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समय क्या है ? क्या भगवान भी हैं इसके के वस में ?

       


समय क्या है अगर ये प्रश्न किया जाए तो अधिकांश लोगो का यही जवाब होगा कि किसी भी काम को करने के लिए कुछ न कुछ समय लगता है। इसी तरह समय को परिभाषित कर सकते हैं। चलिए ये सही है पर समय के बारे में कुछ जबरदस्त सवाल ऐसे हैं जो हमारे ज्ञान को बढ़ा देंगे और उम्मीद है कि हममें से बहुत लोगों को ऐसी जानकारी नहीं मिली होगी। ये सवाल कुछ इस तरह से हैं -

  1. समय क्या है ? 
  2. क्या यह रुकता भी है ?
  3. इसे  कौन चलाता है ?
  4. इसे किसने बनाया ?
  5. ये कितने प्रकार का होता है ? 
  6. क्या इसका भी अंत होगा ?
  7. क्या इसका  भी क्षय होता है?
  8. क्या इसका भी जन्म हुआ था ?
  9. क्या समय यात्रा की जा सकती है ? 
  10. क्या इसकी कोई दिशा होती है?
  11. क्या इसकी गति परिवर्तनशील है ?
  12. क्या यह भी किसी वस्तु से बना है?
  13. क्या यह हर जगह एक जैसा होता है ? 
  14. समय को बढ़ने या चलने के लिए भी किसी वस्तु की आवश्यकता होती है ?



इन उपर्युक्त ( ऊपर दिए गए  ) सवालों से यह विदित ( स्पष्ट ) हो रहा है कि हम समय के बारे में बहुत कम जानते हैं, तो चलिए एक - एक करके जानते हैं।



समय क्या है ? ( What is the Time ? )





            समय एक ऐसी वस्तु है जिसे देखा नहीं जा सकता है। इसके बिना दुनिया का कोई भी काम नहीं किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो हर शय समय की गुलाम है। ये कभी भी रुकता नहीं चाहे कुछ भी इसे कोई फर्क नहीं पड़ता है। पर समय हर वस्तु पर प्रभाव डालता है। समय का न तो जन्म हुआ है और ना ही इसका कोई अंत है। ऐसा क्यों होता है हम अगली हेडिंगो के अन्तर्गत कारण सहित पढ़ेंगे।





क्या समय रुकता भी है ?

       समय एक ऐसी वस्तु है जो निर्बाध ( बिना रुकावट ) के चलता रहता है। इसे कोई भी शय प्रभावित नहीं कर सकती है। अतः समय कभी भी रुकता नहीं है। पर कुछ यूटूबरो ने अपनी विडियो में यह बताया है कि अगर कोई वस्तु प्रकाश की चाल से भी अधिक चाल से चलती है तो उसके लिए समय रुक जाता है। क्या आप इस बात से सहमत हैं, अगर हाँ तो आप गलत हैं क्योंकि हम जानते हैं कि  समय का रुकना मतलब t = 0 होगा। तब सूत्र      चाल = दुरी/समय     

इस सूत्र में समय = 0 रखने पर चाल अपरिभाषित होगी अथवा चाल अनंत होगी, पर यहाँ तो सिर्फ 3 लाख किलोमीटर


से अधिक की यानी मोटे तौर पर हम 5 लाख, 10 लाख या फिर करोड़ में भी मान लें तो भी ये अनंत या अपरिभाषित नहीं होगा क्योंकि हम महाशंख तक गणनाओं को आसानी से कर सकते हैं। इस तरह से हम यह अच्छी तरह से समझ सकते हैं कि समय कभी भी नहीं रुकता है। क्योंकि ऊपर दिए गए सुत्र से यह साबित होता है कि चाल की गणना बिना समय के हो ही नहीं सकती क्योंकि समय और दुरी दोनों ही चाल को निर्धारित करते हैं। 
          







समय को कौन चलाता है ? Who runs the time ?

             समय को कौन चलाता है ये प्रश्न बड़ा ही तार्किक है पर कुछ लोग कहेंग कि इसे भगवान चलाते हैं पर कोई वैज्ञानिक प्रमाण या तार्किक विचार भी तो होने चाहिए कि नहीं। तो चलिए हम इस सवाल का जवाब ढूंढते हैं। समय को अगर भगवान चलाते तो उन्हें कोई भी टेन्शन नहीं होता पर ऐसा नहीं है । इस बात को हम कई उदाहरणों से भली-भांति समझ सकते हैं।

उदाहरण :  कहा जाता है कि जब भगवान भोलेनाथ ( शंकर भगवान ) और श्री गणेश जी का युद्ध हो रहा था तो भगवान भोलेनाथ ने अपनेे ही पुत्र यानी गणेश भगवान का सर धड़ से काट गिराया था। तब देवी पार्वती जी ने क्रोधित होकर पुरे संसार को समाप्त करने जा रही थी तो सभी देवी-देवताओं ने एक फैसला लिया कि गणेेश जी का कटा हुआ सर फिर से जोड़ दिया जाए तो उन्होंने पाया कि समय के चलते ऐसी संभावना ही समाप्त हो चुकी थी तब एक विकल्प उनके समक्ष यह था कि किसी और का सर लगाया जा सकता है पर वो भी कुछ सीमित समय के अंदर ही संभव था। और इस तरह से उन्हें एक हाथी के बच्चे का सिर मिला जिसे काटकर गणेश जी के धड़ में समय रहते जोड़ दिया गया। 
.      ये बातें हमें यही बता रही है कि समय को कोई चलाता नहीं है बल्कि यह स्वयं ही चलता है या फिर प्रकृति चलाती है । पर ऐसा क्यों होता है ये भी बड़ा सवाल है। ऐसे अनेकों उदाहरण हमें मिल जायेंगे।





समय को किसने बनाया ?

         
          समय ऐसी वस्तु है जिसे ना तो बनाया जा सकता है और न ही मिटाया जा सकता है। यह प्रकृति की सबसे अद्भुत वस्तुओं में से एक है। मोटे तौर पर कहें कि इसे प्रकृति ने बनाया है तो गलत नहीं होगा क्योंकि प्रकृति ऐसी ऐसी वस्तुओं का निर्माण करती है जिसे हम इंसान सोच भी नहीं सकते हैं क्योंकि हमारी सोंच समझ भी समय के हाथों में है यानी हम बिना समय के कुछ भी नहीं कर सकते हैं।



ये कितने प्रकार का होता है ?

                  समय मुख्यतः तीन प्रकार का होता है - 
  1. वर्तमान 
  2. भूत और
  3. भविष्य 

      निचे दिए गए चित्र को देखें. 





                 समय के तीनों काल एकसाथ एक क्रम में चलते हैं । जैसे ही वर्तमानकाल अगले छण भविष्यकाल में जाने वाला होता है तभी भविष्यकाल अपनी स्थिति से आगे बढ़ जाता है और भविष्यकाल की जगह वर्तमानकाल हो जाता है। ठीक इसी तरह से वर्तमानकाल के पिछे भूतकाल भी वर्तमानकाल की स्थिति में आ जाता है। तो इस तरह से तीनों काल एक दूसरे के साथ साथ चलते हैं।



क्या इसका अंत भी हो सकता है ?

         कहा जाता है कि दुनिया में हर वस्तु का अन्त होता ही होता है पर समय ऐसी वस्तु है जिससे पुरा ब्रम्हांड चलता है तो इसका अंत मतलब पुरे ब्रम्हांड का अंत। तो इसके अंत के बारे में यही कहा जा सकता है कि इसका अंत संभव तो नहीं  लगता है क्योंकि इसको समाप्त करने का कोई भी कारक का हमें अनुमान नहीं है। अतः हम फिल्हाल यही कह सकते हैं कि अंतहीन वस्तु है। 




क्या इसका क्षय भी होता है ?

          समय एक ऐसी वस्तु है जो हर जगह मौजूद है। अगर इसका क्षय होता तो इसका अंत हो जाता या भविष्य में हो जायेगा इन दोनों बातों में से किसे माने और किसे नहीं कहना मुश्किल है । अगर साधारण या मोटे तौर पर यह कहें कि यह यह क्षयहीन वस्तु है तो यह पुरी तरह  से गलत नहीं होगा । हाँ ये बात जरूर है कि ये हमेशा बदलता रहता है। 



   क्या समय यात्रा की जा सकती है ?

                   समय यात्रा होगी कि नहीं यह तो तभी हम जान पायेंगे जब हम समय यात्रा क्या होती है उसके बारे में जान लें। इसलिए आईए जानते हैं इसके बारे में। 
   

समय यात्रा ( Time traveling )

  वह यात्रा जिसमें किसी ऐसी वस्तु द्वारा बिना कोई समय लगे एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाया जा सके समय यात्रा कहलाता है। पर वास्तव में 100% समय यात्रा संभव नहीं है क्योंकि कोई भी वस्तु चाहे कितनी ही विकसित ही क्यों ना हो पर उसे चलने के लिए कुछ न कुछ समय अवश्य ही लगेगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि समय यात्रा केवल आंशिक रूप से ही की जा सकती है पूर्णरुप से नहीं। समय यात्रा को समझने के लिए हमें एक सरल उदाहरण लेना चाहिए। 

  उदाहरण   1.  - जब हम किसी वाहन ( जैसे : टू - ह्वीलर, थ्री-ह्वीलर, फोर - ह्वीलर  इत्यादि ) से या फिर पैदल भी चलें तो भी हमें पेड़ - पौधे हमाारे सापेक्ष ( मुकाबले) रुके हुए दिखाई देते हैं । या मान लेते हैं कि हम भारत के मुम्बई शहर की यात्रा करना चाहते हैं तो मुम्बई शहर की जमीन हमारे सापेक्ष रुकी हुई है और हम उसको देखते हुए जा रहे हैं या फिर रुककर देख रहे हैं। तो ऐसी यात्रा को अच्छी तरह से कर सकते हैं पर ऐसी वस्तु जो चल रही है तो उसकी यात्रा करना मुश्किल या कठीन होगा या हम उसकी यात्रा अच्छी तरह से नहीं कर सकते हैं। मान लीजिए की या आप किसी तेज वाहन से चलते हुए मुम्बई हो या कोई शहर या फिर कोई वस्तु ही क्यों 
 हो पर हम उसका दीदार ( दर्शन) अच्छी तरह से नहीं कर सकते हैं। ठीक इसी तरह से समय तो अति तिव्र गति से चलने  वाली वस्तु है तो इसकी यात्रा करना कितना मुश्किल होगा। 

   अधिकांश लोगों का कहना है कि हम सिर्फ भविष्यकाल की यात्रा कर सकते हैं भूतकाल की नहीं। कर सकते हैं पर बहुत ही छणिक होगा और हमें पता भी नहीं होगा पर ऐसा कोई साधन नहीं है। 



याद रखिए : कोई भी कार्य न तो पुरी तरह से असंभव है और ना ही पुरी तरह से संभव है। 

इस बात से हमे यह पता चलता है कि हर कार्य संभव हो सकता है बस उसे संभव करने वाला चाहिए। 



उदाहरण 2.   पुरी तरह से समय यात्रा करने के लिए आपको सर्वव्यापी ( एक ही समय में हर जगह उपस्थित होना होगा) जो कि अपने आप में असंभव के बिल्कुल करीब है। यहाँ से एक और प्रश्न का उत्तर मिल रहा है कि भगवान क्यों समय यात्रा कर लेते हैं। क्योंकि वह सर्वव्यापी हैं यानी कि वह एक ही समय में हर जगह हर समय में मौजूद हैं ? 


भगवान हमारे मुकाबले समय यात्रा करते हैं क्योंकि वे बहुत ही कम छड़ में बहुत सारे काम कर सकते हैं। पर ये भी प्रकृति के आगे बेबस हैं क्योंकि ये भी पुरी तरह से समय यात्रा नहीं कर सकते हैं। 


सबसे बड़ी बात 

     सबसे बड़ी बात यह है कि अगर कोई व्यक्ति भविष्य या भूूतकाल की यात्रा करता है तो भी कोई फायदा नही  होगा क्योंकि भविष्यकाल में सशरिर (शरिर सहित ) यात्रा करने के लिए हमें लगभग प्रकाश केे वेग के बराबर, ज्यादा या थोड़े से कम समय की आवश्यकता होगी और इस वेग पर हमारा मस्तिष्क तो शायद सांस भी नही ले पाये यानी किसी भी तरह से अगर हम भविष्यकाल मेें चले भी जायें तो भी हम कुछ जान ही नहीं पायेगे। यह बात शायद ईंसानो पर ही नहीं बल्कि भगवान /ईश्वर या फिर कोई भी हो सब पर लागु होती है। और इसिलिये भगवान समय के आगे बेबस  हैं तभी तो भगवान भोलेनाथ द्वारा गणेश भगवान का सिर काटने के बाद उसे भूतकाल में जाकर नहीं जोड़ सकते थे क्योंकि भुतकाल में जाने के बाद उनका विवेक या फिर सारी शक्तियाँ शूून्य हो जाती है तो भला कोई कार्य कैसे किया जा सकता था तो भूतकाल में जाने का क्या फायदा । इसलिए भगवान कहते हैं कि प्रकृति के विरूद्ध कोई भी नहीं जा सकता है। 

सारांश :   कुल मिलाकर इसका सारांश देखेें तो कोई फायदा नहीं होगा हमें समय यात्रा करके क्योंकि जब हम कुछ  कर नहीं सकते हैं तो क्या मतलब है। वास्तव में देखा जाए तो समय यात्रा सापेक्ष ( तुलनात्मक ) होती है क्योंकि जो हमारे लिए समय यात्रा है वह किसी के लिए सामान्य समय है। जैसे मान लिजिए एलियन समय यात्रा कर सकते हैं तो असल में समय यात्रा नहीं कर रहे हैं बल्कि वो उनके कार्य करने की दर है जो हमसे हजारों या फिर लाखों गुना अधिक हो सकती है। इसलिए हमारे अनुसार वो समय यात्रा कर रहे हैं। 

 एक तरिका ऐसा है जो समय को हमें दिखा सकता है जिसे भविष्य का कैमरा कह सकते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में। 


  भविष्य दिखाने वाला कैमरा 

        भगवान तो एकही स्थान से हर जगह हर समय ( वर्तमान, भूत और भविष्यकाल ) को देख सकते हैं पर क्या मनुष्य ऐसा नहीं कर सकते हैं तो इसका जवाब इस समय ( सन् 2020 ) में संभव नहीं है पर ये संभव किया जा सकता है। कैसे है ना तो चलिए आगे पढ़ते हैं। 
   अगर हम एक ऐसा काल्पनिक विडियो रिकार्डिंग कैमरा बना लें जो जीरो  समय में विडियो रिकार्डिंग कर सके तो हम बैठे - बैठे भविष्य में होने वाली घटनाओं को देख सकते हैं।
यहाँ पर आपका एक सवाल हो सकता है कि  जीरो मतलब कुछ नहीं होता है तो ऐसा कैमरा तो असंभव है। जीरो क्या है इसके बारे में आप पढ़कर यह जान सकते हैं कि जीरो समय हमने क्यों कहा। वास्तव में कोई भी कार्य न तो पुरी तरह से संभव होता है और ना ही पुरी तरह से असंभव। दूसरी तरफ भुतकाल की बात करें तो एक 
साधारण  विडियो रिकार्डिंग कैमरे को लगाकर छोड़ दें तो हम भविष्य में जब चाहे तब इस विडियो को जो भूतकाल में खिंची गई थी देख सकते हैं । यानी हम भूतकाल को भी देख सकते हैं पर भुतकाल में जाना भविष्य काल से पेचिदा है पर याद रखिए कोई भी कार्य पुरी तरह असंभव नहीं होता है इसलिए यह भी जरूर संभव होना चाहिए पर आज हमारे पास ऐसा कोई साधन नहीं है जिससे यह कर सकें।
 


क्या इसकी कोई दिशा है ? 

 
समय एक ऐसी वस्तु है प्रकृति की जो दिशा पे भी निर्भर नहीं करती है क्योंकि यह हर जगह है इसलिए दिशा का कोई सवाल ही नहीं है । लेकिन फिर भी यह वर्तमान से भविष्य की तरफ चलता है। 



 क्या इसकी चाल परिवर्तनशील है? 

  इसकी चाल एकसमान है ना कभी बढ़ती है और ना ही घटती है। अतः समय की चाल अपरिवर्तनशील है। 




 क्या यह भी किसी वस्तु से बना है ? 

यह किस वस्तु से बना यह अपनेआप में एक बड़ा सवाल है। यह ऐसी वस्तु है जिसे वस्तुओं के अंतर होने से महसूस कर सकते हैं पर देख नहीं सकते हैं और ना ही इसे कंट्रोल कर सकते हैं। इन सभी बातों से यह स्पष्ट है कि समय एक ऐसी माया है जो सभी को चलाता है। इसे किसी वस्तु की तुलना करने के लिए हमारे पास कोई वस्तु ही नहीं है। अतः हम कुछ नहीं कह सकते हैं।




 क्या यह हर जगह एक जैसा है  ?

    कुछ लोगो का कहना है कि समय हर जगह अलग - अलग हो सकता है पर ऐसा नहीं है क्योंकि ये अपनी एक ही गति से चलता रहता है ना बढ़ता है और ना ही घटता है। कहते हैं कि ब्लैक होल के आसपास समय रूक जाता है या बहुत धीमी गति से चलता है क्योंकि ब्लैक होल के चारो ओर गुरुत्वाकर्षण बहुत उच्च होता है जिससे कोई भी कार्य सेकेंड के लगभग  लाखवें भाग में ही हो जाता है। अगर कोई वहाँ किसी तरह से चला जाए तो वह पलक झफते ही उसका नामोनिशान मिट जायेगा। ऊपर  ध्यान से आपने पढ़ा होगा तो आपने देखा होगा कि गुरुत्वाकर्षण के कारण समय की चाल निर्धारित होती है यही निष्कर्ष निकल रहा है पर ऐसा नहीं है क्योंकि समय कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे गुरुत्वाकर्षण बल से धीमा या तेज किया अथवा खींचा जा सके । अतः स्पष्ट है कि समय हर जगह एकसमान रहता है।

 समय क्यों चलता है ? 

समय क्यो चलता है इसका जवाब बड़ा सरल है। दरअसल समय अगर नहीं चलेगा तो कुछ भी नहीं हो सकता है। प्रकृति इसे चलाती है वो क्यों चलाती है इसका जवाब  नहीं पता है हम सबको।





आपको यह जानकारी कैसी लगी कमेंट बॉक्स में जरुर बताएँ। क्या आप रोचक जानकारियाँ जानना चाहते हैं तो इस वेबसाइट www.possibilityplus.in को अभी Follow करें।. 
      
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