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क्या होगा अगर पृथ्वी एक सेकेंड के लिए रूक जाये ? Possibilityplus.in



Possibilityplus.in पर आप सभी का स्वागत है। आज हम बात करने जा रहे हैं अपनी पृथ्वी के गति के बारे में जो एक महत्वपूर्ण जानकारी है। पृथ्वी क्यों गति करती है या घूमती है सूर्य के चारों ओर, इसका वेग कितना है, क्या इसका वेग हमेशा समान रहता या बदलता रहता है तो फिर क्यों बदलता है और पृथ्वी का आकार लगभग गोल क्यों है। क्या होगा अगर पृथ्वी 1 सेकेंड के लिए एकाएक रूक जाये। इन सभी सवालों को इस पोस्ट में शामिल किया गया है।





सबसे पहले बात करते हैं पृथ्वी के गति के बारे में 

  पृथ्वी गति क्यों करती है ? 


पृथ्वी गति करती है क्योंकि सूर्य द्वारा पृथ्वी पर अभिकेन्द्र बल लगाया जाता है इस अभिकेन्द्रीय बल को संतुलित करने के लिए पृथ्वी द्वारा सूर्य पर एक अपकेन्द्र बल लगाया जाता है। 
अब यह अभिकेन्द्र और अपकेन्द्र बल क्या है इसको जान लेते हैं क्योंकि बिना इसके जाने हम इस पूरी बात को समझने में असमर्थ हैं। 

अभिकेन्द्र बल ( Centripetal force)

वृत्तीय पथ पर गति करने वाले किसी भी कण या वस्तु पर लगने वाला वह बल जो उस वस्तु या कण को वृत्तीय केन्द्र की तरफ खिंचता है उसे अभिकेन्द्र बल कहते हैं।
इसी प्रकार सूर्य द्वारा पृथ्वी पर लगाया गया खिंचाव बल ही सूर्य का पृथ्वी पर लगाया गया अभिकेन्द्र बल है।
इसके विपरीत ( उल्टा ) अपकेन्द्र बल होता है।

अपकेन्द्र बल

वृत्तीय पथ पर गति करने वाले किसी भी कण, पिण्ड या वस्तु पर लगने वाला वह बल जो उस कण, पिण्ड या वस्तु को केन्द्र के  बाहर की तरफ दबाये रखता है, अपकेन्द्र बल  कहते हैं।
यह अपकेन्द्र बल उस कण, पिण्ड या वस्तु के द्रव्यमान के कारण लगता है।  जब दोनों बल ( अभिकेन्द्र बल व अपकेन्द्र बल ) लगभग समान  होते हैं तब लगभग वृत्तीय गति होने लगती है। यहाँ पर मैंने लगभग शब्द का प्रयोग इसलिए किया है क्योंकि वास्तव में ये दोनों बल  ( अभिकेन्द्र बल व अपकेन्द्र बल ) समान कभी भी नहीं हो सकते हैं और नाहीं 100% वृत्तीय गति संभव है। कोई चीज या वस्तु 100% वृत्तीय गति क्यो नहीं कर सकती या वह जैसी भी हैं तो वह वैसी क्यों है इन सब के बारे में हम अगले पोस्ट में विस्तार से जानकारी जानेंगे  ।
हमने अभिकेन्द्र बल व अपकेन्द्र बल के बारे में तो जान लिया पर यहाँ एक सवाल यह उठता है कि आखिरकार यह  अभिकेन्द्र और अपकेन्द्र बल कैसे या किस कारण से उत्पन्न होता है। दरअसल महान वैज्ञानिक न्यूटन के सिद्धांत के अनुसार ब्रम्हांड या विश्व की प्रतेक वस्तु हर दूसरी वस्तु को अपनी तरफ आकर्षित करती है। इससे यह स्पष्ट है कि अगर सूर्य पृथ्वी को अपनी तरफ आकर्षित करता है तो पृथ्वी भी सूर्य को अपनी तरफ आकर्षित करती है और इसी कारण से अभिकेन्द्र और अपकेन्द्र बल की उत्पत्ति होती है। इसी बल के कारण पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है  ।

पृथ्वी 24 घंटे में अपनी धुरी पर अपना एक चक्कर और सूर्य का एक चक्कर लगाने के लिए लगभग 365 दिनों का समय लगाती है । वर्ष 2013 की एक रिर्पोट में पता  चला कि पृथ्वी की गति 1 सेकेंड कम हो गयी है। तब से भूकंप के मामले में बड़ी वृद्धि इसी वजह से है ।वर्ष 2015 में आये भयानक भूकंप को कोई भूला नहीं है यह सब बातें इसी तरह इशारा करती हैं। 

पृथ्वी सहित अन्य सभी ग्रह सूर्य से धीरे - धीरे  दूर जा रहे हैं  । यह तथ्य भी सही हो सकता है कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा एक ऐसे पथ पर करती है जो पूरी तरह से वृतीय नहीं हो और एक बात यह भी सिद्ध होती है कि पृथ्वी पर सूर्य द्वारा लगाया गया अभिकेन्द्र बल से कुछ बड़ा है अपकेन्द्र बल जिससे यह पता चलता है कि पृथ्वी ही नहीं बल्कि सभी ग्रह जो सौरमंडल में उपस्थित हैं यह सब सूर्य से धीरे - धीरे दूर जा रहे हैं ।



महान वैज्ञानिक डिमाॅयर ने अपने सिध्दांत के अनुसार यह बताया कि हमारा ब्रम्हांड फैल रहा है। 

अब जानते हैं कि अगर पृथ्वी एक सेकेंड के लिए रूक जाये तो क्या होगा । 

 जहाँ बाढ़ आती थी वहाँ सूखा और जहाँ सूखा पड़ता था वहाँ बाढ़ का आना इसकी मुख्य वजह है। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि 1 सेकेंड गति कम होने से इतना परिवर्तन हो रहा है तो अगर 1 सेकेंड के लिए पृथ्वी रूक जाये तो क्या होगा ? 
पृथ्वी पर प्रलय हो जाने बराबर होगा क्योंकि जैसे ही पृथ्वी 1 सेकेंड के लिए रूकना प्रारंभ करेगी वैसे ही पृथ्वी पर मौजूद लगभग सभी बिल्डिंग गिर जायेगीं, कहीँ ज्वालामुखी निकलने लगेगा तो कहीं समुद्र का पानी ही बहुत बड़ी बाढ़ जो दुनिया ने कभी नहीं देखा हो वैसी भयानक होगी। कहीं जमीन फट जायेगी। इस तरह हर जीव लगभग समाप्ति की कगार पर होगा। 

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