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Capacitor की पुरी जानकारी A to Z

 आपका स्वागत है इस पोस्ट और वेबसाइट Possibilityplus.in पर इस पोस्ट में हम कैपासिटर की पूरी जानकारी लेने वाले हैं जैसे -
  •  कैपासिटर किसे कहते हैं ?
  • इसके उपयोग 
  • इसे कहाँ - कहाँ लगाते हैं? 
  • इसमे क्या होता है?
  • ये कितने प्रकार का होता है?


कैपासिटर किसे कहते हैं ? 

              वह युक्ति जिसके दो प्लेटो के बिच विद्युतरोधी या परावैधुत वस्तु ( जैसे कागज, हवा, प्लास्टिक, माइका आदि) लगा होता है उसे कैपासिटर ( संधारित्र) कहते हैं। 

सुत्र के अनुसार परिभाषा - किसी चालक की वैधुत धारिता, चालक को दिए गए आवेश तथा चालक के विभव में होने वाली वृद्धि के अनुपात को कहते हैं। 
सुत्र - C = q/v
जहाँ C = चालक की धारिता 
q = चालक को दिया गया आवेश तथा 
v = चालक के विभव में होने वाली वद्धि है। 

कैपासिटर को हिन्दी में संधारित्र कहा जाता है पर आम बोलचाल की भाषा में ज्यादातर कंडेंसर कहते हैं। कैपासिटर अंग्रेजी शब्द है ना कि हिन्दी। 
संधारित्र का मात्रक फैरड होता है। 


संधारित्र के उपयोग 

कैपासिटर एक बहुउपयोगी वस्तु है जो दुनियाँ के हर इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं में उपयोग होता है। इसका उपयोग प्रत्यावर्ती धारा ( A.C.  Current )  परिपथ में ही किया जाता है, दिष्ट परिपथ में नहीं क्योंकि दिष्ट परिपथ में संधारित्र लगाने से संधारित्र का वोल्टेज परिपथ में लगे दिष्ट धारा स्रोत के बराबर हो जाता है जिससे विभवान्तर शून्य हो जाता है अतः धारा रुक जाती है। ये कितना आवश्यक और महत्वपूर्ण है। 
  इसका उपयोग इतना ज्यादा है कि इसकी लिस्ट या तालिका बनायी जाए तो ये पोस्ट इसी से भर जायेगी फिर भी कुछ ऐसी वस्तुओं का उदाहरण दिया जा रहा है जिन्हें हम सभी जानते हैं-
  • पंखा 
  • टीवी 
  • घड़ी 
  • रेडियो 
  • टार्च
  • मोबाइल चार्जर & फोन





इसे कहाँ - कहाँ लगाते हैं ?

      इसके उपयोग वस्तु के आधार पर किया जाता है जैसे अगर किसी पंखे में इसकी बात की जाए तो ये पंखे में इसलिए लगाया जाता है कि पंखे को एकसमान वोल्टेज प्रदान करता रहे जिससे पंखा एकसमान गति से चलता रहे। 

पंखे में संधारित्र की क्रियाविधि 

 पंखे मे संधारित्र कुछ इस तरह से काम करता है कि पंखा एकसमान चलता रहे अर्थात ये पंखे के लिए वोल्टेज फिल्टर करके देता है। चलिए इसको परिस्थितियों के अनुसार समझते हैं - 

  1. जब वोल्टेज एकाएक कम हो जाता है - जब मेन लाइन का वोल्टेज एकाएक कम हो जाता है तो कैपासिटर अपना वोल्टेज पंखे को दे देता है जिससे पंखे को वोल्टेज की कमी महसूस नहीं हो पाती है और पंखे की गति एकसमान ही रहती है। परन्तु अगर वोल्टेज तुरन्त नहीं बढ़ता है तो फिर पंखा धीमा हो जाता है क्योंकि अब कैपासिटर के पास पहले से कम वोल्टेज ही है अतः पंखे की गति अब कम / धीमी हो जायेगी। 
  2. जब वोल्टेज ज्यादा होता है - जब मेन लाइन का वोल्टेज एकाएक / अचानक बढ़ जाता है तब कैपासिटर चार्ज हो जाता है और पंखे की गति को बढ़ने नहीं देता है जिससे पंखे पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। पर अगर और इसके बाद वोल्टेज बढ़ता है तब कैपासिटर कुछ वोल्टेज पंखे को दे देता है और इस तरह इसकी गति बढ़ जाती है। 


तो कुल मिलाकर देखे तो कैपासिटर पंखे की रक्षा करता है जलने से और वोल्टेज को फिल्टर करके देता है जिससे पंखे की गति एकसमान बनी रहती है। 

इसी तरह से अगर मोबाइल चार्जर, घड़ी, एलईडी बल्ब, टीवी आदि सभी इलेक्ट्रॉनिक सामानों में अगर कैपासिटर का इस्तेमाल होता है तो ज्यादातर वोल्टेज को फिल्टर करने के लिए ही किया जाता है जिससे वस्तु टीकाऊ हो जाए।

इसे कहाँ - कहाँ लगाते हैं ?

  कैपासिटर को लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक सामानों मे इस्तेमाल किया जाता है। मोबाइल फोन्स में तो बहुत ही ज्यादा लगता है क्योंकि मोबाइल फोन में अनेक प्रकार के फंशन होते हैं जिन्हें उचित ऊर्जा या वोल्टेज की आवश्यकता होती है। कैपासिटर के बाद अगर ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली वस्तु है तो वह है प्रतिरोध यानी Resistance.


इसके प्रकार





वैसे तो ये की तरह के होते हैं और इसी वजह इनके नाम भी अलग अलग पड़ जाते हैं पर मुख्य रूप से ये दो प्रकार के होते हैं -
  1. बिना ध्रुव वाला कैपासिटर 
  2. ध्रुव वाला कैपासिटर

बिना ध्रुव वाला कैपासिटर

 ये वहाँ लगता जहाँ प्लस / धन तथा माइनस/ ऋण  उपयोग नहीं किया जाता है। हमें इनको लगाने के लिए सिरों को नहीं देखना होता है। इनका उपयोग लगभग सभी प्रकार के पंखो, घड़ियों , आदि वस्तुओं में किया जाता है। 




 

ध्रुव वाला कैपासिटर

     ध्रुव वाला कैपासिटर वहां पर इस्तेमाल किया जाता है जहाँ प्लस और माइनस होते हैं परिपथ में जैसे मोबाइल & चार्जर, टीवी, LED BULB, DTH RECIEVER इत्यादि।ऐसे संधारित्रो की क्षमता बहुत ज्यादा होती है भले ही देखने छोटे ही क्यों न हो । 




निचे दिये गये चित्र में ऋण चिन्ह को तीर हरे तीर द्वारा दर्शाया गया है इसके दूसरी तरफ का सीरा धन है जिसे प्रदर्शित नहीं किया जाता है क्योंकि ऋण वाले यह पता चल जाता है। 




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