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संभावनाओं का सागर

31 Aug 2019

असफलता से सफलता पाने का अचूक मोटिव , by : Possibilityplus.in




                   ये पोस्ट असफलता से सफलता  पाने की ऐसी संभावना ( Possibility ) और ऊर्जा से भरपूर है जिससे हमें असफलता मिलने का भी डर नहीं रहेगा क्योंकि असफलता ही हमें सफलता का पथ प्रदर्शित करेगी।
 निचे दिए गए बिन्दुुओं को देखिए - 


  • असफलता ही सफलता का मार्ग दिखाती है।
  • असफलता ही सफलता का महत्व बताती है। 
  • असफलता की भी एक सीमा होती है। 
  • जितनी अधिक बार असफलता मिलती है सफलता मिलने की संभावना उतनी ही ज्यादा होती है।
  • असफल होना गलत नहीं है बल्कि असफलता के डर से प्रयास न करना गलत है।
  • असफलता और सफलता हमारे मन की उपज है।





 विशेेष : दुनियाँ का बड़े से बड़ा काम ही क्यों न हो और असफलता चाहे कितनी भी ज्यादा क्यों न मिली हो मगर उसमें सफलता की आखिरी उम्मीद कभी नहीं समाप्त होती है। अगर समाप्त होती है तो वह है हमारा प्रयास। 💎


   उपर्युक्त बिन्दुओं को देखते हुए यह पता चलता है कि असफलता और सफलता के बीच  एक गहरा संंबंध है। बल्कि यह कहना उचित होगा कि असफलता और सफलता दोनों ही एक ही  सिक्के के दो पहलू हैं। इसका मतलब यह है कि जहां असफलता होती है वहां पर सफलता का होना भी तय / निश्चित है। हम जानते हैं कि असफलता और सफलता दोनों  एक-दूसरे के विपरित हैं। शब्द असफलता से भी एक बहुुुत अच्छा उदाहरण निकलकर आता है और वह यह है कि इसका ( असफलता ) पहला अक्षर हटाने पर सफलता में बदल जाता है। याानी इससे यह स्पष्ट होता है कि असफलता में भी सफलता छिपी हुई है बस उसमें सुधार करने की जरूरत होती है।
 उपर्युक्त बिन्दुओं को सविस्तार से जानते हैं।









असफलता ही सफलता का मार्ग दिखाती है...

      दुनियाँ में असफलता को बहुत लोग या तो गलत मानते हैं या फिर असफलता पाना ही नहीं चाहते हैं। किसी भी काम में अगर हम असफल हो रहेें तो इसका मतलब यह है कि हमने जो तरिका अपनाया था सफल होने का नहीं बल्कि असफल होने का था। जिससे हमेें उसी काम को किसी अन्य तरिके से करने का विचार आता है। यहाँ से यह स्पष्ट होती है कि असफलता हमें  सफलता का मार्ग दिखाती है। हम किसी भी काम में जितना अधिक से अधिक बार असफल होते हैं तो हमें उसी काम में सफल होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होती चली जाती है। एक स्ति्थि ऐसी आयेगी जब असफलता की संभावना ही समाप्त हो जायेगी और तभी असफलता भी हमारे आगे घुटने टेककर यह कहेगी कि अब तुम्हें असफल करने के लिए मेरे पास कोई प्रभावी संभावना ही नहीं बची है। अतः अब तुम सफलता प्राप्त कर सकते हो। इसे और बखूबी समझने के लिए हमें कोई जीवंत उदाहरण लेना चाहिए।


  1. थामस एल्वा एडिसन  :  एडिसन एक ऐसे वैज्ञानिक थे जिन्होंने इस दुनियाँ को असफलता का मतलब अपने शब्दों में इस तरह बयाँ  किया " मैं बैट्री बनाने में सैकड़ों बार असफल हुआ मगर इससे भी मुझे यह सीख मिली कि इन सभी तरिकों से बैट्री नहीं बनाई जा सकती है जो तरिके मैने अपनाये थे। "    एडिसन को बल्ब 💡का आविष्कार करने के लिए  दस हज़ार से भी ज्यादा बार असफलता मिली। पर वे जानते थे कि वह असफलता की सीढियाँ बनाकर सफलता को पा सकते हैं। एडिसन हर असफलता से कुछ न कुछ जरूर सीखते थे।   उन्हें यह अच्छी तरह से पता चल चुका था कि ये सारी असफलताएँ व्यर्थ नहीं हैं और आखिकार बल्ब 💡का आविष्कार करने में उन्हें सफलता मिल ही गई। मतलब गलती भी हमें सफलता के पथ को प्रदर्शित करती है यह बात तो स्पष्ट है। यहाँ पर एक बहुत जानदार और मोटिव वाला यह निष्कर्ष भी निकलकर सामने आता है कि असफलता चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो पर उसमे हमें सफलता की एक झलक अनिवार्यरूप से देखने को मिल ही जायेगी।  इसी को ही आखिरी उम्मीद  का नाम दिया गया है।  
  2. चींटी : चीटियों को हमने किसी ऊँचे स्थान पर चढ़ते हुए जरुर देखा होगा। ये उँचे स्थान पर चढ़ने के लिए ना जाने कितने ही प्रयास करती हैं। भले ही ये बार - बार असफल होती हैं मगर फिर भी चढ़ने का सिलसिला जारी रहताा है। ये चढ़ने के लिए इतनी ज्यादा कोशिश करती हैं कि इनके सफल होने की संभावना ही बढ़ जाती है और अन्त में वह उस उँचे स्थान पर चढ़ ही जाती हैं। 






  इस तरह से मिलने वाली सफलता का बड़ा महत्वपूर्ण स्थान होता है 

   



असफलता की सीमा 

     

    दुनियाँ में लगभग हर वस्तु की या कार्य के होने की कोई न कोई सीमा जरुर होती है। तो जाहिर सी बात है कि असफलता की भी कोई न कोई सीमा जरुर होनी चाहिए जो सफलता पर जाकर समाप्त होती हो । जब हम असफलता की सारी संभावनाओं को अपने प्रयासों से समाप्त करते हैं तो हम सफलता और असफलता की सीमा पर पहुंच जाते हैं जहाँ से हम कहीं भी जा सकते हैं चाहे सफलता हो या असफलता। इसके बाद हम सफलता की ओर बढ़ सकते हैं क्योंकि हमारे पास अब असफल होने की कोई प्रभावी संभावना नहीं है। 
      इस बिन्दु पर ना तो सफलता मिलती और ना ही असफलता। इसे उदासीन बिन्दु भी कहते हैं। इसी बिन्दु पर वो लोग रहते हैं जो जितना सफल होते हैं वो उतना ही असफल भी होते हैं। इसे ऐसे समझिए अगर कोई व्यक्ति 500 रूपये कमाता है और वह इसमें से कुछ भी ना बचाते हुए सारा पैसा खर्च कर देता है। यानी वह कमाने से पहले जहाँ था वहीं खर्च करने के बाद फिर आ जाता है। 




असफल होना गलत नहीं बल्कि असफलता के डर से प्रयास न करना गलत है..


    यह लाईन भी बहुत प्रेरणादायी है और हमें इसे अपने दैनिक जीवन में अनिवार्यरूप से उपयोग में लाना चाहिए। इस बात को पढ़ने से ही हमें मोटिव(प्रेरणा)  मिलती है। तो सोचो इसे करने में कितना मोटिव और कामयाबी मिलेगी। यह सफलता की कुंजी है जो हमें यह बताता है कि असफल होना गलत नहीं है बल्कि इसके डर से कि  मैं दोबारा - तेबारा या बार - बार असफल हो जाउँगा तो क्या मतलब ऐसे प्रयास का और यही हमारी सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है जो हमें किसी भी काम में सफलता नहीं दिला पायेगी।




  यदि यही गलती करते हुए एडिसन ने अपने प्रयासों को बंद कर दिया होता तो आज उन्हें शायद कोई नहीं जानता होता। इसी तरह अगर चींटी भी बार - बार प्रयास न करती तो वह भी शायद कभी किसी उँचे स्थानों पर नहीं चढ़ पाती और हम सब चींटियों का बखान नहीं करते। 
  ऐसे तमाम किस्से भरें पढ़ें हैं जो इसकी पुष्टि करते हैं कि " असफल होना गलत नहीं बल्कि असफलता के डर प्रयास न करना गलत है। "



पुरा आर्टिकल पढने के बाद असफलता और सफलता की ये बातें सामने आ रही हैं -

  1. सफलता का मार्ग असफलता से होकर ही जाता है। 
  2. बिना असफलता के कोई भी सफलता नहीं मिलती। 
  3. हम असफलता के कारण असफल नहीं होते बल्कि प्रयास न करने से असफल होते हैं।
  4. प्रयास ही सफलता का मुख्य मोटिव है। 


             यह आर्टिकल पढ़ने के बाद आपको मोटिव ( प्रेरणा) मिला या नहीं, कमेंट जरूर दें।
Thanks for Reading. 
By : Possibilityplus.in


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