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सूर्य अथवा चन्द्र ग्रहण कब और क्यूँ लगता है

 सूर्य ग्रहण हो या चन्द्र ग्रहण ये घटना जब होती है तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमें कुछ सावधानियां बरतने को कहा जाता है। पर हममें से अधिकांश लोगों को यह समझ में ही नहीं आता कि भला सूर्य अथवा चन्द्र ग्रहण से हमारे जीवन में क्या और क्यूँ प्रभाव पड़ेगा। 


सूर्य ग्रहण हो या चन्द्र ग्रहण दोनों में एक बात यह मिलती है कि सूर्य हर ग्रहण में एक किनारे होता है , जबकि चन्द्रमा और पृथ्वी कभी बीच में तो कभी किनारे पर होते हैं। यह स्थिति कब और कैसे आती है इन सभी सवालों को जानते हैं।


सूर्य ग्रहण 

 सूर्य ग्रहण तब लगता है, जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है।

सवाल नम्बर . 01 : सूर्य और पृथ्वी के बीच चन्द्रमा कब और क्यूँ आता है ? 

 जैसा कि हम सब यह जानते हैं कि सूर्य के चारो ओर पृथ्वी चक्कर लगाती हुए अपनी धुरी पर भी घमती है और पृथ्वी के इर्द-गिर्द या चारो तरफ चन्द्रमा भी चक्कर लगाता है। चक्कर लगाते - लगाते एक समय ऐसा आता है कि चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है और इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहते हैं। यह घटना एक वर्ष के अन्दर आ सकती है।




 सूर्य ग्रहण जितना लम्बा होगा इसके लगने में या ऐसा संयोग भी सैकड़ों वर्षों में होगा जैसे 26 दिसंबर 2019 यानी आज के दिन का सूर्य ग्रहण लगभग 144 वर्ष बाद लग रहा है जो लगभग 5घटे 30मिनट का है । इसके अलावा सूर्य ग्रहण जितना छोटा होगा उसके लगने का अन्तराल भी कम  समय का होता है। 





सवाल नम्बर . 02 : सूर्य की प्रकाशीय ऊर्जा से हमारा संबंध क्या है ? 
  इसके लिए हमें यह जानना होगा कि सूर्य के कारण हमें क्या - क्या मिलता है। कहने का मतलब यह है कि हम सूर्य से कैसे संबंधित ( कनेक्टेड ) है। हम जानते हैं कि सूर्य धरती के लिए ऊर्जा का भंडार है और इसके बिना जीवन की कल्पना वर्तमान विज्ञान में नहीं मिल सकती है। सूर्य के प्रकाशीय ऊर्जा के अभाव में निम्नलिखित बातें हो सकती हैं -

  • सभी प्रकार की ऊर्जाओं का सन्तुलन बिगड़ जायेंगी। 
  • लगभग हर जीव का विकास रूक जायेगा। 
  • सूर्य पर आश्रित सभी जीव - जन्तुओं का द्रव्यमान नहीं बढ़ेगा ( इसकी पुरी जानकारी अगले पोस्ट में ) 


हमने प्रायः यह देखा होगा कि कोई भी पेड़ या पौधा अगर छाया में हो तो वह लम्बाई में बड़ता है पर मोटा नहीं हो पाता है क्योंकि सूर्य की ऊर्जा उसे नहीं मिल पाती है।
कुल मिलाकर देखें तो हम साधारण शब्दों में यही कह सकते हैं कि सूर्य की ऊर्जा के बिना जीवन असंभव है।


सवाल नम्बर . 03 : सूर्य ग्रहण से लाभ - हानि क्यों ? 
      सूर्य से हम सभी जीव जन्तु कैसे संबंधित हैं यह जानने के बाद हम लाभ - हानि का अनुमान लगा सकते हैं। मगर इन अनुमानों को प्रमाणित करने के लिए हमें कुछ उदाहरणों को देखना और समझना होगा। यहां पर हम लाभ - हानि के बारे में जानें उससे पहले आपका या बहुत लोगों का यह सवाल हो सकता है कि
 "भला कुछ समय तक सूर्य ना दिखे ( चन्द्रमा के कारण ) तो इससे क्या फर्क पड़ेगा ? " 

जवाब : इस सवाल का जवाब टामिंग (सही समय) से है। अगर किसी व्यक्ति को  किसी भी वस्तु जैसे (पैसा, खाना, दवा, काम आदि) की किसी खास समय में जरूरत है और उस समय में वह वस्तु ना मिलकर बाद में मिलेे तो इसके मिलनेे का कोई फायदा नहीं होता है नुुकसान के अलावा । यही बात सूर्य के प्रकाशीय ऊर्जा में है जो रोज एक निश्चित समय पर हमें मिलती है। पर जब किसी ( चन्द्रमा या अन्य )   कारणवश यही ऊर्जा उस निश्चित समय में नहीं मिल पाती है पृृथ्वी पर ऊर्जा का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके कारण पृथ्वी पर कहीं आंधी - तूफान, भारी वर्षा, हिमपात, सुनामी आदि प्रभाव देखने को मिल सकता है। जिससे अधिकांश जीव - जन्तुओं के जान - मााल के नुकसान होने की संभावना बड़ जाती है।

 तो इन्ही सब के बीच कुछ लोगों को फायदा भी होता है; जैसे आपदा के कारण सभी कार्य प्रगति पर हो जाते हैं जिससे बहुत लोगों को काम के साथ-साथ अच्छी किमत भी मिल जाती है। तो इस तरह सूर्य ग्रहण से किसी को लाभ तो किसी को फायदा होता है जो ज्योतिषी लोग बताते हैं। 







चन्द्र ग्रहण 

   चन्द्र ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी  , सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है। 


सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहण में अन्तर 

 सूर्य ग्रहण चन्द्र ग्रहण के मुकाबले अधिक घातक हो सकता है; क्योंकि पृृथ्वी सूूर्य के अनुसार यानी सूर्य के अभिकेेन्द्र बल के कारण सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है और जब सूूर्य ग्रहण लगता है तो ऐसे में सूूर्य का अभिकेन्द्र बल पृृथ्वी से ज्यादा  चन्द्रमा पर लगने लगेगा जिससे चन्द्रमा पृृथ्वी और सूर्य की खिचातानी में पड़ जाता है। इसके अलावा सूर्य की प्रकाशीय ऊर्जा में भी अनियमितता हो जाती है। 
ऐसे में ही सुनामी यानी समुद्रीय तूफान आने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। और जब चन्द्र ग्रहण लगता है तो पृृथ्वी सूूर्य और चन्द्रमा के बीच में आ जाती है जिससे चन्द्रमा पर लगने वाला अभिकेन्द्रीय बल भी पृृथ्वी पर लगने लगता है। जिससे पृथ्वी और सूर्य के बीच लगने वाला अभिकेन्द्रीय बल और भी बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप पृृथ्वी का गुरुुत्वाकर्षण बल भी बढ़ जाता है। यही कारण है कि इस दौरान हवााई अथवा जलीय सफर बन्द कर दिये जाते हैं। 


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