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प्रकाश, तरंग और कणों की भाँति व्यवहार क्यों करता है क्या प्रकाश कणों से मिलकर बना है

आ ज हम इस आर्टिकल में प्रकाश के बारे में ऐसे आश्चर्यजनक जानकारियाँ जानेंगे जो शायद ही पहले जानने को मिला हो। पर इससे पहले ये नोट आपको पढना चााहिए  »  ㄑ नोट : हमें किसी भी जानकारी पर तभी विश्वास करना चाहिए, जब हमें ऐसे तर्कसंगत उदाहरण मिले जो हमें यह विश्वास दिलाता हो कि जानकारी सही है या नहीं जिसका " www.possibilityplus.in " के लगभग हर आर्टिकल में विशेष ध्यान दिया जाता है।  > वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रकाश दोहरी प्रकृति का गुण रखता है » तरंग  और कण प्रकृति  इनका मानना है कि प्रकाश कुछ मामलों में तरंग और कुछ मामलों में कण की भाँति व्यवहार करता है । प्रयोगों के अनुसार सौर ऊर्जा से विधुत ऊर्जा का प्राप्त करना कणिक ( फोटान ) की भाँति व्यवहार को दर्शाता है। जबकि प्रकाश के तरंग - सिद्धांत से विवर्तन, व्यतिकरण, धुर्वण इत्यादि घटनाओं की व्याख्या सुगमता से हो जाती है ; और कण ( फोटाॅन ) सिद्धांत से प्रकाश - वैधुत प्रभाव  केे अलावा काॅम्पटन प्रभाव,जीमन प्रभाव, रमन प्रभाव इत्यादि घटनाओं की व्याख्या की जाती है। इसीलिए प्रकाश में द्वैती ( दो ) प्रकृति ( dual nature) है यह कहा गया है

कोरोना वायरस के लक्षण और बचाव के सही तरीके

  को रोना वायरस आज भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के अनेक देशों के लिए काल साबित हो रहा है और इसलिए इसे महामारी घोषित कर दिया गया है। हम सभी यह बात जानते होंगें कि यह वायरस चीन ( चाइना ) से 2019 में फैला था और आज यानी 2021 में यह और भी ज्यादा खतरनाक हो गया है क्योंकि  अब यह हवा के माध्यम से भी फैल रहा है। दरअसल यह वायरस अब हवा में अधिक से अधिक समय में जिंदा रहने में सक्षम हो गया जिसके कारण लगभग पुरे भारत में हाहाकार मचा हुआ है।  कोरोना वायरस के लक्षण   इस वायरस के लक्षण शुरुआत में ऐसे हैं कि मनुष्य को पता ही नहीं चल पाता है कि यह सामान्य सर्दी-जुकाम तथा बुखार है या कोरोना संक्रमण है पर जब यह अधिक परेशान करे या न भी परेशान करे तो भी हमें डॉक्टर से चेक या टेस्ट जरूर करवा लेना चाहिए क्योंकि इस बिमारी के लक्षण शर्दी, खाँसी, जुखाम और सांस  फूलना है। इसलिए शर्दी, खाँसी, जुखाम और सांस फूलने में से कोई भी समस्या हो तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि हमें घबराना नहीं है बल्कि अपनेआप को मोटिवेट करना है।    मोटिवेशन या योग एक ऐसा उपाय है जो हमें हर प्रकार की

Correct connection of ceiling fans

 क्या आप छत वाले पंखें का कनेक्शन नहीं जानते हैं और आपको ही इसका कनेक्शन करना  या सीखना है और आपको कोई आईडिया नहीं है तो आपको इस आर्टिकल में पुरी जानकारी देने की कोशिश की गई है। सबसे पहले हम उन सवालों को देख लेतें हैं जो हमारे काम का है, अगर न हो तो आपका समय बर्बाद न हो इसलिए ये सवाल आवश्यक हैं - पंखें में चार तार ( वायर ) क्यों होते हैं ? इसमें तीन तार भी होते हैं, क्यों ? किसको "स्टार्टिंग वायर" कहते हैं ?  किसको "रनिंग वायर" कहते हैं ?  किसको "काॅमन" करना चाहिए ? किन दो तारों में मेन तारों को जोड़ना चाहिए ?  कैपासिटर को किन दो तारों में जोड़ना चाहिए ?  छत वाले पंखें में कितने माईक्रोफैरड का कैपासिटर होना चाहिए ? कैसे पता करें कि कैपासिटर खराब नहीं है ? कैसे पता करें कि पंखा सही या खराब है  ? पंखा सीधा चल रहा है या उल्टा कैसे पता करें ? छत वाले पंखें में चार तार ( वायर ) क्यों होते हैं ?        जो लोग पंखे के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं उनके मन में अनेकों ऐसे सवाल आते हैं जो जानने के बाद ऐसा लगता है कि अरे ये तो बहुत आसान या सरल था। उन्ही में से एक यह

Reading Mood क्या है | रामबाण है इसका उपयोग

रिडिंग मूड क्या है ?      रिडिंग मूड क्या है, इसे अगर साधारण शब्दों में कहें तो पढ़ने वाला मूड भी कह सकते हैं। इसे कब और क्यों चालू किया जाना चाहिए और इसके क्या - क्या फायदे हैं।  यह बात जानना बहुत जरूरी है तभी इसके उपयोग की अहमियत अच्छी तरह से समझने में मदद मिलेगी। यह मूड तब सक्रिय किया जाता है जब हमें कोई  आर्टिकल अधिक समय के लिए पढ़ना हो ।  मोबाइल पर कोई विडियो गेम, फिचर ( फिल्म = Movie) देखना हो । कोई फोटो या डिजाइन बनाना हो।  या टकटकी लगाकर स्क्रीन पर कोई और काम करना हो।  कुल मिलाकर देखें तो यह हमारी आँखों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए है। इस विकल्प को पढ़ने वाला भाव भी कहा जा सकता है जो कि हिन्दी अनुवाद है reading mood का है। चुकिं यह मूड हमारी आँखों को सुरक्षा प्रदान करता है इसलिए इसे आई केयर के नाम से भी जाना जाता है । यह हमारी आँखों को कैसे सुरक्षित रखता है इसे वैज्ञानिक तरीके से समझते हैं। यह कैसे काम करता है ?          क्या आपको पता है कि रिडिंग मूड हम सब की आँखों को कैसे सुरक्षित रखता है। हमें बस यह पता है कि यह हमारी आँखों को सुरक्षा प्रदान करता है पर वास्तविक कारण नहीं

गुणा को जोड़ से पहले हल करने का सबसे बड़ा कारण

  नमस्कार आप सभी का स्वागत है इस पोस्ट में, हमें यह बात पता ही है कि जब जोड़ और गुणा दोनो एक साथ हों तो हमें सबसे पहले गुणा करना होता है और अगर हमसे कोई यह पूछे कि क्यों तो हममें से अधिकांश लोगों का जवाब यही होगा कि बोडमास नियम के अनुसार ऐसा होता है। मगर ये उत्तर हमारे दिमाग को शायद पूरी तरह से संतुष्ट नहीं करता है कि ऐसा क्यों। लिए इसके बारे में पुरी जानकारी लेते हैं। उदाहरण 1.    4 × 3 + 5  = ?इस सवाल को हम बोडमास नियम से हल करेंगे तब  4 × 3 का हल ( 12 ) सबसे पहले होगा। पर अगर इसे हमें बिना बोडमास नियम के समझना है तो कैसे समझेंगे। दरअसल गुणा जोड़ का ही एक रुप है जो जोड़ को आसान और इसे ( जोड़ ) को कम समय में हल करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। माना 4 + 4 + 4  एक जोड़ है जिसे हमें जोड़ना है।  अब आप शायद यह सोच रहे होंगे कि ये क्या सवाल है, इसे तो कोई बच्चा भी हल करलेगा। दरअसल इसी के माध्यम से हम बहुत आसानी से समझ सकते हैं। ( चार ) 4 + 4 + 4  को हम देख रहे हैं कि यह 3 बार है तो इसे ऐसे 4 × 3 या 3 × 4 लिख सकते हैं। इसे विस्तार से समझने के लिए हमें इसके पुरे स्टेप्स को देखना

Zero ka maan kya hai ?

       दुनियाँ में जो भी बड़े - बड़े काम हुए हैं उन सब में कहीं न कहीं जीरो या शून्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और आज भी है। इसके बारे में हममें से ज्यादा लोगों को बहुत कम जानकारी है। इसकी वजह एक नहीं बल्कि अनेकों प्रकार की हैं और इसी अज्ञानता को दूर करने के लिए ये आर्टिकल लिखा गया है।     शून्य ( Zero )        जीरो क्या है,अगर ये प्रश्न किसी भी परसन से किया जाए तो अधिकांश लोगो का यही जवाब होगा कि जो वस्तु पुरी तरह से समाप्त हो जाती है उसे शून्य कहते हैं या जिसका अस्तित्व ही समाप्त हो गया हो उसे जीरो कहते हैं। पर इसके पिछे हमसे एक छोटी-सी जानकारी छूट रही है जो हमारी आँँखों को खोल देगी।  अधिकांश लोगों का मत है कि Zero में कोई वल्यू ( मान ) नहीं होता है। अगर ऐसा है तो जीरो का किसी भी संख्या से संबंध नहीं होना चाहिए क्योंकि ये अस्तित्वहीन है ( इस मान्यता के अनुसार )। पर हमेें यह पता है कि हम अच्छा खासा इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। दरअसल हम जो सोचते हैं कि ये, वो या कोई भी वस्तु समाप्त हो चुकी है या अस्तित्व नहीं है ऐसा सत प्रतिशत संभव नहीं है। क्योंकि कोई भी बात या क्रिया सत प्रतिशत नहीं

सुबह में सूर्य लाल क्यों दिखाई देता है ?

   सूर्य का लाल रंग में ( सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में ) दिखना एक प्राकृतिक घटना है जिसे हम वैज्ञानिक तर्क के आधार पर समझेंगे। उससे पहले लोगों की राय इसके बारे में क्या है उसे जान लेते हैं। सूर्य का लाल और पीले रंग की तस्वीर   बहुतों का कहना है कि सूर्य लाल इसलिए दिखाई देता है क्योंकि लाल, नारंगी और पीले रंग के अलावा बाकी सभी ( हरा, आसमानी, नीला और बैगनी ) रंगों का प्रक्रिणन हो जाता है। प्रक्रिणन क्यों होता है ? इसके जवाब में उनका कहना है कि वातावरण में मौजूद शूक्ष्म कणों ( धूल, गैस आदि ) के द्वारा  अत्यधिक आवृत्ति या कम तरंगदर्ध्यों वाली प्रकाश तरंगों का प्रक्रिणन या फैलाव हो जाता है। अतः हमें सूर्य लगभग लाल रंग का दिखाई देता है।   क्या यह कारण या उदाहरण हमारे मन को संतुष्ट करता है या यह हमें पुरी तरह से समझ में आया ?    अधिकांश लोगों का जवाब होगा "  ना "  और कुछ लोगों का जवाब " हाँ "   में भी होगा। चलिए अब ऐसे सवालों को देखते हैंं जो इस उदाहरण पर प्रश्न खड़ा करते हैं - प्रक्रिणन सुबह और शाम में ही क्यों होता है ?  प्रक्रिणन दोपहर म
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