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संभावनाओं का सागर

8 Mar 2019

अपनी जन्मतिथि कैसे पता करें ? जन्मतिथि निकालने के कारगर तरिके।


दुनियाँ में बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें खुद की असली जन्मतिथि नहीं पता है। इनमें से बहुत लोग इसका जिक्र नहीं करते हैं क्योंकि ये लोग यह सोचते हैं कि क्या हुआ जो हमें अपनी असली या वास्तविक जन्मतिथि नहीं पता । पर जो लोग जानना चाहते हैं वो  क्या करें।


 दरअसल मुझे भी अपनी वास्तविक जन्मतिथि नहीं पता थी पर मैने यही तरिके आदमाए और आज मैं अपनी सही जन्मतिथि जानता हूँ। अगर आप निचे दिए गए किसी भी विकल्प को हासिल कर लेते हैं तो आप जन्मतिथि पता करने में सक्षम हो जायेंगे। 




 क्या है ये तरिके चलिए जानते हैं।
  1. जिस दिनांक को आप पैदा हुए थे पता करिए कि उसी दिनांक या उसके ठीक आगे पिछे आपके गाँव / मोहल्ले / दूर के रिश्तेदार या कोई और पैदा हुआ होगा। उसकी जन्मतिथि से आपकी भी जन्मतिथि बहुत ही आसानी से निकल जायेगी। 
  2. यह पता करें कि जिस दिनांक को आप पैदा हुए हैं उस दिनांक को कोई भी छोटी - बड़ी घटना जो समाचार का हिस्सा बनी हो । 
  3.  यह पता करें कि जिस दिनांक को आप पैदा हुए हैं उस दिनांक के थोड़ा आगे पिछे कोई ऐसी कोई व्रत , त्यौहार आदि पड़ा हो और किसी को याद हो, ( व्रत और त्यौहार हर साल अलग - अलग तिथि को पढ़ते हैं )  ।
  4. यह पता करें कि जिस दिनांक को आप पैदा हुए हैं ठीक उसी दिनांक या उसके आगे - पिछे आपके घर / गाँव /मोहल्ले / रिश्तेदारों या किसी अन्य व्यक्ति विशेष के घर कुछ ऐसा कार्य जैसे : किसी का शादी - विवाह हुआ हो, कोई कारोबार प्रारम हुआ हो, किसी की नौकरी लगी हो, इत्यादि। 






इस तरह का कोई भी काम जो हुआ हो और ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि ऐसा कोई काम न हुआ हो। बस आपको यही पता करना होगा और कुछ नहीं। ऐसे काम जिसमें दिनांक का जिक्र होता है, जैसे : विवाह, कोई जायदाद किसी के नाम हुई हो, कोई ऐसी घटना जिसका जिक्र समाचार में आया हो। इन सभी के अलावा बहुत से काम हैं जिनमें दिनांक का जिक्र आता है। इसलिए बस ऐसी ही कोई जानकारी पता करिए, आपकी जन्मतिथि पता हो जायेगी। 

अगर कोई मदद या सुझाव या फिर इससे संबंधित कोई सवाल या गणित और विज्ञान से जुड़ी हो तो निचे दिए गए हैं कमेंट बॉक्स में लिखकर कमेंट जरूर करें।
° अगर आप हमें ईमेल करना चाहते हैं तो हमारा Email id : dkc4455@gmail.com है । 
धन्यवाद ! 


26 Feb 2019

वस्तुओं के गोल होने का सबसे बड़ा वैज्ञानिक कारण..




 हमारे चारों तरफ बहुत सारी गोल आकार की वस्तुएँ हैं पर क्या हमें इसके बारे में जानकारी है कि आखिर वस्तुएँ क्यों गोल होती हैं। जैसे : गेंद, पानी की बूँदें, वाहनों के पहिये, पृथ्वी, चन्द्रमा, सूर्य आदि ग्रहों की आकृति गोलाकार  क्यों है ?  वस्तुओं के गोल होने की कई वजह हो सकती हैं पर एक वजह ऐसी है जो लगभग हर वस्तुओं के गोल होने की मुख्य वजह है और वह   है  संतुलन का होना  । भला संतुलन और गोलाकार में क्या सम्बन्ध है। चलिए समझते हैं निम्नलिखित उदाहरणों से -
किसी भी वस्तु के क्षेत्रफल ,उसपे लगने वाला दाब और लगने वाले बल में सम्बन्ध : 

दाब = बल / क्षेत्रफल        या    P = F / A

इस सूत्र से स्पष्ट है कि अगर किसी वस्तु पर लगने वाला बल अधिक है या यदि क्षेत्रफल कम है तो दबाव अधिक होगा । चलिए इसके कुछ उदाहरण देखते हैं ।






  जल के अन्दर या जल के ऊपर बनने वाला    बुलबुला अर्धगोलाकार होता है..  


इसको जानने से पहले हमें यह पता होना चाहिए कि आखिर जल में बुलबुला क्यों बनाता है। जल में किसी कारणवश वायु अथवा गैस जब उत्पन्न होती है तो यह वायु अथवा गैस ( चूँकि वायु अथवा गैस जल से हल्की होती है  , इसलिए यह  ) ऊपर उठने लगती है।
 दरअसल जब वायु अथवा गैस ऊपर उठती है तो जल में बहुत बारीक - बारीक परते होती हैं जो गैस या वायु को रोकने का काम करने लगती हैं। इसलिए यही परतें बुलबुलाें का निर्माण करने लगती हैं ।
अब सवाल यह है कि यह ( बुलबुला ) अर्धगोलाकार रूप ही क्यों लेता है ।  चूँकि पानी हर जगह पर 360°  पर समान दबाव लगाता है इसलिए जब गैस अथवा वायु निचे से ऊपर की तरफ दबाव बनाकर पानी से बाहर निकलती है तो इस पर भी पानी 360° पर यानी चारों तरफ से समान दबाव लगाता है । इसी वजह से बुलबुलाें के निचे वाला हिस्सा खुला होता है और बुलबुले के ऊपरी हिस्से पर परत होने से बन्द होता है, इसलिए बुलबुला अर्धगोलाकार होता है । चूँकि हर प्रकार के आकारों से गोलाकार सबसे कम क्षेत्रफल वाला होता है, तभी तो बुलबुले को पानी से निकलने के लिए ज्यादा बल और दबाव मिलता है ( P = F/A ) और इसी वजह से बुलबुला पानी के बाहर आसानी से आ जाता है । बुलबुले का आकार पानी के दबाव पर निर्भर करता है। अगर बुलबुला पानी के बहुत निचे या अधिक गहराई पर बनता है तो बुलबुला छोटा होगा क्योंकि जितनी ही ज्यादा गहराई उतना ही ज्यादा दबाव होता है और इसी लिए बुलबुला कम गहराई में बड़ा और ज्यादा गहराई में छोटा होता है ।






           मौत के कुँए की आकृति  


मेले में जो मौत के कुँए होते हैं वो भी गोलाकार होते हैं । दरअसल गोलाकृति से करतब दिखाने वाले को चारों ओर से समान दबाव मिलता है और गती भी संतुलित होती है । अगर मौत का कुँआ गोल ना होकर थोड़ा सा  दबा या उभरा हुआ है तो करतब दिखाने वाले को बहुत परेशानी होगी क्योंकि गाड़ी की गती बहुत तेजी से कम या ज्यादा होने लगेगी जिससे सन्तुलन बिगड़ जायेगा और दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जायेगी ।



बाॅलीबाल, फुटबॉल या क्रिकेट की गेंद का आकार .. 

बाॅलीबाल, फुटबॉल हो या क्रिकेट की गेंद अगर गोल ना हो तो क्या होगा ?
अगर बाॅलीबाल, फुटबॉल हो या क्रिकेट की गेंद गोल ना होकर थोड़ा चपटा, चौकोर, तिनकोने या किसी अन्य आकार की हो तो निम्नलिखित बातें होंगी -

  • बाॅलीबाल, फुटबॉल हो या क्रिकेट की गेंद को जिस भी दिशा में फेंकेंगे वह उस दिशा में नहीं जायेगी ।  
  • यह अनिश्चितरूप से हवा में मुडे़गी। 
  • हवा का प्रभाव ( घर्षण  ) बहुत अधिक होगा। 



बाॅलीबाल, फुटबॉल हो या क्रिकेट की गेंद की तरह ही पृथ्वी, चन्द्रमा , सूर्य आदि ग्रहों का आकार भी गोल होता है और जैसे बाॅलीबाल, फुटबॉल हो या क्रिकेट की गेंद का सन्तुलन बिगड़ जाता है ।  अगर इनकी आकृति गोल से थोड़ी भी विकृत ( तेड़ी - मेड़ी ) हो जाये ।

गोलाकार आकृति के निम्नलिखित गुण :
  1. गोलाकार दबाव के लिए सबसे ज्यादा सक्षम होता है। 
  2. गोल आकार की वस्तुओं पर घर्षण बल सबसे कम लगता है। 
  3. गोलाकृति का क्षेत्रफल सभी आकृतियों से कम होता है। 
  4. वातावरणीय दबाव के लिए गोल आकार उपयुक्त होता है। 


  गोल आकृति के उपयोग  


वाहनों के टायर की आकृति 

वाहनों के टायर की आकृति गोलाकार होती है जिससे वाहनों की गति का स्थायित्व बन सके। यदि यह गोल ना होकर थोड़ा सा भी उभार हो जाये तो वाहन की गति असंतुलित हो जायेगी। परिणामस्वरूप सड़कों और वाहनों की  स्थिति खराब हो जायेगी। इसके अलावा दूर्घटना की संभावना भी बढ़ जाती है ।







गति करने वाली वस्तुओं की आकृति गोल होती है या गोल रखा जाता है ... 

गति करने वाली वस्तुएं जैसे : सूर्य, पृथ्वी, चन्द्रमा आदि गोल आकार में होती हैं  । क्योंकि यही वह आकार है जिसपर वातावरणीय घर्षण बहुत कम लगता है और सन्तुलित गति मिलती है ।  ईंजन का फ्लाईह्वील ( चक्का ) भी गोल और भारी होता है जिससे सन्तुलित गति मिलती है ।

इन सभी उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि गोलाकार ही सबसे परफैक्ट आकार  है।




आगे 📝 शेष है .. 

1 Feb 2019

संभव और असंभव की सबसे सटीक जानकारी || by : Possibilityplus.in



   संभव और असंभव    


विश्व की हर चीज में ये दोनों शब्द संभव और असंभव आते ही हैं बल्कि यूँ कहा जाये कि इनका होना अनिवार्य है तो बिल्कुल सटीक होगा। दरअसल दुनियाँ में हर वस्तु के दो पहलू होते हैं जिसे नजरिया भी कहते हैं निचे दिए गए चित्र को देखिये -


इस चित्र से स्पष्ट है कि बायें वाले की तरफ से यह अंक 9 है जबकि दायें वाले की तरफ से देखने पर यह 6 दिख रहा है। अब आप ही सोचिए किधर से यह सही है और किधर से गलत । बायें तरफ से  संख्या 9 ही संभव है और दायें तरफ से 6 संभव है । इस चित्र से यह साफ - साफ पता चलता है कि अगर दायाँ वाला लड़का बाँये वाले की तरफ आ जाये तो उसे भी यह 6 नहीं बल्कि 9 ही दिखाई देने लगेगा या फिर बायाँ वाला लड़का दायीं तरफ चला जाये तो इसे अब के स्थान पर 6 ही दिखाई देने लगेगा।



इसी तरह किसी काम को करना किसी के लिए असंभव है तो किसी दूसरे के लिए संभव भी हो सकता है क्योंकि दूसरा परसन दूसरी तरफ से या दूसरे नजरिए से उस काम को देखता है। इसी तरह से अगर तीसरा और चौथा परसन से उसी काम को करने को कहा जाये तो इनके नजरिए से यह काम कुछ और भी हो सकता है । इस प्रकार कोई भी काम हर परसन के लिए समान नहीं हो सकता है। जिसके लिए संभव है तो वह संभव कहेगा और जिसके लिए वही काम असंभव है तो असंभव कहेगा। यहाँ पर एक बहुत ही बड़ी सीख हमें मिल रही है और वह यह कि अगर हम किसी काम को करने जा रहे हैं और किसी भी व्यक्ति या परसन से यह सवाल या उस काम के बारें में कुछ पूछते हैं और वह जो भी कुछ बतायेगा है वह अपने प्वाइंट आफ व्यू  से ही बताएगा । इसका मतलब यह नहीं है कि आप के लिए भी वही बात लागू होगी जो उसके लिए है। हो सकता है कि आप उसी काम को दूसरे नजरिए से देख रहे हैं हो । उदाहरण के लिए जैसे किसी व्यक्ति ने किसी दूसरे परसन से यह पूछता हैं कि तुम 400 मीटर चौड़ी नदी क्यों नहीं पार कर पाये तो वह अपनी कमजोरी को ऐसे थौपने की कोशिश करेगा कि जैसे वह कमजोरी आप सभी की ही हो। संभव है कि वह आपको सभी को भी यह कह देगा यार कोई भी वह 400 मीटर चौड़ी नदी नहीं पार कर सकता है  ।   लेकिन यह तो केवल उसके लिए सत्य है और बाकीयों के लिए अलग है या अलग हो सकता है । क्योंकि बहुत से लोग ऐसे हैं कि जो यह बहुत ही आसानी से कर सकते हैं।

चलिए अब जानते हैं कि किसी भी काम को जो  लगभग पूर्ण रूप से असंभव है जिसे साधारण भाषा में केवल असंभव ही कह दिया जाता है  ।  
कौन - सा कार्य संभव है और कौन असंभव यह बात हममें से अधिकांश लोगों को नहीं पता होता है। लेकिन आज इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको यह पता चल जायेगा कि कोई भी कार्य पूर्णतः असंभव नहीं होता है और ना ही पूर्णतः संभव।
कैसे और क्यों यह सवाल आपको घेर रहे होंगे तो चलिए विस्तार से जानकारी लेते हैं।

दुनियाँ का कोई भी काम संभव और असंभव करने के आधार पर तय होता है। यह कहा जाता है कि कोई भी व्यक्ति मरने के बाद जिन्दा नहीं हो सकता है या साधारण शब्दों में यह कहें कि मरकर जिन्दा होना असंभव है पर दुनियाँ में ऐसे बहुत से लोग हैं जो मरकर भी दोबारा जिन्दा हो गये हैं। यह बात और है कि ऐसा लगभग लाखों और करोड़ों या फिर अरबों में से किसी एक के साथ ऐसा होता है मगर इसका मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति मरकर जिन्दा नहीं हो सकता है।



आज से दो सौ साल पहले कोई व्यक्ति या वैज्ञानिक अगर ऐसा कहा होगा कि भविष्य में मनुष्य एक ही स्थान से दुनियाँ के हर कोने में बात कर सकेगा तो इस कथन को बहुत से लोग यह कहकर नकार दिए होंगे कि यह बिल्कुल असंभव है क्योंकि बिना किसी तार से वो भी दुनियाँ के किसी भी कोने में बात करना बेआधार है। यह बात उस समय के लिए असंभव ही थी क्योंकि उस समय विज्ञान इतना तेज नहीं था। ठीक इसी तरह अगर आज हम यह कहें कि शायद भविष्य में लकड़ी की राख से दोबारा लकड़ी बनायी जा सके तो आज के समय में इस बात पर भी मजाक बनाया जा सकता है क्योंकि हमारा विज्ञान इतना सक्षम नहीं हुआ है कि लकड़ी की राख से दोबारा लकड़ी प्राप्त किया जाये। मोबाईल फोन से बात करना , हवाई सफर करना आदि यह भी किसी जादू की तरह है। मगर यह भी एक विज्ञान की ही देन है ना कि कोई जादू । अगर जादू की बात करें तो यह भी विज्ञान का विशेष ज्ञान है जो बहुत कम ही समझ में आता है। अक्सर हमें या लोगों को जो चीजें कुछ समझ में नहीं आता है तो उसे जादू कह देते हैं,  और जब उसी चीज के बारे में जानकारी हो जाती है तब सामान्य सी घटना लगने लगती है।

आगे 📝 जारी है..


20 Jan 2019

भिन्न या दशमलव वाली संख्याओं का ल.स और म.स पता करना। ल.स और म.स का Two in one.


 भिन्न का ल.स. और म.स. 



       भिन्न हो या दशमलव वाली संख्या हो दोनों का ही ल.स. ( लघुत्तम समापवर्त्य  ) और  म.स. ( महत्तम समापवर्तक ) हम जानेंगे और सीखेंगे। यानी ल.स.और म.स. का टू इन वन है। भिन्नों का ल.स.और म.स. ज्ञात करने का सूत्र ः



चलिए कुछ भिन्नों का ल.स.और म.स. निकालकर देखते हैं :

उदाहरण :  4 / 5, और 3 / 7 का ल.स. और म.स. ज्ञात करो।

 हल :     4 / 5, और 3 / 7 का ल.स.
              = अंश का ल.स. / हर का म.स.
     या      = 4 और 3 का ल.स. / 5 और 7 का म.स.
     या      = 12 / 1

 अतः 4 / 5 और 3 / 7 ल.स. = 12,   -Answer


 4 / 5, और 3 / 7 का म.स.
            = अंश का म.स. / हर का ल.स. या
या        = 1 / 35
अतः 4 / 5 और 3 / 7 म.स. = 1 / 35


  अगर हमें भिन्नों का ल.स.और म.स. बिना सूत्र यानी कि अगर हमें ऊपर दिया गया सूत्र किसी कारणवश नहीं पता हो या फिर न याद हो तो हम भिन्नों का ल.स.और म.स. कैसे ज्ञात करेंगे। हम आपको यह बता दें कि हमारा यही प्रयास रहता है कि आप सीर्फ पढ़ें नहीं बल्कि सीखें  , समझे और आगे बढ़े इसलिए हम आपके लिए यह जानकारी दे रहे हैं ।
चलिए अब हम  4 / 5, और 3 / 7 का ल.स. और म.स. बिना भिन्न वाले सूत्र लगायें ज्ञात करते हैं । इसके लिए हमको इन दोनों भिन्नों को खंडित करना होगा। भिन्नों को तोड़ना या खंडित करने के लिए हमें हर वाले मान को समाप्त करना होगा। हर वाले मान को दो प्रकार से हटाया या समाप्त किया जा सकता :

  1. भिन्न को दशमलव में बदलकर ।
  2. किसी संख्या से अंश में गुणा करें और जो ल. स. और म.स. मिला है उसमें में उसी संख्या से भाग कर दें जिससे पहले गुणा किया गया था । बहुत ही आसानी से काम हो जायेगा।

चलिए उदाहरण की सहायता से समझते हैं। 
  उदाहरण :    भिन्नों 4 / 5, और 3 / 7 का ल.स. और म.स. बिना भिन्न वाले सूत्र लगायें ज्ञात करने के लिए हम सबसे पहले दोनों भिन्नों के हर का ल.स. निकालना होगा या फिर ऐसी संख्या का गुणा करें दोनों भिन्नों कि हर वाला मान हट जाये । 5 और 7 का ल.स. = 35 होगा। इसलिए 4 / 5, और 3 / 7 में 35 का गुणा करने पर, 
      ( 4 / 5 ) × 35  =  4 × 7 
                            = 28
और ( 3 / 7 ) × 35 = 3 × 5
                            = 15

 अब 28 और 15 का म.स.और ल.स. आसानी से पता कर सकते हैं।
28 = 1 × 2 × 2 × 7  और
15 = 1 × 3 × 5

दोनों गुणनखंडो में सिर्फ एक ( 1 ) मिल रहा है। इसलिए 28 और 15 का म.स. = 1   होगा। चुँकि हमने भिन्नों को तोड़ने के लिए 35 से गुणा किया था , इसलिए हमें 35 से भाग करनी पड़ेगी । भाग करने पर, 1 / 35  होगा। अतः भिन्न  4 / 5, और 3 / 7 का म.स. = 1 / 35 


अब 28 और 15 का ल.स. = 28 × 15 = 420. 
चुँकि हमने 28 और 15 प्राप्त किया है भिन्नों  4 / 5, और 3 / 7 में 35 का गुणा करने पर  । इसलिए अब हमें 35 से 420 में भाग करनी पड़ेगी। भाग करने पर,
        420 / 35 = 6 × 7 × 10 / 5 × 7
                      = 12
अतः भिन्न 4 / 5, और 3 / 7 का म.स. = 12

आगे 📝  जारी है...  दशमलव का ल.स.और म.स. । 

नोट : भिन्नों को दशमलव में भी बदलकर ल.स.और म.स. निकाला जा सकता है। पर जो भिन्नें पूर्णतः विभाजित होती हैं । उनका ही आसानी से ल.स.और म.स. निकाला जा सकता है  । 

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19 Jan 2019

किसी भी अखबार को पढ़ें अपनी मोबाईल में | Read any newspaper in your mobile.


 अब किसी भी Newspaper को पढ़ें अपनी            मोबाईल में हर समय और हर जगह।      

 आज के दौर में भी बहुत से लोग अखबार ( Newspaper )  पढ़ना चाहते हैं पर किसी कारणवश वह पढ़ नहीं पाते हैं। इसी कमी को पूरा करने करने की कोशिश हमने की जिसके की अखबार  पढ़ने के लिए आपको ना कहीं जाना पडे़ और ना ही इसके लिए आपको कोई पैसे देने पड़े । 

एक app है जिसमें हमें बहुत सारे अखबार ( Newspaper ) पढ़ने को मिल जायेंगे। निचे दिए गए चित्र को देखिए :



इसके अलावा कई Newspaper हैं जो इस app में उपलब्ध हैं । इस एप को करने के लिए इस https://play.google.com/store/apps/details?id=io.cordova.epapers लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद आप    Play Store  पर पहुँच जाओगे । अब निचे दिए गए चित्र वाले एप पर क्लिक करें।


 डाउनलोड होने लगेगा। अब एप को खोंले आपको ऊपर दि गए पेपर्स की लिस्ट दिखाई देगी। उनमें जो चाहे उसपे क्लिक करके पढ़ सकते हैं। Newsपेपर के सभी पेजों को पढ़ने के लिए बैक 🔙 पर क्लिक करें फिर सभी पेजों की संख्याओं का समूह दिखाई देगा । बिल्कुल निचे दिए गए चित्रानुसार






अगर आपके लिए यह जानकारी थोड़ी भी Helpfull लगी हो तो हमें अपनी राय निचे कमेंट करके जरूर बताएँ। अगर आप हमसे जुड़ना चाहते हैं तो हमारी साईटस् को फ्लो कर लिजिए जिससे आपको हमारी पोस्ट सबसे पहले मिल जायेगी। 

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15 Jan 2019

परिक्षा में यह.. गलती मत करना । by : Possibilityplus.in




किसी भी परिक्षा में यह गलती मत करना. 


क्या आपने कभी सोचा है कि बहुत अच्छे खासे पढ़ने वाले छात्रों को भी परिक्षाओं में ज्यादा अंक क्यों नहीं मिलता है। चलिए हम जानते हैं इसके बारे में। चूँकि परिक्षा का समय आ रहा है तो आप सभी के लिए यह बातें जानना बहुत ही जरूरी है ।


आज इस पोस्ट के द्वारा हम परिक्षाओं में ज्यादा अंक कैसे प्राप्त करें । इसके लिए बहुत ही जरूरी जानकारी जानेंगे। परिक्षा में ज्यादा प्राप्तांक  ( Mark )
पाना  हर किसी के लिए आसान नहीं होता है। कुछ छात्र - छात्राओं को ज्यादा पढ़ने के बाद भी ज्यादा अंक नहीं मिल पाता है ।  इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे :

  •  पढाई अच्छी तरह से ना कर पाना। 
  • बिना किसी टाइमिंग और गोल के पढा़ई करना। 
  • रटने वाली पढा़ई ज्यादा और समझने वाली कम करना ।
  • परिक्षा देते समय सबसे पहले बड़े प्रश्नों को हल करने की कोशिश करना,  इत्यादि । 

उपर दी गई बातों को करने से बचें और सही तरीके से से पढ़ाई करें । इसके लिए निचे दिए गए शब्दों को जरूर पढ़ें।


अगर आपने पढ़ाई अच्छे ढ़ंग से किया है तो परिक्षाओं में ज्यादा नम्बर पाने के लिए निम्नलिखित बातें जरूरी है -
  1. सबसे पहले परिक्षा हाल में अपने दिलो - दिमाग को शान्त करें।
  2. सबसे पहले छोटे प्रश्नों के उत्तर देने की कोशिश करें।
  3. जो प्रश्न सबसे सरल हो उसे ही सबसे पहले करना चाहिए  ।
  4. जब कुछ भी समझ ना आये तो कम से कम एक मिनट तक गहरी साँस लें और कुछ भी ना सोचे।
  5. इसके बाद फिर से प्रश्नों का हल करने का प्रयास करना चाहिए। 
  6. परिक्षा देते समय पानी पीना बहुत ही अच्छा होता है। 
  7. बीच - बीच में अपने आप को तरोताज़ा कर लेना चाहिए। 





इस प्रकार परिक्षा में ज्यादा प्राप्तांक प्राप्त किया जा सकता है। चलिए अब हम जानते हैं कि क्यों और कैसे हम ऊपर दिए गए बातों पर भरोसा करें ? तो आपको बता दें कि इस साइट possibilityplus.in पर हम यही कोशिश करते हैं कि आपको जो भी जानकारी मिले वह आपको समझ में आ जाये और तभी आप उस जानकारी को उपयोग में ला सकें। दरअसल एक सर्वे किया गया जिसमें बहुत से छात्र - छात्राओं को शामिल किया गया । इनके दो ग्रुप और B बनाये गये  । इसमें A ग्रुप को यह कहा गया कि तुम लोग परिक्षा देते समय बिच - बिच में पानी पीना, तरोताज़ा होना और लगभग हर 45 मिनट बाद कम से कम 1 मिनट तक सभी चीजों को भूलकर आराम कर लेना । दूसरी तरफ ग्रुप को कुछ भी नहीं कहा गया। जबकि दोनों ग्रुप में शामिल होने वाले छात्रों की योग्यता लगभग समान थी । परिक्षा परिणाम को देखा गया तो यह मिला कि ग्रुप A के छात्रों का प्राप्तांक , ग्रुप B के छात्रों से ज्यादा अच्छा था। 
आखिर ऐसा क्यों चलिए समझते हैं वैज्ञानिक निष्कर्ष  द्वारा। 




  वैज्ञानिक निष्कर्ष   


परिक्षा देते समय जब हमें थोड़ी थकावट महसूस होती है और अगर हम उस दौरान पानी का सेवन करते हैं तो हमारा मन शांत होने लगता है और आराम महसूस होने लगता है। यह बात तो हम सभी जानते हैं कि जब हमारा मन और मस्तिष्क शान्त हो तब हम कोई भी सवाल आसानी से समझ सकते हैं। अब दूसरी बात जब हम परिक्षा देते हैं तो हमें अगर कुछ भी नहीं समझ में आ रहा है तो हमें कुछ सेकंड या मिनटों तक आराम कर लेना चाहिए। इससे जो बेकार की बातें हमारे दिलो - दिमाग में होती हैं वह बहुत हद कम हो जाती हैं और परिणामस्वरूप हमें प्रश्नों को समझने में आसानी होने लगती है। यहाँ पर यह ध्यान देने वाली बात है कि यह बातें सीर्फ परिक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए ही नहीं है बल्कि हर काम में इनका उपयोग किया जा सकता है और किया जाता भी है।

अगर आप खूद यह निष्कर्ष या अन्तर देखना चाहते हैं तो आप कोई भी प्रश्न लेकर उसे पहले टेंशन के साथ हल करें और उसी प्रश्न को आनन्द ( enjoy ) के साथ हल करके देखें आपको बहुत ही अन्तर देखने को मिल जायेगा । अगर कुछ भी समझ में ना आये तो यह सोचते हुए कुछ मिनटों तक सब कुछ भूलकर फ्री हो जायें । अब आराम करने के बाद फिर से सभी प्रश्नों को एक - एक करके दोबारा जांच ( चेक ) करके देखें। ऐसा करने पर कोई ना कोई प्रश्न जरूर समझ में आ जायेगा।


हमें उम्मीद है कि आप सभी को इससे जरूर मदत मिलेगी। आपको यह पोस्ट कैसा लगा इसके बारे में हमें कमेन्ट करके जरूर बताएँ ताकि हम और भी अच्छा कर सके आपके लिए।
  Thanks for reading.... 



28 Dec 2018

जिंदगी में इन... शब्दों को कभी मत बोलना || असफलता के सबसे बड़े कारणों में से एक हैं ये शब्द।


दुनियाँ में बहुत से शब्द ऐसे हैं जिन्हें बुद्धिमान लोग ना के बराबर बोलते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि ये शब्द ...उनके लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण साबित होगा।
कुछ ऐसे शब्द... हैं जो कहने से ही नहीं बल्कि उनको सोचने से भी उनके होने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है। जैसे : हमने जब अपनी जिंदगी में बहुत बार ऐसे किसी काम, वस्तु , समय,व्यक्ति, गुण आदि की जरूरत ना समझकर उसे छोड़ देंते हैं और आगे अपने काम की तरफ बढ़ते तो वहाँ पर उन्हें उसी वस्तु जिसे हमने जरूरत ना समझते हुए छोड़ दिया था अब उसी की कमी या जरूरत अचानक ही पड़ जाती है । यह देख हम बड़े हैरान हो जाते हैं । यहाँ पर यह ध्यान देने वाली बात यह है कि जब भी हमें कोई व्यक्ति किसी सहायता या फिर किसी वस्तु को देता है और कहता है कि इसकी जरूरत तुम्हें आगे पड़ सकती है या पड़ेगी तो हमें कभी मना नहीं करना चाहिए चाहे वह वस्तु या विचार जो भी हो कितना ही छोटा या नगण्य लगे। यह सब हम सभी के साथ होता है किसी एक के साथ नहीं। बहुत से लोगों को इसकी जानकारी बहुत कुछ गवाने के बाद होती है और तब से ऐसा करना छोड़ देते हैं।


पर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो जान ही नहीं पाते हैं  कि असल में यह सब जो उनके साथ हो रहा है ये उनके गलत शब्दों के बोलने के चलते हो रहा है। अगर साधारण शब्दों में कहा जाये तो लगभग 90% या इससे भी अधिक हमारे जीवन में गलत होने का कारण गलत शब्दों के बोलने पर होता है । 


क्या हैं ये शब्द पोस्ट पुरा और ध्यान से पढिएगा, क्योंकि ऐसी जानकारियाँ आपको हर जगह मिलना दुर्लभ है । दरअसल बहुत से लोग ऐसी बातों को या तो इसलिए नहीं बताते हैं क्योंकि वे लोग सीर्फ अपना ही भला चाहते हैं ना कि सभी का। लेकिन आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि हम विस्तार से जानने जा रहे हैं इसके बारे में ।








मैं यह काम जिंदगी में किसी भी किमत पर नहीं करूँगा / करूँगी । 

I will never do this work in life.    




जी हाँ अगर आप ऐसी कोई बात कहते हैं कि मैं यह काम तो किसी भी किमत पर और कभी नहीं करूँगा / करूँगी तो यह बात आपका फ्लो ( पिछा करना )

करने   लगेगी  और   लगभग  90%  से  भी   ज्यादा 
संभावना है कि एक ना एक दिन वह काम आपसे 
करवाकर ही छोड़ेगी । इस बात के बहुत सारे उदाहरण देखने को मिल जायेगें । जैसे : एक फिल्म में एक गाना है " मिलने की तुम कोशिश करना वादा कभी ना करना , वादा तो टूट जाता है। "   
  शायद यह आपको सिर्फ एक गाना लगे पर इस गाने के माध्यम से यह बताया गया है कि वादा नहीं करना चाहिए क्योंकि वादे टूट जाते हैं और वादे क्यों टूटते हैं इसके लिए कोई भी कारण हो सकता है। इसी फिल्म  में नहीं बल्कि पहले की फिल्मों में जो गाने होते हैं उनमें कुछ ना कुछ काम का संदेश होता था ।
 इसीलिए हमें कोई भी बात कहने से पहले एक बार जरूर सोचना चाहिए। और इस बात से भी हमेशा बचने की कोशिश जरूर करें कि जब भी कोई बात कहें तो उसमें घमंड ना शामिल हो । क्योंकि अगर हम घमंड के साथ को भी बात करते हैं तो इस ऐसी बातों का उल्टा प्रभाव बहुत ही जल्दी असर दिखाने लगता है । दरअसल दुनियाँ में लगभग सभी ईंसानों या कुछ  देवी-देवता भी हैं जिनको घमंड हुआ था और होता भी है और उनका घमंड भी टूटा और  आगे टूटता भी रहेगा    ।  चलिए कुछ बहुत प्रसिद्ध और बड़े उदाहरणों को देखते हैं जिससे हमें विश्वास हो जाये कि वाकई बातों में वजन है। 





अर्जुन और भीम का घमंड 

     Arjuna and Bhim's pride


महाभारत के समाप्त होने के बाद अर्जुन को यह घमंड हो गया कि वह संसार का सबसे बड़ा धनुधर है और परिणामस्वरूप वह अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करने लगा । जब अर्जुन का घमंड चरमसीमा पर पहुँच गया तो भगवान्  श्री कृष्ण  ने उनके घमंड को चूर चूर किया । दरअसल अर्जुन जब महाभारत में कर्ण से युद्ध कर रहे थे तो जब वे कर्ण के रथ पर जब बाँण मारते तो कर्ण का रथ दश कदम पिछे चला जाता था  परन्तु जब कर्ण अर्जुन के रथ पर बाँण चलाता तो इनका रथ सिर्फ एक कदम  ही जाता था। इसीलिए अर्जुन यह घमंड हो गया कि वह कर्ण से  बड़ा धनुधर है। यह बार  सुनने से भगवान्  श्री कृष्ण को यह ज्ञात हो गया कि अर्जुन को घमंड हो गया है और अब यही सही समय है कि इसे सच्चाई को बता दिया जाये । भगवान्  श्री कृष्ण ने कहा कि वास्तव में कर्ण ही सबसे बडा धनुधर था । यह बात सुनकर अर्जुन हक्का - बक्का रह गये और पूछने लगे कि कैसे ?
भगवान्  श्री कृष्ण ने कहा कि तुम्हारे रथ पर संसार के मालिक यानी कि मैं बैठा था जिसे एक कदम पिछे करना तो दूर की बात है, हिला पाना भी बहुत मुश्किल है पर कर्ण ने तुम्हारे रथ को एक कदम पिछे कर दिया। तो सोचो कर्ण बड़ा धनुधर था या तुम । इसी प्रकार भीम को भी अपने बल घमंड हो गया था तो भगवान्  श्री कृष्ण उनका भी घमंड समाप्त करवाया भगवान् बजरंगबली / हनुमान  की मदत से  ।




चलो यह काम कल तो हो ही जायेगा। 

क्या आप भी बहुत बार ऐसा कहते हैं तो आज से ही यह आदत सुधार लो क्योंकि ऐसे कामों का हो पाना लगभग मुश्किल हो जाता है । याद करिए आप सभी ने बहुत बार ऐसा जब कहा होगा तब वह काम किसी ना किसी वजह से जरूर रूक गया होगा। शायद इसीलिए यह कहा जाता है कि " काल करे सो आज करे, आज करे सो अब, पल में परलय होगी बहुरी करेगा कब ।  "    इसका मतलब साफ है कि हम अगर किसी काम को कल करने की बात करते हैं तो उसे आज ही कर लेना चाहिए ( अगर संभव हो तो  ) और जिस काम को हम आज करने की बात करते हैं उसे अभी के अभी करने की कोशिश करना चाहिए ।
दरअसल हम अगर कोई बात सोचते हैं या फिर कहते हैं कि यह... काम या वह... काम किसी अन्य समय में करेंगे तो क्या गारंटी है कि उस समय आप उस काम आपके पास समय हो या फिर आप वहाँ हों जहाँ पर आपको काम था । यह भी तो हो सकता है कि आपको उसी समय कोई बड़ा और उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण और जरूरी आ जाये जिस समय में आपने एक काम सोच रखा था ।
 दरअसल हम जो काम या बात सोचते हैं केवल उसी बात या काम की संभावना नहीं होती है बल्कि उसके अलावा भी बहुत कुछ होता है जो होने वाला होता है । और इसलिए जब हम कोई बात कहतें हैं तो उसकी नकारात्मक यानी उल्टा प्रभाव वाली बात भी सक्रिय हो जाती है और हमारे काम या उस बात को उल्टा करने की कोशिश करने लगती है।


इस बात को सही से समझने के लिए मान लिजिए किसी प्रतियोगिता में दो लोग शामिल हैं और एकदूसरे के आमने सामने हैं । यदि पहला प्रतियोगी दूसरे प्रतियोगी से यह कहता है कि यह प्रतियोगिता तो मैं ही जितुँगा तो यह बात स्पष्ट है कि दूसरा प्रतियोगी पहले प्रतियोगी को हराने की पूरी कोशिश करेगा क्योंकि अब उसे खुली चुनौती ( open warning ) मिल गयी है जो उसके मान - सम्मान को नष्ट करने वाली बात है। अगर पहला प्रतियोगी कुछ भी नहीं कहता तो शायद दूसरा प्रतियोगी इतने जूनून के साथ प्रतियोगिता में भाग नहीं लेता  और ना ही जीतता।  यहाँ पर दूसरा प्रतियोगी के जितने की संभावना और बढ़ जाती है क्योंकि वह अब प्रतियोगिता जितने के लिए जी जान लगा देगा।  इस कहानी से एक बात स्पष्ट हो रही है कि अगर आप कोई बात कहते हैं जिसमें घमंड, किसी को निचा दिखाना, अतिरिक्त विश्वास (over confident) आदि हो तो ऐसी बातों का उल्टा यानी प्रतिक्रिया भी सक्रिय हो जाता है और बाधाओं को उत्पन्न करने लगता है ।
निचे दिए गए शब्दों को जितना हो सके मत बोलिए :

  • किसी बात, वस्तु, अपने गुणों आदि पर घमंड करना। 
  • कल तो यह ... काम कर ही लेंगे  ( ओवर कान्फिडेंट के साथ  ) 
  • मुझसे बड़ा चालाक कोई नहीं । 
  • कोई भी परेशानी नहीं है या होगी । 


ऊपर दिए गए शब्द हम जब भी बोलते हैं तो इनका ऊल्टा होने की संभावना बढ़ जाती है और इन शब्दों को बोलने वाले लोगों को फेंकु ( बढ़ाचढा़कर बोलन वाली ) कहा जाता है । आखिरकार इन शब्दों को बोलने पर ऐसा क्यों होता है,  पूरी तरह से किसी बात को कहना सही नहीं पर फिर भी हम एक बात जरूर कह सकते हैं। वह यह है कि यह शब्द बड़े ही संवेदनशील हैं और इसी कारण इनको बोलने से इनका प्रभाव जल्द ही दिखाई देने लगता है । जैसे कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को भला - बुरा कहता है तो वह शब्द इतना संवेदनशील होता है कि दूसरे व्यक्ति को तुरन्त ही लग जाता है , चाहे शब्द अच्छा हो या बुरा।



क्या आप जानते हैं जो लोग अच्छे खासे अमीर होते हैं फिर भी ऐसी बातें करते हैं कि आप सुनोगे तो आपको यही लगेगा कि अरे यह तो अच्छा खासा धनी है फिर बातें ऐसे कर रहा है जैसे कि यह तो बहुत ही गरीब हो। ऐसे लोगों के अमीर होने की कुछ बातें इस प्रकार है - - 
  • ये लोग अपने आपको बड़ा - चढ़ाकर नहीं बताते हैं। 
  • ये लोग अपने काम को टालते नहीं। 
  • ये लोग अपने बारे में बहुत ही कम जानकारी देते हैं। 
  • ये लोग प्रायः कम बोलने वाले होते हैं ।
  • ऐसे लोग स्वार्थी भी होते हैं। 
  • ऐसे लोग फेंकु नहीं बल्कि बटेरूँ होतें हैं। 


 ये लोग ऐसा क्यों बोलते हैं और इनके ऐसा बोलने पर इनको क्या फायदा होता है। इस आर्टिकल में आपको इनके अमीर होने का राज मिलने वाला है और अगर आप में भी यह आदत आ जाये तो आप या हम सब अमीर बनने की एक सीढ़ी ऊपर चढ़ जायेंगे। 


माता-पिता अपने बच्चों की बडा़ई.. 

 क्यों नहीं करते.... 

बहुत लोग यह सोचते हैं कि मेरे माता-पिता  मेरी बडा़ई क्यों नहीं करते हैं जबकि मैं तो बहुत अच्छा काम करता हूँ। दरअसल हर माता - पिता  अपने की तारीफ तो खुलकर करना चाहते हैं पर उससे पहले ज्यादा जरूरी यह होता है कि उनके बच्चे पर किसी की बुरी नजर ना लगे। और सत्य यह है कि बडा़ई तब करना चाहिए जब आवश्यक हो बिना मतलब यानी किसी के सामने अपने या अपने बच्चों की सराहना करना भारी पड़ सकता है। क्योंकि बिना आवश्यक की सराहना करना घंमड के दायरे में आता है। यह बात तो हम सब जानते हैं कि घमंड बहुत ही बुरी बात है यह बड़े से बड़े गुण को  नष्ट कर देती है । इसलिए हमारे माता-पिता  हमारी प्रशंसा बहुत कम करते हैं । इस बात से बहुत से लोग अपने माता-पिता  को यह कहने लगते हैं कि इनको मेरा कोई मोल ( मान )  ही नहीं है और भला - बुरा भी कहने लगते हैं । 


आपको क्या लगता है हमें कमेन्ट करके जरूर बताएँ और ऐसी ही जानकारियाँ पढ़ने के लिए  www.possibilityplus.in पर आपका स्वागत करने की कोशिश करेगें ।
 धन्यवाद !







24 Dec 2018

UBI bank ke naye ATM card ka pin kaise banaye?


Union Bank of India  के नये  ATM का Pin कैसे बनायें ?


यूनियन  बैंक के एटीएम कार्ड को  Update  कर दिया गया है, क्योंकि Update  करना जरूरी होता है जिससे कि इसकी सुरक्षा बढ़ाई जा सके इसलिए  यह अपडेट आया है ।


 पहले ऐसा होता था कि पहले से ही चार अंकों का कोड, एटीएम कार्ड के लिफाफे के साथ होता था मगर अब ऐसा नहीं है अब हमें खूद ही एक चार अंकों वाला सुरक्षा पिन ( Security  pin ) बनाना है तो चलिए जानते हैं एटीएम पिन कैसे बनाते हैं।



पिन बनाने के लिए  निम्नलिखित चरण हैं -
  1. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम में अपना नया कार्ड डालें ( Insert your new ATM card )
  2. अब एटीएम के स्क्रीन ( screen) पर दिए गए SET ATM PIN ( GREEN PIN )  पर क्लिक करें।
  3. अब दो विकल्प  ( option ) Generate OTP  ,Validate OTP  दिखेंगे। इसमें Generate OTP  पर क्लिक करें । 
  4. अब आपके मोबाइल फोन में ( जो मोबाईल नम्बर खाते से लिंक होगा  )  एक चार अंकों का OTP ( once time password ) आयेगा  ।
  5. अब दोबारा अपना एटीएम कार्ड, एटीएम में डालें और फिर एटीएम के स्क्रीन ( screen) पर दिए गए SET ATM PIN ( GREEN PIN )  पर क्लिक करें  ।
  6. अब फिर दो विकल्प  ( option ) Generate OTP  ,Validate OTP  दिखेंगे। इसमें अब Validate OTP  पर क्लिक करें और चार अंकों का वह OTP जो आपके मोबाइल में मैसेज के माध्यम से आया था । इसे एटीएम मशीन के स्क्रीन पर डालें। 
  7. अब चार अंकों का कोई ऐसा पासवर्ड दो बार डालें ।
अब आपका पासवर्ड सेट हो चुका है।  इसे याद कर लें या कहीं पर लिखकर रख लें।






ATM से जुड़ी कुछ सावधानियाँ 

( Some precautions related to ATM )

  • अपने पिन को समय - समय पर बदलते रहना चाहिए । 
  • अपने एटीएम पिन को किसी अंजाने व्यक्ति ( जिसे आप न जानते हों )  को न बतायें।  
  • ईमई /मैसेज / फैक्स / फोन पर आपसे आपके एटीएम कार्ड नम्बर / समाप्ति तारीख / CVV no. / ATM pin या OTP की जानकारी मागें तो मत देना।  
  • अपने कार्ड के पिछे 3 अंकों के CVV number को याद कर लें और इसे या तो मिटा दें या फिर किसी तरह से अदृश्य कर दें , क्योंकि यह आनलाईन  खरीदारी करने के काम आता है ।इसलिए CVV number के बिना कोई आनलाईन खरीदारी नहीं कर सकता है। 
  • यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के किसी भी बैंक में  महिने में 8 बार  एटीएम से लेन देन मुफ्त ( Free  ) होता है। इससे  ज्यादा बार उपयोग करने पर  एटीएम पर चार्ज लगेगा  । 
  • यदि आपका कार्ड खो / चोरी हो जाता है तो आप तुरंत 18002082244 या 1800222244 पर काॅल करें ( काॅल बिल्कुल मुफ्त  किसी भी समय  )। 
  • एक दिन में आप केवल ₹ 25000 / - हजार  नगद निकाल और ₹ 25000 / - हजार  आनलाइन खर्च कर सकते हैं  । 


उम्मीद है कि आपके लिए उपयोगी होगा। आप अपने सुझाव या राय निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में दें या हमारी ईमेल आईडी dkc4455@gmail.com  पर ईमेल भेज सकते हैं । धन्यवाद ! 

15 Dec 2018

आविष्कार और खोज में अन्तर | Difference in inventions and discovery.


आविष्कार और खोज दोनों ही अलग - अलग बाते हैं। इसलिए इनका अर्थ भी अलग - अलग ही होगा यह स्पष्ट है  । इस पोस्ट को बनाने की वजह यह है कि जब मैंने इन दोनों का ऐसा उपयोग देखा तो मैं दंग रह गया ।


दरअसल मैं एक बार शून्य ( Zero )   की खोज के बारे में पढ़ रहा था तो मैंने वहाँ पर यह पाया कि कई वेबसाइटों में खोज ( Discovery )  और आविष्कार ( Invention )  दोनों का ही उपयोग किया गया था जो कि गलत है । जबकि  इसका  सही उपयोग  खोज ( Discovery )   है  । क्योंकि शून्य आविष्कार  करने वाली कोई वस्तु नहीं है बल्कि यह एक संख्या है । चलिए इसको समझते हैं उदाहरण सहित।
    इन दोनों के बीच क्या अन्तर है यह जानने से पहले हमें इनके बारे में जानना सही और सार्थक होगा।








आविष्कार ( Invention )

9 Dec 2018

आपके मोबाइल में अगर ये अप्स हैं तो...

गूगल प्ले स्टोर ने डिलीट किया 22 खतरनाक एप्स को |



 प्ले  स्टोर ( google play store  ) एक ऐसा प्लेटफार्म है जहाँ उन apps को रखा जाता है जो कोई डाटा ना चूराते हों और ना ही कोई खतरनाक वायरस फैलाते हों । यही वह कारण है कि  Play Store से app को download  



करना सही होता है। मगर कुछ apps ऐसे हैं जो पहले तो सही होते हैं पर 
 Update करके कुछ ऐसी  Background servers से link कर कर देते हैं जो apps का इस्तेमाल करने वालों के लिए तो खतरनाक होता ही है पर साथ में  विज्ञापनदाताओं  को की जेब पर भी भारी लूट करते हैं। 




इससे एक बात और साबित हो रही है और वह यह है कि अगर आप किसी apps को  Play Store  के अलावा कहीं और से  Install  करते हैं तो संभव है कि आपकी जानकारी चूरायी जा रही हो। अगर आप अपने मोबाइल फोन से लेन देन करते हैं तब तो आपके लिए यह बेहद जरूरी है कि इन apps को तुरंत delete कर दें। 





अगर आपके मोबाइल फोन में ये एप्स हैं तो उन्हें डीलिट कर दीजिए क्योंकि गूगल प्ले स्टोर ने तो इन्हें प्ले स्टोर से डिलीट कर दिया है । आखिर क्या बात है कि प्ले स्टोर ने इन एप्स को डिलीट कर दिया  है। दरअसल  साइबर सुरक्षा फर्म   सोफोस  ने  प्ले स्टोर को यह जानकारी दी कि 22 ऐसे खतरनाक एप्स प्ले स्टोर पर मौजूद हैं जो मोबाईल उपभोक्ताओं को ही नहीं बल्कि विज्ञापनदाताओं को धोखा और  दे रहे हैं । 



उपभोक्ताओं की जेब पर डाका

 " सोफोस " ने 22 ऐसे खतरनाक एप्स के बारे में बताया जो लोग ये एप्स उपयोग कर रहे हैं उनकी जेब पर डाका डाला जा सकता है क्योंकि ये एप्स बकराउंड में ऐसे सर्वर से जुड़े हैं जो कि डाटा चुराने का काम कर रहे हैं। इसके साथ ही ये ऐसे एप्स हैं बैकग्राउंड में ऐसे सर्वर से जुड़े हुए हैं कि ये हमारे मोबाईल फोन में खतरनाक वायरस भी इंस्टाल कर सकते हैं । ये एप्स बैकग्राउंड में चलने के कारण बैटरी की खपत भी बहुत ज्यादा होती है । जिसके कारण मोबाइल का लोड काफी बढ़ जाता है परिणामस्वरूप मोबाईल हंगिग की समस्या उत्पन्न हो जाती है । कुल मिलाकेकर देखें तो यह सभी या ऐसे जितने एप्स हैं वे सभी हमारे लिए घातक हैं।  





कौन - कौन एप्स हैं इस लिस्ट में  ?

 ये 22 एप्स निचे दिए गए हैं -

  • Sparkle FlashLight 
  • Snake Attack
  • Math Solver
  • Shape Sorter
  • Tak A Trip
  • Magnifeye
  • Join Up
  • Jombie Killer
  • Space Rocket 
  • Neon Pong
  • Just Flashlight 
  • Table Soccer
  • Cliff Diver
  • Box Stack
  • Jelly Slice 
  • Ak Blackjack
  • Color Tiles
  • Animal Match
  • Roulette Mania
  • Hexa Fall
  • HexaBlocks
  • PairZap








इन्हें डिलीट कैसे करें ? 

 इनको डिलीट करने के लिए निचे दिए गए स्टेप किजिए :
  1.   सबसे पहले प्ले स्टोर को ओपेन करें। 
  2. सबसे ऊपर बांई तरफ  ≡ निशान पर क्लिक करें। 
  3. My apps & gameg  पर क्लिक करें । 
  4. अब जिस एप को डिलीट करना है उसपर क्लिक करें । 
  5. अब Uninstall  पर क्लिक करें। 

 अब ऐप्स अनइंस्टाल / अस्थापित हो गया है।


उम्मीद है यह जानकारी आपके लिए फायदेमंद होगी। हमें कमेन्ट करके अपनी बात जरूर कहें ।
धन्यवाद ||


27 Nov 2018

विज्ञान ( भौतिक विज्ञान ) की तैयारी करने की अब तक की सबसे बड़ी और वैज्ञानिक विधि || by | Possibilityplus.in


विज्ञान की तैयारी वैज्ञानिक ढंग से...



    परीक्षा का समय बड़ी तेजी से आ रहा है ऐसे में सबसे बड़ी समस्या होती है कि  कैसे सभी विषयों की तैयारी किया जाये। तैयारी करने में तीन विषयों गणित, विज्ञान और अंग्रेज़ी में ज़्यादा परेशानी होती है । आज इस पोस्ट में हम  विज्ञान  की तैयारी के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे  । अगर किसी अन्य विषय की तैयारी करना चाहते हैं तो आप कमेंट के माध्यम से जरूर बताएँ |







नब्बे प्रतिशत ( 90% ) प्रश्नों की तैयारी सूत्र के द्वारा बिना याद किए..✴️ 


    क्या आपको पता कि सूत्रों से सम्बंधित लगभग 90 % प्रश्नों के उत्तर बिना याद किए पता किया जा सकता है। जी हाँ दोस्तों यह वास्तव में सही है। विज्ञान विषय में लगभग 50 %  प्रश्न आंकिक ( numeric )  होते हैं परिक्षा में जिसमें प्रत्यक्षरूप से सूत्र का उपयोग किया जाता है। अब बाकि 40 % प्रतिशत  प्रश्नों का उत्तर अप्रत्यक्ष  रूप से सूत्र का उपयोग करके पता किया जाता है। आंकिक प्रश्नों का उत्तर तो आसानी से जाना जा सकता है परन्तु शाब्दिक प्रश्नों का उत्तर जानना थोड़ा मुश्किल होता है ; क्योंकि इन प्रश्नों को आंकिक रूप से शाब्दिक रूप में बदलने के कारण समझना कठिन हो जाता है। तो चलिए जानतें हैं इनके बारे में विस्तार से... 




कैसे करें शाब्दिक प्रश्नों की तैयारी? 

How to Prepare Literally Questions?


             शाब्दिक प्रश्नों की तैयारी ही ज्यादा भारी पड़ता है विद्यार्थियों   को लेकिन इस वैज्ञानिक विधि के द्वारा बहुत ही आसानी से किसी भी प्रश्न का हल या उत्तर दे सकते हैं। 


उदाहरण : 1.  बल क्या है ? इसे परिभाषित किजिए। 
2. परिणामी बल शून्य कब होगा ? 
3. गतिज ऊर्जा किन - किन चीजों पर निर्भर करती है ? 
4. गतिज ऊर्जा किसे कहते हैं ? 
5. पानी ( जल ) और बर्फ में किसका घनत्व अधिक है ? कारण सहित स्पष्ट किजिए |



इस प्रकार के कितने ही क्यों न प्रश्न हों आप सभी प्रश्नों के उत्तर दे सकते हैं वो भी बिना याद किए। चलिए इन सभी प्रश्नों का उत्तर जानते हैं।




उत्तर :  1. 

       परिभाषा ( Definition )  : " बल वह बाह्य कारक है जो किसी वस्तु को  गतिमान अवस्था से विरामावस्था में और यदि विरामावस्था में है तो गति अवस्था में ला देता है या लाने का प्रयास करता है। "
इसका मात्रक  न्यूटन   होता है। इसे " F  " से प्रदर्शित करते हैं।
सूत्र :                               बल = द्रव्यमान × त्वरण 
या                                     F = ma
यदि त्वरण " g " तब          F = mg

इसकी परिभाषा को गौर से देखिए - इसे सूत्र की मदत से ही बनाया गया है। कैसे ?
आइए जानते हैं :
सूत्र में  बल = द्रव्यमान × त्वरण    दिया गया है।
जहाँ     m = वस्तु का द्रव्यमान
तथा      a = त्वरण 

त्वरण  ( Acceleration ) : वेग परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं।
सूत्र :           a = v1 - v 2 / t

जहाँ v1  = प्रारंभिक वेग है ।
      v 2  = बड़ा हुआ वेग है।
इससे एक बात तो साफ पता चल रही है कि बल का मान त्वरण पर ज्यादा निर्भर होता है क्योंकि अगर वेग में परिवर्तन नहीं हुआ तो बल का मान लगभग शून्य होगा। तो कुल मिलाकर कहें कि बल के लिए द्रव्यमान और त्वरण का होना जरूरी है। अगर कोई वस्तु गति में है तो उसे बल लगाकर रोका या रोकने का प्रयास किया जा सकता है ।
या अगर को वस्तु विरामावस्था में ( रूकी हुई ) है तो उसे बल लगाकर गती की अवस्था में लाया जा सकता है या लाने का प्रयास कर सकते हैं ।



उत्तर :    2. 
   बल क्या है हमने जान लिया पर यह परिणामी बल क्या है इसके बारे में जानना बहुत ही जरूरी है क्योंकि अगर परिणामी का मतलब नहीं पता होगा तो हम उत्तर नहीं दे पायेंगे ।





    परिणामी बल ( Resulting force ) :   जब किसी पिण्ड या वस्तु पर कई बल एकसाथ कार्य कर रहे हों तो सभी बलों का योग ही इनका परिणामी बल कहलायेगा। निचे दिए गए चित्र को देखिए -





इनका परिणामी बल F,  F1, F2 और F3 में जिसका मान अधिक होगा उधर से होकर जायेगा ।
जैसे मान लिजिए
F1 = 1 न्यूटन
F2 = 2 न्यूटन और
F3 = 3 न्यूटन
बल लगे हैं तब परिणामी बल F , F3 = 3 न्यूटन वाले बल की तरफ होकर जायेगा।
अब सवाल यह है कि परिणामी बल कब शून्य ( Zero ) होता है।

जब दो या कई बल ऐसे कार्य कर रहें हों कि उनमें परिणाम  न के बराबर हो तो इसी स्थिति को ही शून्य परिणामी बल  कहते हैं।
या
जब दो  या दो से अधिक बल एक दुसरे के विपरीत और  बराबर हों तो उनका परिणामी बल शून्य होगा। 
निचे दिए गए चित्र में शून्य परिणामी बल को दिखाया गया है।



चित्र से स्पष्ट है कि पिण्ड पर दो बराबर बल हैं जो एक - दूसरे  के  विपरीत दिशा में कार्यरत हैं। इसलिए इनका परिणामी बल शून्य है।
 

 नोट : यहाँ पर हमने प्रश्नों को विस्तार से बताया है क्योंकि अच्छे से समझ आ सके। इसका यह मतलब नहीं है कि आप भी परिक्षा में इतना विस्तार से लिखें। आपको केवल इतना लिखना है जो प्रश्न में पूछा जाता है । जैसे ऊपर दिए गए प्रश्न में यह पूछा गया है कि " परिणामी बल कब शून्य होता है " तो उत्तर में हमें केवल यह लिखना है -
 जब दो  या दो से अधिक बल एक दुसरे के विपरीत और  बराबर हों तो उनका परिणामी बल शून्य होगा।

हाँ अगर प्रश्न में यह भी पूछा गया हो कि इसे समझाइए तब हम थोड़ा विस्तार करके लिखेंगे ।






उत्तर :  3. & 4.

गतिज ऊर्जा क्या है इसके बारे में जान लेना चाहिए तब हम आसानी से यह समझ जायेंगे इसके सवालों को । 

गतिज ऊर्जा ( Kinetic energy )  
परिभाषा ( definition ) 
            किसी वस्तु में उसकी गति के कारण जो ऊर्जा उत्पन्न होती है उसे उस वस्तु की गतिज ऊर्जा कहते हैं। इसका भी मात्रक जूल  होता है ।   इसका सूत्र K =  ( 1 / 2 ) mv2 
होता है। गतिज ऊर्जा की परिभाषा से ही एक बात स्पष्ट हो रही है कि गति के कारण ऊर्जा उत्पन्न होती है। अतः स्पष्ट है कि वेग ही मुख्य कारण है जो गतिज ऊर्जा को ज्यादा प्रभावित करता है। 
इसके बाद द्रव्यमान गतिज ऊर्जा को प्रभावित करता है क्योंकि सूत्र में द्रव्यमान का वेग में गुणा है। अगर कुल मिलाकर कहें कि गतिज ऊर्जा किन - किन कारणॊ पर निर्भर करती है तो इसका सीधा उत्तर है -   वेग और द्रव्यमान।
क्योंकि दोनों का गुणनफल ही गतिज ऊर्जा के मान के लिए उत्तरदायी है।




उत्तर :  5. 

    जल और बर्फ़ में किसका घनत्व अधिक होता है ?
माना कि इसका उत्तर हमें नहीं पता या नही याद  है तो सवाल यह है कि इसे कैसे पता करें । यहाँ पर घनत्व की बात हो रही है कि किसका ज्यादा है और किसका कम। यहाँ पर अगर आप घनत्व के बारे में जानते हैं तो जाहिर है कि आप यह उत्तर भी पता कर सकते हैं। अगर नहीं पता है तो चलिए घनत्व के बारे में जानते हैं।



घनत्व ( Density ) 

किसी वस्तु का घनत्व, एकांक आयतन में उपस्थित द्रव्यमान की मात्रा को कहते हैं  ।
मात्रक :  इसका मात्रक " किग्रा / मीटर3  होता है।
सूत्र :      d = m / v

अब यहाँ पर इस बात पर भी गौर किजिएगा कि घनत्व की परिभाषा भी सूत्र के माध्यम से बनायी गयी है । इसका सीधा मतलब है कि हमें यह सभी प्रश्न याद करने की कोई जरूरत नहीं है। चलिए अब घनत्व के बारे में जानतें हैं।


घनत्व का उदाहरण ( Example of Density  ) 


 घनत्व शब्द घन विशेषण है। घन का मतलब किसी वस्तु की एकांक आयतन में उपस्थित मात्रा से है। जैसे कोई चीज़ ज्यादा हो जाये तो उसे हम प्राय घनी, घना कहते हैं।

   मान लिजिए दो गाँव A और B है। गाँव A में 100 लड़के और गाँव B में 50 लड़के हैं । यहाँ पर हम क्या अन्तर देख रहे हैं। गाँव A में लड़कों की संख्या अधिक है तो इसी को हम इस प्रकार से कह सकते हैं कि गाँव A में लड़कों की संख्या का घनत्व अघिक है। ठीक इसी प्रकार से पानी और बर्फ के घनत्व के बारे में हमें बताना है ।


पानी और बर्फ में किसका घनत्व अधिक.. 

 हम जानते हैं कि अगर किसी बर्फ़ के टुकड़े को जल ( पानी ) में डूबोया जाता है तो बर्फ़ का टुकड़ा पानी में नही  डूबता है  ।अतः बर्फ़ का घनत्व कम होता है और पानी का ज्यादा। अगर बर्फ़ का घनत्व अधिक होता तो बर्फ पानी में ही डूबा रहता  । यह घनत्व में अन्तर जानने का आसान तरीका है।





अभी  📝जारी है..



17 Nov 2018

गणित में होने वाली सबसे बड़ी गलतियाँ | जानकारी by- possibilityplus.in


गणित में होने वाली सबसे बड़ी गलतियाँ.... 


नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है,  आप सभी को गणित कम आती हो या ज्यादा पर गणित की कुछ ऐसी गलतियाँ आप सभी के सामने प्रस्तूत करने जा रहा हूँ जिसे देखकर आप अपने दाँतों तले उंगली दबा लेगें ।
क्या हैं यह गलतियाँ चलिए एक नजर डालें इन पर - 
  1. भाग में होने वाली सबसे बड़ी गलती। 
  2. समीकरणों के घटाने में होने वाली गलतियाँ।
  3. कोष्टकों का उपयोग न करना।







भाग में होने वाली सबसे बड़ी गलतियाँ  ||


आप सभी को यह जानकारी बड़ी हैरानी होगी कि भाग जैसे छोटे सवालों में भी ऐसी गलती हो सकती है। भाग में एक नहीं बल्कि दो गलतियाँ हैं जो हमें शर्मसार कर देने वाली है। अगर मैं कहूँ कि 3 से 1 में भाग करें तो यह देखकर आपमें से कुछ लोगों को शायद ऐसा लग रहा होगा कि यह तो बहुत ही छोटी सी भाग है और इसको हल करने में भला कौन सी कठिनाई है। इसी की सहायता से हम जानेंगे भाग में होने वाली गलतियों के बारे में तो चलिए इस भाग को करके ही देखते हैं।







इस भाग में दो गलतियाँ शामिल हैं -

  1. दशमलव लेने पर संख्या 1 से 10 नहीं होगी ।
  2. भाग के नियम के अनुसार भाजक का भागफल में गुणा और शेष को जोड़ने पर मान भाज्य के बराबर होना चाहिए लेकिन इस भाग में ऐसा नहीं है ।


अगर आपको इस भाग को चेक करना है कि सही है कि नहीं तो आप इस सूत्र -   
भाज्य = भाजक × भागफल + शेषफल  से कर सकते हैं।
इस सूत्र से सीर्फ इसी भाग को नहीं बल्कि दुनिया की किसी भी भाग पर आजमा सकते हैं।









समीकरणों के घटाने में होने वाली गलतियाँ ||



समीकरणों में के घटाने में होने वाली गलतियाँ भी बहुत होती हैं पर यह गलतियाँ बहुत कम गणित के जानकार लोगों द्वारा होती हैं । यह समीकरण देखिए -




यह मान कैसे आया है इसको जानने के लिए  निचे दिए गए तस्वीर को देखें -




ऊपर दिए गए चित्र से स्पष्ट है कि विपरीत चिंहो का एक साथ गुणा करने पर " - "  प्राप्त होता है और एक समान चिन्हों का गुणा करने पर " +  " प्राप्त होता है। यह तो चिन्हों का गुणा था पर हम देखेंगे इसकी भाग का क्या सूत्र / नियम है। निचे दिए गए चित्र को देखिए -






जैसे ( - a ) / ( - b ) = + a / b
                 + a / b = + a / b
               - a / + b = - a/ b
               + a / - b = - a / b

इस तरह हम देख रहे हैं कि कैसे चिन्हों का मान भाग देने पर बदलता है। इसे नियम की तरह याद  या कहीं नोट कर लिजिए क्योंकि यह बहुत काम की चीज है।

कोष्टकों का उपयोग न करना .. 


क्या आपको पता है कि गणित में कोष्टकों का कितना बड़ा और महत्वपूर्ण स्थान है। दरअसल गणित में ही नहीं बल्कि कोष्टकों उपयोग हर विषय में किया जाता है पर गणितों में इसका अच्छा -  खासा उपयोग किया जाता है। आइए जानते हैं इसके बारे में। 
      मान लिजिए समीकरण   4x - 5y = 0  में से समीकरण  - 2x + 3y = 0 को घटाना है। इसको घटाने से पहले हमें कोष्टक का उपयोग करना पड़ेगा नहीं यह घटना ही हल करने में असुविधा होगी। 

( 4x - 5y  ) - ( - 2x + 3y  ) 
= 4x - 5y  + 2x - 3y 
= 6x - 8y          -  Answer 




तो उपर देखने से यह स्पष्ट हो रहा है कि अगर कोष्टक " ( )" का उपयोग नहीं किया गया होता तो समीकरण हल करने की बात ही छोडि़ए इसके बिना समीकरण कितना अटपटा सा लगता । इस किसी भी समीकरण को अगर घटना हो जोड़ना हो या फिर गुणा करना हो तो हमें कोष्टकों का उपयोग जरूर करना चाहिए।
आप हमें अपनी किमती राय जरूर देना ।
धन्यवाद !!




आगे जारी है ....... 





7 Nov 2018

दो चरों वाले रैखिक समीकरणों का हल और मुख्य उपयोग।


दो चरों वाले रैखिक समीकरण

Two-dimensional linear equation



दो चरों वाले रैखिक समीकरण के सवाल को जानना हमारे लिए बहुत ही जरूरी  है क्योंकि यह एक ऐसा सवाल है कि जो दो प्रकार के अज्ञात मान / वस्तु की जानकारियाँ प्रदान करता है वो भी बहुत ही आसानी से । और इसमें ज्यादा समय भी नहीं लगता है। जैस : भिन्न के सवाल, आयु / ऊम्र, काम - समय, चाल - समय, विज्ञान के सवाल, घातांक के सवाल , त्रिकोणमितिय के सवाल, ज्यामितीय के सवाल , समाकलन - अवकलन आदि सभी प्रकार के सवालों में इसका उपयोग विशेष रूप से होता है। दो चरों वाले रैखिक समीकरणों को हल करने की मुख्यतः तीन विधियाँ होती हैं -

  1. विलोपन विधि ( Deletion method ) 
  2. विस्थापन विधि ( Displacement method ) 
  3. वज्रगुणन विधि ( Vagranity method ) 







  विलोपन विधि  ( Delation method )   



 इस विधि में सुविधानुसार जिस पद को विलूप्त करना चाहते हैं उसे कर सकते हैं। जब एक पद विलूप्त हो जाता है तो दूसरे पद का मान आसानी से मिल जाता है। इस प्रकार पदो को विलूप्त करने की क्रिया को ही विलोपन कहते हैं । 

 क्या विलोपन का मतलब नहीं समझ में आ रहा है या पता नहीं है तो कोई बात नहीं है । चलिए जानते हैं इसके बारे में 


 विलोपन का मतलब है कि किसी भी चीज / वस्तु का पूर्ण रूप से समाप्त हो जाना या अस्तित्वहीन हो जाना। आपने सूना ही होगा कि पक्षियों की यह या वह प्रजातियों विलूप्त हो रही हैं या किसी अन्य जानवरों की कोई प्रजाति विलूप्त हो चुकी है तो इसका मतलब यह है कि इनकी एक ऐसी प्रजाति थी जो अब धीरे - धीरे समाप्त हो रही हैं या हो चुकी हैं । 





हल करने की विधि (  Method of solving )  

हल करने की विधि इस प्रकार है - 

  1. सबसे पहले दोनों समीकरणों में x या y किसी एक के गुणांक को गुणा या भाग करके बराबर करिए । 
  2. अब जो गुणांक बराबर है उसे जोड़कर या घटाकर काट दीजिए। ( यदि दोनों एकही चिंह के हैं तो घटाओ और अगर चिन्ह अलग - अलग है तो जोड़ दीजिए। ) 
  3. अब जो गुणांक बचा है उसे गुणा / भाग करके हल कर लिजिए । 

उदाहरण ( Example ) 1.    3x + 4y = 10 तथा 5x + 6y = 24  का हल किजिए / x और y का मान निकालिए ।

हल  (solution)  :  3x + 4y = 10     समी० ( 1 ) 
                         5x + 6y = 24     समी०  ( 2 ) 
अब x या y के एक गुणांक में से किसी एक को बराबर करना होगा। चलिए हम यहाँ x के गुणांक को बराबर करते हैं। अब हम यहाँ देख रहे हैं कि x के दो गुणांक 3 और 5 हैं। अगर समी० ( 1 ) में 5 से और समी० ( 2 ) में 3 का गुणा करें तो दोनों समीकरणों ( समी०) में x का गुणांक 15 हो जायेगा। गुणा करने पर  -

5 × ( 3x + 4y = 10 ) 
                          15x + 20y = 50   समी० ... ( 3 ) 
                     3 × ( 5x + 6y = 24 ) 
                     15x + 18y = 72   समी०... ( 4 ) 

चूँकि समी० ... ( 3 )  और  समी०... ( 4 )  में x के गुणांक 15 हैं और एकही चिन्ह के हैं  । इसलिए समी० ( 3 ) से समी० ( 4 ) को घटाने पर, 



   y = - 11
का मान समी० ( 1 ) में रखने पर,
 3x + 4 ( - 11 ) = 10  या 3x - 44 = 1 0
3x = 44 + 10 = 54
x = 54 / 3 = 18
अतः x = 18 और y = - 11 है। 

जारी  📝 है ..  

4 Oct 2018

किसी भी काम में सफल होने का जादुई तरिका।


सफलता पाने का जादुई तरिका


स्वागत है आपका सभी का हमारी वेबसाइट possibilityplus पर । इस आर्टिकल से आप अपनी जिंदगी को एक जादुई तरिके से बदल सकते हैं। 




यह बात मैं  इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि आज जो लोग भी ऊँचाइयों की सीढियाँ चढ़े हैं उनकी सोंच और ईरादे इतने मजबूत थे कि उन्हें कोई भी सफल होने से नहीं रोक पाया। सफल होने के लिए दो बातें बहुत ज्यादा माईने रखती हैं -

  1. सोंच  और 
  2. पक्का ईरादा  ।




पर समस्या यही है कि हममे से बहुत से लोग ऐसा नहीं कर पाते हैं। पहले मैं भी इस बात को नहीं समझ पाता था कि भला सोचने से कैसे सफलता पाई जाती है । लेकिन बार - बार जब यह बात मेरे पास आयी कि तो मैंने ऐसा सोचना प्रारंभ कर दिया और परिणाम जो मिला मुझे अदंर से हिला कर रख दिया । मैने यह पाया कि हम जो भी कुछ हैं आज वो हमारी सोंच का परिणाम है। यह बात जो मैंने कहा कि " हम जो भी कुछ आज हैं यह सब हमारी सोंच का परिणाम है। "  यह बात भगवान महात्मा बुद्ध  की है। दोस्तों आप possibilityplus ( संभावना बढ़ाने ) की साईट पर पढ़ रहे हैं जहाँ आपको संभवत: हर समस्या का समाधान मिल सकता है। अगर आप इसे अच्छी तरह से पढ़ लोतो आपको किसी भी काम सफल में होने से कोई नहीं रो पायेगा / पायेगी।  दुनिया में कोई काम कठिन है तो वह है अपनी असफलता को लेकर जीना और इसे ही अपनी किस्मत मान लेना कि मैं कुछ भी नहीं कर सकता हूँ। यह एक बहुत ही बडी़ कमी, भ्रामक और शर्मनाक बातें हैं जिन्हें हम अपने अन्दर रखकर बहुत ही गलती करते हैं या यह भी कहूँ कि अपने आपके पैरों पर कुल्हाड़ी मारने के समान है तो यह भी गलत नहीं होगा। जैसा हम सोचते हैं या जैसी हमारी सोंच होती है वैसा ही हमारा व्यवहार भी होने लगता है। तो हमें सबसे पहले अपनी सोंच को ही सही रूप देना होगा तभी कोई बात / काम बनेगा। सारा खेल दिलोदिमाग का है, अगर आप  दिलोदिमाग से तैयार हैं तो आप हर काम कर सकते हैं।  




दुनियाँ का हर आदमी सफल है...



जी हाँ दुनियाँ का हर आदमी सफल है अब आप कहोगे कैसे ? तो आगे पढो़ और देखो। हम सभी को यह बात पता है जब कोई बच्चा / बच्ची इस दुनिया में पैदा होता है तो वह पैदा होने तुरन्त बाद ही चलने - फिरने नहीं लगता है। इस समय बच्चे के लिए बैठना और  चलना तो बहुत दूर की बात है वह तो अपने शरीर को भी नहीं संभाल पाता है, जबकि उसके पास हाथ - पैर सब मौजूद होता है। इस बात को गहराई से समझने की कोशिश करिए बच्चे के पास वह सभी चीजें मौजूद है फिर भी वह ना तो वह अपने आप को सँभाल सकता है और ना ही चल फिर सकता है । जबकि यही बच्चा कुछ महीनों बाद पहले बैठना शुरू करता है फिर हाथ - पैर की मदत से चलना प्रारंभ करता है। धीरे -  धीरे दोनों पैरों से चलने भी लगता है। इसके बाद यही बच्चा जो अपने आप को संभाल नहीं पाता था, ठीक से बैठ नहीं पाता था, अब वह सीर्फ चलता ही नहीं बल्कि दौड़ने और कूदने भी लगता है। बच्चों को यह बात नहीं पता होती है कि उसे कैसे चलना है, कैसे दौड़ना है और अपने आपको कैसे संभालना है। फिर भी वह इन सभी कामों को कर लेता है और यह सब कैसे हुआ। प्रयास ( practice   ) एक ऐसी चीजों में से एक है जो हमें हर कामों को करने के लिए अतिआवश्यक है ।



 यहाँ पर एक बात पर गौर करने की है, बच्चों को जो चीजें बहुत ही मुश्किल लगती है वही चीजें हमको उतना ही आसान लगती हैं बल्कि यूँ कहें कि यह सब तो हमारे लिए बाँये हाथ के खेल से भी निचे की चीजें हैं। क्योंकि हम इन  सीढ़ियों को पार कर ऊपर की सीढियाँ चढ़ रहे होते हैं। बच्चा इसलिए चलना सीख जाता है क्योंकि सभी लोग उसे चलने के लिए उसे छोड़ देते हैं। कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं चाहता है कि कोई भी बच्चा न चले। कुल मिलाकर कहे कि बच्चों के चलने का विरोध कोई नहीं करता है।  इसलिए बच्चा चलना सीख जाता है। और जब वही बच्चा बड़ा हो जाता है तो उसे सफल बनाने में बहुत कम लोग ही उसका साथ देते हैं । इस तरह से हर आदमी की पहली सफलता बचपन में चलना - फिरना और बैठना होती है। बच्चा भी लोगों की बातों को अगर उस समय समझ पाता जब वह चलना -  फिरना उसके लिए असंभव जैसा होता  क्योंकि 
अब जब आप बड़े हो गए हो तो यह जरूरी नहीं है कि आपका कोई साथ दे। अब आपको सभी कार्य खुद करना है पर कैसे यह सवाल बार - बार आयेगा जब तक कि आप वह काम कर ना लो। 




जो महसूस करोगे वही होने लगेगा ? 


 यह बात मैं यूँ ही नहीं कह रहा हूँ बल्कि मैंने अपने जीवन में बार - बार महसूस किया है । अगर आप किसी परिमाण की सोंच रहे हैं तो मैं यह बताने मे खुशी महसूस कर रहा हूँ यह अनमोल वचन भगवान महात्मा बुद्ध  जी का है।  क्या आपको अभी तक विश्वास नहीं हो रहा है कि यह बात सही है तो चलिए मैं आपको कुछ ऐसे उदाहरणार्थ पेश करने जा रहा हूँ जो आपके विचारों को खोलेगा ही नहीं बल्कि पंख भी दे देगा । इसके लिए निम्नलिखित शर्तें हैं - 
  1.  जो भी महसूस करें तो दिलो दिमाग से करें । 
  2.  महसूस करने की ऊर्जा निरन्तर होनी चाहिए।  

इन दोनों ही बातों को गहराई से समझते हैं । सोचो कि " मुझे सुबह के 4 , 5, 6 बजे जागना है तो जरूर जागना है। "
यकिन मानिये यह होता है और अगर विश्वास नहीं ह तो इसे आप आजमा सकते हैं । इसे पढ़ने और समझने के लिए यह पोस्ट    https://www.possibilityplus.in/2017/02/jab-kabi-hame-kisi-jaruri-kaam-ke-liye.html?m=1.... जागने लिए क्लिक करें।


नोट :
आगे लिखना बाकी है तब तक इसको पढे़ और इसके बारे में  कमेंट जरूर करें।



आगे ✍️जारी है... 

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