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चारों युगों ( सतयुग , त्रेतायुग , द्वापरयुग तथा कलयुग ) की जानकारी

नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है इस पोस्ट में जिसमें हम चारों युगों की जानकारी वैज्ञानिक तर्क के आधार पर लेंगे। पुराण में यह उल्लेखित है कि हिन्दू धर्म के  आधार पर चारों युगों का वर्णन मिलता है। जो इस प्रकार से हैं - सतयुग त्रेतायुग द्वापरयुग तथा कलयुगइन सभी चारों युगों  में बड़ी विभिन्नता देखने को मिलती है। क्या है इनमें विभिन्नता एक - एक करके जानते हैं। 
सतयुग  ऐसा माना जाता है कि सतयुग वह युग है जो पहले नम्बर पर आता है। है।


इस युग की कालअवधि 1728000 वर्ष थी अर्थात सतयुग सत्तरह लाख अट्ठाइस हजार वर्षों तक चला था फिर इसके बाद त्रेतायुग की शुरुआत हुई होगी । इस युग में मनुष्यों की औसतन उम्र एक लाख वर्ष होने की बात कही गई है। इसके साथ ही इस युग में मनुष्यों की औसतन लम्बाई 32 फूट बतायी गयी है। इस युग के बारे में यह कहा गया है कि इस युग की शुरुआत रविवार ( sunday ) को हुई थी।    इस युग के मुख्य अवतार इस प्रकार हैं -  मत्स्यकूर्मवारह तथानृसिंह अवतार ये अवतार शंखासूर के वध, वेदों का संरक्षित करने, पृथ्वी पर से भार को कम करना, हिरण्याक्ष दैत्य का वध, हिरण्यकश्यप का वध और प्रह्लाद के जीवन को ब…

रासुका, W.H.O, W.W. W, etc full form

रासुका ( N.S.A )  रासुुका ऐसा कानून है जिसके लगने पर किसी भी संदिग्ध को पकड़ा जा सकता है । ये शब्द सुनने में उर्दू प्रतीत होता है पर यह पुर्ण शब्द नहीं है बल्कि हिन्दी के तीन शब्दों के पहले अक्षर हैं।अगर अग्रेंजी यानी इंग्लिश में कहें तो इन्हें हम N.S.A  कहेंगे।  राष्ट्रीय सुरक्षा (अधिनियम-1980) को मजबूत करने के लिए इस नियम को बनाया गया। क्योंकि इससे किसी भी संदिग्ध को हिरासत में लिया जा सकता है और किसी बड़ी साजिश पर अंकुश लगाया जा सकता है।


ये कानून कब और क्यूँ बना देश में कई प्रकार के कानून बनाए गए हैं जो अलग अलग परिस्थितियों में लागू होते हैं। रासुका यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून। 23 सितंबर, 1980 को इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान इसे बनाया गया था। यह कानून देश की सुरक्षा को बनाये रखने के लिए और सरकार को अधिक शक्ति देने के लिए है। दरअसल यह कानून केंद्र और राज्य सरकार को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेने की शक्ति देता है। रासुका ( N.S.A ) का पुरा अर्थ क्या है    रासुका का पुरा अर्थ - 
रा = राष्ट्रीय  सु = सुरक्षा  का = कानून 
 चलिए अब जानते हैं N.S.A यानी इसी के अग्रेंजी रुप का पु…

Math ki basic jankari with details

गणित एक ऐसा विषय है जिसके बारे में जितना जाना उतना ही कम लगता है। इस तरह के - ऐसे सवालों के जवाब मिलते हैं जो वास्तविक दुनियाँ में देखा भी नहीं जा सकता।इसीलिए गणित को विज्ञानकी जननी (माता) भी कहा है। इसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है क्योंकि जीवन के हर पहलू में गणित जरुर मिल जायेगी।          इस पोस्ट में हम ऐसी जानकारी जानने वाले हैं जो हमें नहीं मिल पाए हैं। चलिए जानते हैं ..
पक्षान्तर करने पर प्रतीक बदल क्यों जाते हैं ?  हम जानते हैं कि किसी भी समीकरण के पदों को जब दूसरी तरफ ले जाया जाता है तो उनके प्रतीक बदल जाते हैं, जैसे - समीकरण x 2 + 5x + 8 = 0, के किसी भी पद को दाहिने तरफ ले जाने पर ऋणात्मक हो जायेंगे । माना हम 8 को दाहिने तरफ ले तो ऊपर दिया गया समीकरण ऐसा दिखाई देगा।  x 2  + 5x + 8 = 0  ➡️ x 2 + 5x = - 8
 अब अगर हमसे यह कोई पूछे कि ऐसा क्यों होता है तो हम यही कहते हैं कि जब पक्षान्तर होता है तो उनके प्रतीक बदल जाते हैं इसमे और कोई बात नहीं है। पर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसका सही उत्तर कुछ और है जो कि ज्ञान की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। 

समीकरण में किसी भी पद…

कोरोना वायरस के लक्षण और बचाव के सही तरीके

कोरोना वायरस आज भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के अनेक देशों के लिए काल साबित हो रहा है और इसलिए इसे महामारी घोषित कर दिया गया है। हम सभी यह बात जानते होंगें कि यह वायरस चीन ( चाइना ) से फैला हैै और बहुत ही ज्यादा खतरनाक है क्योंकि यह बहुत तेजी से से फैलता है।


कोरोना वायरस के लक्षण   इस वायरस के लक्षण शुरुआत में ऐसे हैं कि मनुष्य को पता ही नहीं चल पाता है कि यह सामान्य सर्दी-जुकाम तथा बुखार है या कोरोना संक्रमण है पर जब यह अधिक परेशान करे या न भी परेशान करे तो भी हमें डॉक्टर से चेक या टेस्ट जरूर करवा लेना चाहिए क्योंकि इस बिमारी के लक्षण शर्दी, खाँसी, जुखाम और सांस  फूलना है। इसलिए शर्दी, खाँसी, जुखाम और सांस फूलने में से कोई भी समस्या हो तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि हमें घबराना नहीं है बल्कि अपनेआप को मोटिवेट करना है।    मोटिवेशन या योग एक ऐसा उपाय है जो हमें हर प्रकार की विपत्ति या फिर बिमारियों में बहुत मदत करता है । कैसे करना है इसके बारे में हम आगे इस पोस्ट में पढ़ेगें। 


उपचार / बचाव के तरीके   उपचार की बात करें तो इसका उपचार अभी तक संभव नहीं हुआ ह…

24 घंटे नहीं होते हैं एक दिन में, बात पक्की है..

अगर हम किसी भी व्यक्ति से यह पूछते हैं कि एक दिन में कुल कितनी घण्टे होते हैं तो 90% संभावना (कब्जे) है कि वह व्यक्ति हमें यही जवाब देगा कि "  एक दिन में कुल 24 घंटे होते हैं"



और उसे जवाब देने में महज एक सेकेंड या इससे भी कम समय लगेगा। लेकिन वास्तविकता यह है कि एक दिन में कुल 24 घंटे नहीं होते हैं फिर फिर क्या होता है और क्यूं? यह जानना बहुत जरूरी है।
24 घण्टे से थोड़ा कम होता है एक दिन का समय।    एक दिन में 24 घण्टे नहीं होते, बल्कि 23 घण्टे 56 मिनट और 4.100 होते हैं । अब हमारे मन में यह सवाल उठ सकता है कि ऐसा क्यों है?





 दिशा पता करने का बन्द तरिकासूरज सुबह और शाम को लाल क्यूँ होता है? Bodmas नियम फेल कैसे और क्यों?


और अगर ऐसा है भी तो हमें लोग क्यों नहीं बताते हैं।
दरअसल 24 घण्टे में केवल 3.931667 मिनट कम होते हैं जो कि लगभग बहुत कम है और इसलिए साधारण बोलचाल में हम 24 घण्टे ही कहते हैं। अब एक सवाल यह भी है कि आखिरकार 24 घण्टे क्यों नहीं होते हैं एक दिन में तो इसका जवाब है, पृथ्वी की गति।



क्या कारण है कि 24 घण्टे नहीं होते हैं एक दिन में ?    हम जाानते हैं कि पृथ्वी स…

सूर्य अथवा चन्द्र ग्रहण कब और क्यूँ लगता है

सूर्य ग्रहण हो या चन्द्र ग्रहण ये घटना जब होती है तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमें कुछ सावधानियां बरतने को कहा जाता है। पर हममें से अधिकांश लोगों को यह समझ में ही नहीं आता कि भला सूर्य अथवा चन्द्र ग्रहण से हमारे जीवन में क्या और क्यूँ प्रभाव पड़ेगा। 

सूर्य ग्रहण हो या चन्द्र ग्रहण दोनों में एक बात यह मिलती है कि सूर्य हर ग्रहण में एक किनारे होता है , जबकि चन्द्रमा और पृथ्वी कभी बीच में तो कभी किनारे पर होते हैं। यह स्थिति कब और कैसे आती है इन सभी सवालों को जानते हैं।

सूर्य ग्रहण   सूर्य ग्रहण तब लगता है, जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है।

सवाल नम्बर . 01 : सूर्य और पृथ्वी के बीच चन्द्रमा कब और क्यूँ आता है ? 
 जैसा कि हम सब यह जानते हैं कि सूर्य के चारो ओर पृथ्वी चक्कर लगाती हुए अपनी धुरी पर भी घमती है और पृथ्वी के इर्द-गिर्द या चारो तरफ चन्द्रमा भी चक्कर लगाता है। चक्कर लगाते - लगाते एक समय ऐसा आता है कि चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है और इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहते हैं। यह घटना एक वर्ष के अन्दर आ सकती है।




 सूर्य ग्रहण जितना लम्बा होगा इसके लगने में य…

केले का पेड़ पानी में क्यों नहीं डूबता ?

www.possibilityplus.in पर आप सभी का स्वागत है। इस आर्टिकल में हम केले के पेड़ का पानी में ना डूबने के कारण को जानेंगे।
केले का पेड़ पानी में क्यों नहीं डूबता ? यह प्रश्न वैज्ञानिक, तार्किक,  उपयोगी और मजेदार भी है। इसके ना डूूबने की वजह है इसके अन्दर मौजूद पानी की मात्रा। जी हाँ पानी की मात्रा ही वह असल वजह है जो इसे पानी या जल के अंदर डूबने से बचाता है।         यह उत्तर मोटे तौर पर पर जो यह तो बता रहा है कि किसके कारण ऐसा होता है, मगर हमें बात हजम नहीं हो रही है अथवा पुरी तरह से समझ में नहीं आया है। चलिए सरल और वैज्ञानिक तरीके से समझते हैं।


स्पष्टीकरण :  पानी  में कोई वस्तु डूबेगी या नहीं यह दो ✌️ बातों पर निर्भर करता है -
पहली बात : वस्तु का घनत्व।  दूसरी बात : वस्तु की आकृति 

पहली बात के अनुसार 
      पहली स्थिति के अनुसार यदि जिस भी वस्तु का घनत्व पानी के घनत्व से अधिक होगा वह वस्तु पानी में अंदर चली जायेगी अथवा डूब जायेगी। 
इसके विपरीत अगर वस्तु का घनत्व कम हो तो वस्तु पानी में नहीं डूबेेगी ( थोड़ा - बहुत हिस्सा ही जल के अंदर रहेगा ) बल्कि पानी के ऊपर तैरेगी। 

और अगर वस्तु का घनत्व प…
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