सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अंतर की यह विशेषताएँ बड़ी काम की हैं..



          अंतर क्या है ?         



क्या कोई भी वस्तु हर समय एक जैसी रहती है ? 
या कोई वस्तु ऐसी है जिसमें परिवर्तन नहीं होता हो ?
हम सभी यह बात जानते हैं कि समय के साथ हर वस्तुओं में परिवर्तन या अंतर होता रहता है। परिवर्तन वह अनिवार्य प्रक्रिया है जो अंतर के होने पर होती है। बिना अंतर के कोई भी परिवर्तन या कार्य नहीं हो सकता है।
 अतः हम कह सकते हैं कि अंतर दुनियाँ की सभी वस्तुओं में अनिवार्यरूप से पाया है। जैसे हमारे शरीर में रोज ही नहीं बल्कि हर पल अंतर होता रहता है फिर चाहे अंतर अति शूक्ष्म ही क्यों ना हो पर होगा जरूर। तभी तो हम बड़े होते जाते हैं। अगर हम अपने शरीर के वजन को रोज मापे तो हमें इसमें भी अंतर देखने को मिल जायेगा।





 क्या आप किसी भी काम को बार बार एक तरह से कर सकते हैं ? इस बात की गहराई तक अध्ययन किया जाये तो हमें इसका उत्तर मिलेगा नहीं । क्योंकि दुनियाँ में कोई भी क्रिया-कलाप पुरी तरह से समान नहीं हो सकता है। 




      इसका कारण कुछ भी हो पर अन्तर नामक शब्द जरुर आयेगा। जैसे मान लिया आपको किसी शब्द को बोलना है। आप जितनी बार भी बोलेंगे हर बार कोई ना कोई अन्तर जरुर होगा। यह अन्तर वातावरण या किसी अन्य कारण से हो सकता है। अगर आप इसे पता करना चाहते हैं तो अपनी आवाज को रिकार्ड करके इनकी आवृत्ति को देखीए और आवाज 🔉 को भी सुनीए अन्तर मील जायेगा। कभी-कभी यह अन्तर इतना कम होता है कि इसे मापा नहीं जा सकता है। 



इस बात की पुष्टि 1-1 , 2-2, 3-3 इत्यादि संख्याओं के अंतर को देखने होती है। इन्हें भी देखने से यही लगता है कि इनमें कोई अंतर है ही नहीं पर ऐसा असंभव है। 



   कहते हैं कि परिवर्तन प्रकृति का अनिवार्य प्रक्रियाओं में से एक है। अब सोचीए 💭 कि अगर किसी भी वस्तु में परिवर्तन हमेंशा होता है तो इसका मतलब यह है कि उस वस्तु में कुछ न कुछ अंतर हो रहा है तभी तो वह बदल रही है। यहां पर एक बात यह ध्यान देने योग्य है कि परिवर्तन और अंतर दोनों ही बातें एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। कुछ अंतर ऐसे होते हैं कि हम कह ही नहीं सकतें हैं कि उनमें अंतर हो रहा है। इस बात की पुष्टि इस बात से ही हो जाती है कि जब हम किसी पौधे को देखते हैं तो कहेंगे कि इसमें 1 या 2 सेकेंड में कोई परिवर्तन या अंतर नहीं होता होगा। पर सच बात तो यह है कि हर सेकेंड ही नहीं बल्कि हर पल उसमें परिवर्तन होता रहता है 



  अंतर की परिभाषा    


अंतर वह भेद, फर्क या स्थिति है,जो किसी भी वस्तु में अनिवार्यरूप से पाया जाता है।अंतर हर वस्तुओं में अनिवार्यरूप से पाया जाता है फिर चाहे वह एक ही प्रकार की वस्तुएँ ही क्यों ना हो। जैसे कि मान लीजिए कि एक ही सेट की दो मोबाईल 📱 फोन हो पर तब भी इन दोनों के गुणों में असमानता या अंतर जरूर मिलेगा चाहे वह अंतर मामूली ही क्यों ना हो पर होगा जरूर।








अंतर शब्द का उपयोग   



     अंतर शब्द का बहुत बड़ा योगदान है हर क्षेत्र में। लेकिन इसकी जानकारी के अभाव में हम इसका फायदा नहीं ले पाते हैं। पर आप सभी यह ध्यान दें कि यह possibilityplus.in है जिस पर आप वह जानकारियाँ पाते हैं जिसे हर जगह मिलना दुर्लभ है ।
अंतर शब्द की सहायता से हम बहुत बड़े और जटिल कामों में भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर 1-1, 2-2, 3-3 इत्यादि इन सभी में अन्तर होता है। इसका मतलब साफ/स्पष्ट है कि ये 1-1, 2-2, 3-3 इत्यादि देखने में तो बराबर हैं पर व्यवहार में यह नहीं होता है। 
जैसे किसी भी ऊर्जा को पूर्ण रूप से उपयोग में नहीं लाया जा सकता है। 



अंतर के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण 🔎





  • 1-1 = 1×0,  2-2 = 2×0 , 3-3 = 3×0 इत्यादि। 
  • कहने और करने में अंतर 







ऊपर दिए गए उदाहरणों में से पहला बहुत ही आश्चर्यजनक है क्योंकि हम देख रहे हैं कि दोनों संख्याएँ एकही हैं और इनका मान भी बराबर है तो फिर कैसे इनमें कोई अंतर आ गया है ?
यह सवाल आप सभी के मन में ऊफान मार रहा होगा कि यह कैसे हो सकता है ? 
तो आप सबसे पहले यह बात गहराई तक सोचीए की जब भी हम किसी भी वस्तु या बात की तुलना करते हैं तो य कहते हैं कि इन दोनों में कितना अंतर है। मतलब अगर थोड़ा सा ध्यान दें तो हमें सभी विषयों में हर जगह अंतर मील ही जायेगा। इसमें सबसे खास बात यह है कि अंतर शब्द का आना मतलब अंतर अवश्य ही है। कोई भी काम करिए चाहे वह कितना भी सरल क्यों ना  हो पर आप, हम या कोई भी हो पूरी तरह से किसी काम को बीना अंतर के कर सके।

आप सभी का यह भी सवाल हो सकता है कि यार यह क्या है यह कहां की जानकारी है। इसे 1-1 = 1×0,  2-2 = 2×0 इत्यादि को आजतक ना देखा है और ना ही पढ़ा है तो फिर यह कहाँ से आ गया है ?




    उम्मीद है कि आपके लिए यह जानकारी उपयोगी साबित होगी। अगर आपका कोई सवाल है इससे जुड़ा तो कमेंट जरुर करें। धन्यवाद.. 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दिशा पता करने का बेस्ट तरीका..

दिशा कैसे पता करते हैं ? 


दुनियाँ के किसी भी कोने में जाओ आप हर जगह पर दिशा पता कर सकते हैं।  हमने यह आर्टिकल उपयोग करने के लिए बनाया है ऊम्मीद है आपके लिए उपयोगी साबित होगा। इस आर्टिकल को अन्त तक जरूर पढिएगा क्योंकि हमने इसमें लगभग सभी संभव तरिके बताएँ हैं जो आपको हर परिस्थितियों में दिशा पता करने के लिए काफी हो सकता है।






   दिशा का पता करने से पहले हम दिशा के बारे कुछ अहम / आवश्यक जानकारी देने जा रहें हैं ताकि दिशा पता करना और आसान हो जाये | इसमे सबसे पहले जानतें हैं दिशा क्या है और इसका महत्व क्या है |



   दिशा ( Direction  ) 


एक ऐसा मैप या साधन जो हमें उत्तर - दक्षिण , पूरब - पश्चिम , उपर - निचे और आगे - पीछे  इन सभी को प्रदर्शित करे दिशा कहलाता है | दिशा मुख्यतः चार प्रकार की हैं ( अगर उपर - निचे को छोड़दे तो ) लेकिन इनको अलग - अलग भागो  मैं बाँटे तो ये दश प्रकार की हो जाती  है | अगर हमें इन चारों के बीच की दिशाओं को बताना है तो चित्रानुसार बतायेंगे।




जैसे हमें पश्चिम और उत्तर केे बीच की दिशा को बताना है तो हम उत्तर-पश्चिम कहेेंगे। इसी तरह से बाकि सभी दिशाओं के बारे में हम कहेेंगे।




मैट्रिक और इण्टरमीडिएट किस कक्षा को कहा जाता है ?

ज हम जानेंगे कुछ ऐसी जानकारी जो बहुत से छात्र - छात्राएँ पढ़ - लिखकर  भी नहीं जान पाते हैं . इसका सीधा कारण है ध्यान से पढा़ई न करना . लेकिन इन्टरनेट ऐसा साधन है जहाँ पर आपको हर जानकारी मिलती है चाहे कैसी भी जानकारी हो वो भी बिल्कुल आसानी और सुलभ तरिके से , इन बातो को यहीं पर विराम देते हुए हम मूल बात पे आते हैं। विज्ञान से संबंधित प्रश्नों को जानने के लिए पढ़ते रहिये। 

इसे भी पढ़ें >>
4 - 4  / 2 =  क्या होगा ?    cos0° = 1 क्यों होता है ? 

        मैट्रीक किसे या किस कक्षा को कहते हैं ?ईन्टर कौन - सी कक्षा को कहते हैं ? 


  मैट्रिक किस कक्षा को कहते हैं ? 
       मैट्रिक का नाम सुन बहुत से लोग यह सोचते हैं कि ये कौन - सी कक्षा है।  आपको बता दें कि मैट्रिक कोई और कक्षा नही है बल्कि  कक्षा - 10 या दसवीं पास को कहते हैं  जिसे हाई स्कूल भी कहा जाता है।  
इसे अंग्रेजी में 10 th ( टेंथ )  भी कहते हैं। मैट्रिक अंग्रेजी शब्द है जिसका मतलब हाईस्कूल पास /दसवीं पास होता है। इससे यह पता चलता है कि मैट्रिक कोई कक्षा नहीं बल्कि कक्षा 10 या दसवीं उत्तीर्ण को सम्बोधन करने वाला शब्द है। 

अगर हाई स्कू…

पृथ्वी गोल क्यों है ?

पृथ्वी गोल क्यूँ होती है ? 
 पृथ्वी गोल है , चौकोर क्यों नही या फिर किसी अन्य रूप मे क्यों नही है, पृथ्वी ही नहीं बल्कि सभी ग्रहों की आकृति लगभग गोल है। याद रखिए कोई भी वस्तु या चीज बिना वजह के गोल , लम्बी , चौंडी , या लाल - पीली नही होती है । यानी कहने का मतलब यह है कि हर वस्तु के रंग और आकार - प्रकार के होने का कोई न कोई कारण जरूर होता है । इसी तरह तरल पदार्थ ( जैसे - जल की बूँदे भी गोल होती हैं ) इसका भी कारण लगभग वही है जो कि पृथ्वी के गोल होने का है ।





चलो हम पहले जान लें कि जल की बूँदें क्यों या कैसे गोलाकार रूप धारण करती हैं क्योंकि इस कारण में ही इसका जवाब है । जैसे ही जल या कोई तरल पदार्थ जब निचे या ऊपर की तरफ फेंका जाता है तो जल के सबसे ऊपरी हिस्से में गती पहले आती है जिसके कारण वो हिस्सा या भाग पहले बाहर आता है और जैसे ही बाहर आता ( जल का वह भाग जो पहले गती में आता है ) है तो वातावरण के दबाव के कारण ( वो जल का हिस्सा )  जल कई छोटी - छोटी बूदोँ का रूप धारण कर लेता है दरअसल पानी की बूदों पर वातावरण का समान दबाव लगता है जिसके कारण ये गोलाकार रूप धारण करता है और एक कारण यह भी है…
Disclaimer | Privacy Policy | About | Contact | Sitemap | Back To Top ↑
© 2017-2020. Possibilityplus