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आलू को पाला लगने की असली वजह जानकर आश्चर्यचकित 😲 हो जाओगे..


         जाड़ों ( सर्दियों ) के मौसम में पौधों को पाला ( frost) लगना हम लोगों ने तो सुना ही होगा। पर हममें से कुछ लोग ही इसके पीछे की असली वजह जानते होंगे। इसके पीछे का विज्ञान बड़ा रोचक और आश्चर्य जनक है। चलिए फसल आलू 🥔 के उदाहरण को  लेकर देखते हैं। 







  आलू में पाला लगने की व्याख्या  


         आलू में पाला लगना हमने बहुत बार सुना है और इसके बाद आलू का क्या होता है हम सब जानते हैं। जब जाड़े के मौसम में अधिक से अधिक ठंड पड़ने लगती है तो कई प्रकार की फसलों को पाला लगने का खतरा बढ़ जाता है। सबसे ज्यादा उन्हीं फसलों को पाला लगता है जिनके तनों में पानी की मात्रा अधिक होती है। जैसे - आलू   और सब्जियाँ।


     जब ठंड के कारण वातावरण का तापमान शून्य डीग्री सेल्सियस ( 0° c ) या इससे भी निचे तक चला जाता है तब इस परिस्थिति में पानी बर्फ में बदलने लगता है। चूँकि आलू के पौधे 🌱 में पानी की मात्रा अधिक होती है और तेज ठंड के कारण आलू के तनो के अंदर उपस्थित द्रव का भी तापमान निचे आने लगता है । इस कारण से आलू के तनों के अंदर का पानी भी बर्फ बनने लगता है। पानी बर्फ का रुप लेने से आलू के पौधे के तने फटने लगते हैं और परिणामस्वरूप पौधा पीला पड़कर सूख जाता है।



     हमने इसमें क्या पाया, क्या यहाँ पर कोई प्रश्न नहीं उठ रहा है कि क्यों आलू के पौधे का तना फट जाता है पाला लगने पर। वास्तव में अभी भी हम वह मुख्य वजह नहीं जान पायें जो जाननी ही चाहिए। 
         दरअसल द्रव या पानी तीन अवस्थाओं में रह सकता है - 
  1. द्रव ( जैसे - पानी ) 
  2. ठोस ( जैसे - बर्फ )
  3. गैस ( जैसे - वाष्प ) 



            इन तीनों अवस्थाओं में तीनों का आयतन द्रव < ठोस < गैस 
बढ़ते हुए इस क्रम में होता है। साधारण शब्दों में कहें तो अगर हम एक गिलास 🥛 पानी लें  और इसे ठंडा करके बर्फ में बदल दें तो बर्फ गिलास के बाहर तक आ जायेगा। क्योंकि यह जल के मुकाबले अधिक जगह लेता है ( इसे ही विज्ञान की भाषा में आयतन कहते हैं ) ।



जल की भांफ का आयतन तो और भी अधिक होता है इसलिए अगर एक गिलास जल की भांफ बनायी जाये तो इसके लिए गिलास में जगह ही नहीं बचेगी। 






       जब किसी पौधे को पाला लगता है तो उस पौधे के तनो के अंदर मौजूद पानी या द्रव बर्फ़ बनने लगता है। चूँकि बर्फ का आयतन पानी के आयतन से अधिक होता है। अतः यही वजह है कि पौधे के तने बर्फ के अधिक आयतन के कारण फट जाते हैं और पौधा पीला होकर सूख जाता है। 



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