24 Mar 2018

अवकलन मूल नियमों से



मूल नियमों से अवकलन ( Differentiation by First Principle ) 

स्वागत है आप सभी का इस पोस्ट में इसमें हम जानेंगे कि  प्रथम सिद्धांत से अवकलन कैसे करते हैं और इसका क्या महत्व है। मूल नियम यानी प्रथम सिद्धांत से अवकलन करने का मतलब है कि केवल इस विधि में परिभाषा का उपयोग किया जाता है । मतलब इसमें योगफल, गुणनफल फलन के फलन आदि अवकलन वाले नियम नहीं लगाये जाते हैं और नाहीं किसी फलन के अवकल -  गुणांक को ज्ञात माना जाता है। इस विधि से अवकलन करना थोड़ा लंबा और मुश्किल होता है परंतु ज्ञान की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि इसके ज्ञान से अवकलन की बेसिक जानकारी मिलती है  । 




सबसे पहले हम जानेंगे अवकलन की  परिभाषा बारे में शुरु करते हैं ये पोस्ट । 
यहाँ से आगे बढ़ने से पहले हमें अवकलन के प्रथम यानी मूल सिद्धांत की परिभाषा जान लेना बहुत आवश्यक है। 




अवकलन की परिभाषा ( Definition of Differentiation ) 
यदि  x कोई फलन (x) और x + δx का वही फलन (x + δx ) हो तो lim δx ➝0   (x + δx ) - (x) /δx का सीमांत मान ( limiting value ), x के सापेक्ष (x) का अवकल - गुणांक या अवकलन ( Differentiation coefficient) कहलाता है। 

हम सभी को यह पता है कि उँचाईयों तक पहुंचने में यानी सफलता प्राप्त करने के लिए हमें मेहनत करनी पड़ती है। मैं आपको एक बात जरूर कहूँगा इस विध से आपको अवकलन निकालने में ज्यादा मजा या मनोरंजक लगेगा। क्योंकि इस विधि से आप उस समीकरण या फलन का अवकलन निकाल सकते हैं जिसका अवकलन नयी विधि यानी योगफल, गुणनफल फलन के फलन आदि नियमों से अवकलन अभी तक नहीं निकाला जा सका है। 


चलिए फिर कुछ चुनिंदा फलनो का अवकलन प्रथम  सिद्धांत यानी मूल नियम से कैसे करते हैं। 

  उदाहरण 1.   sinx का अवकलन प्रथम सिद्धांत ( मू सिद्धांत ) से ज्ञात करो । 

    हल :  sinx  त्रिकोणमितीय का एक जाना माना सवाल और सूत्रों में उपयोग किया जाने वाला नाम है। इस सवाल को लगाने के लिए त्रिकोणमितीय का ज्ञान होना चाहिए। अगर इसकी जानकारी आपको नहीं है यानी त्रिकोणमितीय में आप कमजोर हैं या फिर नये हैं तो मैं यह बता दूँ कि आपको त्रिकोणमितीय में ज्यादा परेशानी नहीं होगी क्योंकि त्रिकोणमितीय सरलता से सीखी जा सकती है। अगर आपको 

त्रिकोणमितीय,  अवकलन, समाकलन आदि सवालों को हल करना सीखना चाहते हैं तो आप इस साइट की मदत से सीख सकते हैं। बस आपको सबसे पहले इस साइट को सब्सक्राइब करके जो छोटी सी छोटी मदत चाहिए हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर भेज दें । दरअसल मेरा यही प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा छात्र - छात्रा गणित में तेज होकर अपने सपनों को साकार कर सकें।

  क्या आपको पता है गणित के विज्ञान की जननी ( माता) कहा गया है। तो चलिए अब हम शुरू करते हैं। 




माना f(x) = sinx 
       f(x) = sin(x + h) 
अब यहाँ h क्या, क्यों और कैसे आया है यह सब मै आपको बता रहा हूँ। दरअसल h वो छोटे से छोटा मान के लिए उपयोग किया जाने वाला मात्र सूचक है। यहाँ एक सवाल और उठ रहा है कि  h को x  में सिर्फ जोड़ा ही जा सकता है या फिर घटाकर भी वही मान निकाला जा सकता है। तो मेरा जवाब है " हाँ " घटाकर भी हम  वही मान निकाल सकतें हैं।  
अब आगे देखत हैं। 

d sinx/dx = limh➝0    sin( x + h) sinx
                                                 h

जहाँ h➝0 यह सूचित कर रहा कि h शून्य ( Zero ) की तरफ जा रहा है। 
         
                                 2cos(x+h+x)sin(x+h- x) 
                                                2                   2
         = limh➝0                                                 
                                                     h
         
                             2 cos (2x+h) sin h
                                         2            2
       = limh➝0                                          
                                           h
              
         
                             2 cos (x + h) sin 
                                          2         2
       = limh➝0                                       
                                          2h
                                           2 
    = limh➝0  (sin h/2) × limh➝0 cos (x+h/2)
    = 1.cosx, 
    = cosx 

       अतः  d sinx/dx = cosx 

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   ✴  घातांक का मान कब शून्य होता है।

 ✴  बीजगणितीय संख्याओं ( abc, xyz आदि ) में बीजगणितीय संख्या से कैसे भाग ➗ करें ? 😯 

    

इसी तरह से अन्य का अवकलन इस विधी से करें अगर ना समझ में आये तो हमसे कमेन्ट करके प्रश्न पूछीए   ।

                       आगे अभी जारी... ✍️ है ।     

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