Possibilityplus

संभावनाओं का सागर

2 May 2017

दिशा कैसे पता करें ? / कहीं भी कभी भी..






    दुनियाँ के किसी भी कोने में जाओ आप हर जगह पर दिशा पता कर सकते हैं।  हमने यह आर्टिकल उपयोग करने के लिए बनाया है ऊम्मीद है आपके लिए उपयोगी साबित होगा। इस आर्टिकल को अन्त तक जरूर पढिएगा क्योंकि हमने इसमें लगभग सभी संभव तरिके बताएँ हैं जो आपको हर परिस्थितियों में दिशा पता करने के लिए काफी हो सकता है।









   दिशा का पता करने से पहले हम दिशा के बारे कुछ अहम / आवश्यक जानकारी देने जा रहें हैं ताकि दिशा पता करना और आसान हो जाये | इसमे सबसे पहले जानतें हैं दिशा क्या है और इसका महत्व क्या है |





   दिशा ( Direction  )    





एक ऐसा मैप या साधन जो हमें उत्तर - दक्षिण , पूरब - पश्चिम , उपर - निचे और आगे - पीछे  इन सभी को प्रदर्शित करे दिशा कहलाता है | दिशा मुख्यतः चार प्रकार की हैं ( अगर उपर - निचे को छोड़दे तो ) लेकिन इनको अलग - अलग भागो  मैं बाँटे तो ये दश प्रकार की हो जाती  है | अगर हमें इन चारों के बीच की दिशाओं को बताना है तो चित्रानुसार बतायेंगे।








जैसे हमें पश्चिम और उत्तर केे बीच की दिशा को बताना है तो हम उत्तर-पश्चिम कहेेंगे। इसी तरह से बाकि सभी दिशाओं के बारे में हम कहेेंगे।




       घर बनाने में दिशा का महत्व 

 इसका हर क्षेत्र बडा़ महत्व है  , दिशा का ज्योतिष में बडा़ ही महत्व है कब किस दिशा में जाना चाहिए और कब नहीं |किस दिशा में घर का दरवाजा होना चाहिए और किसी दिश में नहीं।




  वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य दरवाजे का मुँह  दक्षिण दिशा को छोड़कर बाकी सभी दिशाओं में बनाया जा सकता है। अगर बात की जाये कि घर के मुख्य दरवाजे का मुँह किस दिशा में सबसे अधिक लाभदायक होता है तो इसका उत्तर है : उत्तर और पूर्व  दिशा। यह दोनों दिशाएँ अतिउत्तम होती हैं  । भूलकर भी दक्षिण दिशा में घर के मुख्य दरवाजे का मुँह नहीं बनाना चाहिए । अगर मजबूरन ऐसा करना पड़े तो एक और मुख्य दरवाजा खोलना चाहिए जिससे कि घर पे पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव से निजात मिल सके। अगर संभव हो तो  उत्तर और पूर्वी दिशा में मुख्य दरवाजा बनायें नहीं तो पश्चिम दिशा में ही दुसरा मुख्य दरवाजा खोलें।







किस दिशा में मुख करके पढ़ना चाहिए , किस दिशा मे मुख होना चाहिए जब कोई पूजा किया जाये और किस दिशा में मुख करके सोना चाहिए | ये सब बडी़ ही महत्वपूर्ण बाते हैं जो दिशा के ना मालूम होने पर इनका लाभ आपको नही मिल पाता है |



     आपको बता दे कि पढ़ने के लिए सबसे अच्छी दिशा ( वास्तुशास्त्र के अनुसार ) उत्तर - पूरब है  यानी कि अगर कोई छात्र या छात्रा उत्तर और पूरब के बीच की दिशा में मुख करके पढ़ता है तो उसकी पढा़ई अच्छी होती है और परिणास्वरूप रिजल्ट अच्छा आता है | अगर आपके मन में यह सवाल या जिज्ञासा उत्पन्न हो रही है कि भला पढा़ई का दिशा से    क्या कनेक्शन है तो आपकी जिज्ञासा का उत्पन्न होना जायज / सही है । दरअसल पूर्वोत्तर ( पूर्व और उत्तर दिशा ) दिशा मुख होने से पूर्वोत्तर से चलने वाली शीतल हवा दिलो - दिमाग को तरो ताजा करती है जिससे मुड अच्छा होने लगता है और जब दिलो -  दिमाग ताजा हो तो कोई भी बात आसानी से याद करना, समझना, सोचना सरल हो जाता है। तो यही कारण था पूर्वोत्तर दिशा में मुख करके पढ़ने का। 






          रात में दिशा का पता लगाना    


आमतौर पर सभी लोग दिन में सूर्य को देखकर ( सुबह या दोपहर बाद ) सही दिशा जान लेते हैं मगर रात की बात की जाये तो बहुत से लोग रात में तो दिशा का पता नही लगा पाते हैं , दरअसल जब हम सबको कहीं नयी जगह जाना पड़ता है तो नयी जगह पर हमें दिशा का पता नहि होता है |




   यह भी पढ़ें ⬇️⬇️

 ✴️   अपनी असली जन्मतिथि कैसे पता करें ?   

 ✴️    LKG और UKG का फुल फार्म              





चलिए जानते हैं । आप दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो आपको सूर्य और चन्द्रमा सदैव पूर्व से पश्चिम की तरप जाते हुए दिख जायेंग यानी सूर्य और चन्द्रमा पूर्व दिशा से उदित होकर पश्चीम दिशा को अस्त होते हैं| अब यह बात शायद आपके मन में उठ रही होगी कि दुनियाॉ के हर कोने में यानी हर स्थान पर दिशा चन्द्रमा के माध्यम एकसमान क्यों होता है |  सभी स्थान से चन्द्रमा को देखने पर ( चन्द्रमा के उदय होते या होने के २ - ३ घन्टे बाद तक ) दिशा लगभग एकसमान हेती है |अत: हम रात मे चन्द्रमा को देखकर दिशा जान सकते हैं | अब यहाँ एक सवाल उठता है कि जब चन्द्रमा ना दिखे तो कैसे दिशा का पता लगेगा | चलिए इस सवाल को भी हल कर लिया जाये | सूर्य और चन्द्रमा के बाद एक ऐसी और चीज( वस्तु ) है जो पूर्व से पश्चिम जाता है  , और ये है सप्ततारे( सात तारों का एक समुह ) जो धरती से थोडा़ उत्तर की दिशा में दिखाई देते हैं |




हैं |ये अन्य तारों से कुछ ज्यादा चमकते हैं और इनकी एक और खास बात है | सात तारों में से चार तारे चारपाई / चौकोर आकार की तरह लम्बाई और चौडा़ई जैसी दशा में है और बाकि तीन तारे एक के बाद एक करके होत  हैं | इसमे जो चार तारे हैं वो हमेशा पश्च्म कि दिशा में और बाकी तीन तारे पूर्व की दिशा में रहते हैं |इसलिए अब दिशा बहुत आराम से मालूम हो जायेगी |
अब अगर मान लिया जाये कि यह तारे भी ना दिखाई दे तो   क्या किया जाए । इसका भी जवाब है और वह है  दंड चुँंबक तथा  कम्पास। चलिए जानते हैं कि दंड चुँंबक तथा कम्पास कैसे दिशा को पता किया जाता है । 


   




   दंड चुँंबक से दिशा पता करना   



 दंड चुँंबक की सहायता से दिन हो  या रात या फिर रात  में चन्द्रमा  , सप्तर्षि तारे दिखें या ना तब भी दिशा बडी़ आसानी से पता किया जा सकता है। दंड चुँंबक की विशेषता क्या यह जानना चाहिए। क्योंकि विशेषता और गुण की जानकारी से स्पष्टरूप से समझा जा सकता है। 




  दंड चुँंबक के गुण *  



दंड चुँंबक के गुण निम्नलिखित हैं - 
  • किसी भी दंड चुँंबक को स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर सदैव ही उत्तर - दक्षिण दिशा में ठहरता है । 
  • दंड चुँंबक के दो ध्रुव उत्तरी ध्रुव ( N ) और दक्षिणी    ध्रुव (S)  होते हैं। 
  • किसी भी दंड चुँंबक को दो भागों में विभाजित करने पर दोनों ही अलग - अलग दंड चुँंबक बन जाते हैं  ।
  • किसी भी दंड चुँंबक का चाहे जितना भाग करें सभी भाग अलग - अलग दंड चुँंबक बन जाते हैं। 









  दंड चुंँबक से दिशा पता करना    

   

       दंड चुँंबक से दिशा पता करना बहुत आसान है। एक दंड चुँंबक लिजिए। इसको बीच में ( केन्द्र पर ) किसी पतले धागे से बाँधकर इसे किसी स्टैंड पर लटका दें  । अगर स्टैंड की सुविधा न हो तो अपने हाथ की अगुँली में धागे को फंसाकर लटका दें। अब दुसरे हाथ से दंड चुँंबक की गति को थोड़ा कम करदे ताकि चुँंबक जल्द से जल्द विरामावस्था में आ जाये। हमने ऊपर पढा़ कि दंड चुँंबक सदैव ही विरामावस्था में उत्तर - दक्षिण दिशा में ठहरता है ( जब चुँंबक को किसी धागे की मदत से लटकाया जाता है ) ।  







 दंड चुँंबक से दिशा पता करने के लिए विशेष बातें   



दंड चुँंबक से दिशा पता करने के निर्देश - 
  1. सबसे पहले दंड चुँंबक का परीक्षण कर लेना चाहिए और निश्चित करलें कि यह दिशा को सही - सही प्रदर्शित कर रहा है  । 
  2. चुँंबक में पतला और मजबूत धागे का प्रयोग करना चाहिए। 
  3. धागे को चुँंबक के बीचोबीच में बाँधे। 
  4. ऐसी जगह पर स्टैंड लगायें जहाँ हवा बहुत कम चल रही हो नहीं तो सटीक दिशा पता करने में थोड़ी मुश्किल हो सकती है। 

दंड चुँंबक की सहायता से दिशा पता करना। 



अब हम आधुनिक तकनीक द्वारा दिशा पता करेंगे और वह तरीका है एंड्रॉयड मोबाइल। मोबाइल फोन में आजकल ऐसे - ऐसे एप आने लगे हैं जिनकी मदद से दिशा तो क्या लगभग हर तरह की जानकारियाँ प्राप्त की जा सकती है। ऐसे ही एक एप की बात हम कर रहे हैं। एक बात मैं यहाँ जरूर कहना चाहता हूँ कि इन सभी तरिकों का समय - समय महत्व है । ऐसा नहीं है कि जब हमारे पास मोबाइल है तो हमें सिर्फ मोबाइल वाले तरिके को ज्यादा महत्व देना चाहिए। दरअसल अगर मानलो किसी कारणवश मोबाइल चार्ज न हो या खराब हो तो क्या करेंगे इस परिस्थिति में तो कहने का मतलब यह है कि सभी तरिकों को जानना चाहिए ।  चलिए फिर देखते हैं।







  कम्पास द्वारा दिशा पता करना    






कम्पास एक इलेक्ट्रॉनिक युक्ति है जो दिशा पता करने के लिए ही बनाया गया है।

 इसको बाजार से आसानी खरीदा जा सकता है। अगर आप बिना खरीदे इसका उपयोग करना चाहते हैं तो आपके पास एक एंड्रॉयड ऑपरेटिंग वाला मोबाइल होना चाहिए। क्योंकि एंड्रॉयड मोबाइल फोन में कम्पाक को डाउनलोड करके इसका उपयोग किया जा सकता है। अगर आप कंपास को डाउनलोड करना चाहते हैं तो यहाँ पर क्लिक करें ➩  कम्पास डाउनलोड करें      






   विधि :  


दिशा पता करने के लिए अपने मोबाइल में कम्पास को open ( खोलें )। अब मोबाइल की स्किन आसमान या उपर की तरफ रखें । आपको चित्रानुसार मोबाइल स्किन पर दिखेगा।





इसमें S दक्षिण को, N उत्तर को, E पूर्व को और W पश्चिम दिशा को प्रदर्शित करेगा । SE दक्षिण - पूर्व को , NE उत्तर - पूर्व को, SW दक्षिण - पश्चिम को और NW उत्तर - पश्चिम दिशा को प्रदर्शित करेगा । अगर मान लिजिए ऊपर बताए गए कोई भी परिस्थिति संभव ना हो सके तो अब आपको निचे दी जा रही है ऐसी जानकारी जो आपको दिशा बता ही देगी।






Dish / DTH की छतरी से दिशा पता करना   



  दिशा पता करने के जितने भी तरिके हैं उन सभी में सबसे सरल और सुलभ है यह तरीका । क्योंकि dish / DTH  की छतरी हम लगभग हर जगह ( भारत में ) पा सकते हैं। अब आती है बारी कि कैसे पता करें तो इसका उत्तर है dish / DTH का मुँह। 







दिशा पता करने के लिए बस हमें छत या बिल्डिंग पर लगे dish / DTH छतरी को देखना है कि उसका मुँह किधर है बस समझो काम हो गया। दरअसल हर dish / DTH छतरी  का मुँह  थोड़़ा - सा भाग पूर्व में होता है तो ज्यादातर भाग दक्षिण दिशा में ही होता है।
उम्मीद है अब दिशा आसानी से और लगभग हर व्यक्ति किसी भी समय में कर सकता है।


 दोस्तों यह जानकारी आपको कैसी लगी इसके बारे में जरूर कमेंट करें जिससे हमें यह पता चल सके कि आपके लिए जानकारी उपयोगी साबित हुई कि नहीं। इतना ही नहीं हम आपके कमेन्ट के हिसाब से ही आर्टिकल लिखते हैं तो कमेन्ट करना ना भूलें।  

www.possibilityplus.in को जरू़र flow करें जिससे आपको हमारी कोई जानकारी internet पे आये तो आपको पता चल जाये | आप हमे Facebook के possilityplus.in पर follow  या like कर सकते हैं |  धन्यवाद !

10 comments:

  1. Very nice information.
    WwW.yogavichar.com

    ReplyDelete
  2. Comment के लिए thanks

    ReplyDelete
  3. Sir namaste......
    Sir kuchh information chahiye sir purv disha ko purv disha aur uttar disha ko uttar disha kiu khte h

    ReplyDelete
  4. Sir namaste......
    Sir kuchh information chahiye.
    Sir purv Disha KO purv Disha Aur Uttar Disha KO Uttar Disha kiu khte h

    ReplyDelete
  5. Agr badal ho tb disha kse pta kr skte hai ...please tell

    ReplyDelete
    Replies
    1. कृपया पोस्ट को पुरा पढिए क्योंकि इसमें लगभग हर तरिकों शामिल किया गया है। धन्यवाद कमेंट करने के लिए!

      Delete

you may like this