Skip to main content

गिरते समय हमारे हाथ क्यों फैल जाते हैं और हमें सपने कैसे दिख जाते हैं आँखें बंद होते हुए भी ?

   
   क्या आप जानते हैं कि हमारी धड़कन, हमारी सांसें को कौन चलाता है ? हमें सपने आँखों के बंद होने के बावजूद भी कैसे दिख जाते हैं, यही नहीं हम सही गलत जो भी करते हैं इसके पीछे क्या राज है इन सभी के बारे विस्तार से जानेंगे।

इस आर्टिकल में हम ऐसी बातें जानेंगे जो हमारे जीवन जीने के तौर-तरीकों को ही नहीं बल्कि हमें अपनी असली स्वतंत्रता से जीने की सही मामले में आजादी मिल जायेगी। इसलिए इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़िएगा और अपने किमती राय भी दिजिए।


सबसे पहले इस सवाल को जानते हैं कि कैसे हमारे हाथ शरीर के गिरते समय अपने - आप फैल जाते हैं।




 हमारे दैनिक जीवन में अनेक ऐसी क्रियाएँ अथवा घटनाएँ हैं जिनके बारे में हम कहीं न कहीं पूरी तरह से नहीं जानते हैं। उन्हीं में से एक यह है कि जब हम गिरने वाले होते हैं तो हमारे हाथ फैल जाते हैं।ऐसा क्यों होता है यह सवाल अगर अपने आप से पूछो तो ज्यादातर लोगों को इसका ठीक - ठीक उत्तर नहीं मिल पाता है। चलिए अपने शरीर के गुण के बारे में जानते हैं।










 गिरते समय हमारे हाथ क्यों फैल जाते हैं ?

       हमारे हाथ का फैलना ( गिरते समय ) हमारे शरीर के एक विशेष गुण का होना है। दरअसल हमारे शरीर में मुख्यरुप से दो दिमाग / मस्तिष्क माने जाते हैं  - 
  1. दिल / मन ( अचेत मन या अवचेतन मन ) 
  2. दिमाग / मस्तिष्क ( चेतन या सचेत मन ) 


      इसमें दिल / मन, दिमाग से अत्यंत तेज होता है ( गति में )। इसके लिए बहुत सी क्रियाएँ 1 सेकेंड से भी कम समय में पुरी ही नहींं होती बल्कि काफी भी होती है। दरअसल हमारा मन यह कभी भी नहीं चाहता है कि हम किसी तरह की तकलीफ सहें क्योंकि इसे वह अहसास पता है जो इसे अच्छे नहीं लगते हैं। यह हमेशा अच्छा अहसास कि इच्छा रखता है और यह इसी अच्छे अहसास को पाने के लिए हमेशा काम करता रहता है।


 इसलिए जब हमारा शरीर अचानक में गिरनेे वाला होता है तो हमारा यह मन वह पोजीशन प्रदान करता है जिससे हमारे शरीर को कोई हानि ना पहुुंचे। यही कारण है कि हमारे हाथ शरीर के गिरने से पहले ही फैल जाते हैं।
         क्या हम ऐसे समय में यह सोच सकते हैं कि हमें क्या करना है और क्या नहीं। दरअसल हमारे दिमाग को किसी भी वस्तु या क्रिया को समझने में कम से कम 1 सेकेंड तो लगेगा पर तबतक तो हम धरती पर गिर चुके होगेें। 

   चलिए अब जानते हैं वैज्ञानिक दृष्टि से कि अचानक गिरते समय हमारे हाथ फैलने के क्या होता है।  
दरअसल जब हमारा शरीर अचानक गिरता है तो इसकी गति एकाएक तेजी से बढ़ने लगती है जिसके विरोध में हमारा हाथ फैल जाता है और गिरने की गति थोड़ी सी कम हो जाती है अथवा यह शरीर की सबसे संतुलित स्थिति होती है उस समय। 
       उपर्युक्त बातें यह भी स्पष्ट करती हैं कि मन को अचेत या अवचेतन मन कहना तर्कसंगत नहीं होगा क्योंकि यह तो हमेशा सक्रिय ( active ) रहता है और तभी तो इसे हर छोटी - बड़ी क्रियाओं का ज्ञान  पहले ही हो जाता है। भले ही यह तर्क नहीं करता, पर हमेेशा जागृत रहता है और जागृत रहना भी सचेत होने की पुष्टि करता है।









मन ( Unconscious mind ) की विशेषताएँ 

मन की विशेषताएँ इस प्रकार हैं - 
  • मन ना तो सोचता है और ना ही समझता है। 
  • मन अहसास, महसूस अथवा भावनाओं के आधार पर चलता है। 
  • इसकी गति प्रकाश की गति से भी तेज होता है। 
  • इसमें अलौकिक शक्तियों को पढ़ने की क्षमता होती है। 
  • मन या अवचेतन मन से ही हमारे शरीर की क्रियाओं का सम्पादन होता है। 
  • हमारे शरीर में जैसा अहसास होगा वैसी ही ऊर्जा हमारे अन्दर होगी। 
  • मन की मदत से आदमी भगवान के तुल्य हो सकता है। 
  • पूजा - पाठ भी मन से सफल होती है, मस्तिष्क से नहीं। 





 मन की विशेषता और कमियों का स्पष्टीकरण 📣


    मन की विशेषताएँ इतनी है कि इसके लिए एक किताब भी कम पड़ जायेगी। मन की विशेषताओं के अलावा कुछ कमियां हैं जो मुश्किलें पैदा करती हैं। चुँकि हमने ऊपर पढ़ा है कि मन कुछ सोचता नहीं है कि क्या गलत है और क्या सही है। इसे अगर गलत काम भी अच्छा लगे तो वह उसी को करना चाहेगा बिल्कुल बच्चे की तरह जिन्हें गलत - सही का कोई पर्क नहीं होता। और दिमाग / मस्तिष्क बच्चों के अभिभावकों का काम करता है जो मन को गलत - सही का फर्क बताता है। हमारा मस्तिष्क हमारे मन को जब उसकी खामियों के  ( जो वह करना चाहता है ) बारे में बताता है और यह अहसास दिलाता है कि इससे तुम्हें बुरा अहसास मिलेगा और अगर तुम्हें सही में अच्छा अहसास पाना है तो यह करो। जो दिलाशा हम मन को देते हैं वह उससे भी अधिक अच्छा लगना चाहिए जो पहले वह करना चाहता था। ऐसा होने पर मन - मस्तिष्क के साथ हो लेता है जिसे साधरण भाषा में बात मानना कहते हैं । यह वही स्थिति है जब हमे कोई मतभेद नहीं होता है और तभी तो हमारे सर में कोई तनाव नहीं होता है। हमारे सर में तनाव ज्यादा तब होता है जब मन और मस्तिष्क के मतो में अन्तर होता है यानी मन कुछ और मस्तिष्क कुछ कहता है। कभी-कभी हमें बहुत सी बातें बिना सोचे समझे मिल जाती हैंं पर हम जबतक वैज्ञानिक आधार पर नहीं समझ पाते हैं तबतक हम उसे जानते हुए भी विश्वास नहीं करते / कर पाते।









हमें स्वप्न / सपने कैसे दिखते हैं जबकि हमारी आँखें बंद होती हैं। 


   बहुत से लोग यह सोचते होगें कि बिना आँखों को खोले कुछ देखा नहीं जा सकता है पर सपने हमें कैसे दिख जाते हैं जबकि हमारी आँखें तो बंद रहती हैं। इसको जानने और समझने के लिए हमें यह जानना होगा कि सपने किन  - किन कारणों से दिखते हैं। यह मुख्यतः दो कारणों से दिखते हैं -

  1. सोंच के कारण सपने दिखना। 
  2. बिना सोचे सपने दिखाई देना। 




स्पष्टीकरण :  सबसे पहले यह जान लेते हैं कि हमें कोई भी वस्तु कैसे दिखाई देती है। जब हम किसी भी वस्तु को देखते हैं तो उस वस्तु का प्रतिबिम्ब हमारे रेटिना के फोकस पर बनता है। इस तरह हमेें वह वस्तु दिखाई देने लगती है। इसी तरह से जब हम किसी व्यक्ति या वस्तु की कल्पना गहराई से करते हैं तो उस व्यक्ति या वस्तु का प्रतिबिम्ब हमाारी रेटिना पर पर बनने लगता है और सपने में भी यह दिखाई दे सकता है । जैसे हमें यह अहसास होता है कि हमें वह वस्तु वास्तव में दिखाई दे रही हो। पर यह तभी possible है जब हम उस व्यक्ति या वस्तु को पहले से ही देखा हो।
    अब बात करते हैं कि वह व्यक्ति या वस्तु हमें सपनों में कैसे दिखाई देता है जिसके बारे में हमने ना कभी सोचा और ना ही कभी भी देखा हो। इस तरह के सपने दैवीय हो सकते हैं। हम जानते हैं कि जिस तरह से कोई फोटो, विडियो आदि चिजे एक मोबाईल से दूसरे मोबाईल तक ऊर्जा के रूप में स्थानांतरित होते ( आते - जाते ) हैं। बिल्कुल इसी तरह से हमारी आत्मा से शरीर तक सभी दृश्य ऊर्जा के रुप में आते हैं।  ऐसा तब होता है जब शरीर के आसपास ऐसी ऊर्जाओं का आना - जाना होता है। यह ऊर्जा हमारे शरीर से कभी-कभी अपने आप कनेक्ट हो जाती है और कभी-कभी कनेक्ट कराई जाती है। जो दैवीय शक्तियों द्वारा भी हो सकती है। यह पुरी तरह से कहना वैज्ञानिकों के लिए भी मुमकिन नहीं है क्योंकि यह वैज्ञानिक दृष्टि से सिध्द नहीं हुआ है।





आपकी क्या राय है जरूर बताएँ हमें बहुत खुशी होगी। धन्यवाद...



Comments

Post a Comment

आपको यह पोस्ट कैसा लगा कमेंट करके बताएँ। धन्यवाद !

Popular posts from this blog

दिशा कैसे पता करें ?

दुनियाँ के किसी भी कोने में जाओ आप हर जगह पर दिशा पता कर सकते हैं।  हमने यह आर्टिकल उपयोग करने के लिए बनाया है ऊम्मीद है आपके लिए उपयोगी साबित होगा। इस आर्टिकल को अन्त तक जरूर पढिएगा क्योंकि हमने इसमें लगभग सभी संभव तरिके बताएँ हैं जो आपको हर परिस्थितियों में दिशा पता करने के लिए काफी हो सकता है।






   दिशा का पता करने से पहले हम दिशा के बारे कुछ अहम / आवश्यक जानकारी देने जा रहें हैं ताकि दिशा पता करना और आसान हो जाये | इसमे सबसे पहले जानतें हैं दिशा क्या है और इसका महत्व क्या है |





   दिशा ( Direction  )    



एक ऐसा मैप या साधन जो हमें उत्तर - दक्षिण , पूरब - पश्चिम , उपर - निचे और आगे - पीछे  इन सभी को प्रदर्शित करे दिशा कहलाता है | दिशा मुख्यतः चार प्रकार की हैं ( अगर उपर - निचे को छोड़दे तो ) लेकिन इनको अलग - अलग भागो  मैं बाँटे तो ये दश प्रकार की हो जाती  है | अगर हमें इन चारों के बीच की दिशाओं को बताना है तो चित्रानुसार बतायेंगे।




जैसे हमें पश्चिम और उत्तर केे बीच की दिशा को बताना है तो हम उत्तर-पश्चिम कहेेंगे। इसी तरह से बाकि सभी दिशाओं के बारे में हम कहेेंगे।




       घर बनाने में दिशा …

भिन्न का गुणा , भाग , जोड़ और घटना हल करना

भिन्न (Fraction ) 


ऊपर चित्र में एक वृत्त को चार बराबर भागों में बाँटा गया है । अगर हम कहें कि इसमें से एक भाग किसी को दे दिया जाये तो कितना भाग बचेगा तो इसका जवाब है 3 / 4 भाग जिसे शाब्दिक या बोलन वाली भाषा में तीन चौथाई  भाग कहेगें । इसी प्रकार 1 / 3 को एक तिहाई कहेंगे।  चलिए अब जानते हैं इनको जोड़ने, घटाने, गुणा और भाग  करने के तरीका के बारे में । 




  भिन्नों का जोड़ , घटाना , गुणा और भाग करने  का तरिका. 

भिन्नों का जोड़ , घटाना , गुणा और भाग; पोस्ट में आपको सब सीखने को मिलेगा। अगर आपके पास कोई सवाल है भिन्नों को हल करने या किसी भी तरह की भिन्न हो तो हमें निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिखकर भेज दें ।

भिन्न क्या है ? What is the Fraction ? 




 भिन्न एक आंशिक भाग होती है जो दो भागों से बनती है -
अंश हर
 जैसे -     1 / 3 , जिसमें 1 अंश और 3 हर है । a / b में " a  " अंश और " b  " हर है।

आज के दौर में बहुत - से लोग ऐसे हैं जो पढ़ - लिखकर भी भिन्न हल करना नहीं जानते हैं । इस कमी का आभास उन्हें तब होता है जब वो कोई काम करने लगते हैं और काम या कार्य में उनको कोई सटीक ( ठीक - …

मैट्रिक और इण्टरमीडिएट किस कक्षा को कहा जाता है ?

ज हम जानेंगे कुछ ऐसी जानकारी जो बहुत से छात्र - छात्राएँ पढ़ - लिखकर  भी नहीं जान पाते हैं . इसका सीधा कारण है ध्यान से पढा़ई न करना . लेकिन इन्टरनेट ऐसा साधन है जहाँ पर आपको हर जानकारी मिलती है चाहे कैसी भी जानकारी हो वो भी बिल्कुल आसानी और सुलभ तरिके से , इन बातो को यहीं पर विराम देते हुए हम मूल बात पे आते हैं। विज्ञान से संबंधित प्रश्नों को जानने के लिए पढ़ते रहिये। 

इसे भी पढ़ें >>
4 - 4  / 2 =  क्या होगा ?    cos0° = 1 क्यों होता है ? 

        मैट्रीक किसे या किस कक्षा को कहते हैं ?ईन्टर कौन - सी कक्षा को कहते हैं ? 


  मैट्रिक किस कक्षा को कहते हैं ? 
       मैट्रिक का नाम सुन बहुत से लोग यह सोचते हैं कि ये कौन - सी कक्षा है।  आपको बता दें कि मैट्रिक कोई और कक्षा नही है बल्कि  कक्षा - 10 या दसवीं पास को कहते हैं  जिसे हाई स्कूल भी कहा जाता है।  
इसे अंग्रेजी में 10 th ( टेंथ )  भी कहते हैं। मैट्रिक अंग्रेजी शब्द है जिसका मतलब हाईस्कूल पास /दसवीं पास होता है। इससे यह पता चलता है कि मैट्रिक कोई कक्षा नहीं बल्कि कक्षा 10 या दसवीं उत्तीर्ण को सम्बोधन करने वाला शब्द है। 

अगर हाई स्कू…

पृथ्वी गोल क्यों है ?

पृथ्वी गोल क्यूँ होती है ? 
 पृथ्वी गोल है , चौकोर क्यों नही या फिर किसी अन्य रूप मे क्यों नही है, पृथ्वी ही नहीं बल्कि सभी ग्रहों की आकृति लगभग गोल है। याद रखिए कोई भी वस्तु या चीज बिना वजह के गोल , लम्बी , चौंडी , या लाल - पीली नही होती है । यानी कहने का मतलब यह है कि हर वस्तु के रंग और आकार - प्रकार के होने का कोई न कोई कारण जरूर होता है । इसी तरह तरल पदार्थ ( जैसे - जल की बूँदे भी गोल होती हैं ) इसका भी कारण लगभग वही है जो कि पृथ्वी के गोल होने का है ।





चलो हम पहले जान लें कि जल की बूँदें क्यों या कैसे गोलाकार रूप धारण करती हैं क्योंकि इस कारण में ही इसका जवाब है । जैसे ही जल या कोई तरल पदार्थ जब निचे या ऊपर की तरफ फेंका जाता है तो जल के सबसे ऊपरी हिस्से में गती पहले आती है जिसके कारण वो हिस्सा या भाग पहले बाहर आता है और जैसे ही बाहर आता ( जल का वह भाग जो पहले गती में आता है ) है तो वातावरण के दबाव के कारण ( वो जल का हिस्सा )  जल कई छोटी - छोटी बूदोँ का रूप धारण कर लेता है दरअसल पानी की बूदों पर वातावरण का समान दबाव लगता है जिसके कारण ये गोलाकार रूप धारण करता है और एक कारण यह भी है…

प्रतिशत कैसे निकालते हैं ?

प्रतिशत ( Percent )  प्रतिशत को पूरी तरह समझने के लिए प्रतिशत का मतलब / शाब्दिक या शब्द का अर्थ जानना बहुत जरूरी है । प्रतिशत में कुछ ऐसी बातें जिन्हें हमें जानना जरूरी होता जैसे -   इनमें से कौन - कौन सही हैं  -

  2 / 5 = ( 2 / 5 )  × 100 = 40 %    2 / 5 = ( 2 / 5 ) × 100 % = 40 %  2 / 5 = 40 / 100 = 40 %


    इन तीनों में पहला गलत है और बाकी दोनों सही हैं। क्योंकि पहली वाले हल में हमें यह स्पष्ट दिख रहा है कि अगर हम 100 में भाग करें तो 2 × 20 = 40 तो मिलेगा पर हर के स्थान पर हमें 100 मिल ही नहीं रहा है तो इसे हम प्रतिशत के रूप में कैसे लिख सकते हैं। अतः यह गलत है। रही बात बाकी दो तरिकों की तो इन दोनों में ही हमें हर के स्थान पर 100 मिल रहा है। दूसरे वाले विकल्प में 1 / 100 = % लिखा गया है।





 ( प्रतिशत = प्रति + शत  ) का संधि -  विक्षेद करने पर दो अलग -  अलग शब्द मिलते हैं जिसमें शत का शाब्दिक अर्थ सौ ( 100) होता है या प्रतिशत  गणित में किसी अनुपात या भिन्न  को व्यक्त करने का एक अलग तरीका है। प्रतिशत का अर्थ है प्रति सौ या प्रति सैकड़ा ( % = 1 / 100 ) एक सौ में से एक  ।   यदि 100 …
Disclaimer | Privacy Policy | About | Contact | Sitemap | Back To Top ↑