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संभावनाओं का सागर

15 May 2019

नजर, क्यों और कैसे लगती है ?


इस दुनियाँ में ऐसी अनेकों बातें हैं जो विज्ञान के नजरिए से अभी तक पूरी तरह से नहीं समझाया जा सकता है, जैसे : लक्षमण रेखा, सपनों का रहस्य, मनुष्य के मष्तिष्क की क्षमता आदि। इन्हीं में से एक है नज़र का लगना । इस आर्टिकल में हम इसी विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं। 





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    नज़र का लगना यह एक ऐसी बात है जिसे कुुछ लोग तो मानते हैं पर कुछ लोगों का यह कहना है कि ऐसा कुछ नहीं होता है, यह सब अन्धविश्वास है। इन दोनों में से किसी भी नतीजे पर पहुंचे इससे पहले हमें विज्ञान की सहायता से इसकी परख कर लेना चाहिए। क्योंकि विज्ञान ही हम सबके लिए एक ऐसा  जरिया है जो सभी बातों को समझने के काम आता है।





नजर क्यों लगती है ? 

नजर क्यों लगती है यह सवाल हममें से बहुतों मन में आता ही है। हम जानते हैं कि हर सवालों के जवाब विज्ञान के दर्पण में देखने पर मिलता है। दरअसल मानव मस्तिष्क ऐसी अपार क्षमताओं से भरपूर है और यही वजह है कि मनुष्य सभी प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ है। अब बात है कि नजर क्यों लगती है तो यह बात हमारे मन और मिजाज पर निर्भर करता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अगर कोई बुरे मिजाज वाला व्यक्ति है तो वह हर समय बुरा ही हो। दरअसल जैसा हमारा मुड / होता है वैसी ही भावनाओं की तरंग  हमारे शरीर से निकलती है। जिस समय अच्छी और नि:स्वार्थ भावना होती है उस समय हमारी आंखों में सकारात्मक तरंग निकलती है। जिस व्यक्ति हो कोई भी वस्तु पर पड़ती है उसमें सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होने लगता है। और अगर जिस समय नकारात्मक तथा स्वार्थ की भावना मन में संचालित हो रही हो तो हमारी आंखों से नकारात्मक तरंगें निकलने लगती  है। इस तरह की नजर जिस भी व्यक्ति /   वस्तु पर पड़ती है उस पर नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। नजर जितनी ज्यादा नाकाराात्मक होती है इसका प्रभााव उतना ही गहरा होता है। 

 


    नज़र कैसे लगती है ?

    नज़र कैसे लगती है इसको समझने के लिए विज्ञान में तमाम ऐसे उदाहरण मौजूद हैं जो काफी हद तक इसकी व्याख्या कर देगा। चलिए देखते हैं इन उदाहरणों को -





  रिमोट

         रिमोट कंट्रोल का काम आंखों या नजर जैसे ही होता है। रिमोट पर अलग - अलग फ्रिक्वेंसी की बटन या स्वीचें होती हैं।



 इछानुसार हम स्वीच का इस्तेमाल करते हैं और स्क्रीन पर उसका परिणाम भी सामने होते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह फ्रिक्वेंसी हमें दिखाई नहीं देती हैं और शायद यही वह मुख्य वजह भी हो सकती है जो बहुत लोगों को नजर लगने वाली बात पर विश्वास नहीं होता है। बिल्कुल इसी तरह से हमारे शरीर में ऐसे सिस्टम हैं जो अनगिनत प्रकार की फ्रिक्वेंसीज आंखों के जरिए से निकाल सकती है।









आगे जारी.... 

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