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संभावनाओं का सागर

18 Jul 2019

हनुमानजी को उनकी परछाईं से कैसे पकड़ा रक्षशी सिंघिका ने ?



       यह पोस्ट बहुत ही तार्किकता पर आधारित है। यह भगवान हनुमान जी या बजरंगबली की एक घटना है। इस पोस्ट में हम जो भी पढ़ेंगे वो तार्किक और विज्ञान की दृष्टि से होगा।



   हममें से अधिकांश लोगों के मन में यह सवाल उठा होगा कि सिंघिका राक्षशी ने आखिर परछाईं की मदत से महाबली बजरंगबली को पकड़ लेती है। कैसे.. कैसे.. कैसे..
तो दिल थाम कर बैठ जाईए और पूरी जानकारी जरुर पढ़िएगा। तो चलिए देर मत करिए, शुरू करते हैं।







नोट : इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़िएगा क्योंकि मुख्य उदाहरण और व्याख्या अंत में ही है।

   


       सिंघिका राक्षशी ने हनुमान जी की परछाईं को कैसे पकड़ा ?

       सिंघिका राक्षशी ने हनुमान जी की परछाईं को कैसे पकड़ी होगी ? 
    दरअसल उसके पास ऐसी शक्ति या वरदान था जिससे यदि वह किसी भी वस्तु की परछाईयों को पकड़ ले तो वह वस्तु भी उसकी पकड़ में आ जायेगी। अब आप शायद यह सोच रहे होंगे कि यह तो सभी लोग जानते हैं कि किसी शक्ति के द्वारा ही वह किसी भी वस्तु परछाईं को पकड़ने में सक्षम थी। पर हम वैज्ञानिक तरीके से उसे समझना चाहते है। चूंकि हमारे पास परछाईं के अलावा कोई और चारा नहीं है जिस पर हम अपनी सोंच - विचार करें। इसलिए परछाईं को पुरी तरह से समझते हैं। 






 परछाईं कैसे बनती है ? 

       हम जानते हैं कि सामान्यतः परछाईं काली   ही होती है। अब हमें यह जानकारी जानना बहुुत जरूरी है कि यह काली क्यों होती है ? ❍






     परछाईं के काले होने का कारण

परछाईं के काली होने का कारण जानने से पहले यह जान लें यह कैसे बनती है।
परछाईं का बनना - जब किसी वस्तु पर कोई प्रकाश की किरणें पड़ती है तो वस्तु के जितने भाग  पर प्रकाश पड़ता है तो वह भाग ऊर्जा के कारण चमकने लगता है। वस्तु के इसी भाग के ठीक उल्टी तरफ प्रकाश की किरणें नहीं पहुंच पाती हैं और इसी कारणवश वस्तु का यह भाग ऊर्जा से वंचित रह जाता है। इसी कारण से जितने भाग पर प्रकाश नहीं पड़ता है ठीक उतने भाग की छाया बन जाती है।
चूूंकि काला रंग नकारात्मक उर्जा / ऊर्जाहीनता का प्रतीक है। इसलिए परछाईं काली होती है। 







  अंधेरे या रात में ऊर्जा में कमी का होना 

        क्या आप जानते हैं अंधेरे या रात के अंधेरे में हमें ज्यादा डर  क्यों लगता है ? 
रात में प्रकाशीय ऊर्जा नहीं होती है चूंकि अंधेरा हमारे शरीर की ऊर्जा को निरंतर खिंचता रहता है जिससे हमारे शरीर की ऊर्जा इतनी कम हो जाती है कि हमें छोटी-छोटी बातों पर भी डर का अहसास होने लगता है। एक बात और जानना चाहोगे कि रात के अंधेरे में हमें नींद जल्द से जल्द क्यों आ जाती है तो इसका भी कारण अंधेरा ही है। 
  दरअसल जब हम अंधेरे के संपर्क में आते हैं तो हमारी आँखों को ऊर्जा की कमी होने लगती है जिससे हमारी आंँखें अपनेआप बंद होने लगती है। इस तरह से नींद जल्द से जल्द आ जाती है। वैसे अगर हम अपनी आँखों को बंद करके रखें तो भी नींद आने लगती है। कारण यह है कि जब हमारी आँखें बंद होती है तो भी कुछ दिखाई नहीं देता सिर्फ अंधेरे के अलावा। तो कुल मिलाकर कहें कि अंधेरा किसी भी तरह से आंखों को मिलना चाहिए बस और कुछ नहीं। 


अंधेरे के गुणों को देखिए :

  • अंधेरा लगभग सभी वस्तुओं की ऊर्जा को अपनी तरफ खींचता है। 
  • अंधेरे की तिव्रता जितनी अधिक होगी वह ऊर्जा को उतनी तीव्रता से खींचेगा। 




नोट : यह उपर्युक्त गुण प्रकाश के गुणों को  ऊल्टा करनेे पर मिला है। जब किसी वस्तु पर प्रकाश डाला जाता है तो उस वस्तु पर प्रकाशीय दबाव जरुर पड़ता है। दरअसल प्रकाशीय ऊर्जा, ऊर्जा के बंडलो के रूप में चलती है। अतः स्पष्ट है कि प्रकाश जिस भी वस्तु पर पड़ेगा उस वस्तु पर  दबाव तो लाज़़मी है। दबाव का ऊल्टा खिंचाव होता है। इसलिए अंधेरे का प्रभाव बल खिंचाव वाला होता है।




   व्याख्या :  अगर हमारा अंदाजा सही है तो इसके अनुसार राक्षशी  सिंघिका ने अपनी शक्ति से हनुमान जी की परछाईं को इतना काली कर दिया कि परछाईं का खिंचाव बल हनुमान जी के गतिकी बल से अधिक हो गया हो या परछाई को माध्यम बनाकर उनका पूरा परिणामी बल शून्य कर दिया हो । बिल्कुल ब्लैैक होल की तरह। जैसे ब्लैैक होल के पास आने वाली कोई भी वस्तु पूरी तरह से बिखर जाती है। ब्लैैक होल का खिंचाव बल इतना अधिक है कि इसमें से कोई प्रकाश भी गुजरकर नहीं जा सकता है। 
    आइए कुछ तर्क और उदाहरण देखते हैं जिससे इस व्याख्या को समझने में और मदत मिले। 

तर्क 
  • सिंघिका राक्षसी सिर्फ परछाई की मदद से ही किसी को पकड़ सकती थी। 
  •  कोई भी परछाईं वस्तु के इशारे से 100% तक नहीं चल सकती हैं। 
  • परछाईं भी वस्तु को नियंत्रित कर सकती है। इसके लिए परछाई में वस्तु की गतिकी बल से अधिक ऊर्जा होनी चाहिए। 
  • परछाई एक ऋणात्मक ऊर्जा है जो किसी भी वस्तु को अपनी ओर आकर्षित कर सकती है। 



 हम जाानते हैं कि परछाई वस्तु से उत्पन्न होती है। इससे एक बात यह साफ हो रही है कि वस्तु और परछाई में कुछ न कुछ सम्बन्ध होना तय है।
    हम सब यह बात तो जानते ही हैं कि जो भी राशियाँ एक दूसरे से संबंधित होती हैं तो उनमें से किसी को भी अगर परिवर्तित करें तो दूसरी राशि पर इसका असर या प्रभाव अवश्य ही पड़ेगा। 





उदाहरण 1.    जिस पंखे से हम हवा लेते हैं ( जैसे टेबल फैन ) अब इसका उदाहरण देखिए।



पंखे के चलने से हवा बहनें लगती हैं। इसका मतलब पंखे और हवा में एक संबंध जरूर जो इन्हें जोड़ता है । यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि सिर्फ पंखा ही हवा को चला नहीं सकता है बल्कि हवाा भी पंखे को अपने ईशारे पर नचा सकती है पर शर्त यह है कि हवा का गतिकी बल पंखेे से अधिक होना चाहिए। क्या आपने हवा से चलते हुए पंखे नहीं देखेें है। शायद सभी ने देखें होगें। कुछ इसी तरह से परछाई भी वस्तु को अपनी ऊर्जा की मदत  से अपनी तरफ खिंचती है ना कि केवल वस्तु ही परछााईं को अपनी तरफ खिंंचती है। 




  उदाहरण 2.
                   जैसे : y = 2x समीकरण में x और y  दोनों एक-दूसरे पर निर्भर कर रहे हैं। अगर हम y में से 1 घटा दें तो 2x से भी 1 घटना पड़ेगा। 



   



  नोट :     इस तरह से हमने कुछ तर्क और उदाहरणों को देखा जो पूरी तरह से यह तो सिद्ध नहीं करता है कि वास्तव में यही कारण है जिससे हनुमानजी को राक्षसी सिंघिका परछाई की मदद से पकड़ा था लेकिन लगभग पुष्टि जरुर कर रहा  है। 

    आपको यह जानकारी कितना हद तक सही लगी। अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर भेजे। आप हमें dkc4455@gmail.com पर मेल कर सकते हैं। धन्यवाद. .... 


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