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cos0° = 1 क्यों होता है ?



  त्रिकोणमितीय का क्षेत्र बहुत व्यापक है क्योंकि यह एक बहुत ही महमहत्वपू गणितों में से एक। कहाँ कौनसी वस्तु किस कोण पे रखी जाये , स्लाइडिंग विंडों हो या कोई घर का काम हर जगह इसकी उपयोगिता का परचम रहता है । लगभग हर काम में इसकी जरूरत पड़ती है। तो हम ऐसी गणित को  क्यों ना भलीभांति समझ ले। इसी बात को ध्यान में रखते हुए यह पोस्ट तैयार किया गया है। 
    गणित में बहुत सारे ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर किताबों में शायद ही  खुलकर  बताया जाता होगा । उनमें से दो सवाल यह है कि cos0° = 1 और sin90°= 1 क्यों होता है  ?



अगर हमसे को यह प्रश्न कर दे तो हममें से बहुत कम लोग ही इसका उत्तर दे पायेंगे । आप यह जानकारी possibilityplus.in पर पढ़ रहे हैं। जहां ऐसी ही जानकारियाँ जानने को मिलती है जो बहुत ही घास हो। हमारे साथ जुड़े रहने के लिए हमारे इस साइट को सब्सक्राइब करें।


     क्यों होता है cos0° = 1 और sin90° = 1    


    जब यह बात या प्रश्न हमसे कोई पूछ ले तो हममे बहुत कम लोग ही इस प्रश्न का जवाब दे पायेंगे । दरअसल बहुत लोगों के पढ़ने का तरीका कुछ ऐसा है कि वो सिर्फ याद करने की कोशिश में ही लगे रहते हैं । हममे से बहुत लोग गणित जैसे विषय को भी कुछ इस तरह पढ़ते हैं जैसे कि कोई याद करने की चीज हो। अब चूँकि त्रिकोणमितीय की बात हो रही है तो इसी का उदाहरण देखतें हैं।





 उदाहरण :  

अगर कोई छात्रा/छात्र  त्रिकोणमितीय पढ़ रहा है तो वो 90% संभावना ( possibility ) है कि sin90° और cos0° या अन्य त्रिकोणमितीय मान को सिर्फ याद करेगी/करेगा, ना कि उसे समझने की कोशिश करेगा कि यह मान क्यों और  कैसे इतना आया है। ऐसे बहुत से सवालों से भरा पड़ा है जिनका जवाब थोड़ा मुश्किल होता है परन्तु ढूढने में उतना मजा भी आता है। चलिए इसका जवाब देख लिया जाये।



     त्रिकोणमितीय सूत्र :        

       sinθ = लम्ब / कर्ण 

      cosθ = आधार / कर्ण

     tanθ = लम्ब / आधार 




इस बात को पूरी तरह से समझने के लिए हमें चित्र की सहायता लेनी पड़ेगी । चित्र देखिए -


cos0° का मान " 1 " होने का कारण 



जब लम्ब के मान को घिरे - धीरे छोटा किया जाता है तो कर्ण का मान आधार के मान के बराबर होने लगता है और जब लम्ब का पूरी तरह से शून्य हो जाता है तब इस स्थिति में कर्ण, आधार के बिल्कुल बराबर हो जाता है या यूँ कहें तो आधार में समाहित हो जाता है। तब आधार और कर्ण के बिच में कोई अन्तराल ( फर्क  ) नहीं रह जाता है। अतः इनके बीच का कोण शून्य हो जाता है। चूँकि हम जानते हैं कि कोई भी संख्या या मान को उसी संख्या या मान में अगर भाग किया जाये तो भागफल सदैव ही " 1" आता है।

   इसलिए            आधार = कर्ण
   तब                 cos0° = आधार / कर्ण
                        cos0° = कर्ण / कर्ण
                        cos0° = 1



इसी तरह sin90° मान क्यों " 1" होता है इसका भी उल्लेख हम देख लेते हैं। कृपया निचे दिया गया चित्र देखें -




चित्र में दाहिने तरफ के त्रिभुज में आधार का धुँधला होना इस बात को दर्शाता है कि आधार का मान पहले था पर अब नहीं है, अर्थात आधार शून्य हो गया है। कर्ण, आधार के शून्य होने के कारण बिल्कुल लम्ब के समान हो गया है और इस वजह से लम्ब और कर्ण के बीच का कोण 90° हो जाता है। चूँकि आधार को जैसे - जैसे छोटा किया जाता है तो कर्ण की माप ( मान) लम्ब के बराबर होने लगता है। जब आधार पूरी तरह से शून्य हो जाता है तो इस स्थिति में कर्ण लम्ब के समान ( माप में ) होकर लम्ब में ही समाहित हो जाता है। 


               


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