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भिन्न भार की वस्तुएँ एक ही समय में धरती पर गिरती हैं क्यों ?

       हैलो दोस्तों आप सभी को मैं एक ऐसी जानकारी देने जा रहा हूँ जिसके बारे में शायद आपने सोचा हो और आपको इसका जवाब न मिला हो। क्या आपने यह  कभी सोचा य देखा है कि दो या दो से अधिक वस्तुएँ जिनका भार या वजन अलग - अलग होता है फिर भी अगर उन्हें धरती पर एक साथ गिराया जाये तो ये वस्तुएँ धरती ( earth ) पर एक साथ  और एक समय में  गिरती हैं ना कि अलग -  अलग समय में। दोस्तों दुनिया में कोई भी चीज हो उसके वैसे होने में कुछ न कुछ कारण जरूर होता है। चूँकि अगर प्रश्न है तो उसका उत्तर भी होना चाहिए या होता है । इसलिए इस प्रश्न का भी उत्तर है और बहुत महत्वपूर्ण और जानकारीपूरक है। अगर आप विद्यार्थी हैं तो आपके लिए बहुत ही अच्छी और इन्ट्रेस्टिंग ( intresting ) जानकारी है। चलिए जानते हैं इसके बारे में। 




 विभिन्न भार की वस्तुओं को एक -  साथ गिराने पर यह एक - साथ धरती पर क्यों गिरती हैं ? 

    आप सभी ने शायद यह देखा होगा कि विभिन्न भार वाली वस्तुओं को अगर एक साथ धरती ( पृथ्वी ) पर गिराया जाये तो भी दोनों वस्तुओं के ( धरती पर )  गिरने का समय एक ही होगा। आखिर ऐसा क्यों होता है, और शायद  बहुत से लोग यह भी कहेगें कि यह गलत है यह तो हो ही नहीं सकता कि अलग -  अलग वजन की  वस्तुओं को  एक साथ गिराया जाये  ( धरती पर ) और वो धरती पर एक साथ गिरे। उनको  तो यह लगता है कि ज्यादा भार वाली वस्तुएँ ही पहले गिरेगीं। पर ऐसा नहीं है और एक बात पहले मुझे भी यही लगता था कि ज्यादा भार / वजन वाली वस्तुएँ ( धरती पर ) पहले गिरेगीं क्योंकि उनका वजन ज्यादा होता है। दरअसल हमारी धरती यानी पृथ्वी इतनी बड़ी है  ( भार और  क्षेत्रफल में ) की इसके आगे यह वजन या भार लगभग नगण्य है। यह विज्ञान द्धारा सिद्ध किया गया है। अगर आपको मेरी बात पर नहीं है तो आप एक काम किजिये। आप कोई भी दो वस्तुओं ( जिनका वजन या भार अलग -  अलग हो ) को लेकर समान ऊँचाई से दोनों को एकसाथ छोडो़ और फिर देखो क्या होता है। आप वस्तुओं के भार में ज्यादा अन्तर रख सकते हैं तब भी उत्तर वही आयेगा। 


    क्या है इसका वैज्ञानिक कारण । 

  जैसा कि हम सस जानते हैं कि हर प्रकार के कार्य के होन में कोई ना कोई वैज्ञानिक कारण जरूर होता है। सो इसका भी एक कारण है जो यह बताता है कि यह ऐसा क्यों है। क्या आप जानते हैं कि पृथ्वी का भार और क्षेत्रफल कितना है। चलिए इसको भी जानलेते हैं ।

पृथ्वी का द्रव्यमान  M = 6 × 1024  kg
और           त्रिज्या  R = 6.37 × 106   mater  है। 
पृथ्वी का क्षेत्रफल  A  = 1.274 × 10 14  mater2

(   आगे जारी है......   ) 

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चलो हम पहले जान लें कि जल की बूँदें क्यों या कैसे गोलाकार रूप धारण करती हैं क्योंकि इस कारण में ही इसका जवाब है । जैसे ही जल या कोई तरल पदार्थ जब निचे या ऊपर की तरफ फेंका जाता है तो जल के सबसे ऊपरी हिस्से में गती पहले आती है जिसके कारण वो हिस्सा या भाग पहले बाहर आता है और जैसे ही बाहर आता ( जल का वह भाग जो पहले गती में आता है ) है तो वातावरण के दबाव के कारण ( वो जल का हिस्सा )  जल कई छोटी - छोटी बूदोँ का रूप धारण कर लेता है दरअसल पानी की बूदों पर वातावरण का समान दबाव लगता है जिसके कारण ये गोलाकार रूप धारण करता है और एक कारण यह भी है…
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