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Math ki basic jankari with details

गणित एक ऐसा विषय है जिसके बारे में जितना जाना उतना ही कम लगता है। इस तरह के - ऐसे सवालों के जवाब मिलते हैं जो वास्तविक दुनियाँ में देखा भी नहीं जा सकता।इसीलिए गणित को विज्ञानकी जननी (माता) भी कहा है। इसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है क्योंकि जीवन के हर पहलू में गणित जरुर मिल जायेगी। 
         इस पोस्ट में हम ऐसी जानकारी जानने वाले हैं जो हमें नहीं मिल पाए हैं। चलिए जानते हैं ..

  पक्षान्तर करने पर प्रतीक बदल क्यों जाते हैं ?

  हम जानते हैं कि किसी भी समीकरण के पदों को जब दूसरी तरफ ले जाया जाता है तो उनके प्रतीक बदल जाते हैं, जैसे - समीकरण x 2 + 5x + 8 = 0, के किसी भी पद को दाहिने तरफ ले जाने पर ऋणात्मक हो जायेंगे । माना हम 8 को दाहिने तरफ ले तो ऊपर दिया गया समीकरण ऐसा दिखाई देगा।
 x 2  + 5x + 8 = 0  ➡️ x 2 + 5x = - 8

 अब अगर हमसे यह कोई पूछे कि ऐसा क्यों होता है तो हम यही कहते हैं कि जब पक्षान्तर होता है तो उनके प्रतीक बदल जाते हैं इसमे और कोई बात नहीं है। पर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसका सही उत्तर कुछ और है जो कि ज्ञान की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। 


समीकरण में किसी भी पद का पक्षानार नहीं होता है 

  दुनियाँ के किसी भी समीकरण में पदों का पक्षानार नहीं होता है। क्या होता है और क्यूँ एक बार फिर इसी समीकरण x 2  + 5x + 8 = 0, में हम दाहिने ओर - 8 कैसे आया है यह समझ सकते हैं। 
देखिए ➡️  X 2  + 5x + 8 = 0
समीकरण के दोनों पक्षों में - 8 घटाने पर, 
 x 2  + 5x + 8 - 8 = - 8
 x 2  + 5x = - 8 

 देखा आपने क्या असलियत है। इसी नहीं बल्कि किसी भी समीकरण के किसी पद को ऐसे  ही हल किया जाता है। पर एक सवाल उठ खड़ा होता है कि जब ऐसा ही है तो हम इसका उपयोग क्यों नहीं करते हैं, पक्षान्तर जैसे शब्दों का ही उपयोग क्यों ? 
 दरअसल पक्षान्तर कहना और करना हमें ज्यादा आसान लगता है और इसी वजह से इसका उपयोग किया जाता है। 
      किसी भी समीकरण के किसी भी पद का पक्षान्तर नहीं होता है, इसका 'तराजू' बहुत सरल और अच्छा उदाहरण है। चलिए समझते हैं। 

समीकरण तराजू की भाँति कार्य करता है 

 हम जानते हैं कि जब किसी दोषरहित तराजू के दोनों पलड़ों पर समान भार की वस्तुएँ रखें तो दोनों ही पलड़े समान ऊँचाई पर होते हैं। अगर मान लिया दोनो पलड़ों पर 8 - 8 किग्रा कि दो वस्तुएँ रखीं गईं हो तब अगर हम दाहिने या बाँये पलड़े से एक 8 किग्रा की एक वस्तु उठा लेते हैं तो दूसरा पलड़ा ऊपर चला जाता है। अब दोनों पलड़ों को समान करने के लिए हमें दूसरे पलड़े से भी एक 8 किग्रा की वस्तु भी निकालनी पड़ेगी। इस तरह समीकरण, तराजू की भाँति कार्य करता है, अतः किसी भी समीकरण के किसी भी पद का पक्षान्तर नहीं होता है।



 धन ( + ) और ऋण ( - ) के गुणा से सम्बंधित

       गणित में बहुत सारे सवाल हैं जिनका जवाब हमें पूर्णतः नहीं मिल पाता है। उन्हीं में से एक सवाल यह है कि धन, ऋण, ऋण - ऋण का गुणा करने पर इनके चिन्ह क्यों बदल जाते हैं। ये सवाल देखने में बहुत छोटा-सा लग रहा होगा मगर ऐसा नहीं है। इसमे आधारभूत ऐसी जानकारी है जो पुरी तरह से हमारे इस सवाल का जवाब देगी।


 धन और ऋण का गुणा ऋण ही क्यों होता है ?

  हम सबको यह पता है कि धन( + ) और ऋण ( - ) का गुणा करने पर ऋण आता है पर क्यों और कैसे आता है इसको हममें से अधिकांश लोग इसे एक्सप्लेन ( explain ) नहीं कर पायेंगे। इसको हम साधारण और सरल आंकिक उदाहरणों की मदद से समझेंगे।

उदाहरण :  ( + 4 ) ×  ( - 4 )  इसमें मान लिया हमें यह नहीं पता है कि धन आयेगा कि ऋण पर यह तो पता है कि 4 और 4 का गुणा 16 होता है। हम जानते हैं कि गुणा जोड़ का ही संक्षिप्त रुप है। +4 को हम चार बार और - 4 को 4 रुपये उधार मानले तो हम चार बार में 16 ऊधार ले लेंगे। ऋण को ऊधार भी कहा जाता है। इस तरह से - 16 आयेगा ।अतः स्पष्ट है कि धन और ऋण का गुणनफल ऋण आता है। क्योंकि हम जानते हैं कि संख्या या गिनती कभी ऋट / माईनस में नहीं हो सकती है।


ऋण और ऋण का गुणा धन ही क्यों होता है ?

  इसको समझने के लिए हम सेब 🍏 का उदाहरण ले सकते हैं। कोई व्यक्ति जो एक बार में 4 सेब, दूसरी बार में 4 सेब, तीसरी बार में 4 सेब तथा चौथी बार में भी 4 सेब ही लेता है या दूसरे शब्दों में कहें तो 4 सेब 4 बार पैसे से खरिदता है। जिसे हम गणितीयरुप में (+ 4 ) × (+ 4 ) में लिख सकते हैं। तो यहाँ पर कुल मिलाकर +16 सेब होगें क्योंकि व्यक्ति ने सेब खरिदें हैं यानी प्लस चिन्ह ही होगा।अगर वह बेचता तो माईनस ( -  ऋण ) चिन्ह होता। 
अब हम ( - 4 ) × ( - 4 ) को यह मान लें पहला ( - 4 ) वह संख्या है जितनी बार सेब बेचा / खरिदा जाता है पर हम यह जानते हैं कि किसी भी वस्तु को बेचने या खरिदने की संख्या 0 से लेकर अनन्त तक कुछ भी हो सकती है पर माईनस / ऋण नहीं हो सकती है। इसलिए यह - 4 न होकर + 4 हो जाएगा। अब बात करते हैं दूसरे - 4 की तो इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि व्यक्ति सेब बेच रहा है लेकिन वह - 4 बार बेच रहा है। चूंकि - 4 बार बेचना मतलब वह बेच नहीं बल्कि +4 बार खरिदने के बराबर है। और खरिदने का मतलब ( + ) से होगा, अतः ( - 4 ) × ( - 4 ) = (+4 ) × ( + 4 ) = + 16 होगा। 

इसे हम ऐसे समझ सकते हैं। किसी भी वस्तु को 0 ( जीरो ) बार बेचना मतलब हमने वस्तु को बेचा ही नहीं, 1 बार बेचना मतलब हमने एक बार बेचा है और अगर - 1 बार बेचा है तो इसका मतलब एक बार खरिदा है। ठीक इसी तरह से - 4 बार - 4 सेब बेचने का असल मतलब खरिदने से हो रहा है। इस तरह क  (-4) × (-4) = + 16 सेब खरिदा। 
 अगर आप यह सोंच रहे हैं कि हम बेचने की जगह हम यह मान लें कि हम सेब या कोई भी वस्तु खरिद रहे हैं तो क्या होगा क्या तब भी (-4) × (-4) = + 16 सेब ही आयेगा तो इसका जवाब है हाँ पर कैसे ? 
 माना (-4) सेब (-4) बार खरिद रहे हैं तब चुँकि हम यह जानते हैं कि (-4) बार खरिदना मतलब +4 बेचने के बराबर होगा क्योंकि 4 के पहले ऋण चिन्ह है जो यह बता रहा है कि यह विपरीत बात है और खरिदने की विपरीत बेचना होता है दसरी बात ( - 4 ) सेब खरिदना मतलब सेब खरिद नहीं बल्कि बेच रहा है। इस तरह व्यक्ति + 16 सेब बेच रहा है। इस तरह 
अतः स्पष्ट है कि ऋण - ऋण का गुणा धन होता है।


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