सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

त्रिभुज के क्षेत्रफल के सूत्र में 2 से भाग क्यूँ किया जाता है ?



 त्रिभुज के क्षेत्रफल के सूत्र में 2 से भाग क्यूँ किया जाता है ?



गणित विषय बहुत से विद्यार्थियों को कठिन लगती है । इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि गणित में ऐसे बहुत से प्रश्न होते हैं जिनका उत्तर ना मिल पाना जिसकी वजह से यह  विषय बोरिंग / तनावपूर्ण लगने लगता है। शुरु करने से पहले मैं आपको बता दूँ कि हमारे सभी आर्टिकल में ज्ञान - विज्ञान और गणित से जुड़ी ऐसी जानकारियाँ मिलती हैं जो हर जगह पाना मुश्किल है तो चलिए अब शुरू करते हैं यह आर्टिकल।



इस आर्टिकल में हम बात कर रहे हैं कि " त्रिभुज के क्षेत्रफल के सूत्र में 2 से भाग क्यूँ किया जाता है ? "
इसको समझने पहले हम आयात के क्षेत्रफल के बारे में देख लेते हैं। आयात के क्षेत्रफल के सूत्र में 2 या किसी अन्य संख्या से भाग नहीं किया जाता है जबकि त्रिभुज के क्षेत्रफल के सूत्र में 2 से भाग किया जाता है  । ऐसा क्यों,  यह सवाल भले ही देखने में बहुत छोटा लग रहा हो मगर इसकी जानकारी बहुत ही महत्वपूर्ण है। आयात और त्रिभुज के आकार में अन्तर होना ही इसकी मुख्य वजह से । अगर हम त्रिभुज के आकार को आयात के आकार जैसा कर दें तो इसका क्षेत्रफल आयत के सूत्र से निकाल सकते हैं  । 

           आयत का क्षेत्रफल = लम्बाई × चौड़ाई





 अब त्रिभुज के क्षेत्रफल का सूत्र देखिए -

        त्रिभुज का क्षेत्रफल = आधार × ऊँचाई / 2





जैसा कर अगर BD एक रेखा जो कि त्रिभुज की ऊँचाई है को सम्मिलित करें तो आयत की तरह इसमें भी चार स्टाप (रूकने का बिन्दु  ) हो जाते हैं। चूँकि BD उँचाई है और आधार AC है तब इसे आयत में बदलने के लिए हमें AC को समान दो भागों में विभाजित करना पड़ेगा। अब माना AD  और  DC,  AC के दो समान विभाजित भाग हैं । 






 अब यह आयत हो गया है। अतः आयत का क्षेत्रफल =  AD × AC  या BC × BD , आयत बनने के पहले उसी त्रिभुज का क्षेत्रफल = ( AC ) / 2  × ( BD )
           = AD या CD × BD 

इस प्रकार यह सिद्ध होता है कि त्रिभुज को आयत के रूप में बदलने के लिए 2 भाग करना पड़ता है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दिशा पता करने का बेस्ट तरीका..

दिशा कैसे पता करते हैं ? 


दुनियाँ के किसी भी कोने में जाओ आप हर जगह पर दिशा पता कर सकते हैं।  हमने यह आर्टिकल उपयोग करने के लिए बनाया है ऊम्मीद है आपके लिए उपयोगी साबित होगा। इस आर्टिकल को अन्त तक जरूर पढिएगा क्योंकि हमने इसमें लगभग सभी संभव तरिके बताएँ हैं जो आपको हर परिस्थितियों में दिशा पता करने के लिए काफी हो सकता है।






   दिशा का पता करने से पहले हम दिशा के बारे कुछ अहम / आवश्यक जानकारी देने जा रहें हैं ताकि दिशा पता करना और आसान हो जाये | इसमे सबसे पहले जानतें हैं दिशा क्या है और इसका महत्व क्या है |



   दिशा ( Direction  ) 


एक ऐसा मैप या साधन जो हमें उत्तर - दक्षिण , पूरब - पश्चिम , उपर - निचे और आगे - पीछे  इन सभी को प्रदर्शित करे दिशा कहलाता है | दिशा मुख्यतः चार प्रकार की हैं ( अगर उपर - निचे को छोड़दे तो ) लेकिन इनको अलग - अलग भागो  मैं बाँटे तो ये दश प्रकार की हो जाती  है | अगर हमें इन चारों के बीच की दिशाओं को बताना है तो चित्रानुसार बतायेंगे।




जैसे हमें पश्चिम और उत्तर केे बीच की दिशा को बताना है तो हम उत्तर-पश्चिम कहेेंगे। इसी तरह से बाकि सभी दिशाओं के बारे में हम कहेेंगे।




मैट्रिक और इण्टरमीडिएट किस कक्षा को कहा जाता है ?

ज हम जानेंगे कुछ ऐसी जानकारी जो बहुत से छात्र - छात्राएँ पढ़ - लिखकर  भी नहीं जान पाते हैं . इसका सीधा कारण है ध्यान से पढा़ई न करना . लेकिन इन्टरनेट ऐसा साधन है जहाँ पर आपको हर जानकारी मिलती है चाहे कैसी भी जानकारी हो वो भी बिल्कुल आसानी और सुलभ तरिके से , इन बातो को यहीं पर विराम देते हुए हम मूल बात पे आते हैं। विज्ञान से संबंधित प्रश्नों को जानने के लिए पढ़ते रहिये। 

इसे भी पढ़ें >>
4 - 4  / 2 =  क्या होगा ?    cos0° = 1 क्यों होता है ? 

        मैट्रीक किसे या किस कक्षा को कहते हैं ?ईन्टर कौन - सी कक्षा को कहते हैं ? 


  मैट्रिक किस कक्षा को कहते हैं ? 
       मैट्रिक का नाम सुन बहुत से लोग यह सोचते हैं कि ये कौन - सी कक्षा है।  आपको बता दें कि मैट्रिक कोई और कक्षा नही है बल्कि  कक्षा - 10 या दसवीं पास को कहते हैं  जिसे हाई स्कूल भी कहा जाता है।  
इसे अंग्रेजी में 10 th ( टेंथ )  भी कहते हैं। मैट्रिक अंग्रेजी शब्द है जिसका मतलब हाईस्कूल पास /दसवीं पास होता है। इससे यह पता चलता है कि मैट्रिक कोई कक्षा नहीं बल्कि कक्षा 10 या दसवीं उत्तीर्ण को सम्बोधन करने वाला शब्द है। 

अगर हाई स्कू…

पृथ्वी गोल क्यों है ?

पृथ्वी गोल क्यूँ होती है ? 
 पृथ्वी गोल है , चौकोर क्यों नही या फिर किसी अन्य रूप मे क्यों नही है, पृथ्वी ही नहीं बल्कि सभी ग्रहों की आकृति लगभग गोल है। याद रखिए कोई भी वस्तु या चीज बिना वजह के गोल , लम्बी , चौंडी , या लाल - पीली नही होती है । यानी कहने का मतलब यह है कि हर वस्तु के रंग और आकार - प्रकार के होने का कोई न कोई कारण जरूर होता है । इसी तरह तरल पदार्थ ( जैसे - जल की बूँदे भी गोल होती हैं ) इसका भी कारण लगभग वही है जो कि पृथ्वी के गोल होने का है ।





चलो हम पहले जान लें कि जल की बूँदें क्यों या कैसे गोलाकार रूप धारण करती हैं क्योंकि इस कारण में ही इसका जवाब है । जैसे ही जल या कोई तरल पदार्थ जब निचे या ऊपर की तरफ फेंका जाता है तो जल के सबसे ऊपरी हिस्से में गती पहले आती है जिसके कारण वो हिस्सा या भाग पहले बाहर आता है और जैसे ही बाहर आता ( जल का वह भाग जो पहले गती में आता है ) है तो वातावरण के दबाव के कारण ( वो जल का हिस्सा )  जल कई छोटी - छोटी बूदोँ का रूप धारण कर लेता है दरअसल पानी की बूदों पर वातावरण का समान दबाव लगता है जिसके कारण ये गोलाकार रूप धारण करता है और एक कारण यह भी है…
Disclaimer | Privacy Policy | About | Contact | Sitemap | Back To Top ↑
© 2017-2020. Possibilityplus