सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

April 4, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चित्रों की अहमियत जानकार हैरान.. हो जाओगे / अब बनो वो जो दिल में है, by Possibilityplus

आँखें हमारे दिलोदिमाग का दर्पण (आईना) होती हैं। जब हम कुछ देखते हैं तो उसकी तस्वीर हमारे दिमाग ( मस्तिष्क ) में बनने लगती है और इसके बाद यह तय होता है कि अब दिल पर इसका प्रभाव कैसा होगा ।


जैसी तस्वीर वैसा ही मन या दिल का मिजाज तय होता है। दरअसल आँखें हमारे दिलोदिमाग के लिए इनपुट का काम करती हैं और इसका आउटपुट हमारे दिलोदिमाग में होता है  । इसलिए अगर हम कुछ ऐसी चीजें देखते हैं जो वास्तव में होना लगभग असंभव हो तो भी हमारा दिमाग उसे सही मानता है। 

 उदाहरण :      अगर हम कोई फिल्म ( मूवी ) देखते हैं तो हमें उस फिल्म की कहानी सही लगती है। यही नहीं बल्कि उन सभी के हाव भाव भी हमें बिलकुल सही लगता है। पर हम सब यह जानते हैं कि यह सब बनावटी होता है। 



बनावट की बात हो रही है तो इसके भी कई सवाल उठ सकतें हैं । जैसा कि हम सब जानते हैं कि फिल्में बनावटी होती हैं पर पुरी तरह से बनावटी भी नहीं हो सकता है क्योंकि कुछ सीन्स ऐसे होते हैं जिन्हें करने के लिए अभिनेता / अभिनेत्री को वैसी ही यादें या भाव अपने चेहरे पर लाना पड़ता है। इसके अलावा और भी बहुत कुछ होता है जो बनावटी नहीं हो सकता है। इसके बाद भी जो कहानी…
Disclaimer | Privacy Policy | About | Contact | Sitemap | Back To Top ↑
© 2017-2020. Possibilityplus