Possibilityplus

संभावनाओं का सागर

12 Aug 2019

इन्द्रधनुष कब, कहाँ , क्यों और कैसे बनती है, आसमान में ?

 

   इन्द्रधनुष का आकाश में बनना जहाँ एक तरफ पर्यावरण की सुन्दरता को बयाँ करता है तो वहीं दूसरी तरफ इसके बारे में जानने की जिज्ञासा भी उत्पन्न होती है। इन्द्रधनुष कब, कहाँ, क्यों और कैसे बनती है इन सभी सवालों का जितना महत्व है उतना ही महत्व इस बात का भी है कि यह गोलाकार में ही क्यों बनती है। इन सभी सवालों का जवाब हम इस पोस्ट में खंघालेंगे।





    इन्द्रधनुष का आकाश में बनना..

      हल्की-फुल्की बारिश या बारिश के बाद आकाश में पानी की कुछ बूँदों की मौजूदगी में सूर्य की किरणें जब इनपर पड़ती है तो ये किरणें अपने अलग - अलग तरंदर्घ्य के कारण प्रकाश सात रंगों में अलग- अलग हो जाता है। इस तरह इममें सात रंग होते हैं। चूँकि यह धनूष के आकार की होती है और यह इन्द्र के धनुष जैसी सुन्दर होती है। इसलिए इसे इन्द्रधनुष के नाम से जाना जाता है। 



यह तो इन्द्रधनुष बनने की संक्षिप्त जानकारी है जिसकी वजह से निम्नलिखित मुख्य सवाल छूट जाते हैं - 
  1. यह गोलाकार में क्यों बनती है ?
  2. प्राकाशरुपी इन्द्रधनुष को बनने की पुरी जानकारी ? 
  3. बारिश में कभी-कभी देखने को ही क्यों मिलती है ? 




 इन्द्रधनुष बरसात के मौसम में ही बनती है। इससे यह बात स्पष्ट होती है कि इसके बनने की वजह पानी है। अगर ऐसा न होता तो यह हर मौसम में बनती। वैसे अगर आप भी इन्द्रधनुष बनाना चाहते हैं तो किसी भी मनचाहे मौसम में बना सकते हैं। इसके बारे हम आगे पढ़ेंगे। इसलिए अन्त तक जरूर पढ़िएगा।




इंद्रधनुष क्यों बनती है 


         इंद्रधनुष के बनने का कारण है वर्ण - विक्षेपण ( Dispersion )  । वर्ण - विक्षेपण क्या है, परिभाषा देखिए ➡️ 

वर्ण - विक्षेपण :  श्वेत प्रकाश - किरण का अपने अवयवी ( सात ) रंगों की प्रकाश - किरणों में विभाजित या अलग होना वर्ण - विक्षेपण कहलाता है। 
    वर्ण - विक्षेपण क्यों होता है यह जानना भी जरूरी है। 






प्रकाश का वर्ण - विक्षेपण क्यों होता है ? 

      श्वेत ( सफेद ) प्रकाश सात रंगों से मिलकर बना है और सभी रंंगों की विचलन या मुड़ने की क्षमता अलग - अलग होती है। इसी वजह से जब श्वेत प्रकाश को किसी विचलन भरे हुए मार्ग से गुजारते हैं ( जैसे - प्रिज्म, पानी की छोटी बूँदें आदि। ) तो सभी रंग अपने विचलन अंतर के कारण से अलग - अलग प्रदर्शित होने लगते हैं। 




नोट : वास्तव में प्रकाश के ☀ सात रंग ( अलग - अलग ही होते ) हैं पर इनके बीच दूरी इतनी कम होती है कि इनको अलग - अलग ( नंगी आँखों से ) देखना मुश्किल होता है। लेकिन जब यही प्रकाश किसी प्रिज्म या पानी की छोटी बूँदों से होकर गुजरता है तो इनमें दूरियाँ या अन्तर बढ़ जाता है और हमें स्पष्टतः दिखाई देने लगता है। 




 इंद्रधनुष गोल आकार में ही क्यों बनती है ?


         इन्द्रधनुष का गोल आकार में बनना भी एक महत्वपूर्ण सवाल है। इस सवाल का उत्तर बहुत कम लोग ही जानते हैं। पर Possibilityplus.in आपको उन सभी सवालों के जवाब मिलेंगे जो आप जानना चाहते हैं।
दरअसल सूर्य का प्रकाश अर्धवृत्ताकार या 360° का कोण बनाते हुए गति करता है ऐसा निष्कर्ष प्रकाश के वर्ण - विक्षेपण  होने  के बाद निकल रहा है ।

 हम स्पष्टरुप से यह देख रहे हैं कि सातो रंगों में अलग - अलग विचलन है जो इन्हें अलग करता है। इसका मतलब यह हुआ कि ये सातों प्रकाशीय रंग एक साथ होते हैं पर पर फिर भी अलग होते हैं। अतः स्पष्टतः हम यह कह सकते हैं प्रकाशीय ऊर्जा अर्धवृत्ताकार पथ बनाते हुए चलता है।
   वृत्ताकार के सबसे बाहरी भाग पर लाल और सबसे आन्तरिक भाग पर बैगनी होता है। इनके अलावा और पाँँच रंग  नारंगी, पीला, हरा, आसानी और नीला। जो लाल और बैगनी दोनों के बीच में होते हैं। और यही वजह है कि इन्द्रधनुष का रुप भी अर्धवृत्ताकार अथवा गोल होता है। 




इन्द्रधनुष कैसे उत्पन्न करें ?

अभी तक हमने इन्द्रधनुष कब, कहाँ और कैसे बनती है ऐसे सवालों को जाना। पर अब हम इन्द्रधनुष कब, कहाँ और कैसे बनती इसके बारे में जानकारी बटोरेंगे। इन्द्रधनुष को बनाने के लिए तीन शर्तें हैं -
  1. सूर्य का प्रकाश 
  2. पानी के फव्वारे ( अत्यंत शूक्ष्म बूँदें )
  3. छाया





     इन्द्रधनुष को बनाने के लिए ऐसी जगह ढूँढे जहाँ सूर्य का प्रकाश और छाया दोनों का एक स्थान पर संगम या मिलान बिन्दु हो। प्रकाश और छाया के केंद्र बिंदु पर मुँह या किसी अन्य तरिके के पानी का फव्वारा ⛲ बनायें। आपको फव्वारे के आसपास छोटी सी इन्द्रधनुष बनती हुई दिख जायेगी। सूर्य का प्रकाश जितना तेज़ होगा इन्द्रधनुष उतनी ही स्पष्ट होगी। इसके लिए दोपहर का समय सबसे सही होता है। 




     आपको यह जानकर कैसा लगा जरुर बताएँ क्योंकि आपके कमेंट के आधार पर ही हमें कुछ नया करने की प्रेरणा मिलती है।.
धन्यवाद...by: Possibilityplus.in


No comments:

Post a Comment

you may like this