सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Correct connection of ceiling fans

 क्या आप छत वाले पंखें का कनेक्शन नहीं जानते हैं और आपको ही इसका कनेक्शन करना  या सीखना है और आपको कोई आईडिया नहीं है तो आपको इस आर्टिकल में पुरी जानकारी देने की कोशिश की गई है। सबसे पहले हम उन सवालों को देख लेतें हैं जो हमारे काम का है, अगर न हो तो आपका समय बर्बाद न हो इसलिए ये सवाल आवश्यक हैं -

  • पंखें में चार तार ( वायर ) क्यों होते हैं ?
  • इसमें तीन तार भी होते हैं, क्यों ?
  • किसको "स्टार्टिंग वायर" कहते हैं ? 
  • किसको "रनिंग वायर" कहते हैं ? 
  • किसको "काॅमन" करना चाहिए ?
  • किन दो तारों में मेन तारों को जोड़ना चाहिए ? 
  • कैपासिटर को किन दो तारों में जोड़ना चाहिए ? 
  • छत वाले पंखें में कितने माईक्रोफैरड का कैपासिटर होना चाहिए ?
  • कैसे पता करें कि कैपासिटर खराब नहीं है ?
  • कैसे पता करें कि पंखा सही या खराब है  ?
  • पंखा सीधा चल रहा है या उल्टा कैसे पता करें ?



छत वाले पंखें में चार तार ( वायर ) क्यों होते हैं ?

       जो लोग पंखे के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं उनके मन में अनेकों ऐसे सवाल आते हैं जो जानने के बाद ऐसा लगता है कि अरे ये तो बहुत आसान या सरल था। उन्ही में से एक यह है कि " छत वाले पंखें में चार तार क्यों होते हैं ?"
 
दरअसल पंखें में जब तार भरा जाता है तो दो प्रकार के स्लाट होते हैं ( स्टार्टिंग और रनिंग )। स्टार्टिंग तार अन्दर की तरफ और रनिंग तार बाहर की तरफ होता है। स्टार्टिंग वाले का काम सिर्फ पंखे को स्टार्ट करने का होता है और रनिंग वाले का सिर्फ पंखे की गति बनाये रखना होता है। चुँकि स्टार्टिंग और रनिंग दोनों में से 2 - 2 वायर निकले होते हैं। जो संख्या में 4 हो जाते हैं। अतः यही कारण है कि पंखे में 4 वायर होते हैं। 
निचे दिए चित्रानुसार 



Celling fan winding diagram.


चित्र में पिले तार स्टार्टिंग के हैं क्योंकि ये अंदर वाले स्लाट में जोड़े गयें हैं। इसके अलावा लाल तारों की बात करें तो यह रनिंग वाले यानी बाहरी स्लाट से जुड़े हुए हैं इसलिए यह रनिंग वायर हैं। इसको अच्छे से समझने के लिए इसका डाईग्राम दिया गया है। निचे दिए गए चित्र को देखिए। 


Celling fan diagram



S1 और S2 स्टार्टिंग ( starting ) तथा R1 और R2 रनिंग ( running ) wire हैं ।



तीन तार ( wire) इसलिए होतें हैं ?

   हम जानते हैं कि लगभग हर छत वाले पंखे में चार तार होते हैं तो फिर किसी - किसी में तीन ही क्यों होते हैं, ऐसा क्यों ?



दरअसल किन्हीं दो तारों ( एक स्टार्टिंग और दूसरे ) को पंखें के अंदर ही जोड़कर काॅमन बना लिया जाता है जिससे अब केवल तीन तार ही बचते हैं जिनको बाहर निकाला जाता है। इसलिए तीन तार हमें देखने को मिलते हैं।


किसको स्टार्टिंग वायर कहते हैं ? 

   जो तार पंखे के अंदर वाले भाग में भरा जाता है उसे स्टार्टिंग वायर कहते हैं। इसमें दो वायर होते हैं एक जहाँ से भरना चालू किया जाता है और दूसरा वह जहाँ भरना रोक दिया गया होता है। अब इसे ही स्टार्टिंग वायर क्यों कहते हैं इसको भी जानना चाहिए। दरअसल इन्हीं के द्वारा पंखे को स्टार्ट ( चालू ) किया जाता है। या दूसरे शब्दों में कहें तो इनसे केवल पंखें को हल्के झटके से गति अवस्था में लाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है चुँकि इनको स्टार्ट करने के लिए उपयोग में लाया जाता है इसलिए इन्हें "स्टार्टिंग वायर" कहते हैं। ऊपर डायग्राम वाला चित्र देखिए। 



किसको रनिंग वायर कहते हैं ? 

     ऊपर दिए गए चित्र में जो काॅपर वायर बाहरी स्लाट के हैं उन्हें रनिंग वायर कहतें हैं। इसमें भी यह बात आती है कि आखिर बाहरी स्लाट से ही निकले तारों को ही रनिंग वायर ( तार ) क्यों कहते हैं। ये जानना हमारे लिए बहुत आवश्यक है। अगर हम " रनिंग " शब्द की बात करें तो यह अंग्रेजी शब्द है और  Running ( = वेग से चलने वाला ) होता है। इससे साफ है कि इन्ही के द्वारा पंखा गति से चलता रहता है। यही कारण है कि इन बाहरी स्लाट वाले तारों को ही रनिंग कहा जाता है। इसमें एक बात हम साफ कर देना चाहते हैं कि स्टार्टिंग वायर की मदत से भी पंखें को चलाया जा सकता है पर इससे पंखें की जलने की ज्यादा संभावना ( Possibility ) बढ़ जाती है। कैसे और क्यों हम आगे पढ़ने वाले हैं। 



इनको काॅमन करना चाहिए 

    पंखे के चलने के हिसाब से स्टार्टिंग का एक वायर और एक वायर रनिंग का जोड़ने पर वह जोड़ काॅमन वायर बन जाता है। अगर सब कुछ करने के बाद पंखा उल्टी दिशा में घूम रहा है तो हमें रनिंग वाले दोनों वायरों को आपस में बदल देना चाहिए ना कि स्टार्टिंग में जोड़ना चाहिए। यानी स्टार्टिंग वायर में मेन तार नहीं जोड़ना चाहिए क्यों कैसे आगे कारण दिया गया है। 
 


इन दोनों तारों में मेन वायर जोड़ें 

       जैसा कि हमनें अभी - अभी पढ़ा है कि काॅमन वायर किसे और कैसे बनाते हैं। इसके बाद अब हमें कनेक्शन करना है उन दो तारों के साथ जो हमारे घर आते हैं। उन दोनों में से किसी एक को काॅमन के साथ और दूसरे को रनिंग वाले के साथ जो कैपासिटर में जुड़ा हुआ है के साथ जोड़ देते हैं। 




कैपासिटर को इन तारों में जोड़ना चाहिए 

           कैपासिटर को किस तार में जोड़ना चाहिए यह भी जानना आवश्यक है। कैपासिटर के दोनों तारों में से किसी भी एक को रनिंग और दूसरे को स्टार्टिंग वायर में जोड़ना चाहिए। क्योंकि हम जानते हैं कि पंखों में नाॅन पोलर ( बिना ध्रुवण ) वाले कैपासिटर लगाये जाते हैं इसलिए हम कैपासिटर के किसी भी तार में रनिंग या स्टार्टिंग के तार जोड़ सकते हैं। इसके अतिरिक्त काॅमन वाला तार ही बचता है जिसमे मेन लाइन का एक तार जोड़ा जाता है। 
   अब आते हैं कि छत वाले पंखें में कितने माईक्रोफैरड का कैपासिटर लगाना चाहिए तो हम 2.5 से 3.15 μF ( माईक्रोफैरड ) लगा सकते हैं। हल्के पंखो में 2.5 μF का और भारीभरकम पंखों में 3.15 μF का कैपासिटर लगाना चाहिए। 



कैपासिटर का टेस्ट 

       अगर पंखा बहुत धीमा या न चले और हमें यह संदेह हो रहा है कि क्या कैपासिटर सही या खराब है, कैसे पता करें तो हम इस तरह से कर सकते हैं - 
  1. सबसे पहले कैपासिटर को A.C. या बिजली से चार्ज करें अगर हो सके तो सीरीज बोर्ड की सहायता से करें। 
  2. इसके बाद सावधानी से कैपासिटर को बिजली से हटा लें। 
  3. इसके बाद कैपासिटर के दोनों तारों को आपस में ऐसे छूवाएँ की हमें ये तार न कहीं छुए। 
  4. अगर स्पर्श ( टच या छुवाने ) पर तेज स्पार्क करता है तो यह सही है। 
  5. अगर स्पर्श करने पर मामूली या स्पार्क ही नहीं करता है तो कैपासिटर खराब है। 




पंखा खराब है या सही ऐसे पता करें 

     पंखे को हम कैसे चेक कर सकते हैं कि सही है या खराब। इसके लिए हमें एक सीरिज बोर्ड की आवश्यकता होती है। यह पता करने के लिए हमें सीरिज बोर्ड में दो तारो को एक दो पिन वाले प्लग में लगाया जाता है जिनके दूसरे सिरे से हम अलग - अलग स्टार्टिंग और रनिंग वायरों को स्पर्श करने पर 100watt का बल्ब जलना चाहिए। अगर नहीं जलता है तो समझ लिजिए पंखें में गड़बड़ी है। किसी - किसी पंखे में केवल तीन तार ही अंदरसे निकाले जाते हैं ऐसे पंखे को हम काॅमन वाले वायर पर रखकर रनिंग और स्टार्टिंग पर बारी - बारी से चेक करने पर दोनो ही परिस्थितियों में बल्ब को जलना ही चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो पंखें में कोई खराबी जरुर है। इसे सही करने के लिए आपको पंखा खोलना ही पड़ेगा। पंखा रिपेयर करने के लिए आप जानकारी जानना चाहते हैं या कोई अन्य सवाल हो तो भी आप हमें कमेंट जरुर करें। 



  पंखा सीधा चल रहा है या उल्टा ऐसे जानें

       बहुत से पंखे एंटीक्लाकवाईज अथवा घड़ी के सुईयों के विपरित चलते हैं पर इसके अलावा कुछ पंखे ऐसे भी होते हैं जो क्लाकवाईज भी चलते हैं। इसलिए थोड़ा सा कन्फ्यूजन तब बनता है जब पंखे की पत्ती पंखे के साथ न हो क्योंकि अगर पत्ती साथ में होगी तो हम यह आसानी से देखकर जान सकते हैं। दरअसल अगर पंखा अच्छा खासा तेज गति से चल रहा है और तब भी हवा न दे रहा हो तो ज्यादा संभावना ( possibility) है कि पंखा उल्टा चल रहा है। या फिर बहुत कम मामलों में यह भी देखा गया है कि पंखें की पत्ती बिल्कुल सीधी हो गई हो किसी कारण से पर ऐसा होने की संभावना बहुत कम ही होती है जबतक कि कोई इसे तोड़ - मरोड़ ना करें तब इस परिस्थिति में पंखा चाहे सीधा चले या फिर उल्टा दोनों ही परिस्थितियों में हवा नहीं दे सकता है पंखा।


अगर हम पंखे की पत्ती को ध्यान से देखेंगे तो हमको यह देखने को मिल जायेगा कि पत्ती कि एक तरफ थोड़ा सा मुड़ा हुआ होगा और दूसरी तरफ बिल्कुल भी नहीं मुड़ा नहीं होता है। बात यह है कि जिस तरफ की पत्ती बिल्कुल भी नहीं मुड़ी न हो उसी तरफ पंखा घूमना चाहिए तभी पंखा हवा देगा और पंखा सीधा चल रहा है। यह कह सकते हैं, तो इस तरह से हम पंखे के सीधा या उल्टा होने की पुष्टि आसानी से कर सकते हैं। 




सावधानियाँ :

  1. सबसे पहले कैपासिटर के दोनों तारों को अच्छी तरह से यह जाँच-परख ले की कहीं पर कटा - छिला तो नहीं है। 
  2. कैपासिटर को बिजली या फेज़ और न्यूट्रल से जोड़ते ही वह पुरी तरह से चार्ज हो जाता है। 
  3. इसे बिना स्पार्क करें न रखें, नहीं तो बाद में गलती से टच होने पर आपको करंट लग सकता है। 
  4. कैपासिटर चाहे कितना ही छोटा क्यों न हो उसे निरावेशित ( डिस्चार्ज ) स्पार्क के द्वारा कर लेना चाहिए।
  5. कैपासिटर को उसपे लिखे वोल्टेज से अधिक वोल्ट पर कभी भी चार्ज नहीं करना चाहिए अन्यथा यह फट सकता है। 
  6. काम करते समय कम से कम चप्पल या जूता पैर में पहनना ही चाहिए। 
  7. पंखें का परिक्षण करने के लिए सीरिज बोर्ड का उपयोग करें। 
  8. सार्टिंग चेक करने के लिए पंखे के सभी तारों को सीरिज के एक तार से तथा दूसरे तार को पंखे की बाॅडी पर बारी बारी से चेक करें। 



ये आर्टिकल आपको कैसा अनुभव कराया क्या आप इससे संबंधित कोई जानकारी चाहते हैं तो अभी कमेंट करें। 
" By : Possibilityplus.in "

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दिशा पता करने के बेस्ट तरीके..

    दु नियाँ के किसी भी कोने में जाओ आप हर जगह पर दिशा पता कर सकते हैं।  हमने यह आर्टिकल उपयोग करने के लिए बनाया है ऊम्मीद है आपके लिए उपयोगी साबित होगा। इस आर्टिकल को अन्त तक जरूर पढिएगा क्योंकि हमने इसमें लगभग सभी संभव तरिके बताएँ हैं जो आपको हर परिस्थितियों में दिशा पता करने के लिए काफी हो सकता है।    दिशा का पता करने से पहले हम दिशा के बारे कुछ अहम / आवश्यक जानकारी देने जा रहें हैं ताकि दिशा पता करना और आसान हो जाये |इसमे सबसे पहले जानतें हैं दिशा क्या है और इसका महत्व क्या है |    दिशा ( Direction  )  एक ऐसा मैप या साधन जो हमें उत्तर - दक्षिण , पूरब - पश्चिम , उपर - निचे और आगे - पीछे  इन सभी को प्रदर्शित करे दिशा कहलाता है | दिशा मुख्यतः चार प्रकार की हैं ( अगर उपर - निचे को छोड़दे तो ) लेकिन इनको अलग - अलग भागो  मैं बाँटे तो ये दश प्रकार की हो जाती  है | अगर हमें इन चारों के बीच की दिशाओं को बताना है तो चित्रानुसार बतायेंगे। जैसे हमें पश्चिम और उत्तर केे बीच की दिशा को बताना है तो हम उत्तर-पश्चिम  कहेेंगे। इसी तरह से बाकि सभी दिशाओं के बारे में हम कहेेंगे। घ

भिन्न का गुणा , भाग , जोड़ और घटना हल करना

ऊपर चित्र में एक वृत्त को तीन बराबर भागों में बाँटा गया है । अगर हम कहें कि इसमें से एक भाग किसी को दे दिया जाये तो कितना भाग बचेगा तो इसका जवाब है,  2/3  भाग जिसे शाब्दिक याा साधारण भाषा में  दो तिहाई   भाग कहेगें । इसी प्रकार ( एक बटा तीन ) 1 / 3 को एक तिहाई  कहेंगे।  चलिए अब जानते हैं इनको जोड़ने, घटाने, गुणा और भाग   करने के तरीीकों के बारे में पुरी जानकारी।                                  भिन्नों का जोड़ , घटाना , गुणा और भाग; इस पोस्ट में आपको सब सीखने को मिलेगा। अगर आपके पास कोई सवाल है भिन्नों को हल करने या किसी भी तरह की भिन्न हो तो हमें निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिखकर भेज दें । भिन्न क्या है ? What is the Fraction ?     भिन्न एक आंशिक भाग होती है जो दो भागों से बनती है - अंश  हर  जैसे -     1 / 3 , जिसमें 1 अंश और 3 हर है । a / b में " a  " अंश और " b  " हर है। आज के दौर में बहुत - से लोग ऐसे हैं जो पढ़ - लिखकर भी भिन्न हल करना नहीं जानते हैं । इस कमी का आभास उन्हें तब होता है जब वो कोई काम करने लगते हैं और काम या कार्य मे

भाग कैसे करें ? How divide any number

भाग ( Division )         भाग क्या है , यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है, गणित में भाग का बड़ा योगदान है  । इसके बिना गणित की क्रिया करने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है दरअसल भाग गणित की आधारभूत क्रियाओं में से एक । गणित की चार आधारभूत क्रियाएँ :   जोड़ ( Additions, Conjunction )  घटना ( Diminis,  Substract )  गुणा ( Multiplication, Multiplying  )  भाग ( Division ,  Quotient)     भा ग सीखना उतना ही कठिन होता है जितना ही हम इस पर ध्यान नहीं देते। दोस्तों भाग ही नहीं बल्कि कोई भी काम सीखना, समझना या पाना हमारे मन पर ज़्यादा निर्भर करता। अगर हम कोई भी काम पूरे मन से करें तो हमें सफल होने की संभावना ( possibility ) उतनी ही ज्यादा होती है।एक बात और है मन हमारी बात तभी सुनता है जब इसे किसी काम के को करने में अच्छा या महत्वपूर्ण लगे या फिर आवश्यकता पड़ी हो।  मन की सबसे बड़ी कमजोरी है उसकी लालच जो अच्छी या बुरी दोनों तरह की होती है। हमें इसी का फायदा उठाकर अपने काम को अंजाम देना चाहिए।  मन और मस्तिष्क की जानकारी   यहाँ पढ़ सकते हैं।             भाग कैसे सीखें?
Disclaimer | Privacy Policy | About | Contact | Sitemap | Back To Top ↑
© 2017-2020. Possibilityplus