Possibilityplus

संभावनाओं का सागर

13 Aug 2019

ऊष्मा संचरण / प्रकाश की यह जानकारी नहीं जानते होंगे !




  • क्या प्रकाश को रोका जा सकता है ? 
  • क्या प्रकाश की चाल बदलती है ? 
  • प्रकाश कितने रंगों से मिलकर बना है ? 
  • प्रकाश की चाल की कितनी होती है ? 







     ऊष्मा संचरण की तीन विधियाँ होती हैं -

  1. चालन
  2. संवहन 
  3. विकिरण 




    क्या हम जाानते हैं कि इन तीनों विधियों में वह कौन - सी मुुख्य वजह है जिसका होना अनिवार्य है। इसका मतलब यह है कि बिना इसके ऊष्मीय ऊर्जा का संचार होना संभव नहीं है। तापान्तर ही वह मुख्य वजह है जिसके कारण ऊष्मा का संंचार या आदान-प्रदान होता है। 
              यह पोस्ट ज्ञान की दृष्टि से बड़ा महत्वपूर्ण है। सबसे पहले हम ऊपर दी गई तीनों विधियों की पुरी जानकारी ले लेते हैं। 




       परिभाषाएँ   

   चालन ( Conduction )

          यदि किसी वस्तु में एक स्थान का ताप 🔥 अधिक और उसी वस्तु के दूसरे स्थान का ताप 🔥 कम है तो अधिक ताप वाले कण के नजदीक कम ताप वाले कण की तरफ ऊष्मीय ऊर्जा  प्रवाहित या संचरित होती है।






   संवहन (  Convection ) 

             किसी तरल पदार्थों ( द्रव और गैस ) में यदि किसी स्थान का ताप अधिक हो तो घनत्व में कमी हो जाने से तरल ऊपर उठता है और कम ताप ( अधिक घनत्व ) का तरल उसका स्थान ले लेता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक कि सम्पूर्ण तरल एक ही ताप पर न हो जाए। इस क्रिया में तरल  पदार्थ के कण स्वयं स्थानांतरित होकर ऊष्मा का संचरण करते हैं। 








विकिरण ( Radiation )

              अधिक ताप की वस्तुओं से कम ताप की वस्तुओं को विधुत - चुम्बकीय तरंगों के रूप में ऊष्मा स्थानांतरित होती है। इन विकिरणों की प्रकृति प्रकाश की प्रकृति से मिलती - जुलती है। इन्हें अवरक्त विकिरण भी कहते हैं। इनके संचरण के लिए किसी पदार्थ माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।

उदाहरण : जैसे सूर्य से पृथ्वी तक  ऊष्मा, ऊष्मीय विकिरण द्वारा ही पहुँचती है।

विकिरण ऊष्मा संचरण का एक ऐसा तरीका है जो वातावरण में मौजूद अतिसूक्ष्म कणों
के द्वारा संचरित होती है।
जैसे : हमारी आवाज 🔉 भी वातावरण में मौजूद शूक्ष्म कणों द्वारा ही होती है। चलिए कुुछ रोचक और मजेदार जानकारियाँ देखते हैं, जो हमें किताबों में भी शायद ही पढ़ने को मिले।
          सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी 14 करोड़ 50 लाख किलोमीटर है। अब क्या यह possibility( संभावना ) है कि बिना किसी माध्यम के प्रकाशीय ऊर्जा पृथ्वी तक पहुंच सके। हमने ऊपर 👆 पढ़ा है कि ऊष्मीय ऊर्जा बिना अन्तर के एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं पहुंच सकती है। इसलिए प्रकाश को सूर्य से पृथ्वी तक आने में या जाने के लिए इनके ( सूर्य और पृथ्वी ) बीच  ऊष्मीय ऊर्जा में अन्तर अनिवार्य है। इससे निम्नलिखित बातें  सामने आती हैैं -

  •  सूर्य के प्रकाश के मार्ग में यदि कोई इससे अधिक प्रकाश या ऊष्मीय ऊर्जा हो तो सूर्य का प्रकाश इससे होकर नहीं जा सकता है। 
  • प्रकाशीय अथवा ऊष्मीय ऊर्जा के संचरण के लिए इसके मार्ग में ऊष्मा में अन्तर होना चाहिए। 
  • विकिरण ऊष्मीय ऊर्जा  की चाल प्रकाश की चाल   3 × 108 मीटर / सेेकंड  के बराबर है। 
  • विकिरण या प्रकाश की चाल ठंडे या अधिक घनत्व वाले माध्यम में कम होती है ( जैसे : जल में )। 






व्यवहारिक जीवन में उपयोग। 

Use in practical life. 


  1. रात्री या अन्धेरे में मोबाइल या टीवी देखते समय हमें कोई लाईट या बल्ब 💡 जलाकर रखना चाहिए जिससे कि मोबाइल या टीवी से निकलने वाली रोशनी आँखों में ना लगे। 
  2. रात्री को सोते समय भी कोई ( हल्का ) उजाला जरूर रहने दें जिससे शरीर की ऊष्मीय ऊर्जा बनी रहे ( ठंडी के मौसम में ) । 
  3. रात्री में सोते समय यदि लाईट को बंद करें तो गर्मी थोड़ी कम  लगती है। 







  अगर हम रात के अंधेरे या दिन में भी किसी अंधेरे में मोबाइल का इस्तेमाल अधिक से अधिक करते हैं तो मोबाइल की स्क्रिन से निकलने वाला प्रकाश आपकी आंखों पर लोड डालेगा और इसमें उपस्थित ऊष्मीय ऊर्जा आंखों को गर्म कर देगी । इस तरह सरदर्द और फिर आंखों में समस्या का होना शुरू हो जायेगा।
  अगर यह मोबाईल या टीवी का इस्तेमाल हम कुछ उजाले में करते हैं तो बहुत हद तक हम इन परेशानियों से छुटकारा पा सकतें हैं।




     यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। इसके बारे में कोई राय या सुझाव हो तो अवश्य कमेंट बॉक्स में लिखें। धन्यवाद.. 


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