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Falan aur falane ka arth

 फलन किसे कहते हैं ?

      फलन शब्द का उपयोग वहाँ पर किया जाता है जहाँ किसी स्वतंत्र राशी से कोई दूसरी परतंत्र राशी प्राप्त किया जाता हो। हमने कैलकुलस या अन्य गणितों में इसका उपयोग बहुत बार देखा होगा। इसके अलावा भी गाँवों में " फलाने " शब्द बहुधा उपयोग किया जाता है जिसका अर्थ हम निचे पढ़ सकते हैं। यहाँ पर स्वतंत्र और परतंत्र का अर्थ भी स्पष्ट होना चाहिए। इसलिए इनको भी परिभाषित किया गया है। 




स्वतंत्र राशी ( independent variable) 

 वह राशी जिसका मान किसी और राशी के मान पर निर्भर नहीं करता है स्वतंत्र राशी कह्ते हैं। जैसे -   Y = x2   इस समीकरण में x एक स्वतंत्र राशी है क्योंकि इसका मान y के मान पर निर्भर नहीं करता है बल्कि y का मान x के मान पर निर्भर करता है इसलिए y एक परतंत्र राशी है। 

 अगर हम इसके अर्थ को नहीं जानते हैं तो हमें गणित के ऐसे सवालों को जहाँ पर इसका उपयोग होता है उसको समझने में परेशानी होगी और साथ ही साथ हमें ऐसे सवालों को हल करने का मन भी नहीं करेगा।
फलन को अच्छी तरह से समझने के लिए हम निचे कुछ उदाहरण देखने जा रहे हैं जो सरल और सुबोध हैं ।

   Y = x2

ऊपर दिए गए समीकरण में y, x का फलन है क्योंकि y का मान x के मान पर निर्भर करता है। इसे हम यह भी कह सकते हैं कि y, फल है x का या y परिणाम है x का। इस समीकरण   Y = x2  को फलन रूप में या गणितीय भाषा में      Y = f(x2)  ऐसे व्यक्त किया जाता है। यहाँ पर  x  स्वतंत्र चर ( independent variable) और  परतंत्र चर(independent variable) है ।



फलाने का अर्थ

    क्या आपको पता है कि फलाने का मतलब या अर्थ क्या होता है। हमने अक्सर गावों में यह सुना ही होगा कि फलाने का बेटा-बेटी या फलाने का घर या काम - काज या फिर कुछ और। हमने ऊपर अभी पढ़ा है कि फलन का मतलब किसी मूल वस्तु से प्राप्त वस्तु या परतंत्र राशी को कहते हैं। ठीक इसी तरह किसी पुत्र या पुत्री को फलाने का लड़का या लड़की कहेंगे, क्योंकि ये लोग अपने माँ - बाप के फलन अथवा फल ( प्राप्त संतान ) हैं। उदाहरण के तौर पर   z = x2+ y
इस समीकरण में z, X और y का फल या प्राप्त मान है। यहाँ पर हम z  को x और y की फलाना, फलाने और  फलानी की औलाद कह सकते हैं । अगर z  लड़की है तो फलानी और अगर z लड़का है तो फलाना कहेंगे। 

 हम जानते हैं कि z का मान x और और y के मान पर निर्भर कर रहा है। क्योंकि   z = x2+ y समीकरण में z परतंत्र राशी है। हम यह भी जानते हैं कि जैसा x और y का मान होगा उसी के अनुसार z का भी मान होगा। चूँकि x और y के भिन्न - भिन या अनेको मान हो सकते हैं। तभी तो एकही माँ - बाप की हर औलाद का रंगरुप, बोलचाल विवेक आदि में अन्तर होता है। 


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