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संभावनाओं का सागर

18 Jul 2019

हनुमानजी को उनकी परछाईं से कैसे पकड़ा रक्षशी सिंघिका ने ?



       यह पोस्ट बहुत ही तार्किकता पर आधारित है। यह भगवान हनुमान जी या बजरंगबली की एक घटना है। इस पोस्ट में हम जो भी पढ़ेंगे वो तार्किक और विज्ञान की दृष्टि से होगा।



   हममें से अधिकांश लोगों के मन में यह सवाल उठा होगा कि सिंघिका राक्षशी ने आखिर परछाईं की मदत से महाबली बजरंगबली को पकड़ लेती है। कैसे.. कैसे.. कैसे..
तो दिल थाम कर बैठ जाईए और पूरी जानकारी जरुर पढ़िएगा। तो चलिए देर मत करिए, शुरू करते हैं।







नोट : इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़िएगा क्योंकि मुख्य उदाहरण और व्याख्या अंत में ही है।

   


       सिंघिका राक्षशी ने हनुमान जी की परछाईं को कैसे पकड़ा ?

       सिंघिका राक्षशी ने हनुमान जी की परछाईं को कैसे पकड़ी होगी ? 
    दरअसल उसके पास ऐसी शक्ति या वरदान था जिससे यदि वह किसी भी वस्तु की परछाईयों को पकड़ ले तो वह वस्तु भी उसकी पकड़ में आ जायेगी। अब आप शायद यह सोच रहे होंगे कि यह तो सभी लोग जानते हैं कि किसी शक्ति के द्वारा ही वह किसी भी वस्तु परछाईं को पकड़ने में सक्षम थी। पर हम वैज्ञानिक तरीके से उसे समझना चाहते है। चूंकि हमारे पास परछाईं के अलावा कोई और चारा नहीं है जिस पर हम अपनी सोंच - विचार करें। इसलिए परछाईं को पुरी तरह से समझते हैं। 






 परछाईं कैसे बनती है ? 

       हम जानते हैं कि सामान्यतः परछाईं काली   ही होती है। अब हमें यह जानकारी जानना बहुुत जरूरी है कि यह काली क्यों होती है ? ❍






     परछाईं के काले होने का कारण

परछाईं के काली होने का कारण जानने से पहले यह जान लें यह कैसे बनती है।
परछाईं का बनना - जब किसी वस्तु पर कोई प्रकाश की किरणें पड़ती है तो वस्तु के जितने भाग  पर प्रकाश पड़ता है तो वह भाग ऊर्जा के कारण चमकने लगता है। वस्तु के इसी भाग के ठीक उल्टी तरफ प्रकाश की किरणें नहीं पहुंच पाती हैं और इसी कारणवश वस्तु का यह भाग ऊर्जा से वंचित रह जाता है। इसी कारण से जितने भाग पर प्रकाश नहीं पड़ता है ठीक उतने भाग की छाया बन जाती है।
चूूंकि काला रंग नकारात्मक उर्जा / ऊर्जाहीनता का प्रतीक है। इसलिए परछाईं काली होती है। 







  अंधेरे या रात में ऊर्जा में कमी का होना 

        क्या आप जानते हैं अंधेरे या रात के अंधेरे में हमें ज्यादा डर  क्यों लगता है ? 
रात में प्रकाशीय ऊर्जा नहीं होती है चूंकि अंधेरा हमारे शरीर की ऊर्जा को निरंतर खिंचता रहता है जिससे हमारे शरीर की ऊर्जा इतनी कम हो जाती है कि हमें छोटी-छोटी बातों पर भी डर का अहसास होने लगता है। एक बात और जानना चाहोगे कि रात के अंधेरे में हमें नींद जल्द से जल्द क्यों आ जाती है तो इसका भी कारण अंधेरा ही है। 
  दरअसल जब हम अंधेरे के संपर्क में आते हैं तो हमारी आँखों को ऊर्जा की कमी होने लगती है जिससे हमारी आंँखें अपनेआप बंद होने लगती है। इस तरह से नींद जल्द से जल्द आ जाती है। वैसे अगर हम अपनी आँखों को बंद करके रखें तो भी नींद आने लगती है। कारण यह है कि जब हमारी आँखें बंद होती है तो भी कुछ दिखाई नहीं देता सिर्फ अंधेरे के अलावा। तो कुल मिलाकर कहें कि अंधेरा किसी भी तरह से आंखों को मिलना चाहिए बस और कुछ नहीं। 


अंधेरे के गुणों को देखिए :

  • अंधेरा लगभग सभी वस्तुओं की ऊर्जा को अपनी तरफ खींचता है। 
  • अंधेरे की तिव्रता जितनी अधिक होगी वह ऊर्जा को उतनी तीव्रता से खींचेगा। 




नोट : यह उपर्युक्त गुण प्रकाश के गुणों को  ऊल्टा करनेे पर मिला है। जब किसी वस्तु पर प्रकाश डाला जाता है तो उस वस्तु पर प्रकाशीय दबाव जरुर पड़ता है। दरअसल प्रकाशीय ऊर्जा, ऊर्जा के बंडलो के रूप में चलती है। अतः स्पष्ट है कि प्रकाश जिस भी वस्तु पर पड़ेगा उस वस्तु पर  दबाव तो लाज़़मी है। दबाव का ऊल्टा खिंचाव होता है। इसलिए अंधेरे का प्रभाव बल खिंचाव वाला होता है।




   व्याख्या :  अगर हमारा अंदाजा सही है तो इसके अनुसार राक्षशी  सिंघिका ने अपनी शक्ति से हनुमान जी की परछाईं को इतना काली कर दिया कि परछाईं का खिंचाव बल हनुमान जी के गतिकी बल से अधिक हो गया हो या परछाई को माध्यम बनाकर उनका पूरा परिणामी बल शून्य कर दिया हो । बिल्कुल ब्लैैक होल की तरह। जैसे ब्लैैक होल के पास आने वाली कोई भी वस्तु पूरी तरह से बिखर जाती है। ब्लैैक होल का खिंचाव बल इतना अधिक है कि इसमें से कोई प्रकाश भी गुजरकर नहीं जा सकता है। 
    आइए कुछ तर्क और उदाहरण देखते हैं जिससे इस व्याख्या को समझने में और मदत मिले। 

तर्क 
  • सिंघिका राक्षसी सिर्फ परछाई की मदद से ही किसी को पकड़ सकती थी। 
  •  कोई भी परछाईं वस्तु के इशारे से 100% तक नहीं चल सकती हैं। 
  • परछाईं भी वस्तु को नियंत्रित कर सकती है। इसके लिए परछाई में वस्तु की गतिकी बल से अधिक ऊर्जा होनी चाहिए। 
  • परछाई एक ऋणात्मक ऊर्जा है जो किसी भी वस्तु को अपनी ओर आकर्षित कर सकती है। 



 हम जाानते हैं कि परछाई वस्तु से उत्पन्न होती है। इससे एक बात यह साफ हो रही है कि वस्तु और परछाई में कुछ न कुछ सम्बन्ध होना तय है।
    हम सब यह बात तो जानते ही हैं कि जो भी राशियाँ एक दूसरे से संबंधित होती हैं तो उनमें से किसी को भी अगर परिवर्तित करें तो दूसरी राशि पर इसका असर या प्रभाव अवश्य ही पड़ेगा। 





उदाहरण 1.    जिस पंखे से हम हवा लेते हैं ( जैसे टेबल फैन ) अब इसका उदाहरण देखिए।



पंखे के चलने से हवा बहनें लगती हैं। इसका मतलब पंखे और हवा में एक संबंध जरूर जो इन्हें जोड़ता है । यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि सिर्फ पंखा ही हवा को चला नहीं सकता है बल्कि हवाा भी पंखे को अपने ईशारे पर नचा सकती है पर शर्त यह है कि हवा का गतिकी बल पंखेे से अधिक होना चाहिए। क्या आपने हवा से चलते हुए पंखे नहीं देखेें है। शायद सभी ने देखें होगें। कुछ इसी तरह से परछाई भी वस्तु को अपनी ऊर्जा की मदत  से अपनी तरफ खिंचती है ना कि केवल वस्तु ही परछााईं को अपनी तरफ खिंंचती है। 




  उदाहरण 2.
                   जैसे : y = 2x समीकरण में x और y  दोनों एक-दूसरे पर निर्भर कर रहे हैं। अगर हम y में से 1 घटा दें तो 2x से भी 1 घटना पड़ेगा। 



   



  नोट :     इस तरह से हमने कुछ तर्क और उदाहरणों को देखा जो पूरी तरह से यह तो सिद्ध नहीं करता है कि वास्तव में यही कारण है जिससे हनुमानजी को राक्षसी सिंघिका परछाई की मदद से पकड़ा था लेकिन लगभग पुष्टि जरुर कर रहा  है। 

    आपको यह जानकारी कितना हद तक सही लगी। अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर भेजे। आप हमें dkc4455@gmail.com पर मेल कर सकते हैं। धन्यवाद. .... 


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14 Jul 2019

बादल काले, सफेद कब और क्यूँ होते हैं ?

   

    बादल ☁️ कब सफेद और कब काले होते हैंं यह जवाब बड़ा रोचक और वैज्ञानिक है और हममें से अधिकांश लोग इसका जवाब जानते हुए भी नहीं जानते हैं। इन बातों को जानने से पहले हमें यह जानना चाहिए कि बादल आखिर बनते कैसे हैं।







    बादल ☁️ का बनना


           बादल बनना एक सुन्दर प्राकृतिक घटना है। यह घटना बरसात या गर्मी के मौसम में होती है। आखिर गर्मी के मौसम में ही क्यों ऐसा होता है यह प्रश्न उठ सकता है। दरअसल पृथ्वी के जिस भी भाग पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती है वहां के आसपास के जलवायु या जल वाष्प बनकर ऊपर उठने लगते हैं। यह जलवाष्प जल के अतिसूक्ष्म होने के कारण काफी हल्के होते हैं और आसमान में आसानी से इधर-उधर आ जा सकते हैं। जब यही जल के अतिसूक्ष्म कण अधिक मात्रा में इकट्ठे होते हैं तो हमें बादलों के रूप में आसमान में दिखाई देते हैं। 









  बादल काले क्यों होते हैं ?

        बादल का रंग इन दो बातों पर निर्भर करता है -
  1.  बादल को किधर से देखा जा रहा है।
  2. बादल के घनत्व या बादल के प्रकार पर।



   काले बादल का बनना 

   
     बरसात के दिनों में काले हों या सफेद बादल आसानी से दिखाई देना सामान्य बात है।




जब बादलों में जलवाष्प  की मात्रा अधिक हो जाती है तो ऐसे बादल पारदर्शी नहीं रह जाते हैं क्योंकि इनमें शूक्ष्म धूल के कण चिपक जाते हैं। जिस बादल में जलवाष्प की अधिकता जितनी अधिक होती है उसमें उतने ही ज्यादा धूल - कण चिपक जाते हैं। इन कणों के साथ धीरे - धीरे जलवाष्प एकठ्ठा होती रहती है। क्योंकि जो भी जलवाष्प भरी गैस धरती से ऊठती है वह सब इन बादलोंरुपी इन कणों पर चिपक जाती हैं। इसी कारण ऐसे बादल सूर्य या चन्द्रमा की रोशनी में काले दिखाई देते हैं।




 जब ऐसे बादलों पर सूर्य का प्रकाश पड़ता है तो बादल से प्रकाश पार न होने की वजह से बादल के दूसरे छोर ( किनारे ) पर इसकी छाया ( परछाईं ) बन जाती है। अतः धरती पर से ऐसे बादलों को देखने से यह काले दिखाई देते हैं। जिस बादल में जितना अधिक पानी होगा वह उतना ही काला दिखाई देता है।



  अगर इसी बादल को जिधर से प्रकाश पड़ रहा है, देखें तो यह काला नहीं बल्कि सफेद दिखाई देता है देगा या बादलों को ऊपर अथवा आसमान से देखने पर सफेद दिखाई देता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जिधर सूर्य का प्रकाश पड़ता है उधर प्रकाश परावर्तित होता है और हमारी आंँखों पर ऐसा ही रंग बनता है।






   इस पोस्ट के बारे में अपना अनुभव निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जरुर शेयर करें।आप हमें dkc4455@gmail.com पर मेल भी कर सकते हैं। 


30 Jun 2019

विज्ञान को सींखने और समझने का नियम..


विज्ञान की तैयारी वैज्ञानिक ढंग से...





    हर छात्र/ छात्रा यह सोचता है कि विषयों की तैयारी कैसे करें कि हमें ज़्यादा मेहनत ना करनी पड़े और परिक्षा में ज्यादा अंक भी मिले। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या होती है कि  कैसे सभी विषयों की तैयारी किया जाये। तैयारी करने में तीन विषयों गणित, विज्ञान और अंग्रेज़ी में ज़्यादा परेशानी होती है । आज इस पोस्ट में हम  विज्ञान  की तैयारी के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे  । अगर किसी अन्य विषय की तैयारी करना चाहते हैं तो आप कमेंट के माध्यम से जरूर बताएँ |







नब्बे प्रतिशत ( 90% ) प्रश्नों की तैयारी सूत्र के द्वारा बिना याद किए..✴️ 


    क्या आपको पता कि सूत्रों से सम्बंधित लगभग 90 % प्रश्नों के उत्तर बिना याद किए पता किया जा सकता है। जी हाँ दोस्तों यह वास्तव में सही है। विज्ञान विषय में लगभग 50 %  प्रश्न आंकिक ( numeric )  होते हैं परिक्षा में जिसमें प्रत्यक्षरूप से सूत्र का उपयोग किया जाता है। अब बाकि 40 % प्रतिशत  प्रश्नों का उत्तर अप्रत्यक्ष  रूप से सूत्र का उपयोग करके पता किया जाता है। आंकिक प्रश्नों का उत्तर तो आसानी से जाना जा सकता है परन्तु शाब्दिक प्रश्नों का उत्तर जानना थोड़ा मुश्किल होता है ; क्योंकि इन प्रश्नों को आंकिक रूप से शाब्दिक रूप में बदलने के कारण समझना कठिन हो जाता है। तो चलिए जानतें हैं इनके बारे में विस्तार से... 





कैसे करें शाब्दिक प्रश्नों की तैयारी? 

How to Prepare Literally Questions?


             शाब्दिक प्रश्नों की तैयारी ही ज्यादा भारी पड़ता है विद्यार्थियों   को लेकिन इस वैज्ञानिक विधि के द्वारा बहुत ही आसानी से किसी भी प्रश्न का हल या उत्तर दे सकते हैं। 


उदाहरण : 1.  बल क्या है ? इसे परिभाषित किजिए। 
2. परिणामी बल शून्य कब होगा ? 
3. गतिज ऊर्जा किन - किन चीजों पर निर्भर करती है ? 
4. गतिज ऊर्जा किसे कहते हैं ? 
5. पानी ( जल ) और बर्फ में किसका घनत्व अधिक है ? कारण सहित स्पष्ट किजिए |


इस प्रकार के कितने ही क्यों न प्रश्न हों आप सभी प्रश्नों के उत्तर दे सकते हैं वो भी बिना याद किए। चलिए इन सभी प्रश्नों का उत्तर जानते हैं।




उत्तर :  1. 

       परिभाषा ( Definition )  : " बल वह बाह्य कारक है जो किसी वस्तु को  गतिमान अवस्था से विरामावस्था में और यदि विरामावस्था में है तो गति अवस्था में ला देता है या लाने का प्रयास करता है। " 
इसका मात्रक  न्यूटन   होता है। इसे " F  " से प्रदर्शित करते हैं।
सूत्र :                               बल = द्रव्यमान × त्वरण 
या                                     F = ma
यदि त्वरण " g " तब          F = mg

इसकी परिभाषा को गौर से देखिए - इसे सूत्र की मदत से ही बनाया गया है। कैसे ?
आइए जानते हैं :
सूत्र में  बल = द्रव्यमान × त्वरण    दिया गया है।
जहाँ     m = वस्तु का द्रव्यमान
तथा      a = त्वरण 

त्वरण  ( Acceleration ) : वेग परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं।
सूत्र :           a = v1 - v 2 / t

जहाँ v1  = प्रारंभिक वेग है ।
      v 2  = बड़ा हुआ वेग है।
इससे एक बात तो साफ पता चल रही है कि बल का मान त्वरण पर ज्यादा निर्भर होता है क्योंकि अगर वेग में परिवर्तन नहीं हुआ तो बल का मान लगभग शून्य होगा। तो कुल मिलाकर कहें कि बल के लिए द्रव्यमान और त्वरण का होना जरूरी है। अगर कोई वस्तु गति में है तो उसे बल लगाकर रोका या रोकने का प्रयास किया जा सकता है ।
या अगर को वस्तु विरामावस्था में ( रूकी हुई ) है तो उसे बल लगाकर गती की अवस्था में लाया जा सकता है या लाने का प्रयास कर सकते हैं ।
 इस प्रकार बल की परिभाषा यह निकलकर आती है " बल वह बाह्य ( बाहरी ) कारक है जो किसी विरामावस्था कि वस्तु को गति और गति अवस्था की वस्तु को विरामावस्था में कर देता है या करने का प्रयास करता है।"
ऊपर वाली परिभाषा से यह परिभाषा थोड़ी अलग है पर इसका मतलब यह नहीं है कि यह परिभाषा गलत है।


 परिभाषा को बनाने के लिए निम्न निर्देश :
  • एकही परिभाषा भिन्न - भिन्न शब्दों या ततरिकों से बनाई जा सकती है। 
  • परिभाषा द्वारा पुरा अर्थ स्पष्ट होना चाहिए चाहे जो भी शब्द उपयोग में हों। 
  • परिभाषा द्वारा हर परिस्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। 
  • परिभाषा को इच्छानुसार छोटा या बड़ा किया जा सकता है। 
  • परिभाषा सूत्र की उपज है या सुत्र से ही बनायी जाती है। 
  • परिभाषा राशियों के नाम पर भी बनाई जा सकती है। जैसे : " द्रव्यमान और त्वरण के गुणनफल को बल कहते हैं। " 
  • परिभाषाएँ दो तरह से बनाई जाती हैं - 1.शब्दो की सहायता से,  2. राशियों की मदद से। 



 उपर्युक्त नियम से यह स्पष्ट होता है हम एक ही परिभाषा को कई तरह से बना सकते हैं। शर्त यह है कि अर्थ स्पष्ट होना चाहिए। अगर हमें शाब्दिक परिभाषा नहीं पता है तो हम राशियों में क्या संबंध है उसके जरिए भी बना सकते हैं।
जैसे : किसी गतिशील वस्तु के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं।
   इसी तरह से परिभाषाओं को बनाएंँ और याद करने वाली बात भूल जायें क्योंकि जो परिभाषा हम बना लेगें तो याद करने की जरूरत ही क्या है।














उत्तर :    2. 
   बल क्या है हमने जान लिया पर यह परिणामी बल क्या है इसके बारे में जानना बहुत ही जरूरी है क्योंकि अगर परिणामी का मतलब नहीं पता होगा तो हम उत्तर नहीं दे पायेंगे ।


    परिणामी बल ( Resulting force ) :   जब किसी पिण्ड या वस्तु पर कई बल एकसाथ कार्य कर रहे हों तो सभी बलों का योग ही इनका परिणामी बल कहलायेगा। निचे दिए गए चित्र को देखिए -





इनका परिणामी बल F,  F1, F2 और F3 में जिसका मान अधिक होगा उधर से होकर जायेगा ।
जैसे मान लिजिए
F1 = 1 न्यूटन
F2 = 2 न्यूटन और
F3 = 3 न्यूटन
बल लगे हैं तब परिणामी बल F , F3 = 3 न्यूटन वाले बल की तरफ होकर जायेगा।
अब सवाल यह है कि परिणामी बल कब शून्य ( Zero ) होता है।

जब दो या कई बल ऐसे कार्य कर रहें हों कि उनमें परिणाम  न के बराबर हो तो इसी स्थिति को ही शून्य परिणामी बल  कहते हैं।
या
जब दो  या दो से अधिक बल एक दुसरे के विपरीत और  बराबर हों तो उनका परिणामी बल शून्य होगा। 
निचे दिए गए चित्र में शून्य परिणामी बल को दिखाया गया है।



चित्र से स्पष्ट है कि पिण्ड पर दो बराबर बल हैं जो एक - दूसरे  के  विपरीत दिशा में कार्यरत हैं। इसलिए इनका परिणामी बल शून्य है।
 

 नोट : यहाँ पर हमने प्रश्नों को विस्तार से बताया है क्योंकि अच्छे से समझ आ सके। इसका यह मतलब नहीं है कि आप भी परिक्षा में इतना विस्तार से लिखें। आपको केवल इतना लिखना है जो प्रश्न में पूछा जाता है । जैसे ऊपर दिए गए प्रश्न में यह पूछा गया है कि " परिणामी बल कब शून्य होता है " तो उत्तर में हमें केवल यह लिखना है -
 जब दो  या दो से अधिक बल एक दुसरे के विपरीत और  बराबर हों तो उनका परिणामी बल शून्य होगा।

हाँ अगर प्रश्न में यह भी पूछा गया हो कि इसे समझाइए तब हम थोड़ा विस्तार करके लिखेंगे ।





उत्तर :  3. & 4.

गतिज ऊर्जा क्या है इसके बारे में जान लेना चाहिए तब हम आसानी से यह समझ जायेंगे इसके सवालों को । 

गतिज ऊर्जा ( Kinetic energy )  
परिभाषा ( definition ) 
            किसी वस्तु में उसकी गति के कारण जो ऊर्जा उत्पन्न होती है उसे उस वस्तु की गतिज ऊर्जा कहते हैं। इसका भी मात्रक जूल  होता है ।   इसका सूत्र K =  ( 1 / 2 ) mv2 
होता है। गतिज ऊर्जा की परिभाषा से ही एक बात स्पष्ट हो रही है कि गति के कारण ऊर्जा उत्पन्न होती है। अतः स्पष्ट है कि वेग ही मुख्य कारण है जो गतिज ऊर्जा को ज्यादा प्रभावित करता है। 
इसके बाद द्रव्यमान गतिज ऊर्जा को प्रभावित करता है क्योंकि सूत्र में द्रव्यमान का वेग में गुणा है। अगर कुल मिलाकर कहें कि गतिज ऊर्जा किन - किन कारणॊ पर निर्भर करती है तो इसका सीधा उत्तर है -   वेग और द्रव्यमान।
क्योंकि दोनों का गुणनफल ही गतिज ऊर्जा के मान के लिए उत्तरदायी है।




उत्तर :  5. 

    जल और बर्फ़ में किसका घनत्व अधिक होता है ?
माना कि इसका उत्तर हमें नहीं पता या नही याद  है तो सवाल यह है कि इसे कैसे पता करें । यहाँ पर घनत्व की बात हो रही है कि किसका ज्यादा है और किसका कम। यहाँ पर अगर आप घनत्व के बारे में जानते हैं तो जाहिर है कि आप यह उत्तर भी पता कर सकते हैं। अगर नहीं पता है तो चलिए घनत्व के बारे में जानते हैं।



घनत्व ( Density ) 

किसी वस्तु का घनत्व, एकांक आयतन में उपस्थित द्रव्यमान की मात्रा को कहते हैं  ।
मात्रक :  इसका मात्रक " किग्रा / मीटर3  होता है।
सूत्र :      d = m / v

अब यहाँ पर इस बात पर भी गौर किजिएगा कि घनत्व की परिभाषा भी सूत्र के माध्यम से बनायी गयी है । इसका सीधा मतलब है कि हमें यह सभी प्रश्न याद करने की कोई जरूरत नहीं है। चलिए अब घनत्व के बारे में जानतें हैं।


घनत्व का उदाहरण ( Example of Density  ) 


 घनत्व शब्द घन विशेषण है। घन का मतलब किसी वस्तु की एकांक आयतन में उपस्थित मात्रा से है। जैसे कोई चीज़ ज्यादा हो जाये तो उसे हम प्राय घनी, घना कहते हैं।

   मान लिजिए दो गाँव A और B है। गाँव A में 100 लड़के और गाँव B में 50 लड़के हैं । यहाँ पर हम क्या अन्तर देख रहे हैं। गाँव A में लड़कों की संख्या अधिक है तो इसी को हम इस प्रकार से कह सकते हैं कि गाँव A में लड़कों की संख्या का घनत्व अघिक है। ठीक इसी प्रकार से पानी और बर्फ के घनत्व के बारे में हमें बताना है ।





पानी और बर्फ में किसका घनत्व अधिक.. 

 हम जानते हैं कि अगर किसी बर्फ़ के टुकड़े को जल ( पानी ) में डूबोया जाता है तो बर्फ़ का टुकड़ा पानी में नही  डूबता है  ।अतः बर्फ़ का घनत्व कम होता है और पानी का ज्यादा। अगर बर्फ़ का घनत्व अधिक होता तो बर्फ पानी में ही डूबा रहता  । यह घनत्व में अन्तर जानने का आसान तरीका है।






   आप अपनी राय हमें जरुर बतायें कि आपको यह जानकारी कैसी लगी। आप हमें dkc4455@gmail.com मेल भी कर सकते हैं। 
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किस तारीख को कौन-सा दिन होगा, जाने बिना कलेंडर देखें। by Possibilityplus.in


           क्या आप जानते हो कि बिना कलेंडर देखे हम किसी भी तारीख को कौन-सा दिन होगा यह पता कर सकते हैं वो भी सेकेंडो या मिनटों में । पर हम उस विधि से पता तो करते हैं कि उसमें इतना वक्त या समय लगता है कि इससे हमें फायदा तो कुछ नहीं होगा मगर नुकसान जरुर होगा। 


    
    जैसे मान लिजिए अगर जब हमारे पास मोबाईल न हो और उसी समय हमसे यह कोई पुछता है कि जरा अगले महीने में 10 तारीख को कौन-सा दिन है बताना।  या ऐसा ही प्रश्न हमें किसी इंट्रेंस इग्जाम में मिल जाये तो हम क्या करेंगे।



 अगर साधारण विधि से अपनी उंँगली पर दिन की गणना करें तो हमें 10 - 15 मिनट तो लगेगा। जरा सोचों अगर यह उत्तर एक मिनट के अंदर ही सेकेंडो में ही आपको मिल तो कितना समय की बचत होगी।
   ऐसी ही एक विधि इस पोस्ट में है चलिए पढ़ते हैं। 






  किसी भी तारीख को दिन पता करना

     
       दिन पता करने के लिए हमें लीप वर्ष की जानकारी होनी चाहिए।

लीप वर्ष : जो वर्ष 366 दिनों का होता है उसे लीप वर्ष या अधिवर्ष कहते हैं।





लीप वर्ष कब और क्यों होता है ? 

       लीप वर्ष हर चार वर्षों में आता है। दरअसल वर्ष में कुल 365 दिन और लगभग 6 घंटे होते हैं। चूँकि एक दिन में 24 घंटे होते हैं। इसलिए यही 6 घंटे चार वर्षों में 24 घंटे या एक दिन के बराबर हो जाता है। गणना में कोई समस्या न आए इसलिए इसे लीप ( अधिवर्ष के रुप में हर चार वर्षों में इसे जोड़ दिया गया और इसे इस नियम में बाँधा   गया कि जिस भी वर्ष में अगर 4 से भाग करते हैं और भाग पुरी तरह से बिना दशमलव के चली गई तो वह वर्ष लीप वर्ष होगा और यदि दशमलव में भाग गई तो वह साधाारण वर्ष ( 365 दिनों ) का होगा। 




किसी भी तारीख को दिन पता करने के लिए निम्नलिखित चरणों की प्रकिया है :-
  1. सबसे पहले दिनों की संख्या ज्ञात करिए। 
  2. अब इसमें ( दिनों की संख्या में ) 7 से भाग करिए।
  3. अब शेषफल के आधार पर दिन पता करिए। इसके लिए निचे दिए गए निर्देशों को देखें।


 7 से भाग देने पर जो शेेषफल(0, 1, 2, 3, 4, 5, 6) मिलेगा उससे अधिक से अधिक मात्र 5 सेकेंड में ही दिन पता हो जायेगा। यह शेषफल 0 से 7 तक ही सीमित है। इसके नियम एक बार पढ़ने से ही समझ में आ जाता है।





   नियम -

  1. शेषफल 0 आया है तो वही दिन होगा जिस दिन से हमने गणना शुरू की थी। जैसे - मान लो किसी महिने की 1 तारीख को सोमवार दिन है और हमें इसी महीने की 8 तारीख को दिन पता करना है । सबसे पहले हम 1 से 8 तारीख के बीच दिनों की संख्या ज्ञात करेंगे। तो 1 से 8 तक 7 दिन हो रहे हैं। इसमें 7 से भाग करेंगे तो शेषफल 0 ही आयेगा। अतः स्पष्ट है कि 8 तारीख को भी सोमवार ही आयेगा।
  2. इसी प्रकार अगर शेषफल 1 आये तो गणना करने वाले दिन से या तो एक दिन आगे या एक दिन पीछे वाला दिन होगा। जैसे सोमवार के एक दिन बाद मंगलवार आता है और सोमवार से एक दिन पहले रविवार होता है। 
  3. इसी प्रकार शेषफल 2, 3, 4, 5, और 6 पर भी होता है।


कलेंडर में दो कालों की गणना की जाती है -

  1. आनेवाले दिनों या काल / समय की 
  2. बिते हुए दिनों या काल / समय की 








1.आने वाले दिनों की गणना 

  उदाहरण :  1 जनवरी 2019 को मंगलवार था तो 31 दिसम्बर 2019 को कौन-सा दिन होगा ? 

  हल : सबसे पहले हमें यह देखना है कि यह लीप वर्ष है या नहीं। लीप वर्ष 366 दिनों का होता है क्योंकि फरवरी में 29 दिन होते हैं। 2019 में 4 से भाग करने से यह दशमलव में कट रहा है। इसलिए यह लीप वर्ष नहीं है। अतः यह वर्ष 365 दिनों का है। 1 जनवरी से 31 दिसम्बर तक 364 दिन हो रहें हैं। 364 में 7 से भाग करने पर शेषफल = 0 आ रहा है। अतः 31 दिसम्बर 2019 को मंगलवार होगा।

     अगर यही प्रश्न यह होता कि 1 जनवरी 2020 को कौन-सा दिन होगा तब दिनों की कुुल संख्या 365 होती। तब 7 से भाग करने पर 1 शेषफल होता। तब हम मंगलवार से एक दिन आगे बढ़ेंगे तो बुधवार का दिन मिलेेगा। इसी प्रकार से 2 जनवरी 2020 को गुरुवार होगा क्योंकि शेषफल 2 आयेगा और मंगलवार से दो दिनों बाद गुरुवार ही होता है। इसी तरह से आने वाले दिनों की गणना में हम दिन पता करेंगे।




2.बिते हुए दिनों की गणना 

  उदाहरण : 31 दिसम्बर 2019 को मंगलवार है तो ज्ञात / पता करिए कि 1 जनवरी 2019 को कौन-सा दिन था ?

 हल : यह उदाहरण पहले का ऊल्टा है क्योंकि  हम बिते हुुए दिनों की  गणना करने जा रहे हैं।
     31 दिसम्बर 2019 और 1 जनवरी 2019 के बीच दिनों की संख्या = 364 दिन
इसमें 7 से भाग करने पर,
शेषफल = 0
चूँकि हम बिते हुए दिन की गणना कर रहे हैं यानी पीछे जा रहे हैं। इसका मतलब यह है कि जिस दिन से हम गणना कर रहे हैं उस दिन से हमें शेषफल के अनुसार पीछे जाना पडे़गा। चुँकि यहां पर शेषफल 0 है तो हमें मंगलवार से 0 दिन पिछे जाने पर मंगलवार ही मिलेगा। अगर शेषफल 1 होता या सवाल यह होता कि 31 दिसम्बर 2019 को मंगलवार है या था तो 31 दिसम्बर 2018 को कौन - सा दिन था ?
तब 31 दिसम्बर 2018 से 31 दिसम्बर 2019 के बीच दिनों की संख्या = 365
तब 7 से भाग करने पर शेषफल = 1
चुँकि 31 दिसम्बर 2019 को मंगलवार है। इसलिए मंगलवार से एक दिन पिछे / पूर्व / पहले सोमवार होता है। अतः 31 दिसम्बर 2018 को सोमवार था।

    इसी तरह सभी प्रश्नों में हल करके देखिए।






दिनों की गणना से संबंधित महत्वपूर्ण बातें

  • हमें सबसे पहले छोटे प्रश्नों को हल करना चाहिए वो भी किसी कलेंडर की सहायता से। 
  • किसी भी साधारण वर्ष से ठीक एक वर्ष आगे या पिछे जाने पर केवल एक दिन आगे या पिछे वाला ही दिन होता है। जैसे : 1 जनवरी 2019 को मंगलवार था तो 1 जनवरी 2020 को बुधवार होगा।
  • लीप वर्ष का ध्यान रखना चाहिए। 2020 एक लीप वर्ष होगा। तो इसके चार साल बाद यानी 2024 भी लीप वर्ष होगा। 
  • लिप वर्ष में 366 दिन होते हैं। इसे अधिवर्ष भी कहते हैं।
  • किसी भी वर्ष में 4 से भाग करने पर जो भाग बिना दशमलव के चली जाय वह लिप वर्ष होगा।



   आप अपने विचार हमें जरूर बताएँ कि यह पोस्ट आपको कैसी लगी। आप हमें dkc4455@gmail.com ईमेल भी कर सकते हैं। अगर आप हमारी वेबसाइट को Follow करना चाहते हैं तो निचे Follow विकल्प पर क्लिक करें। धन्यवाद.... 


26 Jun 2019

आलू को पाला लगने की असली वजह जानकर आश्चर्यचकित 😲 हो जाओगे..


         जाड़ों ( सर्दियों ) के मौसम में पौधों को पाला ( frost) लगना हम लोगों ने तो सुना ही होगा। पर हममें से कुछ लोग ही इसके पीछे की असली वजह जानते होंगे। इसके पीछे का विज्ञान बड़ा रोचक और आश्चर्य जनक है। चलिए फसल आलू 🥔 के उदाहरण को  लेकर देखते हैं। 







  आलू में पाला लगने की व्याख्या  


         आलू में पाला लगना हमने बहुत बार सुना है और इसके बाद आलू का क्या होता है हम सब जानते हैं। जब जाड़े के मौसम में अधिक से अधिक ठंड पड़ने लगती है तो कई प्रकार की फसलों को पाला लगने का खतरा बढ़ जाता है। सबसे ज्यादा उन्हीं फसलों को पाला लगता है जिनके तनों में पानी की मात्रा अधिक होती है। जैसे - आलू   और सब्जियाँ।


     जब ठंड के कारण वातावरण का तापमान शून्य डीग्री सेल्सियस ( 0° c ) या इससे भी निचे तक चला जाता है तब इस परिस्थिति में पानी बर्फ में बदलने लगता है। चूँकि आलू के पौधे 🌱 में पानी की मात्रा अधिक होती है। इस कारण से आलू के तनों के अंदर का पानी भी बर्फ बनने लगता है। पानी बर्फ का रुप लेने से आलू के पौधे के तने फटने लगते हैं और परिणामस्वरूप पौधा पीला पड़कर सूख जाता है।



     हमने इसमें क्या पाया, क्या यहाँ पर कोई प्रश्न नहीं उठ रहा है कि क्यों आलू के पौधे का तना फट जाता है पाला लगने पर। वास्तव में अभी भी हम वह मुख्य वजह नहीं जान पायें जो जाननी ही चाहिए। 
         दरअसल द्रव या पानी तीन अवस्थाओं में रह सकता है - 
  1. द्रव ( जैसे - पानी ) 
  2. ठोस ( जैसे - बर्फ )
  3. गैस ( जैसे - वाष्प ) 



            इन तीनों अवस्थाओं में तीनों का आयतन द्रव < ठोस < गैस 
बढ़ते हुए इस क्रम में होता है। साधारण शब्दों में कहें तो अगर हम एक गिलास 🥛 पानी लें  और इसे ठंडा करके बर्फ में बदल दें तो बर्फ गिलास के बाहर तक आ जायेगा। क्योंकि यह जल के मुकाबले अधिक जगह लेता है ( इसे ही विज्ञान की भाषा में आयतन कहते हैं ) ।



जल की भांफ का आयतन तो और भी अधिक होता है इसलिए अगर एक गिलास जल की भांफ बनायी जाये तो इसके लिए गिलास में जगह ही नहीं बचेगी। 






       जब किसी पौधे को पाला लगता है तो उस पौधे के तनो के अंदर मौजूद पानी या द्रव बर्फ़ बनता है। चूँकि बर्फ का आयतन पानी के आयतन से अधिक होता है। अतः यही वजह है कि पौधे के तने बर्फ के अधिक आयतन के कारण फट जाते हैं और पौधा पीला होकर सूख जाता है। 



   उम्मीद है कि आपको सही जानकारी मिल गई होगी। आप अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर भेजें। इससे हमें बड़ी खुशी होती है और  बेहतर करने की प्रेरणा भी मिलती है।
आप हमें dkc4455@gmail.com पर ईमेल भी भेज सकते हैं। ऐसी एक से बढ़कर एक और महत्वपूर्ण जानकारियाँ पाने के लिए अभी Follow करें  इस साइज को...


Train kab ayegi , by:Possibilityplus.in

   

      ज के इस दौर में ट्रेन यात्रा करने का बड़ा जरिया है। लाखों की तादाद में लोग रोज ट्रेन से सफर करते हैं। वास्तव में ट्रेन बस के मुकाबले सस्ती पड़ती है और तो और इसमें खाने-पीने, टायलेट और सोने की सुविधा भी उपलब्ध होती है। इन सभी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए आपको यह जानकारी भी होनी चाहिए:
  • ट्रेन कब आयेगी?
  • ट्रेन कहाँ तक पहुँची है? 
  • ट्रेन कहाँ से आ रही है?
  • ट्रेन कहाँ तक होनी चाहिए? 
  • ट्रेन की समय - सारिणी (टाइम टेबल)? 
  • ट्रेन लेट क्या है?
  • ट्रेन रद्द तो नहीं न है?
  • ट्रेन का किराया कैसा है?
  • ट्रेन का नाम क्या है?
  • ट्रेन का नम्बर क्या है?
  • ट्रेन किस - किस दिन जाती है?
  • ट्रेन किस - किस दिन नहीं जाती है?




ऊपर लिखे गए जितने भी सवाल हैं कि वह ट्रेन यात्री के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ये सवाल सभी के होते हैं, और इस पोस्ट में हम इन सभी सवालों का उत्तर पाने जा रहे हैं। जो लोग इनका उत्तर जानते हैं कि वे यात्रा में यात्रा का आनंद लेते हैं पर जो लोग नहीं जानते या फिर नए हैं और उन्हें लम्बे सफर की यात्रा करनी है तो उनके लिए यह किसी जंग से कम नहीं होता है।
           इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए इस पोस्ट को बनाया गया है और इसे पड़ने के बाद यात्रा जंग नहीं बल्कि इसमें रंग भरना होगा।




   ट्रेन की पूरी जानकारी  


            कोई भी ट्रेन की जानकारी चाहे वह मुम्बई कि लोकल ट्रेन हो या एक्सप्रेस ट्रेन। ऊपर हमें हमने जो भी सवाल किया उन सभी के उत्तर में मिल जायेंगे।


ट्रेन की पूरी जानकारी के लिए हमें चाहिए -
  • स्कृनटच मोबाईल (जिसमें ऐप चल सके) 
  • इंटरनेट 

    

       अगर हमारे पास मोबाईल 📱 है जिसमें हम कोई अप इंटल द्वारा चला सकते हैं तो ठीक बात है। इसके अलावा हमारे मोबाईल में इंटरनेट होना चाहिए। इतना सब होने के बाद अब जानते हैं कि अप के बारे में - 


      

    एम संकेतक     


                        यह एक ऐसा ऐप   है जिसकी मदद से हम सभी ट्रेनों के समय - सारिणी की जानकारी, ट्रेन का नाम, नम्बर और बहुत कुछ कर सकते हैं।) इस  ऐप   का उपयोग करने के लिए यह अभी तक   m-Indicator   करें डाउनलोड करें।

      डाउनलोड करने के बाद  ऐप  खोलें। अब जो पता कर सकता है कर सकते हैं।



इसमें ट्रेन ही नहीं बल्कि बस, आटो आदि कई प्रकार की जानकारियों को पा सकतें हैं। अगर हमें किसी एक्सप्रेस ट्रेन की जानकारी लेनी है तो कैसे चलेंगे उदाहरण देखते हैं।


    उदाहरण   


      उदाहरण के तौर पर मान लिकि हमें वाराणसी से  मुम्बई  तक जाना है। अगर हमें ट्रेन नाम नहीं भी पता है तो भी कोई बात नहीं है क्योंकि हमें ऐप में   वाराणसी   लिख देना है।
  • अप में खुलने के बाद एक्सप्रेस  पर क्लिक करें।
  • अब में से  अंग्रेजी में वाराणसी लिखें और करने के लिए लोकमान्य या मुंबई लिखें में।
  • अब खोज पर क्लिक करें। 
  • अब जो भी लोग हैं सबकी लिस्ट नकलकर आ जाएगी। 





इसमें ट्रेन का नाम, नाम, समय - सारिणी दिखाई देगी। अगर लाइव देखना चाहते हैं तो इंटरनेट चालू  करके देख सकते हैं। ट्रेन लाईव (  लाइव)  देखने के लिए ये स्टेप्स लेटके -


  • जिस ट्रेन को लाईव देखना है उस पर क्लिक करें। 
  • अब चल रही स्थिति  पर क्लिक करें। 
  • अब ट्रेन जहां यह है, यह तीर तीर दिखाता है। 




यह नहीं है बल्कि यह भी पता चल जाएगा कि ट्रेन लेट है या नहीं। उपर चित्र में यह दिखाई दे रहा है कि Yusufpur में 44 मिनट  तक लेट है। इसे अंग्रेजी में देरी से 44 मिनट  लिखा गया है।
इस प्रकार से हम हर जगह की ट्रेनों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 


अगर हम मुम्बई, पुने या दिल्ली  में हैं तो यहाँ बस आटो की जानकारी पा सकतें हैं। अगर लोकल ट्रेन की जानकारी चाहिए तो लोकल ट्रेन का चुुनाव करें। 





    आपको यह जानकारी कितनी उपयोगी है। हमें कमेन्थ के माध्यम से जरूर बताएं। इससे हमें प्रेरणा मिलती है और बहुत अच्छा करने की।
  धन्यवाद  


22 Jun 2019

चाल और वेग में इतना बड़ा.. अंतर , कैसे जाने। by : Possibilityplus.in

 

  चाल और वेग में अन्तर की जानकारी विज्ञान के क्षेत्र में बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। क्योंकि इसके बिना जाने हम आगे यह तय नहीं कर पाएंगे कि किसकी कौन-सी गति है।



चाल से ज्यादा वेग का महत्व होता है , मगर इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह बात होती है कि कौन सी वस्तु चाल अथवा वेग से गति कर रही है। हममें से बहुतों यह लगता है कि चाल और वेग दौनों एक ही है। इन्हीं  कारणों से यह पोस्ट बनाना पड़ा है।




इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ना क्योंकि इसमें बहुत ही खास / महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिलनेेवाली है।
चलिए कुुछ  सवालों को देखते हैंं ? 
  1. किसी वाहन की गति चाल या वेग में से किसके अन्तर्गत आती है ? 
  2. पृथ्वी की गति चाल या वेग में से किसके अन्तर्गत आती है ? 
  3. जब कोई वस्तु गुरुत्वीय क्षेत्र में फेंकी जाती है तो उसकी गति चाल या वेग में से किसके अन्तर्गत आती है ? 
  4. पेड़ से फल का गिरना किसके अन्तर्गत आता है चाल या वेग ? 

इन सभी सवालों को देखने पर हमें इसकी महत्ता की जानकारी समझ में आना शुरू हो जायेगी। चलिए इन दोनों को जानते हैं एक - एक करके -




  चाल ( Speed )

               कीसी वस्तु द्वारा एकांक समय में चली गई दूरी को उस वस्तु की चाल (speed) कहते हैं।
या किसी वस्तु द्वारा चली गयी दूरी के परिवर्तन की समय - दर को वस्तु की चाल कहते हैं।

     चाल का सूत्र

                   मान लिजिए कोई वस्तु Δt समय के अन्तराल में Δs दूरी तय करती है तो दूरी के परिवर्तन की समय - दर अथवा 
चाल = दूरी में परिवर्तन / समय में परिवर्तन
या.    V = Δs / Δt
मात्रक = दूरी का मात्रक / समय का मात्रक
        = मीटर / सेकंड

चूंकि हम यह देख रहे हैं कि इसमें कहीं पर भी दिशा का कोई जिक्र नहीं किया गया है, इससे यह बात स्पष्ट हो रही है कि चाल का दिशा से कोई नाता नहीं है। इसलिए यह अदिश राशि है।






      वेग ( Velocity )

            किसी वस्तु के एकांक समय में विस्थापन को वेग कहते हैं।
                              या
विस्थापन की समय - दर को वस्तु का वेग कहते हैं।
                               या
 किसी गतिमान वस्तु के द्वारा विस्थापन में  होने वाले परिवर्तन के समय दर को उस वस्तु का वेग कहते हैं। इसका मात्रक भी मीटर / सेकंड है। चुंकि विस्थथापन सदिश राशि है।

              उदाहरण:    मानलो कोई कार 40 किमी / घण्टा से चलती है। यह कथन यह जानकारी देता है कि कार दिशा के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहा है। इसलिए यह चाल कहलायेगी। पर अगर यह बात कही जाये कि कार पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण दिशा में से किसी दिशा में आगे बढ़ रही है तो इस कथन को कार की चाल नहीं बल्कि वेग कहेंगे।
    चुंकि वेग सदिश राशि है तो किसी भी सदिश राशि को व्यक्त करने के लिए ➝ चिन्ह का उपयोग किया जाता है। यह चिन्ह परिमाण के उपर लगाया जाता है। जैसे -   विस्थापन  Δs⟶       
को से प्रदर्शित करते हैं। वेग को निचे चित्र मेें दिखाया गया है।




चाल और वेग में अन्तर 


याद रखिए : 

  1. चाल और वेग को बांटने वाली वस्तु सिर्फ और सिर्फ दिशा ही है। 
  2. किसी भी वस्तु की गति में अगर गति के साथ - साथ दिशा की भी जानकारी मिलती है तो वह वेग वाली गति होगी। 
जैसे : 
  • पेड़ से फल 🥝 गिरते हैं। 
  • राकेट को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया जाता है। 
  • पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर गति करते हुए जाती है। 
  •  हवाई जहाज मुंबई से दिल्ली जा रहा है। 
  • सूर्य ☀ की रौशनी पृथ्वी पर आती है। इत्यादि.. 



पेड़ से फल 🥝 गिरते हैं। अब आपका सवाल यह हो सकता है कि इसमें दिशा का जिक्र नहीं किया गया है पर यह कैसे वेग वाली गति है.? 
दरअसल हर जगह दिशा को बताने की जरूरत नहीं होती है, क्योंकि वह वाक्य में छुपी हुई होती है। अब ध्यान दीजिये कि " पेड़ से फल 🥝 गिरते हैं।" तो यह बात स्पष्ट है कि फल निचे की तरफ ही गिरेंगे। तो दिशा आ गयी कि नहीं। 
इसी तरह " राकेट को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया जाता है " इसमें भी दिशा है पर थोड़ा सा ध्यान देने की जरूरत है। चूंकि अंतरिक्ष आकाश को कहते हैं और * आकाश ऊपर 👆 की तरफ है। इस इसलिए यहाँ भी दिशा की जानकारी मिली है। अतः यह भी सदिश राशि है। इसी तरह से हम वस्तु की गति को पहचान सकते हैं और उसकी गणना भी आसानी से कर सकते हैं। 




* विशेष : आसमान सिर्फ धरती 🌏 के ऊपर ही नहीं बल्कि इसके निचे भी है। 



अगर आप इसके बारे में विस्तार से जानकारी चाहते हैं तो हमें कमेेन्ट जरुर करें । और ऐसी एक से बढ़कर एक जानकारियों को पाने के लिए इस साइट को follow करें। निचे पढ़ें >>> 


यह पोस्ट आपको कैसी लगी इसके बारे में हमें जरुर बताएँ। धन्यवाद  ! अगर आपका कोई सवाल है तो कमेंट करें और अगर आप इस साइट से जुड़ना चाहते हैं तो निचे site follow करें । इसके लिए आपके पास एक गूगल का एक Gmail Account होना चाहिए। अपना ई-मेल और पासवर्ड लिखें और OK करें । बस हो गया.


19 Jun 2019

दूरी और विस्थापन में अंतर ( Difference between distance and displacement )

       

          दूरी और विस्थापन में अन्तर को जानना विज्ञान में बड़ी भूमिका है। इनमें अंतर करना बहुत ही आसान है। इनमें अंतर करें सबसे पहले हमें इन दोनों के बारे में पुरी जानकारी कर लना चाहिए। चलिए आगे पढ़ते हैं। >>>>





          दूरी ( Distance)   

                                 किसी गतिमान वस्तु  द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में उसके मार्ग की लम्बाई को वस्तु द्वारा तय की गई दूरी कहते हैं।  
निचे दिए गए चित्र को देखिए : 

इसमें किसी घर 🏩 से किसी स्कूल 🚸 तक जाने के लिए तीन रास्ते हैं और तीनों ही रास्ते अलग - अलग दूरी के हैं। 



इसका मात्रक मीटर है। इसकी कोई दिशा नहीं होती है यानी यह दिशाहीन होती है। इसलिए दूरी को अदिश राशि कहते हैं। ... 





   विस्थापन  Displacement   

                          गति करने वाली किसी वस्तु द्वारा दो स्थानों या बिंदुओं के बीच की सीधी दूरी को विस्थापन कहते हैं। 

या  गति करने वाली किसी वस्तु द्वारा किसी ऋजु - रेखीय मार्ग पर गति करते हुए प्रारम्भिक  छोर से अन्तिम छोर तक पहुंच जाये तो इनके बीच के अंतर को उस वस्तु का विस्थापन कहेंगे ।
 उपर्युक्त ( 👆 दिए  गए ) चित्र में  घर से स्कूल जाने के तीन ⚟ रास्ते हैं जिसमें 2  ( दूसरा ) रास्ता एकदम सीधा है। अत: हम यह कह सकते हैं कि विस्थापन किन्हीं दो बिदुओं के बीच की दूरी ही होती है। 
 चुंकि  विस्थापन, बीच की सीधी दूरी है जिससे दिशा का बोध या ज्ञान होता है। अतः विस्थापन सदिस राशियों वाली राशि है। हम जानते हैं कि दूरी का मात्रक मीटर है और इसमें भी दूरी का उपयोग किया जाता है। इसलिए इसका मात्रक भी मीटर ही है। 










  दूरी और विस्थापन में अन्तर. 



दूरी और विस्थापन में अन्तर
दूरी विस्थापन
किसी गतिमान वस्तु द्वारा तय की गई मार्ग की लम्बाई को दूरी कहते हैं। किसी निश्चित दिशा में गतिमान वस्तु की अन्तिम और प्रारम्भिक स्थितियों के बीच की न्यूनतम दूरी को विस्थापन कहते हैं।
यह केवल परिमाण को व्यक्त करती है। यह परिमाण और दिशा दोनों को व्यक्त करती है।
यह एक अदिश राशि है। यह एक सदिश राशि है।
दूरी सदैव धनात्मक होती है। विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक अथवा शून्य भी हो सकती है।
यह वस्तु द्वारा तय किए गए रास्ते पर निर्भर करती है । यह वस्तु द्वारा तय किए गए रास्ते पर निर्भर नहीं करता है ।

17 Jun 2019

Level kaise karen / nikale ?


    लेवल ( स्तर )         


    आप सभी का स्वागत है आप के possibilityplus.in  site पर। Level ( स्तर ) का उपयोग कहाँ - कहाँ किया जाता है, लेवल पाईप और पानी की मदत से लेवल कैसे पता करते हैं और पानी का ही  उपयोग क्यों किया जाता है ?



ऐसे जितने भी सवाल हैं सभी पर विचार - विमर्श करेंगे इस पोस्ट में, तो आइये जानते हैं एक - एक करके ।






    लेवल ( स्तर ) क्या है ?

                         किसी भी वस्तु के उपरी भागों के स्तरों की स्थिति में अन्तर और समानता को सरल शब्दों में लेवल कहते हैं। 
एकही वस्तु के विभिन्न स्थानों के स्तरों में अंतर हो सकता है। 
लेवल को हिंदी में स्तर, समस्तर, समतल, एकबराबर  इत्यादि कहते हैं।

 लेवल पता करें, इससे पहले हमें यह जानना परमावश्यक है कि आखिर जल के माध्यम से से ही लेवल क्यों निकालते / पता करते हैं। इसको जानते ही लेवल की जानकारी शीशे की तरह साफ हो जायेगी। 




   जल की विशेषता.. 

                   जल कि विशेषताएँ कुछ इस तरह है :
  • जल अपना तल स्वयं ढूंढ लेता है। 
  • जल का कोई निश्चित आकर नहीं होता है। 





   चुंकि जल / पानी को किसी भी आकार वाले बर्तन में रखने पर भी पानी का तल हर जगह एकसमान हो जाता है। और यह  ( भारत में ) आसानी से मिल जाता है तो इन्हीं कारणों के चलते लेवल करने के लिए पानी का उपयोग सबसे अच्छा होता है। चलिए प्रमाण देखलेते हैं। द्रव के अंदर किसी भी बिंदु पर दाब का सूत्र :  P =  hdg. 
जहाँ P = द्रव का दाब 
h = द्रव की गहराई 
d = द्रव का घनत्व और
g = गुरुत्वीय त्वरण है। 

इस सूत्र से यह स्पष्ट होता है कि द्रव ( जल ) का दाब द्रव की गहराई पर निर्भर करता है ना कि द्रव किस आकार के बर्तन में रखा पर करता है। यानी हम किसी भी आकार के बर्तन में पानी को रखें तो भी दाब पर कोई असर नहीं पड़ेगा बस इसकी गहराई नहीं बदलनी चाहिए। उदाहरण के रूप में ऊपर 👆 दिए गए चित्र को देखें। द्रव के इसी गुण का इस्तेमाल लेवल करने में किया जाता है। 








  लेवल कैसे पता करें ?

                        लेवल पता करने के लिए सबसे पहले हमें प्लास्टिक की बनी पतली, पारदर्शी और समान गोलाकार पाईप चाहिए। यह हार्डवेयर की दुकान पर आसानी से मील जायेगी।


  लेवल पता करने का निर्देश >>

            लेवल पता करने के निर्देश को देखें -
  1. सबसे पहले लेवल पाईप में साफ जल / पानी भरें।
  2. पाइप के अंदर कोई बुलबुला नहीं होना चाहिए।
  3. अब पाईप के दोनों सिरों को एकसाथ कर दोनों का लेवल एक है, यह निश्चित करें। 
  4. उपर्युक्त तीनों चरणों के बाद जिस भी वस्तु का लेवल करना है तो पाईप के दोनों सिरों को अलग - अलग स्थानों पर रोककर देखें और जहां पानी का लेवल हो निशान लगाते जायें।



आपको यह पोस्ट कैसा लगा ? हमें जरूर बताएँ और ऐसे ही जानकारियाँ प्राप्त करने के लिए इस साइट को follow करें। धन्यवाद... 

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