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संभावनाओं का सागर

28 Dec 2018

जिंदगी में इन... शब्दों को कभी मत बोलना || असफलता के सबसे बड़े कारणों में से एक हैं ये शब्द।


दुनियाँ में बहुत से शब्द ऐसे हैं जिन्हें बुद्धिमान लोग ना के बराबर बोलते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि ये शब्द ...उनके लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण साबित होगा।
कुछ ऐसे शब्द... हैं जो कहने से ही नहीं बल्कि उनको सोचने से भी उनके होने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है। जैसे : हमने जब अपनी जिंदगी में बहुत बार ऐसे किसी काम, वस्तु , समय,व्यक्ति, गुण आदि की जरूरत ना समझकर उसे छोड़ देंते हैं और आगे अपने काम की तरफ बढ़ते तो वहाँ पर उन्हें उसी वस्तु जिसे हमने जरूरत ना समझते हुए छोड़ दिया था अब उसी की कमी या जरूरत अचानक ही पड़ जाती है । यह देख हम बड़े हैरान हो जाते हैं । यहाँ पर यह ध्यान देने वाली बात यह है कि जब भी हमें कोई व्यक्ति किसी सहायता या फिर किसी वस्तु को देता है और कहता है कि इसकी जरूरत तुम्हें आगे पड़ सकती है या पड़ेगी तो हमें कभी मना नहीं करना चाहिए चाहे वह वस्तु या विचार जो भी हो कितना ही छोटा या नगण्य लगे। यह सब हम सभी के साथ होता है किसी एक के साथ नहीं। बहुत से लोगों को इसकी जानकारी बहुत कुछ गवाने के बाद होती है और तब से ऐसा करना छोड़ देते हैं।


पर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो जान ही नहीं पाते हैं  कि असल में यह सब जो उनके साथ हो रहा है ये उनके गलत शब्दों के बोलने के चलते हो रहा है। अगर साधारण शब्दों में कहा जाये तो लगभग 90% या इससे भी अधिक हमारे जीवन में गलत होने का कारण गलत शब्दों के बोलने पर होता है । 


क्या हैं ये शब्द पोस्ट पुरा और ध्यान से पढिएगा, क्योंकि ऐसी जानकारियाँ आपको हर जगह मिलना दुर्लभ है । दरअसल बहुत से लोग ऐसी बातों को या तो इसलिए नहीं बताते हैं क्योंकि वे लोग सीर्फ अपना ही भला चाहते हैं ना कि सभी का। लेकिन आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि हम विस्तार से जानने जा रहे हैं इसके बारे में ।








मैं यह काम जिंदगी में किसी भी किमत पर नहीं करूँगा / करूँगी । 

I will never do this work in life.    




जी हाँ अगर आप ऐसी कोई बात कहते हैं कि मैं यह काम तो किसी भी किमत पर और कभी नहीं करूँगा / करूँगी तो यह बात आपका फ्लो ( पिछा करना )

करने   लगेगी  और   लगभग  90%  से  भी   ज्यादा 
संभावना है कि एक ना एक दिन वह काम आपसे 
करवाकर ही छोड़ेगी । इस बात के बहुत सारे उदाहरण देखने को मिल जायेगें । जैसे : एक फिल्म में एक गाना है " मिलने की तुम कोशिश करना वादा कभी ना करना , वादा तो टूट जाता है। "   
  शायद यह आपको सिर्फ एक गाना लगे पर इस गाने के माध्यम से यह बताया गया है कि वादा नहीं करना चाहिए क्योंकि वादे टूट जाते हैं और वादे क्यों टूटते हैं इसके लिए कोई भी कारण हो सकता है। इसी फिल्म  में नहीं बल्कि पहले की फिल्मों में जो गाने होते हैं उनमें कुछ ना कुछ काम का संदेश होता था ।
 इसीलिए हमें कोई भी बात कहने से पहले एक बार जरूर सोचना चाहिए। और इस बात से भी हमेशा बचने की कोशिश जरूर करें कि जब भी कोई बात कहें तो उसमें घमंड ना शामिल हो । क्योंकि अगर हम घमंड के साथ को भी बात करते हैं तो इस ऐसी बातों का उल्टा प्रभाव बहुत ही जल्दी असर दिखाने लगता है । दरअसल दुनियाँ में लगभग सभी ईंसानों या कुछ  देवी-देवता भी हैं जिनको घमंड हुआ था और होता भी है और उनका घमंड भी टूटा और  आगे टूटता भी रहेगा    ।  चलिए कुछ बहुत प्रसिद्ध और बड़े उदाहरणों को देखते हैं जिससे हमें विश्वास हो जाये कि वाकई बातों में वजन है। 




अर्जुन और भीम का घमंड 

     Arjuna and Bhim's pride


महाभारत के समाप्त होने के बाद अर्जुन को यह घमंड हो गया कि वह संसार का सबसे बड़ा धनुधर है और परिणामस्वरूप वह अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करने लगा । जब अर्जुन का घमंड चरमसीमा पर पहुँच गया तो भगवान्  श्री कृष्ण  ने उनके घमंड को चूर चूर किया । दरअसल अर्जुन जब महाभारत में कर्ण से युद्ध कर रहे थे तो जब वे कर्ण के रथ पर जब बाँण मारते तो कर्ण का रथ दश कदम पिछे चला जाता था  परन्तु जब कर्ण अर्जुन के रथ पर बाँण चलाता तो इनका रथ सिर्फ एक कदम  ही जाता था। इसीलिए अर्जुन यह घमंड हो गया कि वह कर्ण से  बड़ा धनुधर है। यह बार  सुनने से भगवान्  श्री कृष्ण को यह ज्ञात हो गया कि अर्जुन को घमंड हो गया है और अब यही सही समय है कि इसे सच्चाई को बता दिया जाये । भगवान्  श्री कृष्ण ने कहा कि वास्तव में कर्ण ही सबसे बडा धनुधर था । यह बात सुनकर अर्जुन हक्का - बक्का रह गये और पूछने लगे कि कैसे ?

भगवान्  श्री कृष्ण ने कहा कि तुम्हारे रथ पर संसार के मालिक यानी कि मैं बैठा था जिसे एक कदम पिछे करना तो दूर की बात है, हिला पाना भी बहुत मुश्किल है पर कर्ण ने तुम्हारे रथ को एक कदम पिछे कर दिया। तो सोचो कर्ण बड़ा धनुधर था या तुम । इसी प्रकार भीम को भी अपने बल घमंड हो गया था तो भगवान्  श्री कृष्ण उनका भी घमंड समाप्त करवाया भगवान् बजरंगबली / हनुमान  की मदत से  ।




चलो यह काम कल तो हो ही जायेगा। 

क्या आप भी बहुत बार ऐसा कहते हैं तो आज से ही यह आदत सुधार लो क्योंकि ऐसे कामों का हो पाना लगभग मुश्किल हो जाता है । याद करिए आप सभी ने बहुत बार ऐसा जब कहा होगा तब वह काम किसी ना किसी वजह से जरूर रूक गया होगा। शायद इसीलिए यह कहा जाता है कि " काल करे सो आज करे, आज करे सो अब, पल में परलय होगी बहुरी करेगा कब ।  "    इसका मतलब साफ है कि हम अगर किसी काम को कल करने की बात करते हैं तो उसे आज ही कर लेना चाहिए ( अगर संभव हो तो  ) और जिस काम को हम आज करने की बात करते हैं उसे अभी के अभी करने की कोशिश करना चाहिए ।
दरअसल हम अगर कोई बात सोचते हैं या फिर कहते हैं कि यह... काम या वह... काम किसी अन्य समय में करेंगे तो क्या गारंटी है कि उस समय आप उस काम आपके पास समय हो या फिर आप वहाँ हों जहाँ पर आपको काम था । यह भी तो हो सकता है कि आपको उसी समय कोई बड़ा और उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण और जरूरी आ जाये जिस समय में आपने एक काम सोच रखा था ।
 दरअसल हम जो काम या बात सोचते हैं केवल उसी बात या काम की संभावना नहीं होती है बल्कि उसके अलावा भी बहुत कुछ होता है जो होने वाला होता है । और इसलिए जब हम कोई बात कहतें हैं तो उसकी नकारात्मक यानी उल्टा प्रभाव वाली बात भी सक्रिय हो जाती है और हमारे काम या उस बात को उल्टा करने की कोशिश करने लगती है।


इस बात को सही से समझने के लिए मान लिजिए किसी प्रतियोगिता में दो लोग शामिल हैं और एकदूसरे के आमने सामने हैं । यदि पहला प्रतियोगी दूसरे प्रतियोगी से यह कहता है कि यह प्रतियोगिता तो मैं ही जितुँगा तो यह बात स्पष्ट है कि दूसरा प्रतियोगी पहले प्रतियोगी को हराने की पूरी कोशिश करेगा क्योंकि अब उसे खुली चुनौती ( open warning ) मिल गयी है जो उसके मान - सम्मान को नष्ट करने वाली बात है। अगर पहला प्रतियोगी कुछ भी नहीं कहता तो शायद दूसरा प्रतियोगी इतने जूनून के साथ प्रतियोगिता में भाग नहीं लेता  और ना ही जीतता।  यहाँ पर दूसरा प्रतियोगी के जितने की संभावना और बढ़ जाती है क्योंकि वह अब प्रतियोगिता जितने के लिए जी जान लगा देगा।  इस कहानी से एक बात स्पष्ट हो रही है कि अगर आप कोई बात कहते हैं जिसमें घमंड, किसी को निचा दिखाना, अतिरिक्त विश्वास (over confident) आदि हो तो ऐसी बातों का उल्टा यानी प्रतिक्रिया भी सक्रिय हो जाता है और बाधाओं को उत्पन्न करने लगता है ।
निचे दिए गए शब्दों को जितना हो सके मत बोलिए :

  • किसी बात, वस्तु, अपने गुणों आदि पर घमंड करना। 
  • कल तो यह ... काम कर ही लेंगे  ( ओवर कान्फिडेंट के साथ  ) 
  • मुझसे बड़ा चालाक कोई नहीं । 
  • कोई भी परेशानी नहीं है या होगी । 


ऊपर दिए गए शब्द हम जब भी बोलते हैं तो इनका ऊल्टा होने की संभावना बढ़ जाती है और इन शब्दों को बोलने वाले लोगों को फेंकु ( बढ़ाचढा़कर बोलन वाली ) कहा जाता है । आखिरकार इन शब्दों को बोलने पर ऐसा क्यों होता है,  पूरी तरह से किसी बात को कहना सही नहीं पर फिर भी हम एक बात जरूर कह सकते हैं। वह यह है कि यह शब्द बड़े ही संवेदनशील हैं और इसी कारण इनको बोलने से इनका प्रभाव जल्द ही दिखाई देने लगता है । जैसे कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को भला - बुरा कहता है तो वह शब्द इतना संवेदनशील होता है कि दूसरे व्यक्ति को तुरन्त ही लग जाता है , चाहे शब्द अच्छा हो या बुरा।



क्या आप जानते हैं जो लोग अच्छे खासे अमीर होते हैं फिर भी ऐसी बातें करते हैं कि आप सुनोगे तो आपको यही लगेगा कि अरे यह तो अच्छा खासा धनी है फिर बातें ऐसे कर रहा है जैसे कि यह तो बहुत ही गरीब हो। ऐसे लोगों के अमीर होने की कुछ बातें इस प्रकार है - - 
  • ये लोग अपने आपको बड़ा - चढ़ाकर नहीं बताते हैं। 
  • ये लोग अपने काम को टालते नहीं। 
  • ये लोग अपने बारे में बहुत ही कम जानकारी देते हैं। 
  • ये लोग प्रायः कम बोलने वाले होते हैं ।
  • ऐसे लोग स्वार्थी भी होते हैं। 
  • ऐसे लोग फेंकु नहीं बल्कि बटेरूँ होतें हैं। 


 ये लोग ऐसा क्यों बोलते हैं और इनके ऐसा बोलने पर इनको क्या फायदा होता है। इस आर्टिकल में आपको इनके अमीर होने का राज मिलने वाला है और अगर आप में भी यह आदत आ जाये तो आप या हम सब अमीर बनने की एक सीढ़ी ऊपर चढ़ जायेंगे। 



आपको क्या लगता है हमें कमेन्ट करके जरूर बताएँ और ऐसी ही जानकारियाँ पढ़ने के लिए  www.possibilityplus.in पर आपका स्वागत करने की कोशिश करेगें । धन्यवाद !







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