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गणित के सवाल - जवाब ( by : Possibilityplus.in )

आपके प्रश्न ( Your question )   सवाल - जवाब में आपका स्वागत है। हमारे एक मित्र दर्शक ने पूछा है कि 923 में 4 से जब भाग करते हैं तो 3 शेषफल आता है, तो भाग 0 बार जाती है तो  ठीक है पर जब हम 25 में 4 से भाग देते हैं तो शेषफल 1 बचता है और 923 वाली भाग की तरह अगर इसमें भी 1 में भाग देते समय 0 बार भाग लेकर जाये तो भागफल 60 हो जायेगा जो कि गलत है , तो सही नियम क्या है ?  बतायें।
 हमारे उत्तर ( Our answer )              भाग करने की मूल प्रक्रिया और नियम जानने के लिए यह पोस्ट ध्यान से पढ़िएगा। भाग करने का मूल नियम इस प्रकार है - भाजक से किसी ऐसी संख्या में गुणा करें कि गुणनफल भाज्य के बराबर हो जाये या फिर थोड़ा कम रहे। भाग शून्य बार तभी जाती है जब भागफल ईकाई से भी कम हो या शून्य के आलावा कोई विकल्प ना हो।


उदाहरण ( Examples )        उपर्युक्त नियमों को समझने के लिए हम छोटे-छोटे उदाहरणों को देखना आवश्यक है।
अगर हम 7 से 1 में भाग करें तो भागफल कितना आयेगा यह हमें अंदाजा लगाना पडे़गा। हमें 7 में एक ऐसी संख्या का गुणा करना होगा जिससे कि इनका गुणनफल ( 7 × ?  = 1 या 0.9, 0.8, 0.7 ) के बराबर हो जाये…

सुबह में सूर्य लाल क्यों दिखाई देता है ।। full details in hindi by Possibilityplus ।।

सूर्य लाल क्यों होता है ? ( सूर्योदय और सूर्यास्त के समय )

   सूर्य का लाल रंग में ( सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में ) दिखना एक प्राकृतिक घटना है जिसे हम वैज्ञानिक तर्क के आधार पर समझेंगे। उससे पहले लोगों की राय इसके बारे में क्या है उसे जान लेते हैं।



 बहुतों का कहना है कि सूर्य लाल इसलिए दिखाई देता है क्योंकि लाल, नारंगी और पीले रंग के अलावा बाकी सभी ( हरा, आसमानी, नीला और बैगनी ) रंगों का प्रक्रिणन हो जाता है। प्रक्रिणन क्यों होता है ? इसके जवाब में उनका कहना है कि वातावरण में मौजूद शूक्ष्म कणों ( धूल, गैस आदि ) के द्वारा  अत्यधिक आवृत्ति या कम तरंगदर्ध्यों वाली प्रकाश तरंगों का प्रक्रिणन या फैलाव हो जाता है। अतः हमें सूर्य लगभग लाल रंग का दिखाई देता है।



  क्या यह कारण या उदाहरण हमारे मन को संतुष्ट करता है या यह हमें पुरी तरह से समझ में आया ? 
  अधिकांश लोगों का जवाब होगा " ना "  और कुछ लोगों का जवाब " हाँ "  में भी होगा।

चलिए अब ऐसे सवालों को देखते हैंं जो इस उदाहरण पर प्रश्न खड़ा करते हैं -


प्रक्रिणन सुबह और शाम में ही क्यों होता है ? प्रक्रिणन दोपहर में क्यों नह…

Bodmas rule 2 ( बोडमास नियम 2) by: Possibilityplus

क्या इन सवालों के जवाब हैं हमारे पास ?



ऐसे सवालों 2 ÷ 2 ÷ 2 ÷ 2 को किस तरफ से और क्यों हल किया जाता है ? इस  2 ÷ 2 ÷ 2 ÷ 2 प्रश्न का उत्तर क्या है ? 36 ÷ 4 × 3 का मान क्या होगा ? 3 या 27 क्या Bodmas नियम पुरी तरह से लागू होता है ? 




अगर देखा जाए तो बहुत से लोगों को इस तरह के सवालों को लेकर कन्फ्यूजन बना रहता है कि किधर से हल करें और किधर से नहीं।






नोट:इस तरह के सवालों को हल करने और समझाने का संभवतः पुरा प्रयास किया गया है, अगर फिर भी कोई कमी हो तो कमेंट जरुर करें। धन्यवाद ? 


   आपको बता दे कि हम ऐसे 2 ÷ 2 ÷ 2 ÷ 2  किसी भी सवाल को किसी भी तरफ से हल कर सकते हैं। ऐसा करने पर मान में कोई अंतर नहीं होगा। पर कैसे ?  जानने के लिए पुरा आर्टिकल ध्यान से जरूर पढ़िएगा।


              बोडमास ( Bodmas ) एक ऐसा नियम है, जो ऐसे सवालों 36 ÷ 4 × 3 , 8 ÷ 4 ( 2 + 2), 
2 ÷ 2 ÷ 2 ÷ 2 = ? को हल करने के लिए बनाया गया है पर क्या आप जानते हैं कि यह नियम पुरी तरह से सही है या काम करता है ? । यह बात इन उदाहरणों से निकलकर आ रही है । चलो मान भी लेते हैंं  कि Bodmas नियम गलत है तो कोई ऐसा कारण तो दो जिससे यह सिद्ध हो स…

पृथ्वी पर पानी है पर चन्द्रमा पर नहीं ऐसा क्यों ?

पृथ्वी पर पानी है पर चन्द्रमा पर नहीं ऐसा क्यों ???
पृथ्वी और चंद्रमा दोनों पर पानी के होने या ना होने की वजह है इनका वातावरण।
 अब ये वातावरण  क्या है इसको जाने बिना हमारी जानकारी अधुरी है। 









वातावरण (atmosphere,environment) 

    वातावरण का शाब्दिक अर्थ जानने के लिए हमें इसका संधि विक्षेद करना होगा। संधि विक्षेद वातावरण = वात + आवरण
वात का मतलब हवा  ( हवा = वात, वायु, बयार, पवन आदि ) होता है। इसके बाद आवरण का मतलब परत, कवर आदि होता है। इन दोनों शब्दों को एक साथ मिलाकर अर्थ निकाले तो इसकी परिभाषा इस प्रकार होगी - वातावरण : हमाारे चारों तरफ जो हवा का आवरण है इसे ही वातावरण कहते हैं।   अब सवाल यह है कि यह वातावरण किस बात पर निर्भर करता है, कैसे बनता है और क्यों ?

वातावरण उत्पन्न होने के कारणवातावरण को उत्पन्न करने वाला कारण है गुरुत्वीय त्वरण (gravitational acceleration)     जिस ग्रह का गुरुत्वीय त्वरण जितना अधिक होगा उस ग्रह पर उतना ही ज्यादा वातावरण होगा। हम जानते हैं कि पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण चन्द्रमा से अधिक है। यही कारण है कि चन्द्रमा पर वातावरण बहुत कम है। अब आती है उस सवाल की जो सारे सवालो…

भाज्य और अभाज्य संख्या क्या है ?

भाज्य और अभाज्य संख्याओं की जानकारी (सरल शब्दों में) 






 भाज्य और अभाज्य का नाम सुनते ही बहुत से छात्र - छात्राओं को गणित में बोरियत महसूस होने लगता है। कारण है तो जानकारी का अभाव। चलिए जानते  हैं >>





भाज्य संख्या :  वे संख्याएँ जो 1 और स्वयं को छोड़कर किसी अन्य संख्या से (बिना दशमलव के) विभाजित हो जाये भाज्य संख्या कहलाती है। 
जैसे : 4, 6, 8, 9, 10, 12, 14, 15, 16, 18, 20 इत्यादि भाज्य संख्याएँ हैं। इन सभी संख्याओं में 1 और स्वयं के अलावा किसी तिसरी संख्या से पुरी - पुरी विभाजित या कट रही हैं।4 = 1 × 2 × 26 = 1 × 2 × 3 8 =  1 × 2 × 4  जैसे : 4, 1 और 4 के अलावा 2 से पुरी तरह से विभाजित या कट रही है। अतः 4 एक भाज्य संंख्या है। इसी तरह 6 ,2 और 3 से विभाजित हो रही है। अतः 6 भी एक भाज्य संख्या है। इसी तरह हम बाकि सभी भाज्य संख्याओं का पता कर सकते हैं। यहाँ हम देख रहे हैं कि जो भी भाज्य संख्या है उसका ( 1 और  स्वयं के अलावा ) कुछ न कुछ गुणनखंड जरूर होता है। इस आधार पर हम यह कह सकते हैं कि " वे सभी संख्याएँ जिनका 1 और स्वयं के अलावा कोई गुणनखंड हो तो उन्हें भाज्य संख्या कहते हैं। " 



सूर्य के प्रकाश में सात रंग क्यों होता है ?

सूर्य ☀ के प्रकाश में सात रंग होते हैं यह लगभग हर शक्स जानता ही होगा। पर यह क्यों होता है यह बहुत कम लोग ही जानते होंगे। इस सवाल का जवाब जानने से पहले हमें एक और महत्वपूर्ण सवाल देखना अतिआवश्यक है और वो है सूर्य के प्रकाश के रंग का विशेष क्रम में होना - लाल (Red) , नारंगी(Orange, पीला(yellow) हरा(Green), आसमानी (Sky), नीला (Blue) तथा बैगनी( Violet)





    आखिर इसी क्रम में ही क्यों होते हैं ये सभी रंग ? इससे पहले हम पहले सवाल का जवाब /उत्तर देख लेते हैं। 



सूर्य के प्रकाश में सात रंग क्यों होते हैं ?

सूर्य के प्रकाश में सात रंग नहीं बल्कि विभिन्न प्रकार के रंग होते हैं और यह इतनी तिव्रता से बदलते हैं कि हमारी आँखेें इन सभी रंगों को देखने में सक्षम नहीं होती है और देख नहीं पाती है ।  हमारी आँखें केवल उन्हीं सात रंगों ( लाल, नारंगी, पीला, हरा, आसमानी, नीला और बैगनी )  को देख पाती है जो परिणामी रुपसे स्थिर होते हैं और आँख की क्षमता के अनुरूप होते हैं । इस तरह हम कहते हैं कि सूूर्य के प्रकाश में सात रंग ही होते हैं। इस घटना को यह कहावत पुरी तरह से सूट करती है " जो होता है वह दिखता नहीं औ…

Isro ( इसरो ) ka fullform.

इसरो का पुरा नाम    



इसरो का पुरा नाम क्या है ? इसका पुरा नाम ( हिन्दी में )  " भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन " है।



ISRO fullform in english  I  = Indian S = Space  R = Research  O = Organisation 







  ISRO भारत में कहाँ पड़ता है ?     इसकाका मुख्यालय भारत के " कर्नाटक " राज्य की राजधानी बैंग्लोर( बैंगलुरू ) में है। इसका का पुरा नाम जानने के बाद यह पता चलता है कि यह भारत के लिए अंतरिक्ष कार्यक्ररमों को बढ़ावा देेन के लिए है। इसी संस्था के कारण हम मोबाईल 📱,  टीवी 📺, इंटरनेट आदि का उपयोग कर पा रहे हैं। यही संस्था उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजकर उन्हें एक निश्चित कक्षा में स्थापित करती है जिससे वह संबंधित जानकारी देता रहे। 


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LKG&UKG fullform 




आशा है आपके लिए यह पोस्ट उपयोगी साबित हुआ होगा।


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दिशा कैसे पता करें ?

दुनियाँ के किसी भी कोने में जाओ आप हर जगह पर दिशा पता कर सकते हैं।  हमने यह आर्टिकल उपयोग करने के लिए बनाया है ऊम्मीद है आपके लिए उपयोगी साबित होगा। इस आर्टिकल को अन्त तक जरूर पढिएगा क्योंकि हमने इसमें लगभग सभी संभव तरिके बताएँ हैं जो आपको हर परिस्थितियों में दिशा पता करने के लिए काफी हो सकता है।






   दिशा का पता करने से पहले हम दिशा के बारे कुछ अहम / आवश्यक जानकारी देने जा रहें हैं ताकि दिशा पता करना और आसान हो जाये | इसमे सबसे पहले जानतें हैं दिशा क्या है और इसका महत्व क्या है |





   दिशा ( Direction  )    



एक ऐसा मैप या साधन जो हमें उत्तर - दक्षिण , पूरब - पश्चिम , उपर - निचे और आगे - पीछे  इन सभी को प्रदर्शित करे दिशा कहलाता है | दिशा मुख्यतः चार प्रकार की हैं ( अगर उपर - निचे को छोड़दे तो ) लेकिन इनको अलग - अलग भागो  मैं बाँटे तो ये दश प्रकार की हो जाती  है | अगर हमें इन चारों के बीच की दिशाओं को बताना है तो चित्रानुसार बतायेंगे।




जैसे हमें पश्चिम और उत्तर केे बीच की दिशा को बताना है तो हम उत्तर-पश्चिम कहेेंगे। इसी तरह से बाकि सभी दिशाओं के बारे में हम कहेेंगे।




       घर बनाने में दिशा …

भिन्न का गुणा , भाग , जोड़ और घटना हल करना

भिन्न (Fraction ) 


ऊपर चित्र में एक वृत्त को चार बराबर भागों में बाँटा गया है । अगर हम कहें कि इसमें से एक भाग किसी को दे दिया जाये तो कितना भाग बचेगा तो इसका जवाब है 3 / 4 भाग जिसे शाब्दिक या बोलन वाली भाषा में तीन चौथाई  भाग कहेगें । इसी प्रकार 1 / 3 को एक तिहाई कहेंगे।  चलिए अब जानते हैं इनको जोड़ने, घटाने, गुणा और भाग  करने के तरीका के बारे में । 




  भिन्नों का जोड़ , घटाना , गुणा और भाग करने  का तरिका. 

भिन्नों का जोड़ , घटाना , गुणा और भाग; पोस्ट में आपको सब सीखने को मिलेगा। अगर आपके पास कोई सवाल है भिन्नों को हल करने या किसी भी तरह की भिन्न हो तो हमें निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिखकर भेज दें ।

भिन्न क्या है ? What is the Fraction ? 




 भिन्न एक आंशिक भाग होती है जो दो भागों से बनती है -
अंश हर
 जैसे -     1 / 3 , जिसमें 1 अंश और 3 हर है । a / b में " a  " अंश और " b  " हर है।

आज के दौर में बहुत - से लोग ऐसे हैं जो पढ़ - लिखकर भी भिन्न हल करना नहीं जानते हैं । इस कमी का आभास उन्हें तब होता है जब वो कोई काम करने लगते हैं और काम या कार्य में उनको कोई सटीक ( ठीक - …

मैट्रिक और इण्टरमीडिएट किस कक्षा को कहा जाता है ?

ज हम जानेंगे कुछ ऐसी जानकारी जो बहुत से छात्र - छात्राएँ पढ़ - लिखकर  भी नहीं जान पाते हैं . इसका सीधा कारण है ध्यान से पढा़ई न करना . लेकिन इन्टरनेट ऐसा साधन है जहाँ पर आपको हर जानकारी मिलती है चाहे कैसी भी जानकारी हो वो भी बिल्कुल आसानी और सुलभ तरिके से , इन बातो को यहीं पर विराम देते हुए हम मूल बात पे आते हैं। विज्ञान से संबंधित प्रश्नों को जानने के लिए पढ़ते रहिये। 

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4 - 4  / 2 =  क्या होगा ?    cos0° = 1 क्यों होता है ? 

        मैट्रीक किसे या किस कक्षा को कहते हैं ?ईन्टर कौन - सी कक्षा को कहते हैं ? 


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       मैट्रिक का नाम सुन बहुत से लोग यह सोचते हैं कि ये कौन - सी कक्षा है।  आपको बता दें कि मैट्रिक कोई और कक्षा नही है बल्कि  कक्षा - 10 या दसवीं पास को कहते हैं  जिसे हाई स्कूल भी कहा जाता है।  
इसे अंग्रेजी में 10 th ( टेंथ )  भी कहते हैं। मैट्रिक अंग्रेजी शब्द है जिसका मतलब हाईस्कूल पास /दसवीं पास होता है। इससे यह पता चलता है कि मैट्रिक कोई कक्षा नहीं बल्कि कक्षा 10 या दसवीं उत्तीर्ण को सम्बोधन करने वाला शब्द है। 

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पृथ्वी गोल क्यों है ?

पृथ्वी गोल क्यूँ होती है ? 
 पृथ्वी गोल है , चौकोर क्यों नही या फिर किसी अन्य रूप मे क्यों नही है, पृथ्वी ही नहीं बल्कि सभी ग्रहों की आकृति लगभग गोल है। याद रखिए कोई भी वस्तु या चीज बिना वजह के गोल , लम्बी , चौंडी , या लाल - पीली नही होती है । यानी कहने का मतलब यह है कि हर वस्तु के रंग और आकार - प्रकार के होने का कोई न कोई कारण जरूर होता है । इसी तरह तरल पदार्थ ( जैसे - जल की बूँदे भी गोल होती हैं ) इसका भी कारण लगभग वही है जो कि पृथ्वी के गोल होने का है ।





चलो हम पहले जान लें कि जल की बूँदें क्यों या कैसे गोलाकार रूप धारण करती हैं क्योंकि इस कारण में ही इसका जवाब है । जैसे ही जल या कोई तरल पदार्थ जब निचे या ऊपर की तरफ फेंका जाता है तो जल के सबसे ऊपरी हिस्से में गती पहले आती है जिसके कारण वो हिस्सा या भाग पहले बाहर आता है और जैसे ही बाहर आता ( जल का वह भाग जो पहले गती में आता है ) है तो वातावरण के दबाव के कारण ( वो जल का हिस्सा )  जल कई छोटी - छोटी बूदोँ का रूप धारण कर लेता है दरअसल पानी की बूदों पर वातावरण का समान दबाव लगता है जिसके कारण ये गोलाकार रूप धारण करता है और एक कारण यह भी है…

प्रतिशत कैसे निकालते हैं ?

प्रतिशत ( Percent )  प्रतिशत को पूरी तरह समझने के लिए प्रतिशत का मतलब / शाब्दिक या शब्द का अर्थ जानना बहुत जरूरी है । प्रतिशत में कुछ ऐसी बातें जिन्हें हमें जानना जरूरी होता जैसे -   इनमें से कौन - कौन सही हैं  -

  2 / 5 = ( 2 / 5 )  × 100 = 40 %    2 / 5 = ( 2 / 5 ) × 100 % = 40 %  2 / 5 = 40 / 100 = 40 %


    इन तीनों में पहला गलत है और बाकी दोनों सही हैं। क्योंकि पहली वाले हल में हमें यह स्पष्ट दिख रहा है कि अगर हम 100 में भाग करें तो 2 × 20 = 40 तो मिलेगा पर हर के स्थान पर हमें 100 मिल ही नहीं रहा है तो इसे हम प्रतिशत के रूप में कैसे लिख सकते हैं। अतः यह गलत है। रही बात बाकी दो तरिकों की तो इन दोनों में ही हमें हर के स्थान पर 100 मिल रहा है। दूसरे वाले विकल्प में 1 / 100 = % लिखा गया है।





 ( प्रतिशत = प्रति + शत  ) का संधि -  विक्षेद करने पर दो अलग -  अलग शब्द मिलते हैं जिसमें शत का शाब्दिक अर्थ सौ ( 100) होता है या प्रतिशत  गणित में किसी अनुपात या भिन्न  को व्यक्त करने का एक अलग तरीका है। प्रतिशत का अर्थ है प्रति सौ या प्रति सैकड़ा ( % = 1 / 100 ) एक सौ में से एक  ।   यदि 100 …
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