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संभावनाओं का सागर

13 Aug 2019

ऊष्मा संचरण / प्रकाश की यह जानकारी नहीं जानते होंगे !




  • क्या प्रकाश को रोका जा सकता है ? 
  • क्या प्रकाश की चाल बदलती है ? 
  • प्रकाश कितने रंगों से मिलकर बना है ? 
  • प्रकाश की चाल की कितनी होती है ? 







     ऊष्मा संचरण की तीन विधियाँ होती हैं -

  1. चालन
  2. संवहन 
  3. विकिरण 




    क्या हम जाानते हैं कि इन तीनों विधियों में वह कौन - सी मुुख्य वजह है जिसका होना अनिवार्य है। इसका मतलब यह है कि बिना इसके ऊष्मीय ऊर्जा का संचार होना संभव नहीं है। तापान्तर ही वह मुख्य वजह है जिसके कारण ऊष्मा का संंचार या आदान-प्रदान होता है। 
              यह पोस्ट ज्ञान की दृष्टि से बड़ा महत्वपूर्ण है। सबसे पहले हम ऊपर दी गई तीनों विधियों की पुरी जानकारी ले लेते हैं। 




       परिभाषाएँ   

   चालन ( Conduction )

          यदि किसी वस्तु में एक स्थान का ताप 🔥 अधिक और उसी वस्तु के दूसरे स्थान का ताप 🔥 कम है तो अधिक ताप वाले कण के नजदीक कम ताप वाले कण की तरफ ऊष्मीय ऊर्जा  प्रवाहित या संचरित होती है।






   संवहन (  Convection ) 

             किसी तरल पदार्थों ( द्रव और गैस ) में यदि किसी स्थान का ताप अधिक हो तो घनत्व में कमी हो जाने से तरल ऊपर उठता है और कम ताप ( अधिक घनत्व ) का तरल उसका स्थान ले लेता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक कि सम्पूर्ण तरल एक ही ताप पर न हो जाए। इस क्रिया में तरल  पदार्थ के कण स्वयं स्थानांतरित होकर ऊष्मा का संचरण करते हैं। 








विकिरण ( Radiation )

              अधिक ताप की वस्तुओं से कम ताप की वस्तुओं को विधुत - चुम्बकीय तरंगों के रूप में ऊष्मा स्थानांतरित होती है। इन विकिरणों की प्रकृति प्रकाश की प्रकृति से मिलती - जुलती है। इन्हें अवरक्त विकिरण भी कहते हैं। इनके संचरण के लिए किसी पदार्थ माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।

उदाहरण : जैसे सूर्य से पृथ्वी तक  ऊष्मा, ऊष्मीय विकिरण द्वारा ही पहुँचती है।

विकिरण ऊष्मा संचरण का एक ऐसा तरीका है जो वातावरण में मौजूद अतिसूक्ष्म कणों
के द्वारा संचरित होती है।
जैसे : हमारी आवाज 🔉 भी वातावरण में मौजूद शूक्ष्म कणों द्वारा ही होती है। चलिए कुुछ रोचक और मजेदार जानकारियाँ देखते हैं, जो हमें किताबों में भी शायद ही पढ़ने को मिले।
          सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी 14 करोड़ 50 लाख किलोमीटर है। अब क्या यह possibility( संभावना ) है कि बिना किसी माध्यम के प्रकाशीय ऊर्जा पृथ्वी तक पहुंच सके। हमने ऊपर 👆 पढ़ा है कि ऊष्मीय ऊर्जा बिना अन्तर के एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं पहुंच सकती है। इसलिए प्रकाश को सूर्य से पृथ्वी तक आने में या जाने के लिए इनके ( सूर्य और पृथ्वी ) बीच  ऊष्मीय ऊर्जा में अन्तर अनिवार्य है। इससे निम्नलिखित बातें  सामने आती हैैं -

  •  सूर्य के प्रकाश के मार्ग में यदि कोई इससे अधिक प्रकाश या ऊष्मीय ऊर्जा हो तो सूर्य का प्रकाश इससे होकर नहीं जा सकता है। 
  • प्रकाशीय अथवा ऊष्मीय ऊर्जा के संचरण के लिए इसके मार्ग में ऊष्मा में अन्तर होना चाहिए। 
  • विकिरण ऊष्मीय ऊर्जा  की चाल प्रकाश की चाल   3 × 108 मीटर / सेेकंड  के बराबर है। 
  • विकिरण या प्रकाश की चाल ठंडे या अधिक घनत्व वाले माध्यम में कम होती है ( जैसे : जल में )। 






व्यवहारिक जीवन में उपयोग। 

Use in practical life. 


  1. रात्री या अन्धेरे में मोबाइल या टीवी देखते समय हमें कोई लाईट या बल्ब 💡 जलाकर रखना चाहिए जिससे कि मोबाइल या टीवी से निकलने वाली रोशनी आँखों में ना लगे। 
  2. रात्री को सोते समय भी कोई ( हल्का ) उजाला जरूर रहने दें जिससे शरीर की ऊष्मीय ऊर्जा बनी रहे ( ठंडी के मौसम में ) । 
  3. रात्री में सोते समय यदि लाईट को बंद करें तो गर्मी थोड़ी कम  लगती है। 







  अगर हम रात के अंधेरे या दिन में भी किसी अंधेरे में मोबाइल का इस्तेमाल अधिक से अधिक करते हैं तो मोबाइल की स्क्रिन से निकलने वाला प्रकाश आपकी आंखों पर लोड डालेगा और इसमें उपस्थित ऊष्मीय ऊर्जा आंखों को गर्म कर देगी । इस तरह सरदर्द और फिर आंखों में समस्या का होना शुरू हो जायेगा।
  अगर यह मोबाईल या टीवी का इस्तेमाल हम कुछ उजाले में करते हैं तो बहुत हद तक हम इन परेशानियों से छुटकारा पा सकतें हैं।




     यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। इसके बारे में कोई राय या सुझाव हो तो अवश्य कमेंट बॉक्स में लिखें। धन्यवाद.. 


15 अगस्त 1947 को कौन सा दिन था ?

                       हम सभी को यह पता होता है कि 15 अगस्त 1947 को हमारा देश ( भारत ) स्वतंत्र ( Independence ) हुआ था। पर हममें से कुछ लोग ही यह जानते होंगे कि 15 अगस्त 1947 को कौन - सा वार ( दिन ) था।




हमारा प्यारा भारत को ( 15 अगस्त 1947 )  शुक्रवार को स्वतंत्रता का अधिकार हासिल करने में कामयाबी मिली थी। शुक्रवार का संंधि - विक्षेद करें तो हमें ये शब्द मिलते हैं -
शुक्रवार =  शुक्र  +  वार
शुक्र  = शुक्र ग्रह
वार   =  दिन
होता है।



15 अगस्त 1947  को कौन - सा  दिन था ?


    15  अगस्त 1947 को कौनसा दिन था यह मोबाईल में मौजूद कलेंडर की मदद से देख सकते हैं पर अगर हमसे यह जानकारी बिना कहीं से देखे पता करनी हो या परिक्षा में ऐसा कोई सवाल आये तो हम क्या करेंगे ? तब तो हमें परेशानी होगी है ना इसी स्थिति को देखते हुए यह पोस्ट बनाया गया है। 







पता करने की विधि :


           15 अगस्त 1947 से 15 अगस्त 2019 के बिच के दिनों की संख्या ज्ञात करके से भाग करके यह देखना है कि शेषफल क्या आ रहा है ?

15.8.1947 और 15.8. 2019 के बिच दिनों की संख्या = 72 वर्ष + 18 दिन 
18 दिन लीप वर्ष का है। चुँकि हर चार वर्षों में एक लीप वर्ष होता है। इसलिए 72वर्षों में कुल लीप वर्ष  18 होगें । 
     चुँकि 1 वर्ष = 365 दिन होता है। अगर इसमें 7 से भाग करें तो शेष 1 आता है। तभीतो हर अगला वर्ष एक दिन आगे से शुरू होता ( लीप वर्ष को छोड़कर ) है। जैसे - माना किसी वर्ष 1 जनवरी को सोमवार है तो इसके बाद वाले वर्ष की 1 जनवरी को मंगलवार होगा ( यदि पहला वर्ष लीप न हो तो ) । जैसे : 2018 - 019.
इस तरह 72 वर्ष को 72 दिन मान सकते हैं। 72 और 18 का योग = 90 
90 में 7 से भाग करने पर शेष 6 मिला है। इसका मतलब 15 अगस्त 2019 से 6 दिन आगे ( या 1 दिन पिछे ) वाला दिन (  गुरुवार/वृहस्पतिवार ) ही 15 अगस्त 1947 का है।






दिन पता करनी की पुरी जानकारी के लिए इसे पढ़ें 👉   किसी भी तारीख को दिन कैसे जाने ?    


 आपको यह जानकारी कैसी लगी जरूर बताएँ ! 

Thanks by : Possibilityplus.in

12 Aug 2019

इन्द्रधनुष कब, कहाँ , क्यों और कैसे बनती है, आसमान में ?

 

   इन्द्रधनुष का आकाश में बनना जहाँ एक तरफ पर्यावरण की सुन्दरता को बयाँ करता है तो वहीं दूसरी तरफ इसके बारे में जानने की जिज्ञासा भी उत्पन्न होती है। इन्द्रधनुष कब, कहाँ, क्यों और कैसे बनती है इन सभी सवालों का जितना महत्व है उतना ही महत्व इस बात का भी है कि यह गोलाकार में ही क्यों बनती है। इन सभी सवालों का जवाब हम इस पोस्ट में खंघालेंगे।





    इन्द्रधनुष का आकाश में बनना..

      हल्की-फुल्की बारिश या बारिश के बाद आकाश में पानी की कुछ बूँदों की मौजूदगी में सूर्य की किरणें जब इनपर पड़ती है तो ये किरणें अपने अलग - अलग तरंदर्घ्य के कारण प्रकाश सात रंगों में अलग- अलग हो जाता है। इस तरह इममें सात रंग होते हैं। चूँकि यह धनूष के आकार की होती है और यह इन्द्र के धनुष जैसी सुन्दर होती है। इसलिए इसे इन्द्रधनुष के नाम से जाना जाता है। 



यह तो इन्द्रधनुष बनने की संक्षिप्त जानकारी है जिसकी वजह से निम्नलिखित मुख्य सवाल छूट जाते हैं - 
  1. यह गोलाकार में क्यों बनती है ?
  2. प्राकाशरुपी इन्द्रधनुष को बनने की पुरी जानकारी ? 
  3. बारिश में कभी-कभी देखने को ही क्यों मिलती है ? 




 इन्द्रधनुष बरसात के मौसम में ही बनती है। इससे यह बात स्पष्ट होती है कि इसके बनने की वजह पानी है। अगर ऐसा न होता तो यह हर मौसम में बनती। वैसे अगर आप भी इन्द्रधनुष बनाना चाहते हैं तो किसी भी मनचाहे मौसम में बना सकते हैं। इसके बारे हम आगे पढ़ेंगे। इसलिए अन्त तक जरूर पढ़िएगा।




इंद्रधनुष क्यों बनती है 


         इंद्रधनुष के बनने का कारण है वर्ण - विक्षेपण ( Dispersion )  । वर्ण - विक्षेपण क्या है, परिभाषा देखिए ➡️ 

वर्ण - विक्षेपण :  श्वेत प्रकाश - किरण का अपने अवयवी ( सात ) रंगों की प्रकाश - किरणों में विभाजित या अलग होना वर्ण - विक्षेपण कहलाता है। 
    वर्ण - विक्षेपण क्यों होता है यह जानना भी जरूरी है। 






प्रकाश का वर्ण - विक्षेपण क्यों होता है ? 

      श्वेत ( सफेद ) प्रकाश सात रंगों से मिलकर बना है और सभी रंंगों की विचलन या मुड़ने की क्षमता अलग - अलग होती है। इसी वजह से जब श्वेत प्रकाश को किसी विचलन भरे हुए मार्ग से गुजारते हैं ( जैसे - प्रिज्म, पानी की छोटी बूँदें आदि। ) तो सभी रंग अपने विचलन अंतर के कारण से अलग - अलग प्रदर्शित होने लगते हैं। 




नोट : वास्तव में प्रकाश के ☀ सात रंग ( अलग - अलग ही होते ) हैं पर इनके बीच दूरी इतनी कम होती है कि इनको अलग - अलग ( नंगी आँखों से ) देखना मुश्किल होता है। लेकिन जब यही प्रकाश किसी प्रिज्म या पानी की छोटी बूँदों से होकर गुजरता है तो इनमें दूरियाँ या अन्तर बढ़ जाता है और हमें स्पष्टतः दिखाई देने लगता है। 




 इंद्रधनुष गोल आकार में ही क्यों बनती है ?


         इन्द्रधनुष का गोल आकार में बनना भी एक महत्वपूर्ण सवाल है। इस सवाल का उत्तर बहुत कम लोग ही जानते हैं। पर Possibilityplus.in आपको उन सभी सवालों के जवाब मिलेंगे जो आप जानना चाहते हैं।
दरअसल सूर्य का प्रकाश अर्धवृत्ताकार के रुप में गति करता है ऐसा निष्कर्ष प्रकाश के वर्ण - विक्षेपण  होने  के बाद निकल रहा है ।

 हम स्पष्टरुप से यह देख रहे हैं कि सातो रंगों में अलग - अलग विचलन है जो इन्हें अलग करता है। इसका मतलब यह हुआ कि ये सातों प्रकाशीय रंग एक साथ होते हैं पर पर फिर भी अलग होते हैं। अतः स्पष्टतः हम यह कह सकते हैं प्रकाशीय ऊर्जा अर्धवृत्ताकार पथ बनाते हुए चलता है।
   वृत्ताकार के सबसे बाहरी भाग पर लाल और सबसे आन्तरिक भाा पर बैगनी होता है। इनके अलावा और पाँँच रंग  नारंगी, पीला, हरा, आसानी और नीला। जो लाल और बैगनी दोनों के बीच में होते हैं। और यही वजह है कि इन्द्रधनुष का रुप भी अर्धवृत्ताकार अथवा गोल होता है। 




इन्द्रधनुष कैसे उत्पन्न करें ?

अभी तक हमने इन्द्रधनुष कब, कहाँ और कैसे बनती है ऐसे सवालों को जाना। पर अब हम इन्द्रधनुष कब, कहाँ और कैसे बनती इसके बारे में जानकारी बटोरेंगे। इन्द्रधनुष को बनाने के लिए तीन शर्तें हैं -
  1. सूर्य का प्रकाश 
  2. पानी के फव्वारे ( अत्यंत शूक्ष्म बूँदें )
  3. छाया





     इन्द्रधनुष को बनाने के लिए ऐसी जगह ढूँढे जहाँ सूर्य का प्रकाश और छाया दोनों का एक स्थान पर संगम या मिलान बिन्दु हो। प्रकाश और छाया के केंद्र बिंदु पर मुँह या किसी अन्य तरिके के पानी का फव्वारा ⛲ बनायें। आपको फव्वारे के आसपास छोटी सी इन्द्रधनुष बनती हुई दिख जायेगी। सूर्य का प्रकाश जितना तेज़ होगा इन्द्रधनुष उतनी ही स्पष्ट होगी। इसके लिए दोपहर का समय सबसे सही होता है। 




     आपको यह जानकर कैसा लगा जरुर बताएँ क्योंकि आपके कमेंट के आधार पर ही हमें कुछ नया करने की प्रेरणा मिलती है।.
धन्यवाद...by: Possibilityplus.in


1 Aug 2019

केले 🍌 का पेड़ पानी में क्यों नहीं डूबता ?





Www.possibilityplus.in पर आप सभी का स्वागत है। इस आर्टिकल में हम केले के पेड़ का पानी में ना डूबने के कारण को जानेंगे।



नोट : इस साइट पर ऐसी जानकारियाँ मिलती हैं जो हमारे दैनिक जीवन में उपयोगी होती हैं पर हम उनके बारे में पुरी तरह से नहीं जानते हैं।  अगर आप ऐसी कोई जानकारी जानना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में लिखकर जरुर पूछें।  धन्यवाद......




 केले 🍌 का पेड़ पानी में क्यों नहीं डूबता ?


    केले का पेड़ पानी में क्यों नहीं डूबता ? यह प्रश्न वैज्ञानिक, तार्किक,  उपयोगी और मजेदार भी है। इसके ना डूूबने की वजह है इसके अन्दर मौजूद पानी की मात्रा। जी हाँ पानी की मात्रा ही वह असल वजह है जो इसे पानी या जल के अंदर डूबने से बचाता है।
        यह उत्तर मोटे तौर पर पर जो यह तो बता रहा है कि किसके कारण ऐसा होता है, मगर हमें बात हजम नहीं हो रही है अथवा पुरी तरह से समझ में नहीं आया है। चलिए सरल और वैज्ञानिक तरीके से समझते हैं।


    स्पष्टीकरण :  पानी  में कोई वस्तु डूबेगी या नहीं यह दो ✌️ बातों पर निर्भर करता है -

पहली बात : वस्तु का घनत्व। 
दूसरी बात : वस्तु की आकृति 


पहली बात के अनुसार 

      पहली स्थिति के अनुसार यदि जिस भी वस्तु का घनत्व पानी के घनत्व से अधिक होगा वह वस्तु पानी में अंदर चली जायेगी अथवा डूब जायेगी। 

इसके विपरीत अगर वस्तु का घनत्व कम हो तो वस्तु पानी में नहीं डूबेेगी ( थोड़ा - बहुत हिस्सा ही जल के अंदर रहेगा ) बल्कि पानी के ऊपर तैरेगी। 


और अगर वस्तु का घनत्व पानी के घनत्व  के बराबर हो तब वस्तु पानी में डूबती हुई तैरेगी। 
       चुंँकि केले के पेड़ में लगभग 88 % तक पानी / जल ( water 💦 ) होता है । इसके अलावा एक द्रव ( लगभग 10% ) होता है जो पानी से भी हल्का होता है।  इसलिए केला हल्का - सा  डूबतेे हुए तैरता है जल / पानी में। 




दूसरी बात के अनुसार

       यदि अधिक घनत्व वाली वस्तु को विशेष आकृति में बनाया जाये तो यह पानी में नहीं डूबेगी। जैसे जब वस्तु को अधिक से अधिक क्षेत्रफल में फैला दिया जाता है तो वस्तु द्वारा पानी पर लगाया बल पानी के  उत्पेक्ष बल ( ऊपर की ओर लगने वाला बल ) से कम हो जाता है और वस्तु पानी से अधिक घनत्व होने के बाद भी पानी में नहीं डूबती है। 

     


  आपको क्या लगता है, अपनी बात कमेंट बॉक्स में लिखकर जरुर शेयर करें। धन्यवाद......


29 Jul 2019

सतत , वितत या मिश्रित भिन्न ( continues fraction ) by : Possibilityplus.in





   ऐसी भिन्न जो कई भिन्नों का समूह हो या कई भिन्ने  एक के बाद एक किसी एक भिन्न के हर से वृक्ष की शाखाओं के रूप में जुड़ी हों तो ऐसी भिन्न को मिश्रित, वितत या सतत भिन्न ( continues fraction ) कहते हैं। चलिए इसके बाारे में A to Z ( ए टू जे़ड ) जानकारियाँ लेते हैं।




     आर्टिकल के बारे में संक्षिप्त जानकारी 💡
          यह आर्टिकल गणितज्ञ और टेक्निकल लोगों के लिए बड़ा महत्वपूर्ण है क्योंकि मिश्रित भिन्न बहुव्यापी है।  इसका उपयोग हर क्षेत्र में किया जाता है। इसलिए इस  आर्टिकल को पुरी तरह से ध्यान  साथ पढ़िएगा।    



सतत भिन्नों का योग 🔖


सवाल 1.

का योग ज्ञात करें। 





हल : सबसे पहले 1 + 1/2 जोड़ना होगा। या यूँ कहें कि निचे जोड़ते हुए ऊपर की तरफ बढ़ते हैं।
इसलिए.             1 + 1/2 = ( 1×2 + 1 ) / 2
                                     = 3/2.

इस मान को रखने पर भिन्न हो जायेगी -
                       1 + 1 / ( 3/2 ) 
अब यहाँ से इसे दो तरिकों से हल कर सकते हैं -
पहला तरीका 
        इसमें    1 / ( 3/2 )  ,  2 का 1 के साथ गुणा होगा। 2 का गुणा 1 में इसलिए हो रहा है क्योंकि 3 में 2 की भाग है यानी 2, 1 का सहगुणनखंड  है।
तब भिन्न                2/3,    हो जायेगी।
अब भिन्न    1 + 2/3  हो जायेगी। 

इनको जोड़ने पर,      ( 1 × 3 + 2 ) / 3 = 5/3       - Ans.





दूसरा तरिका 




इस तरह से हल करते हैं। यहाँ पर दोनों विधियों के बारे में बताया गया जिससे आपको कोई संसय ना रहे। चलिए अब और बड़े सवालों को देखते हैंं।


सवाल 2. 

हल : सबसे पहले 3 + 1/4 को हल करना होगा। तब 
3 + 1/4  =  ( 3×4 + 1 ) / 4
              =  13 / 4. 

अब  2 + 1 / ( 13/4 ) का योग करना होगा। तब
2 + 1 / ( 13/4 ) = 2 + 4/13
                         = ( 2×13  +4 ) / 13
                         =  ( 26 + 4 ) / 13
                         = 30 / 13
 अतः Ans.        = 30 / 13.




सतत भिन्नों का घटना 🔶




सवाल 1. 



हल :  घटाने में भी निचे से ऊपर की तरफ हल करते जाते हैं।

बस फर्क इतना है कि इसमें घटाते हैं। 
 तब 3 - 1/0 को हल करने पर,
( 3×0 - 1 ) / 0 = - 1 / 0.

अब इस मान को भिन्न में रखेगें तब भिन्न
2 - 1 / ( - 1/0 ) = ( 2 - 1 × 0 ) / - 1
                        =  - 2

अब इस मान को भिन्न में रखेगें तब भिन्न
1 - 1 / - 2 =  ( 1×-2 - 1 ) / - 2
                =  ( - 2 - 1 ) / - 2
                =. - 3 / - 2
                = 3 / 2

उत्तर         = 3/2.



सतत भिन्नों का गुणा  


सवाल 1.  



हल :  यह सतत भिन्न का गुणा है। जब एक भिन्न में दूसरी भिन्न से भाग किया जाता है तब ऐसा होता है। इसमें जिस भिन्न से भाग करते हैं उसके हर का गुणा पहले वाली भिन्न के अंश में हो जाता है। 

 भिन्न का  अंश / हर    या  ( 1 × 1 ) /  2 × 1 = 1 / 2.

तथा   3 × 1 / 4 = 3 / 4
            
अब  ( 3 / 4 )  से 1 / 2 में भाग करनी होगी। 
तब.    ( 1 / 2 ) / ( 3 / 4 ) = 4 / 2 × 3
                               = 4 / 6.
उत्तर -              4 / 6



अगर 4 के स्थान पर हो तो हल क्या होगा ? 


सवाल 2.  


हल :   पहले वाले उदाहरण की भांति  हल करने पर, 
3 × 1 / 0  या ( 3 × 1 ) / 0 
              = 3 / 0.

इसके बाद  1 × 1 से 2 × 1  का मान निकालेंगे । तब

तब,           1 × 1 / 2 × 1  = 1 / 2.

अब ( 3 / 0 )  से ( 1 / 2 ) में भाग करना होगा। तब
 ( 1 / 2 ) / ( 3 / 0 ) =  0 / 6.

उत्तर -                0 / 6.







सतत भिन्नों की भाग   

28 Jul 2019

गिरते समय हमारे हाथ क्यों फैल जाते हैं और हमें सपने कैसे दिख जाते हैं आँखें बंद होते हुए भी ?

     क्या आप जानते हैं कि हमारी धड़कन, हमारी सांसें को कौन चलाता है ? हमें सपने आँखों के बंद होने के बावजूद भी कैसे दिख जाते हैं, यही नहीं हम सही गलत जो भी करते हैं इसके पीछे क्या राज है इन सभी के बारे विस्तार से जानेंगे।

इस आर्टिकल में हम ऐसी बातें जानेंगे जो हमारे जीवन जीने के तौर-तरीकों को ही नहीं बल्कि हमें अपनी असली स्वतंत्रता से जीने की सही मामले में आजादी मिल जायेगी। इसलिए इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़िएगा और अपने किमती राय भी दिजिए।


सबसे पहले इस सवाल को जानते हैं कि कैसे हमारे हाथ शरीर के गिरते समय अपने - आप फैल जाते हैं।




 हमारे दैनिक जीवन में अनेक ऐसी क्रियाएँ अथवा घटनाएँ हैं जिनके बारे में हम कहीं न कहीं पूरी तरह से नहीं जानते हैं। उन्हीं में से एक यह है कि जब हम गिरने वाले होते हैं तो हमारे हाथ फैल जाते हैं।ऐसा क्यों होता है यह सवाल अगर अपने आप से पूछो तो ज्यादातर लोगों को इसका ठीक - ठीक उत्तर नहीं मिल पाता है। चलिए अपने शरीर के गुण के बारे में जानते हैं।










 गिरते समय हमारे हाथ क्यों फैल जाते हैं ?

       हमारे हाथ का फैलना ( गिरते समय ) हमारे शरीर के एक विशेष गुण का होना है। दरअसल हमारे शरीर में मुख्यरुप से दो दिमाग / मस्तिष्क माने जाते हैं  - 
  1. दिल / मन ( अचेत मन या अवचेतन मन ) 
  2. दिमाग / मस्तिष्क ( चेतन या सचेत मन ) 


      इसमें दिल / मन, दिमाग से अत्यंत तेज होता है ( गति में )। इसके लिए बहुत सी क्रियाएँ 1 सेकेंड से भी कम समय में पुरी ही नहींं होती बल्कि काफी भी होती है। दरअसल हमारा मन यह कभी भी नहीं चाहता है कि हम किसी तरह की तकलीफ सहें क्योंकि इसे वह अहसास पता है जो इसे अच्छे नहीं लगते हैं। यह हमेशा अच्छा अहसास कि इच्छा रखता है और यह इसी अच्छे अहसास को पाने के लिए हमेशा काम करता रहता है।


 इसलिए जब हमारा शरीर अचानक में गिरनेे वाला होता है तो हमारा यह मन वह पोजीशन प्रदान करता है जिससे हमारे शरीर को कोई हानि ना पहुुंचे। यही कारण है कि हमारे हाथ शरीर के गिरने से पहले ही फैल जाते हैं।
         क्या हम ऐसे समय में यह सोच सकते हैं कि हमें क्या करना है और क्या नहीं। दरअसल हमारे दिमाग को किसी भी वस्तु या क्रिया को समझने में कम से कम 1 सेकेंड तो लगेगा पर तबतक तो हम धरती पर गिर चुके होगेें। 

   चलिए अब जानते हैं वैज्ञानिक दृष्टि से कि अचानक गिरते समय हमारे हाथ फैलने के क्या होता है।  
दरअसल जब हमारा शरीर अचानक गिरता है तो इसकी गति एकाएक तेजी से बढ़ने लगती है जिसके विरोध में हमारा हाथ फैल जाता है और गिरने की गति थोड़ी सी कम हो जाती है अथवा यह शरीर की सबसे संतुलित स्थिति होती है उस समय। 
       उपर्युक्त बातें यह भी स्पष्ट करती हैं कि मन को अचेत या अवचेतन मन कहना तर्कसंगत नहीं होगा क्योंकि यह तो हमेशा सक्रिय ( active ) रहता है और तभी तो इसे हर छोटी - बड़ी क्रियाओं का ज्ञान  पहले ही हो जाता है। भले ही यह तर्क नहीं करता, पर हमेेशा जागृत रहता है और जागृत रहना भी सचेत होने की पुष्टि करता है।









मन ( Unconscious mind ) की विशेषताएँ 

मन की विशेषताएँ इस प्रकार हैं - 
  • मन ना तो सोचता है और ना ही समझता है। 
  • मन अहसास, महसूस अथवा भावनाओं के आधार पर चलता है। 
  • इसकी गति प्रकाश की गति से भी तेज होता है। 
  • इसमें अलौकिक शक्तियों को पढ़ने की क्षमता होती है। 
  • मन या अवचेतन मन से ही हमारे शरीर की क्रियाओं का सम्पादन होता है। 
  • हमारे शरीर में जैसा अहसास होगा वैसी ही ऊर्जा हमारे अन्दर होगी। 
  • मन की मदत से आदमी भगवान के तुल्य हो सकता है। 
  • पूजा - पाठ भी मन से सफल होती है, मस्तिष्क से नहीं। 





 मन की विशेषता और कमियों का स्पष्टीकरण 📣


    मन की विशेषताएँ इतनी है कि इसके लिए एक किताब भी कम पड़ जायेगी। मन की विशेषताओं के अलावा कुछ कमियां हैं जो मुश्किलें पैदा करती हैं। चुँकि हमने ऊपर पढ़ा है कि मन कुछ सोचता नहीं है कि क्या गलत है और क्या सही है। इसे अगर गलत काम भी अच्छा लगे तो वह उसी को करना चाहेगा बिल्कुल बच्चे की तरह जिन्हें गलत - सही का कोई पर्क नहीं होता। और दिमाग / मस्तिष्क बच्चों के अभिभावकों का काम करता है जो मन को गलत - सही का फर्क बताता है। हमारा मस्तिष्क हमारे मन को जब उसकी खामियों के  ( जो वह करना चाहता है ) बारे में बताता है और यह अहसास दिलाता है कि इससे तुम्हें बुरा अहसास मिलेगा और अगर तुम्हें सही में अच्छा अहसास पाना है तो यह करो। जो दिलाशा हम मन को देते हैं वह उससे भी अधिक अच्छा लगना चाहिए जो पहले वह करना चाहता था। ऐसा होने पर मन - मस्तिष्क के साथ हो लेता है जिसे साधरण भाषा में बात मानना कहते हैं । यह वही स्थिति है जब हमे कोई मतभेद नहीं होता है और तभी तो हमारे सर में कोई तनाव नहीं होता है। हमारे सर में तनाव ज्यादा तब होता है जब मन और मस्तिष्क के मतो में अन्तर होता है यानी मन कुछ और मस्तिष्क कुछ कहता है। कभी-कभी हमें बहुत सी बातें बिना सोचे समझे मिल जाती हैंं पर हम जबतक वैज्ञानिक आधार पर नहीं समझ पाते हैं तबतक हम उसे जानते हुए भी विश्वास नहीं करते / कर पाते।









हमें स्वप्न / सपने कैसे दिखते हैं जबकि हमारी आँखें बंद होती हैं। 


   बहुत से लोग यह सोचते होगें कि बिना आँखों को खोले कुछ देखा नहीं जा सकता है पर सपने हमें कैसे दिख जाते हैं जबकि हमारी आँखें तो बंद रहती हैं। इसको जानने और समझने के लिए हमें यह जानना होगा कि सपने किन  - किन कारणों से दिखते हैं। यह मुख्यतः दो कारणों से दिखते हैं -

  1. सोंच के कारण सपने दिखना। 
  2. बिना सोचे सपने दिखाई देना। 




स्पष्टीकरण :  सबसे पहले यह जान लेते हैं कि हमें कोई भी वस्तु कैसे दिखाई देती है। जब हम किसी भी वस्तु को देखते हैं तो उस वस्तु का प्रतिबिम्ब हमारे रेटिना के फोकस पर बनता है। इस तरह हमेें वह वस्तु दिखाई देने लगती है। इसी तरह से जब हम किसी व्यक्ति या वस्तु की कल्पना गहराई से करते हैं तो उस व्यक्ति या वस्तु का प्रतिबिम्ब हमाारी रेटिना पर पर बनने लगता है और सपने में भी यह दिखाई दे सकता है । जैसे हमें यह अहसास होता है कि हमें वह वस्तु वास्तव में दिखाई दे रही हो। पर यह तभी possible है जब हम उस व्यक्ति या वस्तु को पहले से ही देखा हो।
    अब बात करते हैं कि वह व्यक्ति या वस्तु हमें सपनों में कैसे दिखाई देता है जिसके बारे में हमने ना कभी सोचा और ना ही कभी भी देखा हो। इस तरह के सपने दैवीय हो सकते हैं। हम जानते हैं कि जिस तरह से कोई फोटो, विडियो आदि चिजे एक मोबाईल से दूसरे मोबाईल तक ऊर्जा के रूप में स्थानांतरित होते ( आते - जाते ) हैं। बिल्कुल इसी तरह से हमारी आत्मा से शरीर तक सभी दृश्य ऊर्जा के रुप में आते हैं।  ऐसा तब होता है जब शरीर के आसपास ऐसी ऊर्जाओं का आना - जाना होता है। यह ऊर्जा हमारे शरीर से कभी-कभी अपने आप कनेक्ट हो जाती है और कभी-कभी कनेक्ट कराई जाती है। जो दैवीय शक्तियों द्वारा भी हो सकती है। यह पुरी तरह से कहना वैज्ञानिकों के लिए भी मुमकिन नहीं है क्योंकि यह वैज्ञानिक दृष्टि से सिध्द नहीं हुआ है।





आपकी क्या राय है जरूर बताएँ हमें बहुत खुशी होगी। धन्यवाद...



27 Jul 2019

आसमानी बिजली ⛈ से कैसे बचे ?


              बरसात के मौसम में आकाशीय बिजली ( वैद्युत ) मनुष्य के लिए किसी मुुसीबत से कम नहीं है। क्योंकि  हर साल ( वर्ष ) में बहुतों की जान चली जाती है। बिजली जब कड़कती है तो हर व्यक्ति डरने लगता है क्योंकि सभी को यह पता है कि यह जिस पर गिरि उसकी मौत लगभग तय  है।


     अब सवाल है कि इस मौतरुपी बिजली के कहर से कैसे बचा जाये।
 इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ने पर हमें वो जानकारियाँ मिलेगी जो हमें आकाशीय बिजली से बचने में बहुत हद तक मदत करेगी।



    आकाशीय बिजली से बचने के उपाय 




 जब आकाशीय बिजली लगातार तड़के तो हमें 
आकाशीय बिजली ⛈ से बचने के निम्नलिखित उपाय करने चाहिए :  - 

  • छोटे और घने पेड़ के नीचे ही खड़े हों ( यदि खड़ा होना पड़े तो ) 
  • अगर संभव हो तो किसी भवन ( घर ) में चले जायें।
  • प्लास्टिक हैंड वाली छतरी ☔ का उपयोग करें।
  • मोबाइल फोनस् को Flight mood पर करें या Switch off कर दें ।
  • टेलीविजन का इस्तेमाल भी ना करें। 
  • अपने घर के ऊपर किसी छड़ को अवश्य लगायें। 
  • अगर आप किसी वाहन में हैं तो वाहन से ना निकलें। 
  • छत पर या खुले मैदान में ना रहें। 
  • बिजली, टेलीफोन के खंभों से दूर रहें। 
  • अगर त्वचा में झुनझुनी हो तो तुरन्त निचे बैठकर  कानों पर अपने हाथ रख दें। 
  • अपने हाथ में कोई धातु ( जो विद्युत चालक हों ) को अपने से दूर करदें। 
  • खेत में फावड़ा न चलायें। 











आकाशीय बिजली क्यों गिरती है ? 

      जिस प्रकार पानी जिस तरफ ढाल पाता है उधर से जाने लगता है। यहां पर समझने वाली बात यह है कि पानी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए ढाल अथवा झुकाव जरूरी होता है ठीक उसी तरह बिजली के आवागमन ( आने - जाने )  के लिए विभव में अन्तर ( या विभवान्तर ) जरुरी होता है। बिजली उसी वस्तु पर गिरती है जिसका विभव इसके विभव से कम हो वैसे आकाशीय बिजली का विभव हजारों में होता है। इसलिए यह बिजली खम्भों के तारों पर भी गिर जाती है। सबसे ज्यादा बिजली उस मार्ग से होकर जाती है जिधर इसे सबसे ज्यादा विभवान्तर मिले। बिजली का उस वस्तु पर गिरने की possibility ज्यादा होती है जो अधिक से अधिक नुकिला हो। जैसे : लम्बे और पतले पेड़, खम्भे, आदि। क्या आप यह सोच रहे हैं कि बड़े - बड़े महानगरों में बड़ी - बड़ी बिल्डिंग या टावर होते हैं पर उन पर तो नहीं गिरती आखिर  क्यों ? 

 दरअसल बिल्डिंग और टावरों के सबसे ऊपरी भाग पर नुकिलानुमा धातु की छड़ होती है जो आकाशीय बिजली को उसी के प्रेरण से प्लस चार्ज के द्वारा निश्क्रिय कर देती है। इसके अलावा एक रास्ता और है अगर घर, बिल्डिंग तथा टावर के ऊपर चारो ओर एक धातु तार को धरती से संबंधित कर दें तो इसपर आकाशीय बिजली गिरते ही पृथ्वी में चली जायेगी। 

   एक सवाल अब भी उठ रहा है कि जब पेड़ - पौधों पर बिजली जब गिरती है तो इसमें आग 🔥 क्यों लग जाती है। इसका जवाब है जोड़ पर ढीला होना।






जिस तरह तार ढीला होने पर उसी जगह आग 🔥 लगती है जहां पर यह तार ढीला हो। 
ठीक इसी तरह आकाशीय बिजली जिस वस्तु पर गिरती वहां पर इसका जोड़ ढीला होता है और इसी कारण से वहाँ आग लग जाती है। 



इस पोस्ट के बारे में आपकी क्या राय है हमें जरूर बताएँ। धन्यवाद.. 

18 Jul 2019

हनुमानजी को उनकी परछाईं से कैसे पकड़ा रक्षशी सिंघिका ने ?



       यह पोस्ट बहुत ही तार्किकता पर आधारित है। यह भगवान हनुमान जी या बजरंगबली की एक घटना है। इस पोस्ट में हम जो भी पढ़ेंगे वो तार्किक और विज्ञान की दृष्टि से होगा।



   हममें से अधिकांश लोगों के मन में यह सवाल उठा होगा कि सिंघिका राक्षशी ने आखिर परछाईं की मदत से महाबली बजरंगबली को पकड़ लेती है। कैसे.. कैसे.. कैसे..
तो दिल थाम कर बैठ जाईए और पूरी जानकारी जरुर पढ़िएगा। तो चलिए देर मत करिए, शुरू करते हैं।







नोट : इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़िएगा क्योंकि मुख्य उदाहरण और व्याख्या अंत में ही है।

   


       सिंघिका राक्षशी ने हनुमान जी की परछाईं को कैसे पकड़ा ?

       सिंघिका राक्षशी ने हनुमान जी की परछाईं को कैसे पकड़ी होगी ? 
    दरअसल उसके पास ऐसी शक्ति या वरदान था जिससे यदि वह किसी भी वस्तु की परछाईयों को पकड़ ले तो वह वस्तु भी उसकी पकड़ में आ जायेगी। अब आप शायद यह सोच रहे होंगे कि यह तो सभी लोग जानते हैं कि किसी शक्ति के द्वारा ही वह किसी भी वस्तु परछाईं को पकड़ने में सक्षम थी। पर हम वैज्ञानिक तरीके से उसे समझना चाहते है। चूंकि हमारे पास परछाईं के अलावा कोई और चारा नहीं है जिस पर हम अपनी सोंच - विचार करें। इसलिए परछाईं को पुरी तरह से समझते हैं। 






 परछाईं कैसे बनती है ? 

       हम जानते हैं कि सामान्यतः परछाईं काली   ही होती है। अब हमें यह जानकारी जानना बहुुत जरूरी है कि यह काली क्यों होती है ? ❍






     परछाईं के काले होने का कारण

परछाईं के काली होने का कारण जानने से पहले यह जान लें यह कैसे बनती है।
परछाईं का बनना - जब किसी वस्तु पर कोई प्रकाश की किरणें पड़ती है तो वस्तु के जितने भाग  पर प्रकाश पड़ता है तो वह भाग ऊर्जा के कारण चमकने लगता है। वस्तु के इसी भाग के ठीक उल्टी तरफ प्रकाश की किरणें नहीं पहुंच पाती हैं और इसी कारणवश वस्तु का यह भाग ऊर्जा से वंचित रह जाता है। इसी कारण से जितने भाग पर प्रकाश नहीं पड़ता है ठीक उतने भाग की छाया बन जाती है।
चूूंकि काला रंग नकारात्मक उर्जा / ऊर्जाहीनता का प्रतीक है। इसलिए परछाईं काली होती है। 







  अंधेरे या रात में ऊर्जा में कमी का होना 

        क्या आप जानते हैं अंधेरे या रात के अंधेरे में हमें ज्यादा डर  क्यों लगता है ? 
रात में प्रकाशीय ऊर्जा नहीं होती है चूंकि अंधेरा हमारे शरीर की ऊर्जा को निरंतर खिंचता रहता है जिससे हमारे शरीर की ऊर्जा इतनी कम हो जाती है कि हमें छोटी-छोटी बातों पर भी डर का अहसास होने लगता है। एक बात और जानना चाहोगे कि रात के अंधेरे में हमें नींद जल्द से जल्द क्यों आ जाती है तो इसका भी कारण अंधेरा ही है। 
  दरअसल जब हम अंधेरे के संपर्क में आते हैं तो हमारी आँखों को ऊर्जा की कमी होने लगती है जिससे हमारी आंँखें अपनेआप बंद होने लगती है। इस तरह से नींद जल्द से जल्द आ जाती है। वैसे अगर हम अपनी आँखों को बंद करके रखें तो भी नींद आने लगती है। कारण यह है कि जब हमारी आँखें बंद होती है तो भी कुछ दिखाई नहीं देता सिर्फ अंधेरे के अलावा। तो कुल मिलाकर कहें कि अंधेरा किसी भी तरह से आंखों को मिलना चाहिए बस और कुछ नहीं। 


अंधेरे के गुणों को देखिए :

  • अंधेरा लगभग सभी वस्तुओं की ऊर्जा को अपनी तरफ खींचता है। 
  • अंधेरे की तिव्रता जितनी अधिक होगी वह ऊर्जा को उतनी तीव्रता से खींचेगा। 




नोट : यह उपर्युक्त गुण प्रकाश के गुणों को  ऊल्टा करनेे पर मिला है। जब किसी वस्तु पर प्रकाश डाला जाता है तो उस वस्तु पर प्रकाशीय दबाव जरुर पड़ता है। दरअसल प्रकाशीय ऊर्जा, ऊर्जा के बंडलो के रूप में चलती है। अतः स्पष्ट है कि प्रकाश जिस भी वस्तु पर पड़ेगा उस वस्तु पर  दबाव तो लाज़़मी है। दबाव का ऊल्टा खिंचाव होता है। इसलिए अंधेरे का प्रभाव बल खिंचाव वाला होता है।




   व्याख्या :  अगर हमारा अंदाजा सही है तो इसके अनुसार राक्षशी  सिंघिका ने अपनी शक्ति से हनुमान जी की परछाईं को इतना काली कर दिया कि परछाईं का खिंचाव बल हनुमान जी के गतिकी बल से अधिक हो गया हो या परछाई को माध्यम बनाकर उनका पूरा परिणामी बल शून्य कर दिया हो । बिल्कुल ब्लैैक होल की तरह। जैसे ब्लैैक होल के पास आने वाली कोई भी वस्तु पूरी तरह से बिखर जाती है। ब्लैैक होल का खिंचाव बल इतना अधिक है कि इसमें से कोई प्रकाश भी गुजरकर नहीं जा सकता है। 
    आइए कुछ तर्क और उदाहरण देखते हैं जिससे इस व्याख्या को समझने में और मदत मिले। 

तर्क 
  • सिंघिका राक्षसी सिर्फ परछाई की मदद से ही किसी को पकड़ सकती थी। 
  •  कोई भी परछाईं वस्तु के इशारे से 100% तक नहीं चल सकती हैं। 
  • परछाईं भी वस्तु को नियंत्रित कर सकती है। इसके लिए परछाई में वस्तु की गतिकी बल से अधिक ऊर्जा होनी चाहिए। 
  • परछाई एक ऋणात्मक ऊर्जा है जो किसी भी वस्तु को अपनी ओर आकर्षित कर सकती है। 



 हम जाानते हैं कि परछाई वस्तु से उत्पन्न होती है। इससे एक बात यह साफ हो रही है कि वस्तु और परछाई में कुछ न कुछ सम्बन्ध होना तय है।
    हम सब यह बात तो जानते ही हैं कि जो भी राशियाँ एक दूसरे से संबंधित होती हैं तो उनमें से किसी को भी अगर परिवर्तित करें तो दूसरी राशि पर इसका असर या प्रभाव अवश्य ही पड़ेगा। 





उदाहरण 1.    जिस पंखे से हम हवा लेते हैं ( जैसे टेबल फैन ) अब इसका उदाहरण देखिए।



पंखे के चलने से हवा बहनें लगती हैं। इसका मतलब पंखे और हवा में एक संबंध जरूर जो इन्हें जोड़ता है । यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि सिर्फ पंखा ही हवा को चला नहीं सकता है बल्कि हवाा भी पंखे को अपने ईशारे पर नचा सकती है पर शर्त यह है कि हवा का गतिकी बल पंखेे से अधिक होना चाहिए। क्या आपने हवा से चलते हुए पंखे नहीं देखेें है। शायद सभी ने देखें होगें। कुछ इसी तरह से परछाई भी वस्तु को अपनी ऊर्जा की मदत  से अपनी तरफ खिंचती है ना कि केवल वस्तु ही परछााईं को अपनी तरफ खिंंचती है। 




  उदाहरण 2.
                   जैसे : y = 2x समीकरण में x और y  दोनों एक-दूसरे पर निर्भर कर रहे हैं। अगर हम y में से 1 घटा दें तो 2x से भी 1 घटना पड़ेगा। 



   



  नोट :     इस तरह से हमने कुछ तर्क और उदाहरणों को देखा जो पूरी तरह से यह तो सिद्ध नहीं करता है कि वास्तव में यही कारण है जिससे हनुमानजी को राक्षसी सिंघिका परछाई की मदद से पकड़ा था लेकिन लगभग पुष्टि जरुर कर रहा  है। 

    आपको यह जानकारी कितना हद तक सही लगी। अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर भेजे। आप हमें dkc4455@gmail.com पर मेल कर सकते हैं। धन्यवाद. .... 


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14 Jul 2019

बादल काले, सफेद कब और क्यूँ होते हैं ?

   

    बादल ☁️ कब सफेद और कब काले होते हैंं यह जवाब बड़ा रोचक और वैज्ञानिक है और हममें से अधिकांश लोग इसका जवाब जानते हुए भी नहीं जानते हैं। इन बातों को जानने से पहले हमें यह जानना चाहिए कि बादल आखिर बनते कैसे हैं।







    बादल ☁️ का बनना


           बादल बनना एक सुन्दर प्राकृतिक घटना है। यह घटना बरसात या गर्मी के मौसम में होती है। आखिर गर्मी के मौसम में ही क्यों ऐसा होता है यह प्रश्न उठ सकता है। दरअसल पृथ्वी के जिस भी भाग पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती है वहां के आसपास के जलवायु या जल वाष्प बनकर ऊपर उठने लगते हैं। यह जलवाष्प जल के अतिसूक्ष्म होने के कारण काफी हल्के होते हैं और आसमान में आसानी से इधर-उधर आ जा सकते हैं। जब यही जल के अतिसूक्ष्म कण अधिक मात्रा में इकट्ठे होते हैं तो हमें बादलों के रूप में आसमान में दिखाई देते हैं। 









  बादल काले क्यों होते हैं ?

        बादल का रंग इन दो बातों पर निर्भर करता है -
  1.  बादल को किधर से देखा जा रहा है।
  2. बादल के घनत्व या बादल के प्रकार पर।



   काले बादल का बनना 

   
     बरसात के दिनों में काले हों या सफेद बादल आसानी से दिखाई देना सामान्य बात है।




जब बादलों में जलवाष्प  की मात्रा अधिक हो जाती है तो ऐसे बादल पारदर्शी नहीं रह जाते हैं क्योंकि इनमें शूक्ष्म धूल के कण चिपक जाते हैं। जिस बादल में जलवाष्प की अधिकता जितनी अधिक होती है उसमें उतने ही ज्यादा धूल - कण चिपक जाते हैं। इन कणों के साथ धीरे - धीरे जलवाष्प एकठ्ठा होती रहती है। क्योंकि जो भी जलवाष्प भरी गैस धरती से ऊठती है वह सब इन बादलोंरुपी इन कणों पर चिपक जाती हैं। इसी कारण ऐसे बादल सूर्य या चन्द्रमा की रोशनी में काले दिखाई देते हैं।




 जब ऐसे बादलों पर सूर्य का प्रकाश पड़ता है तो बादल से प्रकाश पार न होने की वजह से बादल के दूसरे छोर ( किनारे ) पर इसकी छाया ( परछाईं ) बन जाती है। अतः धरती पर से ऐसे बादलों को देखने से यह काले दिखाई देते हैं। जिस बादल में जितना अधिक पानी होगा वह उतना ही काला दिखाई देता है।



  अगर इसी बादल को जिधर से प्रकाश पड़ रहा है, देखें तो यह काला नहीं बल्कि सफेद दिखाई देता है देगा या बादलों को ऊपर अथवा आसमान से देखने पर सफेद दिखाई देता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जिधर सूर्य का प्रकाश पड़ता है उधर प्रकाश परावर्तित होता है और हमारी आंँखों पर ऐसा ही रंग बनता है।






   इस पोस्ट के बारे में अपना अनुभव निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जरुर शेयर करें।आप हमें dkc4455@gmail.com पर मेल भी कर सकते हैं। 


30 Jun 2019

विज्ञान को सींखने और समझने का नियम..


विज्ञान की तैयारी वैज्ञानिक ढंग से...





    हर छात्र/ छात्रा यह सोचता है कि विषयों की तैयारी कैसे करें कि हमें ज़्यादा मेहनत ना करनी पड़े और परिक्षा में ज्यादा अंक भी मिले। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या होती है कि  कैसे सभी विषयों की तैयारी किया जाये। तैयारी करने में तीन विषयों गणित, विज्ञान और अंग्रेज़ी में ज़्यादा परेशानी होती है । आज इस पोस्ट में हम  विज्ञान  की तैयारी के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे  । अगर किसी अन्य विषय की तैयारी करना चाहते हैं तो आप कमेंट के माध्यम से जरूर बताएँ |







नब्बे प्रतिशत ( 90% ) प्रश्नों की तैयारी सूत्र के द्वारा बिना याद किए..✴️ 


    क्या आपको पता कि सूत्रों से सम्बंधित लगभग 90 % प्रश्नों के उत्तर बिना याद किए पता किया जा सकता है। जी हाँ दोस्तों यह वास्तव में सही है। विज्ञान विषय में लगभग 50 %  प्रश्न आंकिक ( numeric )  होते हैं परिक्षा में जिसमें प्रत्यक्षरूप से सूत्र का उपयोग किया जाता है। अब बाकि 40 % प्रतिशत  प्रश्नों का उत्तर अप्रत्यक्ष  रूप से सूत्र का उपयोग करके पता किया जाता है। आंकिक प्रश्नों का उत्तर तो आसानी से जाना जा सकता है परन्तु शाब्दिक प्रश्नों का उत्तर जानना थोड़ा मुश्किल होता है ; क्योंकि इन प्रश्नों को आंकिक रूप से शाब्दिक रूप में बदलने के कारण समझना कठिन हो जाता है। तो चलिए जानतें हैं इनके बारे में विस्तार से... 





कैसे करें शाब्दिक प्रश्नों की तैयारी? 

How to Prepare Literally Questions?


             शाब्दिक प्रश्नों की तैयारी ही ज्यादा भारी पड़ता है विद्यार्थियों   को लेकिन इस वैज्ञानिक विधि के द्वारा बहुत ही आसानी से किसी भी प्रश्न का हल या उत्तर दे सकते हैं। 


उदाहरण : 1.  बल क्या है ? इसे परिभाषित किजिए। 
2. परिणामी बल शून्य कब होगा ? 
3. गतिज ऊर्जा किन - किन चीजों पर निर्भर करती है ? 
4. गतिज ऊर्जा किसे कहते हैं ? 
5. पानी ( जल ) और बर्फ में किसका घनत्व अधिक है ? कारण सहित स्पष्ट किजिए |


इस प्रकार के कितने ही क्यों न प्रश्न हों आप सभी प्रश्नों के उत्तर दे सकते हैं वो भी बिना याद किए। चलिए इन सभी प्रश्नों का उत्तर जानते हैं।




उत्तर :  1. 

       परिभाषा ( Definition )  : " बल वह बाह्य कारक है जो किसी वस्तु को  गतिमान अवस्था से विरामावस्था में और यदि विरामावस्था में है तो गति अवस्था में ला देता है या लाने का प्रयास करता है। " 
इसका मात्रक  न्यूटन   होता है। इसे " F  " से प्रदर्शित करते हैं।
सूत्र :                               बल = द्रव्यमान × त्वरण 
या                                     F = ma
यदि त्वरण " g " तब          F = mg

इसकी परिभाषा को गौर से देखिए - इसे सूत्र की मदत से ही बनाया गया है। कैसे ?
आइए जानते हैं :
सूत्र में  बल = द्रव्यमान × त्वरण    दिया गया है।
जहाँ     m = वस्तु का द्रव्यमान
तथा      a = त्वरण 

त्वरण  ( Acceleration ) : वेग परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं।
सूत्र :           a = v1 - v 2 / t

जहाँ v1  = प्रारंभिक वेग है ।
      v 2  = बड़ा हुआ वेग है।
इससे एक बात तो साफ पता चल रही है कि बल का मान त्वरण पर ज्यादा निर्भर होता है क्योंकि अगर वेग में परिवर्तन नहीं हुआ तो बल का मान लगभग शून्य होगा। तो कुल मिलाकर कहें कि बल के लिए द्रव्यमान और त्वरण का होना जरूरी है। अगर कोई वस्तु गति में है तो उसे बल लगाकर रोका या रोकने का प्रयास किया जा सकता है ।
या अगर को वस्तु विरामावस्था में ( रूकी हुई ) है तो उसे बल लगाकर गती की अवस्था में लाया जा सकता है या लाने का प्रयास कर सकते हैं ।
 इस प्रकार बल की परिभाषा यह निकलकर आती है " बल वह बाह्य ( बाहरी ) कारक है जो किसी विरामावस्था कि वस्तु को गति और गति अवस्था की वस्तु को विरामावस्था में कर देता है या करने का प्रयास करता है।"
ऊपर वाली परिभाषा से यह परिभाषा थोड़ी अलग है पर इसका मतलब यह नहीं है कि यह परिभाषा गलत है।


 परिभाषा को बनाने के लिए निम्न निर्देश :
  • एकही परिभाषा भिन्न - भिन्न शब्दों या ततरिकों से बनाई जा सकती है। 
  • परिभाषा द्वारा पुरा अर्थ स्पष्ट होना चाहिए चाहे जो भी शब्द उपयोग में हों। 
  • परिभाषा द्वारा हर परिस्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। 
  • परिभाषा को इच्छानुसार छोटा या बड़ा किया जा सकता है। 
  • परिभाषा सूत्र की उपज है या सुत्र से ही बनायी जाती है। 
  • परिभाषा राशियों के नाम पर भी बनाई जा सकती है। जैसे : " द्रव्यमान और त्वरण के गुणनफल को बल कहते हैं। " 
  • परिभाषाएँ दो तरह से बनाई जाती हैं - 1.शब्दो की सहायता से,  2. राशियों की मदद से। 



 उपर्युक्त नियम से यह स्पष्ट होता है हम एक ही परिभाषा को कई तरह से बना सकते हैं। शर्त यह है कि अर्थ स्पष्ट होना चाहिए। अगर हमें शाब्दिक परिभाषा नहीं पता है तो हम राशियों में क्या संबंध है उसके जरिए भी बना सकते हैं।
जैसे : किसी गतिशील वस्तु के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं।
   इसी तरह से परिभाषाओं को बनाएंँ और याद करने वाली बात भूल जायें क्योंकि जो परिभाषा हम बना लेगें तो याद करने की जरूरत ही क्या है।














उत्तर :    2. 
   बल क्या है हमने जान लिया पर यह परिणामी बल क्या है इसके बारे में जानना बहुत ही जरूरी है क्योंकि अगर परिणामी का मतलब नहीं पता होगा तो हम उत्तर नहीं दे पायेंगे ।


    परिणामी बल ( Resulting force ) :   जब किसी पिण्ड या वस्तु पर कई बल एकसाथ कार्य कर रहे हों तो सभी बलों का योग ही इनका परिणामी बल कहलायेगा। निचे दिए गए चित्र को देखिए -





इनका परिणामी बल F,  F1, F2 और F3 में जिसका मान अधिक होगा उधर से होकर जायेगा ।
जैसे मान लिजिए
F1 = 1 न्यूटन
F2 = 2 न्यूटन और
F3 = 3 न्यूटन
बल लगे हैं तब परिणामी बल F , F3 = 3 न्यूटन वाले बल की तरफ होकर जायेगा।
अब सवाल यह है कि परिणामी बल कब शून्य ( Zero ) होता है।

जब दो या कई बल ऐसे कार्य कर रहें हों कि उनमें परिणाम  न के बराबर हो तो इसी स्थिति को ही शून्य परिणामी बल  कहते हैं।
या
जब दो  या दो से अधिक बल एक दुसरे के विपरीत और  बराबर हों तो उनका परिणामी बल शून्य होगा। 
निचे दिए गए चित्र में शून्य परिणामी बल को दिखाया गया है।



चित्र से स्पष्ट है कि पिण्ड पर दो बराबर बल हैं जो एक - दूसरे  के  विपरीत दिशा में कार्यरत हैं। इसलिए इनका परिणामी बल शून्य है।
 

 नोट : यहाँ पर हमने प्रश्नों को विस्तार से बताया है क्योंकि अच्छे से समझ आ सके। इसका यह मतलब नहीं है कि आप भी परिक्षा में इतना विस्तार से लिखें। आपको केवल इतना लिखना है जो प्रश्न में पूछा जाता है । जैसे ऊपर दिए गए प्रश्न में यह पूछा गया है कि " परिणामी बल कब शून्य होता है " तो उत्तर में हमें केवल यह लिखना है -
 जब दो  या दो से अधिक बल एक दुसरे के विपरीत और  बराबर हों तो उनका परिणामी बल शून्य होगा।

हाँ अगर प्रश्न में यह भी पूछा गया हो कि इसे समझाइए तब हम थोड़ा विस्तार करके लिखेंगे ।





उत्तर :  3. & 4.

गतिज ऊर्जा क्या है इसके बारे में जान लेना चाहिए तब हम आसानी से यह समझ जायेंगे इसके सवालों को । 

गतिज ऊर्जा ( Kinetic energy )  
परिभाषा ( definition ) 
            किसी वस्तु में उसकी गति के कारण जो ऊर्जा उत्पन्न होती है उसे उस वस्तु की गतिज ऊर्जा कहते हैं। इसका भी मात्रक जूल  होता है ।   इसका सूत्र K =  ( 1 / 2 ) mv2 
होता है। गतिज ऊर्जा की परिभाषा से ही एक बात स्पष्ट हो रही है कि गति के कारण ऊर्जा उत्पन्न होती है। अतः स्पष्ट है कि वेग ही मुख्य कारण है जो गतिज ऊर्जा को ज्यादा प्रभावित करता है। 
इसके बाद द्रव्यमान गतिज ऊर्जा को प्रभावित करता है क्योंकि सूत्र में द्रव्यमान का वेग में गुणा है। अगर कुल मिलाकर कहें कि गतिज ऊर्जा किन - किन कारणॊ पर निर्भर करती है तो इसका सीधा उत्तर है -   वेग और द्रव्यमान।
क्योंकि दोनों का गुणनफल ही गतिज ऊर्जा के मान के लिए उत्तरदायी है।




उत्तर :  5. 

    जल और बर्फ़ में किसका घनत्व अधिक होता है ?
माना कि इसका उत्तर हमें नहीं पता या नही याद  है तो सवाल यह है कि इसे कैसे पता करें । यहाँ पर घनत्व की बात हो रही है कि किसका ज्यादा है और किसका कम। यहाँ पर अगर आप घनत्व के बारे में जानते हैं तो जाहिर है कि आप यह उत्तर भी पता कर सकते हैं। अगर नहीं पता है तो चलिए घनत्व के बारे में जानते हैं।



घनत्व ( Density ) 

किसी वस्तु का घनत्व, एकांक आयतन में उपस्थित द्रव्यमान की मात्रा को कहते हैं  ।
मात्रक :  इसका मात्रक " किग्रा / मीटर3  होता है।
सूत्र :      d = m / v

अब यहाँ पर इस बात पर भी गौर किजिएगा कि घनत्व की परिभाषा भी सूत्र के माध्यम से बनायी गयी है । इसका सीधा मतलब है कि हमें यह सभी प्रश्न याद करने की कोई जरूरत नहीं है। चलिए अब घनत्व के बारे में जानतें हैं।


घनत्व का उदाहरण ( Example of Density  ) 


 घनत्व शब्द घन विशेषण है। घन का मतलब किसी वस्तु की एकांक आयतन में उपस्थित मात्रा से है। जैसे कोई चीज़ ज्यादा हो जाये तो उसे हम प्राय घनी, घना कहते हैं।

   मान लिजिए दो गाँव A और B है। गाँव A में 100 लड़के और गाँव B में 50 लड़के हैं । यहाँ पर हम क्या अन्तर देख रहे हैं। गाँव A में लड़कों की संख्या अधिक है तो इसी को हम इस प्रकार से कह सकते हैं कि गाँव A में लड़कों की संख्या का घनत्व अघिक है। ठीक इसी प्रकार से पानी और बर्फ के घनत्व के बारे में हमें बताना है ।





पानी और बर्फ में किसका घनत्व अधिक.. 

 हम जानते हैं कि अगर किसी बर्फ़ के टुकड़े को जल ( पानी ) में डूबोया जाता है तो बर्फ़ का टुकड़ा पानी में नही  डूबता है  ।अतः बर्फ़ का घनत्व कम होता है और पानी का ज्यादा। अगर बर्फ़ का घनत्व अधिक होता तो बर्फ पानी में ही डूबा रहता  । यह घनत्व में अन्तर जानने का आसान तरीका है।






   आप अपनी राय हमें जरुर बतायें कि आपको यह जानकारी कैसी लगी। आप हमें dkc4455@gmail.com मेल भी कर सकते हैं। 
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किस तारीख को कौन-सा दिन होगा, जाने बिना कलेंडर देखें। by Possibilityplus.in


           क्या आप जानते हो कि बिना कलेंडर देखे हम किसी भी तारीख को कौन-सा दिन होगा यह पता कर सकते हैं वो भी सेकेंडो या मिनटों में । पर हम उस विधि से पता तो करते हैं कि उसमें इतना वक्त या समय लगता है कि इससे हमें फायदा तो कुछ नहीं होगा मगर नुकसान जरुर होगा। 


    
    जैसे मान लिजिए अगर जब हमारे पास मोबाईल न हो और उसी समय हमसे यह कोई पुछता है कि जरा अगले महीने में 10 तारीख को कौन-सा दिन है बताना।  या ऐसा ही प्रश्न हमें किसी इंट्रेंस इग्जाम में मिल जाये तो हम क्या करेंगे।



 अगर साधारण विधि से अपनी उंँगली पर दिन की गणना करें तो हमें 10 - 15 मिनट तो लगेगा। जरा सोचों अगर यह उत्तर एक मिनट के अंदर ही सेकेंडो में ही आपको मिल तो कितना समय की बचत होगी।
   ऐसी ही एक विधि इस पोस्ट में है चलिए पढ़ते हैं। 






  किसी भी तारीख को दिन पता करना

     
       दिन पता करने के लिए हमें लीप वर्ष की जानकारी होनी चाहिए।

लीप वर्ष : जो वर्ष 366 दिनों का होता है उसे लीप वर्ष या अधिवर्ष कहते हैं।





लीप वर्ष कब और क्यों होता है ? 

       लीप वर्ष हर चार वर्षों में आता है। दरअसल वर्ष में कुल 365 दिन और लगभग 6 घंटे होते हैं। चूँकि एक दिन में 24 घंटे होते हैं। इसलिए यही 6 घंटे चार वर्षों में 24 घंटे या एक दिन के बराबर हो जाता है। गणना में कोई समस्या न आए इसलिए इसे लीप ( अधिवर्ष के रुप में हर चार वर्षों में इसे जोड़ दिया गया और इसे इस नियम में बाँधा   गया कि जिस भी वर्ष में अगर 4 से भाग करते हैं और भाग पुरी तरह से बिना दशमलव के चली गई तो वह वर्ष लीप वर्ष होगा और यदि दशमलव में भाग गई तो वह साधाारण वर्ष ( 365 दिनों ) का होगा। 




किसी भी तारीख को दिन पता करने के लिए निम्नलिखित चरणों की प्रकिया है :-
  1. सबसे पहले दिनों की संख्या ज्ञात करिए। 
  2. अब इसमें ( दिनों की संख्या में ) 7 से भाग करिए।
  3. अब शेषफल के आधार पर दिन पता करिए। इसके लिए निचे दिए गए निर्देशों को देखें।


 7 से भाग देने पर जो शेेषफल(0, 1, 2, 3, 4, 5, 6) मिलेगा उससे अधिक से अधिक मात्र 5 सेकेंड में ही दिन पता हो जायेगा। यह शेषफल 0 से 7 तक ही सीमित है। इसके नियम एक बार पढ़ने से ही समझ में आ जाता है।





   नियम -

  1. शेषफल 0 आया है तो वही दिन होगा जिस दिन से हमने गणना शुरू की थी। जैसे - मान लो किसी महिने की 1 तारीख को सोमवार दिन है और हमें इसी महीने की 8 तारीख को दिन पता करना है । सबसे पहले हम 1 से 8 तारीख के बीच दिनों की संख्या ज्ञात करेंगे। तो 1 से 8 तक 7 दिन हो रहे हैं। इसमें 7 से भाग करेंगे तो शेषफल 0 ही आयेगा। अतः स्पष्ट है कि 8 तारीख को भी सोमवार ही आयेगा।
  2. इसी प्रकार अगर शेषफल 1 आये तो गणना करने वाले दिन से या तो एक दिन आगे या एक दिन पीछे वाला दिन होगा। जैसे सोमवार के एक दिन बाद मंगलवार आता है और सोमवार से एक दिन पहले रविवार होता है। 
  3. इसी प्रकार शेषफल 2, 3, 4, 5, और 6 पर भी होता है।


कलेंडर में दो कालों की गणना की जाती है -

  1. आनेवाले दिनों या काल / समय की 
  2. बिते हुए दिनों या काल / समय की 








1.आने वाले दिनों की गणना 

  उदाहरण :  1 जनवरी 2019 को मंगलवार था तो 31 दिसम्बर 2019 को कौन-सा दिन होगा ? 

  हल : सबसे पहले हमें यह देखना है कि यह लीप वर्ष है या नहीं। लीप वर्ष 366 दिनों का होता है क्योंकि फरवरी में 29 दिन होते हैं। 2019 में 4 से भाग करने से यह दशमलव में कट रहा है। इसलिए यह लीप वर्ष नहीं है। अतः यह वर्ष 365 दिनों का है। 1 जनवरी से 31 दिसम्बर तक 364 दिन हो रहें हैं। 364 में 7 से भाग करने पर शेषफल = 0 आ रहा है। अतः 31 दिसम्बर 2019 को मंगलवार होगा।

     अगर यही प्रश्न यह होता कि 1 जनवरी 2020 को कौन-सा दिन होगा तब दिनों की कुुल संख्या 365 होती। तब 7 से भाग करने पर 1 शेषफल होता। तब हम मंगलवार से एक दिन आगे बढ़ेंगे तो बुधवार का दिन मिलेेगा। इसी प्रकार से 2 जनवरी 2020 को गुरुवार होगा क्योंकि शेषफल 2 आयेगा और मंगलवार से दो दिनों बाद गुरुवार ही होता है। इसी तरह से आने वाले दिनों की गणना में हम दिन पता करेंगे।




2.बिते हुए दिनों की गणना 

  उदाहरण : 31 दिसम्बर 2019 को मंगलवार है तो ज्ञात / पता करिए कि 1 जनवरी 2019 को कौन-सा दिन था ?

 हल : यह उदाहरण पहले का ऊल्टा है क्योंकि  हम बिते हुुए दिनों की  गणना करने जा रहे हैं।
     31 दिसम्बर 2019 और 1 जनवरी 2019 के बीच दिनों की संख्या = 364 दिन
इसमें 7 से भाग करने पर,
शेषफल = 0
चूँकि हम बिते हुए दिन की गणना कर रहे हैं यानी पीछे जा रहे हैं। इसका मतलब यह है कि जिस दिन से हम गणना कर रहे हैं उस दिन से हमें शेषफल के अनुसार पीछे जाना पडे़गा। चुँकि यहां पर शेषफल 0 है तो हमें मंगलवार से 0 दिन पिछे जाने पर मंगलवार ही मिलेगा। अगर शेषफल 1 होता या सवाल यह होता कि 31 दिसम्बर 2019 को मंगलवार है या था तो 31 दिसम्बर 2018 को कौन - सा दिन था ?
तब 31 दिसम्बर 2018 से 31 दिसम्बर 2019 के बीच दिनों की संख्या = 365
तब 7 से भाग करने पर शेषफल = 1
चुँकि 31 दिसम्बर 2019 को मंगलवार है। इसलिए मंगलवार से एक दिन पिछे / पूर्व / पहले सोमवार होता है। अतः 31 दिसम्बर 2018 को सोमवार था।

    इसी तरह सभी प्रश्नों में हल करके देखिए।






दिनों की गणना से संबंधित महत्वपूर्ण बातें

  • हमें सबसे पहले छोटे प्रश्नों को हल करना चाहिए वो भी किसी कलेंडर की सहायता से। 
  • किसी भी साधारण वर्ष से ठीक एक वर्ष आगे या पिछे जाने पर केवल एक दिन आगे या पिछे वाला ही दिन होता है। जैसे : 1 जनवरी 2019 को मंगलवार था तो 1 जनवरी 2020 को बुधवार होगा।
  • लीप वर्ष का ध्यान रखना चाहिए। 2020 एक लीप वर्ष होगा। तो इसके चार साल बाद यानी 2024 भी लीप वर्ष होगा। 
  • लिप वर्ष में 366 दिन होते हैं। इसे अधिवर्ष भी कहते हैं।
  • किसी भी वर्ष में 4 से भाग करने पर जो भाग बिना दशमलव के चली जाय वह लिप वर्ष होगा।



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