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Capacitor की पुरी जानकारी A to Z

आपका स्वागत है इस पोस्ट और वेबसाइट Possibilityplus.in पर इस पोस्ट में हम कैपासिटर की पूरी जानकारी लेने वाले हैं जैसे -  कैपासिटर किसे कहते हैं ?इसके उपयोग इसे कहाँ - कहाँ लगाते हैं? इसमे क्या होता है?ये कितने प्रकार का होता है?

कैपासिटर किसे कहते हैं ?               वह युक्ति जिसके दो प्लेटो के बिच विद्युतरोधी या परावैधुत वस्तु ( जैसे कागज, हवा, प्लास्टिक, माइका आदि) लगा होता है उसे कैपासिटर ( संधारित्र) कहते हैं। 
सुत्र के अनुसार परिभाषा - किसी चालक की वैधुत धारिता, चालक को दिए गए आवेश तथा चालक के विभव में होने वाली वृद्धि के अनुपात को कहते हैं।  सुत्र - C = q/v जहाँ C = चालक की धारिता  q = चालक को दिया गया आवेश तथा  v = चालक के विभव में होने वाली वद्धि है। 
कैपासिटर को हिन्दी में संधारित्र कहा जाता है पर आम बोलचाल की भाषा में ज्यादातर कंडेंसर कहते हैं। कैपासिटर अंग्रेजी शब्द है ना कि हिन्दी।  संधारित्र का मात्रक फैरड होता है। 

संधारित्र के उपयोग कैपासिटर एक बहुउपयोगी वस्तु है जो दुनियाँ के हर इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं में उपयोग होता है। इसका उपयोग प्रत्यावर्ती धारा ( A.C.  Current )  परिपथ में ही…

आश्चर्यजनक फैक्ट्स जो सोचने पर मजबूर कर दें

आश्चर्यजनक फैक्ट्स 
नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है Possibilityplus.in पर


 इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसी रोचक जानकारियाँ जानने वाले हैं जो इन्ट्रेस्टिंग ही नहीं बल्कि ज्ञान की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। आइए आगे पढ़ते हैं >> Facts No.1   उजाले में भी अँधेरा या अँधेरे में भी उजाला होता है क्या आप जानते हैं कि अँधेरे में भी उजाला होता है या फिर इसका उल्टा कहें तो उजाले में भी अँधेरा होता है। तो यह तथ्य बिल्कुल सही है, कैसे और क्यों उदाहरण लेकर समझते हैं। 



  जब किसी अँधेरी जगह पर उजाला किया जाता है तो अक्सर यह कहा या माना जाता है कि अँधेेरा समाप्त हो गया है पर वास्तव में ऐसा नहीं है। अगर ऐसा  होता तो एक बार अँधेरा समाप्त होने के बाद अपने आप यह वापस नहीं आ जाता। जब उजााल बंद कर दिया जाता है पर यह बात हम भली-भांति जानते हैं कि जबतक उजाला है तब तक हमें अंँधेरा दिखाई नहीं देता है । इसका मतलब यह है कि अँधेरा, उजाला होनेे के बाद भी मौजूद होता है पर उजाले के होने से दिखाई नहीं देता है।   इसके विपरीत उजाले में भी अँधेरा मौजूद होता है यह बात स्पष्ट हो जाती है। 
Facts No.2  किसी वस्तु के हर दृश्य/…

भावनाओं के उपयोग से अपने जीवन को कैसे खुशहाल और सफल बनाएँ ?

इस दुनियाँ में हम वो पा सकते हैं जो चाहते हैं पर शर्त यही है कि क्या हम जो पाना चाहते हैं उसके लायक हैं या फिर उतनी मेहनत कर सकते हैं ? अगर "हाँ" तो जरूर पा सकते हैं बस हमें अपने काम को बखूबी करने की आवश्यकता है। आज के इइस पोस्ट में हम ऐसी ही जानकारी लेने जा रहे हैं जो बहुत आवश्यक है। 

नोट :
अगर हमनें इस पोस्ट में दी गई जानकारी को बारिकी से समझ लिया तो हमें हर काम में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जायेगी। क्योंकि हम यह जान चुके होगे कि हमें कब, कहाँ, क्या और कैसे करना है किसी काम को । हो सकता है कि कुछ लोगों को इसमें बताई गई बातें पल्ले ना पड़े, पर संभवतः समझाने का भरसक पुरा प्रयास किया गया है। हम भावनाओं को कितने हद तक अपने वस में कर सकते हैं  यह हमारी इच्छाशक्ति और प्रयत्न पर निर्भर करता है। 





   दुनिया का कोई भी शक्स ऐसा नहीं होगा जो बिना किसी भावना ( फिलिंगस् ) के हो क्योंकि बिना किसी भावना के कोई जिंदा ही नहीं रह सकता है। इस तरह हम यह भी कह सकते हैं कि हमारी जिन्दगी भावनाओं के कारण ही प्रभावित होती रहती है। शुरुआत में हमें यह भाव उभरने नहीं देंगे क्योंकि जबतक हम इसको समझेंगे…

भिन्नों को हल करने के लिए ल. स. क्यों निकाला जाता है ?

आपका स्वागत है Possibilityplus.in. परजब भी किसी भिन्न को हल करना हो चाहे भिन्न का जोड़ हो या घटाना तब इन प्रकार की भिन्नों को हल करने के लिए हमें भिन्नों के हरों का लघुत्तम समापवर्तक निकालना ही पड़ता है। ऐसा क्या कारण है कि ऐसा होता है। 
इस पोस्ट में हम इसी के बारे में बड़ी ही सरलता से यह जानने वाले हैं कि भिन्नों को हल करते समय इनका लघुत्तम समापवर्तक ( ल. स. ) क्यों निकालना आवश्यक होता है। हम भिन्नों को बिना ल.स निकाले भी हल कर सकते हैं पर केसे हम इसी पोस्ट में जानेंगे पर पहले ल. स का कारण जान लेते हैं। आइए आगे पढ़ते हैं >>>
इसको अच्छी तरह से समझने के लिए हमें कई उदाहरणों को सामिल करना होगा। 
  उदाहरण 1.   


   इस में हमें हर ( 5 व 7 ) का ल.स. निकालना पड़ेगा पर क्यों चलिए इसका मूल कारण देखते हैं। हम देख रहे हैं कि 5 और 7 दोनों अलग अलग संख्याएँ हैं। सबसे पहले इन दोनों हरों को एकसमान संख्या में बदलना होगा तभी हम काॅमन ले सकते हैं। अगर ल.स की बात करें तो इनका ( 5 और 7 का ) ल.स  35 होगा। अब इसी 35 का गुणा और भाग दोनों भिन्नों के अंश व हर में करना होगा। गुणा करने के बाद भिन्नों का नया…

गुणा को जोड़ से पहले हल करने का सबसे बड़ा कारण

नमस्कार आप सभी का स्वागत है इस पोस्ट में, हमें यह बात पता ही है कि जब जोड़ और गुणा दोनो एक साथ हों तो हमें सबसे पहले गुणा करना होता है और अगर हमसे कोई यह पूछे कि क्यों तो हममें से अधिकांश लोगों का जवाब यही होगा कि बोडमास नियम के अनुसार ऐसा होता है। मगर ये उत्तर हमारे दिमाग को शायद पूरी तरह से संतुष्ट नहीं करता है। चलिए इसके बारे में पुरी जानकारी लेते हैं।



उदाहरण 1.    4 × 3 + 5  = ? इस सवाल को हम बोडमास नियम से हल करेंगे तब  4 × 3 का हल ( 12 ) सबसे पहले होगा। पर अगर इसे हमें बिना बोडमास नियम के समझना है तो कैसे समझेंगे। दरअसल गुणा जोड़ का ही एक रुप है जो जोड़ को आसान और इसे ( जोड़ ) को कम समय में हल करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।


माना 4 + 4 + 4  एक जोड़ है जिसे हमें जोड़ना है।  अब आप शायद यह सोच रहे होंगे कि ये क्या सवाल है, इसे तो कोई बच्चा भी हल करलेगा। दरअसल इसी के माध्यम से हम बहुत आसानी से समझ सकते हैं।  4 + 4 + 4  को हम देख रहे हैं कि यह 3 बार है तो इसे ऐसे 4 × 3 या 3 × 4 लिख सकते हैं। इसे विस्तार से समझने के लिए हमें इसके पुरे स्टेप्स को देखना होगा।  4 + 4 + 4 = 4 ( 1+ 1+ 1 …

चारों युगों ( सतयुग , त्रेतायुग , द्वापरयुग तथा कलयुग ) की जानकारी

नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है इस पोस्ट में जिसमें हम चारों युगों की जानकारी वैज्ञानिक तर्क के आधार पर लेंगे। पुराण में यह उल्लेखित है कि हिन्दू धर्म के  आधार पर चारों युगों का वर्णन मिलता है। जो इस प्रकार से हैं - सतयुग त्रेतायुग द्वापरयुग तथा कलयुगइन सभी चारों युगों  में बड़ी विभिन्नता देखने को मिलती है। क्या है इनमें विभिन्नता एक - एक करके जानते हैं। 
सतयुग  ऐसा माना जाता है कि सतयुग वह युग है जो पहले नम्बर पर आता है। है।


इस युग की कालअवधि 1728000 वर्ष थी अर्थात सतयुग सत्तरह लाख अट्ठाइस हजार वर्षों तक चला था फिर इसके बाद त्रेतायुग की शुरुआत हुई होगी । इस युग में मनुष्यों की औसतन उम्र एक लाख वर्ष होने की बात कही गई है। इसके साथ ही इस युग में मनुष्यों की औसतन लम्बाई 32 फूट बतायी गयी है। इस युग के बारे में यह कहा गया है कि इस युग की शुरुआत रविवार ( sunday ) को हुई थी।    इस युग के मुख्य अवतार इस प्रकार हैं -  मत्स्यकूर्मवारह तथानृसिंह अवतार ये अवतार शंखासूर के वध, वेदों का संरक्षित करने, पृथ्वी पर से भार को कम करना, हिरण्याक्ष दैत्य का वध, हिरण्यकश्यप का वध और प्रह्लाद के जीवन को ब…

रासुका, W.H.O, W.W. W, etc full form

रासुका ( N.S.A )  रासुुका ऐसा कानून है जिसके लगने पर किसी भी संदिग्ध को पकड़ा जा सकता है । ये शब्द सुनने में उर्दू प्रतीत होता है पर यह पुर्ण शब्द नहीं है बल्कि हिन्दी के तीन शब्दों के पहले अक्षर हैं।अगर अग्रेंजी यानी इंग्लिश में कहें तो इन्हें हम N.S.A  कहेंगे।  राष्ट्रीय सुरक्षा (अधिनियम-1980) को मजबूत करने के लिए इस नियम को बनाया गया। क्योंकि इससे किसी भी संदिग्ध को हिरासत में लिया जा सकता है और किसी बड़ी साजिश पर अंकुश लगाया जा सकता है।


ये कानून कब और क्यूँ बना देश में कई प्रकार के कानून बनाए गए हैं जो अलग अलग परिस्थितियों में लागू होते हैं। रासुका यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून। 23 सितंबर, 1980 को इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान इसे बनाया गया था। यह कानून देश की सुरक्षा को बनाये रखने के लिए और सरकार को अधिक शक्ति देने के लिए है। दरअसल यह कानून केंद्र और राज्य सरकार को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेने की शक्ति देता है। रासुका ( N.S.A ) का पुरा अर्थ क्या है    रासुका का पुरा अर्थ - 
रा = राष्ट्रीय  सु = सुरक्षा  का = कानून 
 चलिए अब जानते हैं N.S.A यानी इसी के अग्रेंजी रुप का पु…
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