Possibilityplus

संभावनाओं का सागर

17 Jun 2019

Level kaise karen / nikale ?


    लेवल ( स्तर )         


    आप सभी का स्वागत है आप के possibilityplus.in  site पर। Level ( स्तर ) का उपयोग कहाँ - कहाँ किया जाता है, लेवल पाईप और पानी की मदत से लेवल कैसे पता करते हैं और पानी का ही  उपयोग क्यों किया जाता है ?



ऐसे जितने भी सवाल हैं सभी पर विचार - विमर्श करेंगे इस पोस्ट में, तो आइये जानते हैं एक - एक करके ।






    लेवल ( स्तर ) क्या है ?

                         किसी भी वस्तु के उपरी भागों के स्तरों की स्थिति में अन्तर और समानता को सरल शब्दों में लेवल कहते हैं। 
एकही वस्तु के विभिन्न स्थानों के स्तरों में अंतर हो सकता है। 
लेवल को हिंदी में स्तर, समस्तर, समतल, एकबराबर  इत्यादि कहते हैं।

 लेवल पता करें, इससे पहले हमें यह जानना परमावश्यक है कि आखिर जल के माध्यम से से ही लेवल क्यों निकालते / पता करते हैं। इसको जानते ही लेवल की जानकारी शीशे की तरह साफ हो जायेगी। 




   जल की विशेषता.. 

                   जल कि विशेषताएँ कुछ इस तरह है :
  • जल अपना तल स्वयं ढूंढ लेता है। 
  • जल का कोई निश्चित आकर नहीं होता है। 



   चुंकि जल / पानी को किसी भी आकार वाले बर्तन में रखने पर भी पानी का तल हर जगह एकसमान हो जाता है। और यह  ( भारत में ) आसानी से मील जाता है तो इन्हीं कारणों के चलते लेवल करने के लिए पानी का उपयोग सबसे अच्छा होता है। 













  लेवल कैसे पता करें ?

                        लेवल पता करने के लिए सबसे पहले हमें प्लास्टिक की बनी पतली, पारदर्शी और समान गोलाकार पाईप चाहिए। यह हार्डवेयर की दुकान पर आसानी से मील जायेगी।


  लेवल पता करने का निर्देश >>

            लेवल पता करने के निर्देश को देखें -
  1. सबसे पहले लेवल पाईप में साफ जल / पानी भरें।
  2. पाइप के अंदर कोई बुलबुला नहीं होना चाहिए।
  3. अब पाईप के दोनों सिरों को एकसाथ कर दोनों का लेवल एक है, यह निश्चित करें। 
  4. उपर्युक्त तीनों चरणों के बाद जिस भी वस्तु का लेवल करना है तो पाईप के दोनों सिरों को अलग - अलग स्थानों पर रोककर देखें और जहां पानी का लेवल हो निशान लगाते जायें।



आपको यह पोस्ट कैसा लगा ? हमें जरूर बताएँ और ऐसे ही जानकारियाँ प्राप्त करने के लिए इस साइट को follow करें। धन्यवाद... 

13 Jun 2019

LKG और UKG का फुल फार्म क्या है ? या LKG और UKG को हिन्दी में क्या कहते हैं ?


  शिक्षा के क्षेत्र में कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हें जानना सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं बल्कि अध्यापक / अध्यापिकाओं के लिए बड़ा अहम है। उन्हीं में से एक है LKG और UKG  का फुल फार्म और हिंदी में इनका अर्थ जानना। इनकी महत्ता आप इसी बात से समज सकते हैं कि  अगर कोई व्यक्ति या छात्र / छात्रा हमसे इसके बारे में जानकारी मांगे तो क्या होगा ?



चलिए जानते हैं :




LKG  का पुरा अर्थ अग्रेंजी में 

 
LKG FULL FORM = LOWER KINDERGARTEN



LKG  का पुरा अर्थ हिंदी में 

निचली बालवाड़ी


LOWER यहां पर निचली कक्षा को दर्शा रहा है और KINDERGARTEN का अर्थ बालवाड़ी से है। UKG का फुल फार्म जाने उससे पहले हमें बालवाड़ी का अर्थ या मतलब जान लेना चाहिए। 




 बालवाड़ी का अर्थ    


जिस तरह से फुलवारी  होती है उसी प्रकार सेे बालवाड़ी होता है। हम सभी को पता है कि फुलवारी में तरह तरह के फुल होतें हैं और उनकी देखभाल की जाती है । जिस प्रकार से फुलवारी में छोटे छोटे पुष्पों की उचित दशा और दिशाा दी जाती है ठीक इसी तरह बालवाड़ी में भी बच्चों  को तौर-तरीकों के  बारे में समझाया और सीखाया जता है। इन दोनों कक्षाओं के बच्चों को कैैसे कलम पकड़ते, कैसे, बैैठते, कैसे बात करते हैं आदि तौर तरीकों को सीखाया जाता है।
 इसलिए बालवाड़ी शब्द का इस्तेमाल इन कक्षाओं के लिए किया जाता है। 







UKG का अर्थ हिंदी और अंग्रेजी में

ऊपरी बालवाड़ी

UKG = UPPER KINDERGARTEN



LKG से बड़ा UKG कक्षा होती है।



आप को यह जानकारी कैसी लगी हमें कमेेन्ट के माध्यम से जरूर बताएँ जिससे हम आपके लिए और अधिक उपयोगी जानकारियाँ ला सके। 
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11 Jun 2019

दूनियांँ में कोई भी वस्तु बिना " अंतर " की नहीं है by 👤 Possibilityplus



          अंतर क्या है ?         



क्या कोई भी वस्तु हर समय एक जैसी रहती है ? 
या कोई वस्तु ऐसी है जिसमें परिवर्तन नहीं होता हो ?
हम सभी यह बात जानते हैं कि समय के साथ हर वस्तुओं में परिवर्तन या अंतर होता रहता है।





 क्या आप किसी भी काम को बार बार एक तरह से कर सकते हैं ? इस बात की गहराई तक अध्ययन किया जाये तो हमें इसका उत्तर मिलेगा नहीं । क्योंकि दुनियाँ में कोई भी क्रिया-कलाप पुरी तरह से समान नहीं हो सकता है। 



      इसका कारण कुछ भी हो पर अन्तर नामक शब्द जरुर आयेगा। जैसे मान लिया आपको किसी शब्द को बोलना है। आप जितनी बार भी बोलेंगे हर बार कोई ना कोई अन्तर जरुर होगा। यह अन्तर वातावरण या किसी अन्य कारण से हो सकता है। अगर आप इसे पता करना चाहते हैं तो अपनी आवाज को रिकार्ड करके इनकी आवृत्ति को देखीए और आवाज 🔉 को भी सुनीए अन्तर मील जायेगा। कभी-कभी यह अन्तर इतना कम होता है कि इसे मापा नहीं जा सकता है। 


इस बात की पुष्टि 1-1 , 2-2, 3-3 इत्यादि संख्याओं के अंतर को देखने होती है। इन्हें भी देखने से यही लगता है कि इनमें कोई अंतर है ही नहीं पर ऐसा असंभव है। 



   कहते हैं कि परिवर्तन प्रकृति का अनिवार्य प्रक्रियाओं में से एक है। अब सोचीए 💭 कि अगर किसी भी वस्तु में परिवर्तन हमेंशा होता है तो इसका मतलब यह है कि उस वस्तु में कुछ न कुछ अंतर हो रहा है तभी तो वह बदल रही है। यहां पर एक बात यह ध्यान देने योग्य है कि परिवर्तन और अंतर दोनों ही बातें एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। कुछ अंतर ऐसे होते हैं कि हम कह ही नहीं सकतें हैं कि उनमें अंतर हो रहा है। इस बात की पुष्टि इस बात से ही हो जाती है कि जब हम किसी पौधे को देखते हैं तो कहेंगे कि इसमें 1 या 2 सेकेंड में कोई परिवर्तन या अंतर नहीं होता होगा। पर सच बात तो यह है कि हर सेकेंड ही नहीं बल्कि हर पल उसमें परिवर्तन होता रहता है 


  अंतर की परिभाषा    


अंतर वह भेद, फर्क या स्थिति है,जो किसी भी वस्तु में अनिवार्यरूप से पाया जाता है।अंतर हर वस्तुओं में अनिवार्यरूप से पाया जाता है फिर चाहे वह एक ही प्रकार की वस्तुएँ ही क्यों ना हो। जैसे कि मान लीजिए कि एक ही सेट की दो मोबाईल 📱 फोन हो पर तब भी इन दोनों के गुणों में असमानता या अंतर जरूर मिलेगा चाहे वह अंतर मामूली ही क्यों ना हो पर होगा जरूर।








अंतर शब्द का उपयोग   



     अंतर शब्द का बहुत बड़ा योगदान है हर क्षेत्र में। लेकिन इसकी जानकारी के अभाव में हम इसका फायदा नहीं ले पाते हैं। पर आप सभी यह ध्यान दें कि यह possibilityplus.in है जिस पर आप वह जानकारियाँ पाते हैं जिसे हर जगह मिलना दुर्लभ है ।
अंतर शब्द की सहायता से हम बहुत बड़े और जटिल कामों में भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर 1-1, 2-2, 3-3 इत्यादि इन सभी में अन्तर होता है। इसका मतलब साफ/स्पष्ट है कि ये 1-1, 2-2, 3-3 इत्यादि देखने में तो बराबर हैं पर व्यवहार में यह नहीं होता है। 
जैसे किसी भी ऊर्जा को पूर्ण रूप से उपयोग में नहीं लाया जा सकता है। 



अंतर के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण 🔎





  • 1-1 = 1×0,  2-2 = 2×0 , 3-3 = 3×0 इत्यादि। 
  • कहने और करने में अंतर 







ऊपर दिए गए उदाहरणों में से पहला बहुत ही आश्चर्यजनक है क्योंकि हम देख रहे हैं कि दोनों संख्याएँ एकही हैं और इनका मान भी बराबर है तो फिर कैसे इनमें कोई अंतर आ गया है ?
यह सवाल आप सभी के मन में ऊफान मार रहा होगा कि यह कैसे हो सकता है ? 
तो आप सबसे पहले यह बात गहराई तक सोचीए की जब भी हम किसी भी वस्तु या बात की तुलना करते हैं तो य कहते हैं कि इन दोनों में कितना अंतर है। मतलब अगर थोड़ा सा ध्यान दें तो हमें सभी विषयों में हर जगह अंतर मील ही जायेगा। इसमें सबसे खास बात यह है कि अंतर शब्द का आना मतलब अंतर अवश्य ही है। कोई भी काम करिए चाहे वह कितना भी सरल क्यों ना  हो पर आप, हम या कोई भी हो पूरी तरह से किसी काम को बीना अंतर के कर सके।

आप सभी का यह भी सवाल हो सकता है कि यार यह क्या है यह कहां की जानकारी है। इसे 1-1 = 1×0,  2-2 = 2×0 इत्यादि को आजतक ना देखा है और ना ही पढ़ा है तो फिर यह कहाँ से आ गया है ?


आगे जारी....

25 May 2019

प्लास्टिक की गिलास 🥛 में खौलते पानी / चाय 🍵 / दूध डालने पर भी गिलास क्यों नहीं गलती ?


आप सभी का स्वागत है इस वैज्ञानिकरुपी सवाल में। हममें से बहुतों के मन में यह सवाल कभी न कभी उठा होगा कि इतने पतले प्लास्टिक की गिलास 🥛 में खौलते हुए दूध / चाय ☕या कोई अन्य द्रव को डालने पर भी यह क्यों नहीं फटती / गलती है। यह हमारे मन में आश्चर्य का भाव पैदा करती है।




 चलिए अब इस जिज्ञासा को शांत करने के लिए इसके उत्तर की तलाश करते हैं विज्ञान की छांव से।





  कारण और खासियत   



         प्लास्टिक के गिलास के ना फटने / घलने का कारण वैज्ञानिक है। 

खासियत
प्लास्टिक की गिलास पतली होने के कारण इसमें चाहे खौलता हुआ पानी , चाय या दूध डाले  यह नहीं फटती / गलती है। 









        कारण ( Reason ) 
                     प्लास्टिक हो या कांच अगर इनकी गिलास हो और इनमें खौलता हुआ दूध, चाय - पानी आदि डालते हैं तो गिलास के अन्दर और बाहर की तली का तापान्तर बहुत ही कम रह जाता है क्योंकि गिलास बहुत पतली होती है। तो तापान्तर ही इसकी खास वजह है और  इसीलिए प्लास्टिक की गिलास को पतली बनायी जााती है जिससे यह गले ना। 
अगर गिलास को मोटी बनाई जाये और इसमें खौलता हुआ पानी / दूध या फिर कोई अन्य तरल पदार्थ डाले तो अधिक तापान्तर के कारण गिलास के अन्दर की तली का तापमान ज्यादा और गिलास के बाहरी तली का तापमान कम होगा। परिणामस्वरूप गिलास के आन्तरिक तली ज्यादा फैलने लगेगी और बाहरी तली कम फैलेगी जिससे गिलास फट जायेगी। इसका एक उदाहरण है कि प्लास्टिक की बहुत ही पतली पन्नी भी नहीं गलती गर्म चाय डालने पर। 





   आप हमें अपनी कीमती राय दें या फिर आपको यह जानकारी कै सी लगी जरूर बताएँ।  

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15 May 2019

नजर, क्यों और कैसे लगती है ?


इस दुनियाँ में ऐसी अनेकों बातें हैं जो विज्ञान के नजरिए से अभी तक पूरी तरह से नहीं समझाया जा सकता है, जैसे : लक्षमण रेखा, सपनों का रहस्य, मनुष्य के मष्तिष्क की क्षमता आदि। इन्हीं में से एक है नज़र का लगना । इस आर्टिकल में हम इसी विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं। 





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    नज़र का लगना यह एक ऐसी बात है जिसे कुुछ लोग तो मानते हैं पर कुछ लोगों का यह कहना है कि ऐसा कुछ नहीं होता है, यह सब अन्धविश्वास है। इन दोनों में से किसी भी नतीजे पर पहुंचे इससे पहले हमें विज्ञान की सहायता से इसकी परख कर लेना चाहिए। क्योंकि विज्ञान ही हम सबके लिए एक ऐसा  जरिया है जो सभी बातों को समझने के काम आता है।





नजर क्यों लगती है ? 

नजर क्यों लगती है यह सवाल हममें से बहुतों मन में आता ही है। हम जानते हैं कि हर सवालों के जवाब विज्ञान के दर्पण में देखने पर मिलता है। दरअसल मानव मस्तिष्क ऐसी अपार क्षमताओं से भरपूर है और यही वजह है कि मनुष्य सभी प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ है। अब बात है कि नजर क्यों लगती है तो यह बात हमारे मन और मिजाज पर निर्भर करता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अगर कोई बुरे मिजाज वाला व्यक्ति है तो वह हर समय बुरा ही हो। दरअसल जैसा हमारा मुड / होता है वैसी ही भावनाओं की तरंग  हमारे शरीर से निकलती है। जिस समय अच्छी और नि:स्वार्थ भावना होती है उस समय हमारी आंखों में सकारात्मक तरंग निकलती है। जिस व्यक्ति हो कोई भी वस्तु पर पड़ती है उसमें सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होने लगता है। और अगर जिस समय नकारात्मक तथा स्वार्थ की भावना मन में संचालित हो रही हो तो हमारी आंखों से नकारात्मक तरंगें निकलने लगती  है। इस तरह की नजर जिस भी व्यक्ति /   वस्तु पर पड़ती है उस पर नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। नजर जितनी ज्यादा नाकाराात्मक होती है इसका प्रभााव उतना ही गहरा होता है। 

 


    नज़र कैसे लगती है ?

    नज़र कैसे लगती है इसको समझने के लिए विज्ञान में तमाम ऐसे उदाहरण मौजूद हैं जो काफी हद तक इसकी व्याख्या कर देगा। चलिए देखते हैं इन उदाहरणों को -





  रिमोट

         रिमोट कंट्रोल का काम आंखों या नजर जैसे ही होता है। रिमोट पर अलग - अलग फ्रिक्वेंसी की बटन या स्वीचें होती हैं।



 इछानुसार हम स्वीच का इस्तेमाल करते हैं और स्क्रीन पर उसका परिणाम भी सामने होते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह फ्रिक्वेंसी हमें दिखाई नहीं देती हैं और शायद यही वह मुख्य वजह भी हो सकती है जो बहुत लोगों को नजर लगने वाली बात पर विश्वास नहीं होता है। बिल्कुल इसी तरह से हमारे शरीर में ऐसे सिस्टम हैं जो अनगिनत प्रकार की फ्रिक्वेंसीज आंखों के जरिए से निकाल सकती है।









आगे जारी.... 

3 Apr 2019

चित्रों की अहमियत जानकार हैरान.. हो जाओगे / अब बनो वो जो दिल में है, by Possibilityplus






आँखें हमारे दिलोदिमाग का दर्पण (आईना) होती हैं। जब हम कुछ देखते हैं तो उसकी तस्वीर हमारे दिमाग ( मस्तिष्क ) में बनने लगती है और इसके बाद यह तय होता है कि अब दिल पर इसका प्रभाव कैसा होगा ।


जैसी तस्वीर वैसा ही मन या दिल का मिजाज तय होता है। दरअसल आँखें हमारे दिलोदिमाग के लिए इनपुट का काम करती हैं और इसका आउटपुट हमारे दिलोदिमाग में होता है  । इसलिए अगर हम कुछ ऐसी चीजें देखते हैं जो वास्तव में होना लगभग असंभव हो तो भी हमारा दिमाग उसे सही मानता है। 

   उदाहरण :      अगर हम कोई फिल्म ( मूवी ) देखते हैं तो हमें उस फिल्म की कहानी सही लगती है। यही नहीं बल्कि उन सभी के हाव भाव भी हमें बिलकुल सही लगता है। पर हम सब यह जानते हैं कि यह सब बनावटी होता है। 



बनावट की बात हो रही है तो इसके भी कई सवाल उठ सकतें हैं । जैसा कि हम सब जानते हैं कि फिल्में बनावटी होती हैं पर पुरी तरह से बनावटी भी नहीं हो सकता है क्योंकि कुछ सीन्स ऐसे होते हैं जिन्हें करने के लिए अभिनेता / अभिनेत्री को वैसी ही यादें या भाव अपने चेहरे पर लाना पड़ता है। इसके अलावा और भी बहुत कुछ होता है जो बनावटी नहीं हो सकता है। इसके बाद भी जो कहानी होती है वो ज्यादातर काल्पनिक ही होती है । लेकिन बहुत सारी ऐसी भी फिल्में भी हैं जो हकीकत कहानियों पर बनायी गयी या बनायी जाती हैं। 






   भावना   (  Feeling  )              



 ये 😁😀😂😊☺️😌 तस्वीरें देखते ही हमारे मन में हास्य ( हँसी ) का भाव उत्पन्न होने लगता है । ये उपर्युक्त सभी चित्र हम सभी के भाव या भावनाएँ हैं जिन्हें चित्ररूप दिया गया है और इसीलिए हमारा कैसा भी मूड ( मिजाज) हो हमें इन तस्वीरों को देखते ही हँसी का अहसास होने लगता है ।
हम सभी लोग अपने भावों को मुख्यरूप से तीन तरह से व्यक्त करते हैं :

  1. चित्र द्वारा 
  2. अपने चेहरे पर भाव लाकर 
  3. बोलकर 









नोट : इस साइट्स से जुड़ने के लिए इस     साइट्स को follow करिए। धन्यवाद...    




 अब शायद आपको यह लगे कि इसमें  क्या खास बात है, यह तो हमें भी पता है । तो आपको बता दें कि आपको ऐसी जानकारी मिलने जा रही है जो आपको या हम सबको अपने मूड/मिजाज/मन/दिल को जब चाहे तब अपने मुताबिक बनाया जा सकता।  अगर आपको इसका उदाहरण चाहिए तो चलिए देखिए :
हम अगर किसी बीमार व्यक्ति से मिलते हैं तो हमारा मन / मूड उसकी दशा और बातें सुनकर उदासी 😟☹️🙁😞😕 के भाव प्रदर्शित करने लगता  । और दूसरी तरफ अगर वही बीमार व्यक्ति हँसी की मजाक की बातें करता है तो हमारा मूड / मन इस दु:ख ( sad ) वाले मुड को छोड़कर हँसी वाला मुड ही पसन्द करेगा। इसके दो कारण हैं :

1. किसी भी व्यक्ति को दु:खी होना पसंद नहीं है। 
2. हँसी का भाव हमारे चेहरे पर बहुत ही सरलता से बनता है क्योंकि इसको बनने में कम ऊर्जा लगती है, जबकि दु:ख वाला भाव प्रकट करने में ज्यादा ऊर्जा लगती है। 


चलिए अब हम इसकी यानी तस्वीरों की विशेषताएँ या गुणों को जानते हैं जिनकी मदद से हम सभी जो चाहे बन सकते हैं ।
इनकी विशेषताएँ कुछ इस प्रकार है  - - -

  1. हम जो महसूस करते हैं उसे हम आकर्षित करते हैं । 
  2. जब चाहे तब अपना मूड ठीक कर सकते हैं।
  3. अगर आप बुध्दिमान बनना चाहते हैं तो इस कौन्सेप्ट ( विचारधारा ) से आसानी से बन सकते हैं ।
  4. जैसा बनना है वैसी ही तस्वीरें देखिए, बनने में मदद मिलेगी।
  5. अपनी ईच्छाओं को तस्वीररूप में वास्तविक दुनियाँ में किसी पेपर या कागज पर अंकित करिए ।
  6. जो ईच्छा तस्वीर रूप में दिलोदिमाग को सन्तुष्ट करेगी उसी में सफलता आसानी से हासिल होती है।




   उपर्युक्त गुणों का इस्तेमाल हम सभी जाने - अंजाने में कभी ना कभी जरूर करते हैं पर इनके महत्व के बारे में नहीं जानते हैं । जैसे अगर हमारा मूड खराब हो तो हम कोई गेम  ( खेल), विडियो, म्यूज़िक, कोई मजेदार चित्र , मोटिवेशनल बातें या कुछ और करते हैं जिससे कि हमें ऊर्जा मिल सके। 
अब हम ऊपर दिए गए गुणों के संदर्भ को विस्तार से समझेंगे । 

22 Mar 2019

अक्षरों को काले रंग में लिखने की मुख्य वजह क्या है ? By - Possibilityplus.in

क्षरों को काले रंग में ही

 क्यों लिखा जाता है   ?




क्या आप जानते हैं कि किताबों में अक्षरों को काले रंग में ही क्यों लिखा जाता है । अगर आपके मन में ये सवाल ऊठा है और शायद आपके इस सवाल का समाधान पहले नहीं मिला होगा । जैसा कि हम बार - बार यह कहते कि हर वस्तु के रंग रूप , आकार या प्रकार के होने की कुछ विशेष वजह होती है । चलिए इसकी विशेष वजह और वैज्ञानिक कारण क्या है जानते हैं -
 सभी रंगों में काले रंग की प्रकाश को परावर्तित करने की प्रवृत्ति सबसे कम होती है । इसलिए आँखों पर सबसे तेज गति से काले रंग की किसी भी वस्तु का प्रतिबिम्ब बनाता है । आँखों पर बहुत कम भार पड़ता है । सफेद रंग की किसी भी वस्तु पर अगर हम कुछ भी तस्वीर, शब्द लिख दिया जाए तो वह स्पष्ट दिखाई देने लगता है  ।


इसके अलावा बहुत सारे ऐसे गुण हैं काले रंग जो निम्नलिखित :


  • काली वस्तु या शब्द आँखों पर सबसे कम तनाव पैदा करता है ।
  • काले रंग की वस्तुओं या अक्षरों को अधिक दूर से स्पष्ट देखा जा सकता है।
  • काला रंग हमारी आँखों और दिमाग को आरामदायक वाला अहसास देता है  । 
  • काली वस्तु या अंधकार अथवा आँखें बंद करने पर हमें सर दर्द, आँखों में दर्द, आँखों में पानी की कमी को पुरा आदि परेशानियों से बचने में मदद मिलती है ।

  नोट : 

काले रंग के और विशेष गुणों को जानने के लिए हमें follow और comment करें , जिससे हम आपके लिए और भी बेहतर जानकारियाँ उपलब्ध करा पायें । 





उपर्युक्त सभी बातों यानी काले रंग के गुणों को ध्यान में रखते हुए अक्षरों को काले में लिखा जाता है। उम्मीद है यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी। अगर आप ऐसी उपयोगी और रोचक जानकारियों को पाना चाहते हैं तो आप इस साईट www.possibilityplus.in  को follow  करें
धन्यवाद !


8 Mar 2019

जन्मतिथि कैसे पता करें ? जन्मतिथि निकालने के कारगर तरिके।


दुनियाँ में बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें खुद की असली जन्मतिथि नहीं पता है। इनमें से बहुत लोग इसका जिक्र नहीं करते हैं क्योंकि ये लोग यह सोचते हैं कि क्या हुआ जो हमें अपनी असली या वास्तविक जन्मतिथि नहीं पता । पर जो लोग जानना चाहते हैं वो  क्या करें।


 दरअसल मुझे भी अपनी वास्तविक जन्मतिथि नहीं पता थी पर मैने यही तरिके आदमाए और आज मैं अपनी सही जन्मतिथि जानता हूँ। अगर आप निचे दिए गए किसी भी विकल्प को हासिल कर लेते हैं तो आप जन्मतिथि पता करने में सक्षम हो जायेंगे। 




 क्या है ये तरिके चलिए जानते हैं।
  1. जिस दिनांक को आप पैदा हुए थे पता करिए कि उसी दिनांक या उसके ठीक आगे पिछे आपके गाँव / मोहल्ले / दूर के रिश्तेदार या कोई और पैदा हुआ होगा। उसकी जन्मतिथि से आपकी भी जन्मतिथि बहुत ही आसानी से निकल जायेगी। 
  2. यह पता करें कि जिस दिनांक को आप पैदा हुए हैं उस दिनांक को कोई भी छोटी - बड़ी घटना जो समाचार का हिस्सा बनी हो । 
  3.  यह पता करें कि जिस दिनांक को आप पैदा हुए हैं उस दिनांक के थोड़ा आगे पिछे कोई ऐसी कोई व्रत , त्यौहार आदि पड़ा हो और किसी को याद हो, ( व्रत और त्यौहार हर साल अलग - अलग तिथि को पढ़ते हैं )  ।
  4. यह पता करें कि जिस दिनांक को आप पैदा हुए हैं ठीक उसी दिनांक या उसके आगे - पिछे आपके घर / गाँव /मोहल्ले / रिश्तेदारों या किसी अन्य व्यक्ति विशेष के घर कुछ ऐसा कार्य जैसे : किसी का शादी - विवाह हुआ हो, कोई कारोबार प्रारम हुआ हो, किसी की नौकरी लगी हो, इत्यादि। 



इस तरह का कोई भी काम जो हुआ हो और ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि ऐसा कोई काम न हुआ हो। बस आपको यही पता करना होगा और कुछ नहीं। ऐसे काम जिसमें दिनांक का जिक्र होता है, जैसे : विवाह, कोई जायदाद किसी के नाम हुई हो, कोई ऐसी घटना जिसका जिक्र समाचार में आया हो। इन सभी के अलावा बहुत से काम हैं जिनमें दिनांक का जिक्र आता है। इसलिए बस ऐसी ही कोई जानकारी पता करिए, आपकी जन्मतिथि पता हो जायेगी। 




अगर कोई मदद या सुझाव या फिर इससे संबंधित कोई सवाल या गणित और विज्ञान से जुड़ी हो तो निचे दिए गए हैं कमेंट बॉक्स में लिखकर कमेंट जरूर करें।
° अगर आप हमें ईमेल करना चाहते हैं तो हमारा Email id : dkc4455@gmail.com है । 
धन्यवाद ! 


26 Feb 2019

वस्तुओं के गोल होने का सबसे बड़ा वैज्ञानिक कारण..




 हमारे चारों तरफ बहुत सारी गोल आकार की वस्तुएँ हैं पर क्या हमें इसके बारे में जानकारी है कि आखिर वस्तुएँ क्यों गोल होती हैं। जैसे : गेंद, पानी की बूँदें, वाहनों के पहिये, पृथ्वी, चन्द्रमा, सूर्य आदि ग्रहों की आकृति गोलाकार  क्यों है ?  वस्तुओं के गोल होने की कई वजह हो सकती हैं पर एक वजह ऐसी है जो लगभग हर वस्तुओं के गोल होने की मुख्य वजह है और वह   है  संतुलन का होना  । भला संतुलन और गोलाकार में क्या सम्बन्ध है। चलिए समझते हैं निम्नलिखित उदाहरणों से -
किसी भी वस्तु के क्षेत्रफल ,उसपे लगने वाला दाब और लगने वाले बल में सम्बन्ध : 

दाब = बल / क्षेत्रफल        या    P = F / A

इस सूत्र से स्पष्ट है कि अगर किसी वस्तु पर लगने वाला बल अधिक है या यदि क्षेत्रफल कम है तो दबाव अधिक होगा । चलिए इसके कुछ उदाहरण देखते हैं ।






  जल के अन्दर या जल के ऊपर बनने वाला    बुलबुला अर्धगोलाकार होता है..  


इसको जानने से पहले हमें यह पता होना चाहिए कि आखिर जल में बुलबुला क्यों बनाता है। जल में किसी कारणवश वायु अथवा गैस जब उत्पन्न होती है तो यह वायु अथवा गैस ( चूँकि वायु अथवा गैस जल से हल्की होती है  , इसलिए यह  ) ऊपर उठने लगती है।
 दरअसल जब वायु अथवा गैस ऊपर उठती है तो जल में बहुत बारीक - बारीक परते होती हैं जो गैस या वायु को रोकने का काम करने लगती हैं। इसलिए यही परतें बुलबुलाें का निर्माण करने लगती हैं ।
अब सवाल यह है कि यह ( बुलबुला ) अर्धगोलाकार रूप ही क्यों लेता है ।  चूँकि पानी हर जगह पर 360°  पर समान दबाव लगाता है इसलिए जब गैस अथवा वायु निचे से ऊपर की तरफ दबाव बनाकर पानी से बाहर निकलती है तो इस पर भी पानी 360° पर यानी चारों तरफ से समान दबाव लगाता है । इसी वजह से बुलबुलाें के निचे वाला हिस्सा खुला होता है और बुलबुले के ऊपरी हिस्से पर परत होने से बन्द होता है, इसलिए बुलबुला अर्धगोलाकार होता है । चूँकि हर प्रकार के आकारों से गोलाकार सबसे कम क्षेत्रफल वाला होता है, तभी तो बुलबुले को पानी से निकलने के लिए ज्यादा बल और दबाव मिलता है ( P = F/A ) और इसी वजह से बुलबुला पानी के बाहर आसानी से आ जाता है । बुलबुले का आकार पानी के दबाव पर निर्भर करता है। अगर बुलबुला पानी के बहुत निचे या अधिक गहराई पर बनता है तो बुलबुला छोटा होगा क्योंकि जितनी ही ज्यादा गहराई उतना ही ज्यादा दबाव होता है और इसी लिए बुलबुला कम गहराई में बड़ा और ज्यादा गहराई में छोटा होता है ।






           मौत के कुँए की आकृति  


मेले में जो मौत के कुँए होते हैं वो भी गोलाकार होते हैं । दरअसल गोलाकृति से करतब दिखाने वाले को चारों ओर से समान दबाव मिलता है और गती भी संतुलित होती है । अगर मौत का कुँआ गोल ना होकर थोड़ा सा  दबा या उभरा हुआ है तो करतब दिखाने वाले को बहुत परेशानी होगी क्योंकि गाड़ी की गती बहुत तेजी से कम या ज्यादा होने लगेगी जिससे सन्तुलन बिगड़ जायेगा और दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जायेगी ।



बाॅलीबाल, फुटबॉल या क्रिकेट की गेंद का आकार .. 

बाॅलीबाल, फुटबॉल हो या क्रिकेट की गेंद अगर गोल ना हो तो क्या होगा ?
अगर बाॅलीबाल, फुटबॉल हो या क्रिकेट की गेंद गोल ना होकर थोड़ा चपटा, चौकोर, तिनकोने या किसी अन्य आकार की हो तो निम्नलिखित बातें होंगी -

  • बाॅलीबाल, फुटबॉल हो या क्रिकेट की गेंद को जिस भी दिशा में फेंकेंगे वह उस दिशा में नहीं जायेगी ।  
  • यह अनिश्चितरूप से हवा में मुडे़गी। 
  • हवा का प्रभाव ( घर्षण  ) बहुत अधिक होगा। 



बाॅलीबाल, फुटबॉल हो या क्रिकेट की गेंद की तरह ही पृथ्वी, चन्द्रमा , सूर्य आदि ग्रहों का आकार भी गोल होता है और जैसे बाॅलीबाल, फुटबॉल हो या क्रिकेट की गेंद का सन्तुलन बिगड़ जाता है ।  अगर इनकी आकृति गोल से थोड़ी भी विकृत ( तेड़ी - मेड़ी ) हो जाये ।

गोलाकार आकृति के निम्नलिखित गुण :
  1. गोलाकार दबाव के लिए सबसे ज्यादा सक्षम होता है। 
  2. गोल आकार की वस्तुओं पर घर्षण बल सबसे कम लगता है। 
  3. गोलाकृति का क्षेत्रफल सभी आकृतियों से कम होता है। 
  4. वातावरणीय दबाव के लिए गोल आकार उपयुक्त होता है। 


  गोल आकृति के उपयोग  


वाहनों के टायर की आकृति 

वाहनों के टायर की आकृति गोलाकार होती है जिससे वाहनों की गति का स्थायित्व बन सके। यदि यह गोल ना होकर थोड़ा सा भी उभार हो जाये तो वाहन की गति असंतुलित हो जायेगी। परिणामस्वरूप सड़कों और वाहनों की  स्थिति खराब हो जायेगी। इसके अलावा दूर्घटना की संभावना भी बढ़ जाती है ।







गति करने वाली वस्तुओं की आकृति गोल होती है या गोल रखा जाता है ... 

गति करने वाली वस्तुएं जैसे : सूर्य, पृथ्वी, चन्द्रमा आदि गोल आकार में होती हैं  । क्योंकि यही वह आकार है जिसपर वातावरणीय घर्षण बहुत कम लगता है और सन्तुलित गति मिलती है ।  ईंजन का फ्लाईह्वील ( चक्का ) भी गोल और भारी होता है जिससे सन्तुलित गति मिलती है ।

इन सभी उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि गोलाकार ही सबसे परफैक्ट आकार  है।




आगे 📝 शेष है .. 

1 Feb 2019

संभव और असंभव की सबसे सटीक जानकारी || by : Possibilityplus.in



   संभव और असंभव    


विश्व की हर चीज में ये दोनों शब्द संभव और असंभव आते ही हैं बल्कि यूँ कहा जाये कि इनका होना अनिवार्य है तो बिल्कुल सटीक होगा। दरअसल दुनियाँ में हर वस्तु के दो पहलू होते हैं जिसे नजरिया भी कहते हैं निचे दिए गए चित्र को देखिये -


इस चित्र से स्पष्ट है कि बायें वाले की तरफ से यह अंक 9 है जबकि दायें वाले की तरफ से देखने पर यह 6 दिख रहा है। अब आप ही सोचिए किधर से यह सही है और किधर से गलत । बायें तरफ से  संख्या 9 ही संभव है और दायें तरफ से 6 संभव है । इस चित्र से यह साफ - साफ पता चलता है कि अगर दायाँ वाला लड़का बाँये वाले की तरफ आ जाये तो उसे भी यह 6 नहीं बल्कि 9 ही दिखाई देने लगेगा या फिर बायाँ वाला लड़का दायीं तरफ चला जाये तो इसे अब के स्थान पर 6 ही दिखाई देने लगेगा।



इसी तरह किसी काम को करना किसी के लिए असंभव है तो किसी दूसरे के लिए संभव भी हो सकता है क्योंकि दूसरा परसन दूसरी तरफ से या दूसरे नजरिए से उस काम को देखता है। इसी तरह से अगर तीसरा और चौथा परसन से उसी काम को करने को कहा जाये तो इनके नजरिए से यह काम कुछ और भी हो सकता है । इस प्रकार कोई भी काम हर परसन के लिए समान नहीं हो सकता है। जिसके लिए संभव है तो वह संभव कहेगा और जिसके लिए वही काम असंभव है तो असंभव कहेगा। यहाँ पर एक बहुत ही बड़ी सीख हमें मिल रही है और वह यह कि अगर हम किसी काम को करने जा रहे हैं और किसी भी व्यक्ति या परसन से यह सवाल या उस काम के बारें में कुछ पूछते हैं और वह जो भी कुछ बतायेगा है वह अपने प्वाइंट आफ व्यू  से ही बताएगा । इसका मतलब यह नहीं है कि आप के लिए भी वही बात लागू होगी जो उसके लिए है। हो सकता है कि आप उसी काम को दूसरे नजरिए से देख रहे हैं हो । उदाहरण के लिए जैसे किसी व्यक्ति ने किसी दूसरे परसन से यह पूछता हैं कि तुम 400 मीटर चौड़ी नदी क्यों नहीं पार कर पाये तो वह अपनी कमजोरी को ऐसे थौपने की कोशिश करेगा कि जैसे वह कमजोरी आप सभी की ही हो। संभव है कि वह आपको सभी को भी यह कह देगा यार कोई भी वह 400 मीटर चौड़ी नदी नहीं पार कर सकता है  ।   लेकिन यह तो केवल उसके लिए सत्य है और बाकीयों के लिए अलग है या अलग हो सकता है । क्योंकि बहुत से लोग ऐसे हैं कि जो यह बहुत ही आसानी से कर सकते हैं।

चलिए अब जानते हैं कि किसी भी काम को जो  लगभग पूर्ण रूप से असंभव है जिसे साधारण भाषा में केवल असंभव ही कह दिया जाता है  ।  
कौन - सा कार्य संभव है और कौन असंभव यह बात हममें से अधिकांश लोगों को नहीं पता होता है। लेकिन आज इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको यह पता चल जायेगा कि कोई भी कार्य पूर्णतः असंभव नहीं होता है और ना ही पूर्णतः संभव।
कैसे और क्यों यह सवाल आपको घेर रहे होंगे तो चलिए विस्तार से जानकारी लेते हैं।

दुनियाँ का कोई भी काम संभव और असंभव करने के आधार पर तय होता है। यह कहा जाता है कि कोई भी व्यक्ति मरने के बाद जिन्दा नहीं हो सकता है या साधारण शब्दों में यह कहें कि मरकर जिन्दा होना असंभव है पर दुनियाँ में ऐसे बहुत से लोग हैं जो मरकर भी दोबारा जिन्दा हो गये हैं। यह बात और है कि ऐसा लगभग लाखों और करोड़ों या फिर अरबों में से किसी एक के साथ ऐसा होता है मगर इसका मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति मरकर जिन्दा नहीं हो सकता है।



आज से दो सौ साल पहले कोई व्यक्ति या वैज्ञानिक अगर ऐसा कहा होगा कि भविष्य में मनुष्य एक ही स्थान से दुनियाँ के हर कोने में बात कर सकेगा तो इस कथन को बहुत से लोग यह कहकर नकार दिए होंगे कि यह बिल्कुल असंभव है क्योंकि बिना किसी तार से वो भी दुनियाँ के किसी भी कोने में बात करना बेआधार है। यह बात उस समय के लिए असंभव ही थी क्योंकि उस समय विज्ञान इतना तेज नहीं था। ठीक इसी तरह अगर आज हम यह कहें कि शायद भविष्य में लकड़ी की राख से दोबारा लकड़ी बनायी जा सके तो आज के समय में इस बात पर भी मजाक बनाया जा सकता है क्योंकि हमारा विज्ञान इतना सक्षम नहीं हुआ है कि लकड़ी की राख से दोबारा लकड़ी प्राप्त किया जाये। मोबाईल फोन से बात करना , हवाई सफर करना आदि यह भी किसी जादू की तरह है। मगर यह भी एक विज्ञान की ही देन है ना कि कोई जादू । अगर जादू की बात करें तो यह भी विज्ञान का विशेष ज्ञान है जो बहुत कम ही समझ में आता है। अक्सर हमें या लोगों को जो चीजें कुछ समझ में नहीं आता है तो उसे जादू कह देते हैं,  और जब उसी चीज के बारे में जानकारी हो जाती है तब सामान्य सी घटना लगने लगती है।

आगे 📝 जारी है..


20 Jan 2019

भिन्न या दशमलव वाली संख्याओं का ल.स और म.स पता करना। ल.स और म.स का Two in one.


 भिन्न का ल.स. और म.स. 



       भिन्न हो या दशमलव वाली संख्या हो दोनों का ही ल.स. ( लघुत्तम समापवर्त्य  ) और  म.स. ( महत्तम समापवर्तक ) हम जानेंगे और सीखेंगे। यानी ल.स.और म.स. का टू इन वन है। भिन्नों का ल.स.और म.स. ज्ञात करने का सूत्र ः



चलिए कुछ भिन्नों का ल.स.और म.स. निकालकर देखते हैं :

उदाहरण :  4 / 5, और 3 / 7 का ल.स. और म.स. ज्ञात करो।

 हल :     4 / 5, और 3 / 7 का ल.स.
              = अंश का ल.स. / हर का म.स.
     या      = 4 और 3 का ल.स. / 5 और 7 का म.स.
     या      = 12 / 1

 अतः 4 / 5 और 3 / 7 ल.स. = 12,   -Answer


 4 / 5, और 3 / 7 का म.स.
            = अंश का म.स. / हर का ल.स. या
या        = 1 / 35
अतः 4 / 5 और 3 / 7 म.स. = 1 / 35


  अगर हमें भिन्नों का ल.स.और म.स. बिना सूत्र यानी कि अगर हमें ऊपर दिया गया सूत्र किसी कारणवश नहीं पता हो या फिर न याद हो तो हम भिन्नों का ल.स.और म.स. कैसे ज्ञात करेंगे। हम आपको यह बता दें कि हमारा यही प्रयास रहता है कि आप सीर्फ पढ़ें नहीं बल्कि सीखें  , समझे और आगे बढ़े इसलिए हम आपके लिए यह जानकारी दे रहे हैं ।
चलिए अब हम  4 / 5, और 3 / 7 का ल.स. और म.स. बिना भिन्न वाले सूत्र लगायें ज्ञात करते हैं । इसके लिए हमको इन दोनों भिन्नों को खंडित करना होगा। भिन्नों को तोड़ना या खंडित करने के लिए हमें हर वाले मान को समाप्त करना होगा। हर वाले मान को दो प्रकार से हटाया या समाप्त किया जा सकता :

  1. भिन्न को दशमलव में बदलकर ।
  2. किसी संख्या से अंश में गुणा करें और जो ल. स. और म.स. मिला है उसमें में उसी संख्या से भाग कर दें जिससे पहले गुणा किया गया था । बहुत ही आसानी से काम हो जायेगा।

चलिए उदाहरण की सहायता से समझते हैं। 
  उदाहरण :    भिन्नों 4 / 5, और 3 / 7 का ल.स. और म.स. बिना भिन्न वाले सूत्र लगायें ज्ञात करने के लिए हम सबसे पहले दोनों भिन्नों के हर का ल.स. निकालना होगा या फिर ऐसी संख्या का गुणा करें दोनों भिन्नों कि हर वाला मान हट जाये । 5 और 7 का ल.स. = 35 होगा। इसलिए 4 / 5, और 3 / 7 में 35 का गुणा करने पर, 
      ( 4 / 5 ) × 35  =  4 × 7 
                            = 28
और ( 3 / 7 ) × 35 = 3 × 5
                            = 15

 अब 28 और 15 का म.स.और ल.स. आसानी से पता कर सकते हैं।
28 = 1 × 2 × 2 × 7  और
15 = 1 × 3 × 5

दोनों गुणनखंडो में सिर्फ एक ( 1 ) मिल रहा है। इसलिए 28 और 15 का म.स. = 1   होगा। चुँकि हमने भिन्नों को तोड़ने के लिए 35 से गुणा किया था , इसलिए हमें 35 से भाग करनी पड़ेगी । भाग करने पर, 1 / 35  होगा। अतः भिन्न  4 / 5, और 3 / 7 का म.स. = 1 / 35 


अब 28 और 15 का ल.स. = 28 × 15 = 420. 
चुँकि हमने 28 और 15 प्राप्त किया है भिन्नों  4 / 5, और 3 / 7 में 35 का गुणा करने पर  । इसलिए अब हमें 35 से 420 में भाग करनी पड़ेगी। भाग करने पर,
        420 / 35 = 6 × 7 × 10 / 5 × 7
                      = 12
अतः भिन्न 4 / 5, और 3 / 7 का म.स. = 12

आगे 📝  जारी है...  दशमलव का ल.स.और म.स. । 

नोट : भिन्नों को दशमलव में भी बदलकर ल.स.और म.स. निकाला जा सकता है। पर जो भिन्नें पूर्णतः विभाजित होती हैं । उनका ही आसानी से ल.स.और म.स. निकाला जा सकता है  । 

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19 Jan 2019

किसी भी अखबार को पढ़ें अपनी मोबाईल में | Read any newspaper in your mobile.


 अब किसी भी Newspaper को पढ़ें अपनी            मोबाईल में हर समय और हर जगह।      

 आज के दौर में भी बहुत से लोग अखबार ( Newspaper )  पढ़ना चाहते हैं पर किसी कारणवश वह पढ़ नहीं पाते हैं। इसी कमी को पूरा करने करने की कोशिश हमने की जिसके की अखबार  पढ़ने के लिए आपको ना कहीं जाना पडे़ और ना ही इसके लिए आपको कोई पैसे देने पड़े । 

एक app है जिसमें हमें बहुत सारे अखबार ( Newspaper ) पढ़ने को मिल जायेंगे। निचे दिए गए चित्र को देखिए :



इसके अलावा कई Newspaper हैं जो इस app में उपलब्ध हैं । इस एप को करने के लिए इस https://play.google.com/store/apps/details?id=io.cordova.epapers लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद आप    Play Store  पर पहुँच जाओगे । अब निचे दिए गए चित्र वाले एप पर क्लिक करें।


 डाउनलोड होने लगेगा। अब एप को खोंले आपको ऊपर दि गए पेपर्स की लिस्ट दिखाई देगी। उनमें जो चाहे उसपे क्लिक करके पढ़ सकते हैं। Newsपेपर के सभी पेजों को पढ़ने के लिए बैक 🔙 पर क्लिक करें फिर सभी पेजों की संख्याओं का समूह दिखाई देगा । बिल्कुल निचे दिए गए चित्रानुसार






अगर आपके लिए यह जानकारी थोड़ी भी Helpfull लगी हो तो हमें अपनी राय निचे कमेंट करके जरूर बताएँ। अगर आप हमसे जुड़ना चाहते हैं तो हमारी साईटस् को फ्लो कर लिजिए जिससे आपको हमारी पोस्ट सबसे पहले मिल जायेगी। 

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15 Jan 2019

परिक्षा में यह.. गलती मत करना । by : Possibilityplus.in




किसी भी परिक्षा में यह गलती मत करना. 


क्या आपने कभी सोचा है कि बहुत अच्छे खासे पढ़ने वाले छात्रों को भी परिक्षाओं में ज्यादा अंक क्यों नहीं मिलता है। चलिए हम जानते हैं इसके बारे में। चूँकि परिक्षा का समय आ रहा है तो आप सभी के लिए यह बातें जानना बहुत ही जरूरी है ।


आज इस पोस्ट के द्वारा हम परिक्षाओं में ज्यादा अंक कैसे प्राप्त करें । इसके लिए बहुत ही जरूरी जानकारी जानेंगे। परिक्षा में ज्यादा प्राप्तांक  ( Mark )
पाना  हर किसी के लिए आसान नहीं होता है। कुछ छात्र - छात्राओं को ज्यादा पढ़ने के बाद भी ज्यादा अंक नहीं मिल पाता है ।  इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे :

  •  पढाई अच्छी तरह से ना कर पाना। 
  • बिना किसी टाइमिंग और गोल के पढा़ई करना। 
  • रटने वाली पढा़ई ज्यादा और समझने वाली कम करना ।
  • परिक्षा देते समय सबसे पहले बड़े प्रश्नों को हल करने की कोशिश करना,  इत्यादि । 

उपर दी गई बातों को करने से बचें और सही तरीके से से पढ़ाई करें । इसके लिए निचे दिए गए शब्दों को जरूर पढ़ें।


अगर आपने पढ़ाई अच्छे ढ़ंग से किया है तो परिक्षाओं में ज्यादा नम्बर पाने के लिए निम्नलिखित बातें जरूरी है -
  1. सबसे पहले परिक्षा हाल में अपने दिलो - दिमाग को शान्त करें।
  2. सबसे पहले छोटे प्रश्नों के उत्तर देने की कोशिश करें।
  3. जो प्रश्न सबसे सरल हो उसे ही सबसे पहले करना चाहिए  ।
  4. जब कुछ भी समझ ना आये तो कम से कम एक मिनट तक गहरी साँस लें और कुछ भी ना सोचे।
  5. इसके बाद फिर से प्रश्नों का हल करने का प्रयास करना चाहिए। 
  6. परिक्षा देते समय पानी पीना बहुत ही अच्छा होता है। 
  7. बीच - बीच में अपने आप को तरोताज़ा कर लेना चाहिए। 





इस प्रकार परिक्षा में ज्यादा प्राप्तांक प्राप्त किया जा सकता है। चलिए अब हम जानते हैं कि क्यों और कैसे हम ऊपर दिए गए बातों पर भरोसा करें ? तो आपको बता दें कि इस साइट possibilityplus.in पर हम यही कोशिश करते हैं कि आपको जो भी जानकारी मिले वह आपको समझ में आ जाये और तभी आप उस जानकारी को उपयोग में ला सकें। दरअसल एक सर्वे किया गया जिसमें बहुत से छात्र - छात्राओं को शामिल किया गया । इनके दो ग्रुप और B बनाये गये  । इसमें A ग्रुप को यह कहा गया कि तुम लोग परिक्षा देते समय बिच - बिच में पानी पीना, तरोताज़ा होना और लगभग हर 45 मिनट बाद कम से कम 1 मिनट तक सभी चीजों को भूलकर आराम कर लेना । दूसरी तरफ ग्रुप को कुछ भी नहीं कहा गया। जबकि दोनों ग्रुप में शामिल होने वाले छात्रों की योग्यता लगभग समान थी । परिक्षा परिणाम को देखा गया तो यह मिला कि ग्रुप A के छात्रों का प्राप्तांक , ग्रुप B के छात्रों से ज्यादा अच्छा था। 
आखिर ऐसा क्यों चलिए समझते हैं वैज्ञानिक निष्कर्ष  द्वारा। 




  वैज्ञानिक निष्कर्ष   


परिक्षा देते समय जब हमें थोड़ी थकावट महसूस होती है और अगर हम उस दौरान पानी का सेवन करते हैं तो हमारा मन शांत होने लगता है और आराम महसूस होने लगता है। यह बात तो हम सभी जानते हैं कि जब हमारा मन और मस्तिष्क शान्त हो तब हम कोई भी सवाल आसानी से समझ सकते हैं। अब दूसरी बात जब हम परिक्षा देते हैं तो हमें अगर कुछ भी नहीं समझ में आ रहा है तो हमें कुछ सेकंड या मिनटों तक आराम कर लेना चाहिए। इससे जो बेकार की बातें हमारे दिलो - दिमाग में होती हैं वह बहुत हद कम हो जाती हैं और परिणामस्वरूप हमें प्रश्नों को समझने में आसानी होने लगती है। यहाँ पर यह ध्यान देने वाली बात है कि यह बातें सीर्फ परिक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए ही नहीं है बल्कि हर काम में इनका उपयोग किया जा सकता है और किया जाता भी है।

अगर आप खूद यह निष्कर्ष या अन्तर देखना चाहते हैं तो आप कोई भी प्रश्न लेकर उसे पहले टेंशन के साथ हल करें और उसी प्रश्न को आनन्द ( enjoy ) के साथ हल करके देखें आपको बहुत ही अन्तर देखने को मिल जायेगा । अगर कुछ भी समझ में ना आये तो यह सोचते हुए कुछ मिनटों तक सब कुछ भूलकर फ्री हो जायें । अब आराम करने के बाद फिर से सभी प्रश्नों को एक - एक करके दोबारा जांच ( चेक ) करके देखें। ऐसा करने पर कोई ना कोई प्रश्न जरूर समझ में आ जायेगा।


हमें उम्मीद है कि आप सभी को इससे जरूर मदत मिलेगी। आपको यह पोस्ट कैसा लगा इसके बारे में हमें कमेन्ट करके जरूर बताएँ ताकि हम और भी अच्छा कर सके आपके लिए।
  Thanks for reading.... 



28 Dec 2018

जिंदगी में इन... शब्दों को कभी मत बोलना || असफलता के सबसे बड़े कारणों में से एक हैं ये शब्द।


दुनियाँ में बहुत से शब्द ऐसे हैं जिन्हें बुद्धिमान लोग ना के बराबर बोलते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि ये शब्द ...उनके लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण साबित होगा।
कुछ ऐसे शब्द... हैं जो कहने से ही नहीं बल्कि उनको सोचने से भी उनके होने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है। जैसे : हमने जब अपनी जिंदगी में बहुत बार ऐसे किसी काम, वस्तु , समय,व्यक्ति, गुण आदि की जरूरत ना समझकर उसे छोड़ देंते हैं और आगे अपने काम की तरफ बढ़ते तो वहाँ पर उन्हें उसी वस्तु जिसे हमने जरूरत ना समझते हुए छोड़ दिया था अब उसी की कमी या जरूरत अचानक ही पड़ जाती है । यह देख हम बड़े हैरान हो जाते हैं । यहाँ पर यह ध्यान देने वाली बात यह है कि जब भी हमें कोई व्यक्ति किसी सहायता या फिर किसी वस्तु को देता है और कहता है कि इसकी जरूरत तुम्हें आगे पड़ सकती है या पड़ेगी तो हमें कभी मना नहीं करना चाहिए चाहे वह वस्तु या विचार जो भी हो कितना ही छोटा या नगण्य लगे। यह सब हम सभी के साथ होता है किसी एक के साथ नहीं। बहुत से लोगों को इसकी जानकारी बहुत कुछ गवाने के बाद होती है और तब से ऐसा करना छोड़ देते हैं।


पर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो जान ही नहीं पाते हैं  कि असल में यह सब जो उनके साथ हो रहा है ये उनके गलत शब्दों के बोलने के चलते हो रहा है। अगर साधारण शब्दों में कहा जाये तो लगभग 90% या इससे भी अधिक हमारे जीवन में गलत होने का कारण गलत शब्दों के बोलने पर होता है । 


क्या हैं ये शब्द पोस्ट पुरा और ध्यान से पढिएगा, क्योंकि ऐसी जानकारियाँ आपको हर जगह मिलना दुर्लभ है । दरअसल बहुत से लोग ऐसी बातों को या तो इसलिए नहीं बताते हैं क्योंकि वे लोग सीर्फ अपना ही भला चाहते हैं ना कि सभी का। लेकिन आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि हम विस्तार से जानने जा रहे हैं इसके बारे में ।








मैं यह काम जिंदगी में किसी भी किमत पर नहीं करूँगा / करूँगी । 

I will never do this work in life.    




जी हाँ अगर आप ऐसी कोई बात कहते हैं कि मैं यह काम तो किसी भी किमत पर और कभी नहीं करूँगा / करूँगी तो यह बात आपका फ्लो ( पिछा करना )

करने   लगेगी  और   लगभग  90%  से  भी   ज्यादा 
संभावना है कि एक ना एक दिन वह काम आपसे 
करवाकर ही छोड़ेगी । इस बात के बहुत सारे उदाहरण देखने को मिल जायेगें । जैसे : एक फिल्म में एक गाना है " मिलने की तुम कोशिश करना वादा कभी ना करना , वादा तो टूट जाता है। "   
  शायद यह आपको सिर्फ एक गाना लगे पर इस गाने के माध्यम से यह बताया गया है कि वादा नहीं करना चाहिए क्योंकि वादे टूट जाते हैं और वादे क्यों टूटते हैं इसके लिए कोई भी कारण हो सकता है। इसी फिल्म  में नहीं बल्कि पहले की फिल्मों में जो गाने होते हैं उनमें कुछ ना कुछ काम का संदेश होता था ।
 इसीलिए हमें कोई भी बात कहने से पहले एक बार जरूर सोचना चाहिए। और इस बात से भी हमेशा बचने की कोशिश जरूर करें कि जब भी कोई बात कहें तो उसमें घमंड ना शामिल हो । क्योंकि अगर हम घमंड के साथ को भी बात करते हैं तो इस ऐसी बातों का उल्टा प्रभाव बहुत ही जल्दी असर दिखाने लगता है । दरअसल दुनियाँ में लगभग सभी ईंसानों या कुछ  देवी-देवता भी हैं जिनको घमंड हुआ था और होता भी है और उनका घमंड भी टूटा और  आगे टूटता भी रहेगा    ।  चलिए कुछ बहुत प्रसिद्ध और बड़े उदाहरणों को देखते हैं जिससे हमें विश्वास हो जाये कि वाकई बातों में वजन है। 





अर्जुन और भीम का घमंड 

     Arjuna and Bhim's pride


महाभारत के समाप्त होने के बाद अर्जुन को यह घमंड हो गया कि वह संसार का सबसे बड़ा धनुधर है और परिणामस्वरूप वह अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करने लगा । जब अर्जुन का घमंड चरमसीमा पर पहुँच गया तो भगवान्  श्री कृष्ण  ने उनके घमंड को चूर चूर किया । दरअसल अर्जुन जब महाभारत में कर्ण से युद्ध कर रहे थे तो जब वे कर्ण के रथ पर जब बाँण मारते तो कर्ण का रथ दश कदम पिछे चला जाता था  परन्तु जब कर्ण अर्जुन के रथ पर बाँण चलाता तो इनका रथ सिर्फ एक कदम  ही जाता था। इसीलिए अर्जुन यह घमंड हो गया कि वह कर्ण से  बड़ा धनुधर है। यह बार  सुनने से भगवान्  श्री कृष्ण को यह ज्ञात हो गया कि अर्जुन को घमंड हो गया है और अब यही सही समय है कि इसे सच्चाई को बता दिया जाये । भगवान्  श्री कृष्ण ने कहा कि वास्तव में कर्ण ही सबसे बडा धनुधर था । यह बात सुनकर अर्जुन हक्का - बक्का रह गये और पूछने लगे कि कैसे ?

भगवान्  श्री कृष्ण ने कहा कि तुम्हारे रथ पर संसार के मालिक यानी कि मैं बैठा था जिसे एक कदम पिछे करना तो दूर की बात है, हिला पाना भी बहुत मुश्किल है पर कर्ण ने तुम्हारे रथ को एक कदम पिछे कर दिया। तो सोचो कर्ण बड़ा धनुधर था या तुम । इसी प्रकार भीम को भी अपने बल घमंड हो गया था तो भगवान्  श्री कृष्ण उनका भी घमंड समाप्त करवाया भगवान् बजरंगबली / हनुमान  की मदत से  ।





चलो यह काम कल तो हो ही जायेगा। 


क्या आप भी बहुत बार ऐसा कहते हैं तो आज से ही यह आदत सुधार लो क्योंकि ऐसे कामों का हो पाना लगभग मुश्किल हो जाता है । याद करिए आप सभी ने बहुत बार ऐसा जब कहा होगा तब वह काम किसी ना किसी वजह से जरूर रूक गया होगा। शायद इसीलिए यह कहा जाता है कि " काल करे सो आज करे, आज करे सो अब, पल में परलय होगी बहुरी करेगा कब ।  "    इसका मतलब साफ है कि हम अगर किसी काम को कल करने की बात करते हैं तो उसे आज ही कर लेना चाहिए ( अगर संभव हो तो  ) और जिस काम को हम आज करने की बात करते हैं उसे अभी के अभी करने की कोशिश करना चाहिए ।
दरअसल हम अगर कोई बात सोचते हैं या फिर कहते हैं कि यह... काम या वह... काम किसी अन्य समय में करेंगे तो क्या गारंटी है कि उस समय आप उस काम आपके पास समय हो या फिर आप वहाँ हों जहाँ पर आपको काम था । यह भी तो हो सकता है कि आपको उसी समय कोई बड़ा और उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण और जरूरी आ जाये जिस समय में आपने एक काम सोच रखा था ।
 दरअसल हम जो काम या बात सोचते हैं केवल उसी बात या काम की संभावना नहीं होती है बल्कि उसके अलावा भी बहुत कुछ होता है जो होने वाला होता है । और इसलिए जब हम कोई बात कहतें हैं तो उसकी नकारात्मक यानी उल्टा प्रभाव वाली बात भी सक्रिय हो जाती है और हमारे काम या उस बात को उल्टा करने की कोशिश करने लगती है।


इस बात को सही से समझने के लिए मान लिजिए किसी प्रतियोगिता में दो लोग शामिल हैं और एकदूसरे के आमने सामने हैं । यदि पहला प्रतियोगी दूसरे प्रतियोगी से यह कहता है कि यह प्रतियोगिता तो मैं ही जितुँगा तो यह बात स्पष्ट है कि दूसरा प्रतियोगी पहले प्रतियोगी को हराने की पूरी कोशिश करेगा क्योंकि अब उसे खुली चुनौती ( open warning ) मिल गयी है जो उसके मान - सम्मान को नष्ट करने वाली बात है। अगर पहला प्रतियोगी कुछ भी नहीं कहता तो शायद दूसरा प्रतियोगी इतने जूनून के साथ प्रतियोगिता में भाग नहीं लेता  और ना ही जीतता।  यहाँ पर दूसरा प्रतियोगी के जितने की संभावना और बढ़ जाती है क्योंकि वह अब प्रतियोगिता जितने के लिए जी जान लगा देगा।  इस कहानी से एक बात स्पष्ट हो रही है कि अगर आप कोई बात कहते हैं जिसमें घमंड, किसी को निचा दिखाना, अतिरिक्त विश्वास (over confident) आदि हो तो ऐसी बातों का उल्टा यानी प्रतिक्रिया भी सक्रिय हो जाता है और बाधाओं को उत्पन्न करने लगता है ।
निचे दिए गए शब्दों को जितना हो सके मत बोलिए :


  • किसी बात, वस्तु, अपने गुणों आदि पर घमंड करना। 
  • कल तो यह ... काम कर ही लेंगे  ( ओवर कान्फिडेंट के साथ  ) 
  • मुझसे बड़ा चालाक कोई नहीं । 
  • कोई भी परेशानी नहीं है या होगी । 


ऊपर दिए गए शब्द हम जब भी बोलते हैं तो इनका ऊल्टा होने की संभावना बढ़ जाती है और इन शब्दों को बोलने वाले लोगों को फेंकु ( बढ़ाचढा़कर बोलन वाली ) कहा जाता है । आखिरकार इन शब्दों को बोलने पर ऐसा क्यों होता है,  पूरी तरह से किसी बात को कहना सही नहीं पर फिर भी हम एक बात जरूर कह सकते हैं। वह यह है कि यह शब्द बड़े ही संवेदनशील हैं और इसी कारण इनको बोलने से इनका प्रभाव जल्द ही दिखाई देने लगता है । जैसे कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को भला - बुरा कहता है तो वह शब्द इतना संवेदनशील होता है कि दूसरे व्यक्ति को तुरन्त ही लग जाता है , चाहे शब्द अच्छा हो या बुरा।



क्या आप जानते हैं जो लोग अच्छे खासे अमीर होते हैं फिर भी ऐसी बातें करते हैं कि आप सुनोगे तो आपको यही लगेगा कि अरे यह तो अच्छा खासा धनी है फिर बातें ऐसे कर रहा है जैसे कि यह तो बहुत ही गरीब हो। ऐसे लोगों के अमीर होने की कुछ बातें इस प्रकार है - - 
  • ये लोग अपने आपको बड़ा - चढ़ाकर नहीं बताते हैं। 
  • ये लोग अपने काम को टालते नहीं। 
  • ये लोग अपने बारे में बहुत ही कम जानकारी देते हैं। 
  • ये लोग प्रायः कम बोलने वाले होते हैं ।
  • ऐसे लोग स्वार्थी भी होते हैं। 
  • ऐसे लोग फेंकु नहीं बल्कि बटेरूँ होतें हैं। 


 ये लोग ऐसा क्यों बोलते हैं और इनके ऐसा बोलने पर इनको क्या फायदा होता है। इस आर्टिकल में आपको इनके अमीर होने का राज मिलने वाला है और अगर आप में भी यह आदत आ जाये तो आप या हम सब अमीर बनने की एक सीढ़ी ऊपर चढ़ जायेंगे। 


माता-पिता अपने बच्चों की बडा़ई.. 

 क्यों नहीं करते.... 

बहुत लोग यह सोचते हैं कि मेरे माता-पिता  मेरी बडा़ई क्यों नहीं करते हैं जबकि मैं तो बहुत अच्छा काम करता हूँ। दरअसल हर माता - पिता  अपने की तारीफ तो खुलकर करना चाहते हैं पर उससे पहले ज्यादा जरूरी यह होता है कि उनके बच्चे पर किसी की बुरी नजर ना लगे। और सत्य यह है कि बडा़ई तब करना चाहिए जब आवश्यक हो बिना मतलब यानी किसी के सामने अपने या अपने बच्चों की सराहना करना भारी पड़ सकता है। क्योंकि बिना आवश्यक की सराहना करना घंमड के दायरे में आता है। यह बात तो हम सब जानते हैं कि घमंड बहुत ही बुरी बात है यह बड़े से बड़े गुण को  नष्ट कर देती है । इसलिए हमारे माता-पिता  हमारी प्रशंसा बहुत कम करते हैं । इस बात से बहुत से लोग अपने माता-पिता  को यह कहने लगते हैं कि इनको मेरा कोई मोल ( मान )  ही नहीं है और भला - बुरा भी कहने लगते हैं ।  आशा है कि यह जानकारी आप सभी के लिए उपयोगी होगी ।

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